भाव में हेराफेरी: सेबी ने 28 करोड़ रुपये के खाते कुर्क किए

सेबी ने भाव में हेराफेरी के मामले में प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध इकाई चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों से 28 करोड़ रुपये कुर्क किए हैं। 16 सितंबर 2026 को जारी अंतरिम आदेश के अनुसार, अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस में क्रॉस-सेगमेंट हेराफेरी से इन्होंने करीब 28.12 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ कमाया। प्रसार पर 22,06,44,706 रुपये और चौबारा पर 6,05,63,836 रुपये कुर्की लगी। प्रवर्तकों सहित सात नोटिसधारकों पर बाजार से रोक, जवाब के लिए 21 दिन।

स्रोत

The Hindu — Business · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • SEBI impounded bank accounts of Prrsaar Sampada Private Limited and Chaubara Eats Private Limited totalling ₹28 crore for price manipulation between October 2025 and June 2026. — Attributed to a SEBI interim order released on Wednesday, September 16, 2026; figure appears in source.
  • Cumulative wrongful gains of about ₹28.12 crore were made over roughly nine months. — Direct quote from the SEBI interim order as reproduced in the source.
  • Impounding split: ₹22,06,44,706 for Prrsaar and promoters Ved Prakash Gupta and Priti Gupta; ₹6,05,63,836 for Chaubara Eats and promoters Saroj Gupta and Gaurav Tomar. — Specific figures and names appear in the source, attributed to the SEBI order.
  • Seven noticees barred from the capital market until the impounded amount is paid, with 21 days to respond. — Attributed to SEBI; source refers to entities and promoters as the seven noticees.
  • The trading pattern was neither hedging nor arbitrage but manipulative and fraudulent. — Quoted assessment of the regulator, stated as prima facie in the interim order; not independently verified.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह मामला सात नामों से ज़्यादा इस बात का है कि डेरिवेटिव बाज़ार में कीमत तय होने की प्रक्रिया कितनी आसानी से मोड़ी जा सकती है। सेबी ने प्रारंभिक तौर पर जो पैटर्न बताया है — फ्यूचर्स में जानबूझकर नुकसान उठाकर ऑप्शंस में उससे बड़ी, उलटी दिशा की पोज़िशन से मुनाफ़ा कमाना — वह करीब नौ महीनों में लगभग ₹28.12 करोड़ के अनुचित लाभ में बदला, और इसकी कीमत दूसरी तरफ़ ट्रेड कर रहे आम निवेशकों ने चुकाई। रकम को पहले ही ज़ब्त करना और भुगतान होने तक बाज़ार से रोक लगाना — आर्थिक रूप से यह संदेश है कि हेरफेर घाटे का सौदा है, मुनाफ़े का नहीं।

  • ₹28.12 करोड़ का कथित अनुचित लाभ नई संपत्ति नहीं, बल्कि हस्तांतरण है — उतना ही नुकसान उलटी तरफ़ ट्रेड करने वाले दूसरे निवेशकों को हुआ।
  • फ्यूचर्स के नुकसान को ऑप्शंस में बड़ा मुनाफ़ा बनाने की 'लागत' मानना, सेबी के प्रारंभिक आकलन में न हेजिंग है न आर्बिट्राज; इससे कीमत के संकेत विकृत होते हैं और बाज़ार की गुणवत्ता गिरती है।
  • डेरिवेटिव में ऊँचे लीवरेज के कारण तुलनात्मक रूप से कम पूँजी से भी कीमत हिलाई जा सकती है — यही कम लागत, ऊँचे प्रतिफल वाला प्रोत्साहन हेरफेर को जन्म देता है।
  • अंतिम जुर्माने से पहले खाते ज़ब्त करना और बाज़ार प्रतिबंध को भुगतान से जोड़ना, वसूली-जोखिम घटाने की आर्थिक रणनीति है — पैसा निकल जाने के बाद जुर्माने का मूल्य कम रह जाता है।
  • व्यापक कीमतों, रोज़गार या वृद्धि पर असर नगण्य है; असली आर्थिक दांव खुदरा निवेशकों का भरोसा और सख़्त निगरानी की लागत है, जो सभी भागीदारों पर पड़ती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 21 दिन की अवधि में कंपनियाँ क्या जवाब देती हैं और सेबी अंतरिम आदेश को पुष्ट करता है या नरम करता है — साथ ही क्रॉस-सेगमेंट गतिविधि पर निगरानी, मार्जिन या ऑर्डर नियम कड़े होते हैं या नहीं।

यह केवल अंतरिम आदेश है और प्रारंभिक निष्कर्षों पर आधारित है, अंतिम फ़ैसला नहीं; आरोपित पक्षों का पक्ष अभी दर्ज नहीं हुआ, और यह ख़बर यह नहीं बताती कि नुकसान किन निवेशकों को हुआ या ₹28.12 करोड़ का ब्योरा क्या है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भाव में हेराफेरी के एक मामले में प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी इकाई चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों से 28 करोड़ रुपये कुर्क करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी के अनुसार इन इकाइयों ने अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच स्टॉक फ्यूचर्स और स्टॉक ऑप्शंस के बीच "क्रॉस-सेगमेंट" हेराफेरी कर करीब 28.12 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ कमाया। आदेश 16 सितंबर 2026 (बुधवार) को जारी हुआ और इसमें प्रवर्तकों सहित सात नोटिसधारकों को पूंजी बाजार से रोक दिया गया है।

मुख्य तथ्य

  • सेबी ने प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड और संबद्ध इकाई चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों से 28 करोड़ रुपये कुर्क किए।
  • हेराफेरी की अवधि अक्टूबर 2025 से जून 2026 यानी लगभग 9 महीने बताई गई है।
  • सेबी के अनुसार कुल अनुचित लाभ लगभग 28.12 करोड़ रुपये रहा।
  • अंतरिम आदेश बुधवार, 16 सितंबर 2026 को जारी किया गया।
  • प्रसार पर हेराफेरी लाभ के आधार पर शीर्ष 13 स्क्रिप और चौबारा पर शीर्ष 10 स्क्रिप-दिनों में बार-बार क्रॉस-सेगमेंट हेराफेरी पाई गई।
  • प्रसार प्राइवेट लिमिटेड और प्रवर्तक वेद प्रकाश गुप्ता व प्रीति गुप्ता के खातों से 22,06,44,706 रुपये कुर्क।
  • चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड और प्रवर्तक सरोज गुप्ता व गौरव तोमर के खातों से 6,05,63,836 रुपये कुर्क।
  • सात नोटिसधारकों को कुर्की राशि चुकाने तक पूंजी बाजार से रोका गया; जवाब देने के लिए 21 दिन का समय।

समयरेखा

  1. अक्टूबर 2025 से जून 2026सेबी की जांच अवधि, जिसमें स्टॉक फ्यूचर्स व ऑप्शंस में बार-बार क्रॉस-सेगमेंट भाव हेराफेरी पाई गई।
  2. 16 सितंबर 2026 (बुधवार)सेबी ने अंतरिम आदेश जारी कर 28 करोड़ रुपये के बैंक खाते कुर्क किए और सात नोटिसधारकों को बाजार से रोका।
  3. 17 सितंबर 2026आदेश की खबर प्रकाशित (सुबह 9:57 बजे IST)।
  4. आदेश के 21 दिन के भीतरनोटिसधारकों को अंतरिम आदेश पर जवाब देने की समयसीमा।

किसका दाँव

  • सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) — बाजार की अखंडता की रक्षा; डेरिवेटिव सेगमेंट में हेराफेरी रोकने और अनुचित लाभ वसूलने की जिम्मेदारी।
  • प्रसार संपदा प्राइवेट लिमिटेड व प्रवर्तक वेद प्रकाश गुप्ता, प्रीति गुप्ता — 22,06,44,706 रुपये की कुर्की और भुगतान होने तक पूंजी बाजार से प्रतिबंध।
  • चौबारा ईट्स प्राइवेट लिमिटेड व प्रवर्तक सरोज गुप्ता, गौरव तोमर — 6,05,63,836 रुपये की कुर्की और पूंजी बाजार से प्रतिबंध।
  • अन्य निवेशक — सेबी के अनुसार एक सेगमेंट में भाव बिगाड़कर दूसरे सेगमेंट में लाभ कमाने से इन्हें नुकसान हुआ और वे धोखे का शिकार हुए।
  • बैंक/नोटिसधारकों के खाते रखने वाली संस्थाएं — कुर्की आदेश का पालन करना।

क्यों अहम है

यह मामला दिखाता है कि हेराफेरी अब एक ही शेयर के दो अलग-अलग खंडों — फ्यूचर्स और ऑप्शंस — के बीच की जा रही है, जहां एक खंड में जानबूझकर भाव बिगाड़कर दूसरे खंड में मुनाफा कमाया जाता है। सेबी का कहना है कि यह न हेजिंग है न आर्बिट्राज, बल्कि छल है जो बाजार की अखंडता और आम निवेशकों के भरोसे को चोट पहुंचाता है। खातों की कुर्की और बाजार से रोक जैसे अंतरिम कदम बताते हैं कि नियामक जांच पूरी होने से पहले ही धन की सुरक्षा करना चाहता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सेबी = भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड, प्रतिभूति बाजार का नियामक।
  • मामला: प्रसार संपदा प्रा. लि. व चौबारा ईट्स प्रा. लि. — 28 करोड़ रुपये के बैंक खाते कुर्क।
  • अंतरिम आदेश की तिथि: 16 सितंबर 2026; जांच अवधि अक्टूबर 2025–जून 2026।
  • कुल अनुचित लाभ: लगभग 28.12 करोड़ रुपये, लगभग 9 महीनों में।
  • कुर्की राशि: प्रसार 22,06,44,706 रुपये; चौबारा 6,05,63,836 रुपये।
  • सात नोटिसधारक पूंजी बाजार से प्रतिबंधित; जवाब के लिए 21 दिन।

मेन्स दृष्टिकोण

सेबी का यह अंतरिम आदेश भारतीय डेरिवेटिव बाजार में एक नई किस्म की हेराफेरी — क्रॉस-सेगमेंट भाव हेराफेरी — को उजागर करता है। सेबी के अनुसार इकाइयां पहले ऑप्शंस खंड में विपरीत दिशा की स्थिति (LTP से नीचे खरीद या ऊपर बिक्री) बना लेती थीं, और फिर स्टॉक फ्यूचर्स में दीर्घकालिक औसत भाव से ऊंचे या नीचे भाव पर भारी मात्रा में आक्रामक ऑर्डर डालकर भाव को प्रभावित करती थीं; फ्यूचर्स में घाटा हुआ, पर उसी शेयर के ऑप्शंस में बड़ी स्थिति के कारण अधिक मुनाफा हुआ। सेबी ने स्पष्ट किया कि ऑप्शंस स्थितियां फ्यूचर्स स्थिति से बहुत भिन्न और दिशात्मक रूप से विपरीत थीं, इसलिए यह न हेजिंग थी न आर्बिट्राज, बल्कि हेराफेरी व छल — जिससे अन्य निवेशकों की कीमत पर लाभ कमाया गया और बाजार की अखंडता प्रभावित हुई। निहितार्थ यह है कि निगरानी को एक खंड तक सीमित न रखकर फ्यूचर्स-ऑप्शंस के बीच जुड़े सौदों के पैटर्न पर आधारित बनाना होगा; आगे का रास्ता सेबी द्वारा अपनाए गए उपायों जैसा है — अनुचित लाभ के बराबर खातों की कुर्की, भुगतान होने तक बाजार से रोक, और नोटिसधारकों को 21 दिन में जवाब का अवसर देकर प्राकृतिक न्याय का पालन।

मुख्य शब्द

सेबी (SEBI)
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड — प्रतिभूति बाजार का नियामक, जिसने यह अंतरिम आदेश जारी किया।
अंतरिम आदेश (Interim Order)
जांच पूरी होने से पहले नियामक द्वारा दिया गया अस्थायी आदेश, जैसे खाते कुर्क करना या बाजार से रोक लगाना।
क्रॉस-सेगमेंट भाव हेराफेरी
एक खंड (जैसे फ्यूचर्स) में जानबूझकर भाव बिगाड़कर दूसरे खंड (जैसे ऑप्शंस) में लाभ कमाना — सेबी के अनुसार यह छलपूर्ण है।
LTP (लास्ट ट्रेडेड प्राइस)
अंतिम सौदे का भाव; सेबी ने बताया कि इकाइयां LTP से नीचे खरीद या ऊपर बिक्री के ऑप्शंस ऑर्डर पहले लगा लेती थीं।
हेजिंग और आर्बिट्राज
जोखिम से बचाव और भाव-अंतर से वैध लाभ की रणनीतियां; सेबी ने कहा कि यह पैटर्न इनमें से कोई नहीं था।
कुर्की (Impounding)
अनुचित लाभ की राशि तक बैंक खातों को रोक देना, जिससे धन का हस्तांतरण न हो सके।

अभ्यास प्रश्न

  1. सेबी द्वारा उजागर 'क्रॉस-सेगमेंट भाव हेराफेरी' क्या है और यह हेजिंग व आर्बिट्राज से किस प्रकार भिन्न है? प्रसार-चौबारा मामले के आधार पर समझाइए।
  2. डेरिवेटिव बाजार में हेराफेरी रोकने के लिए नियामक के पास अंतरिम उपाय (खातों की कुर्की, बाजार से रोक) कितने प्रभावी हैं? निवेशक हितों की रक्षा के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए।
  3. बाजार की अखंडता (market integrity) और आम निवेशकों का भरोसा किस तरह एक-दूसरे से जुड़े हैं? प्रसार संपदा मामले के उदाहरण से चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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