कर्तव्य भवन निर्माण के लिए शास्त्री, कृषि भवन खाली होंगे
सीपीडब्ल्यूडी ने सरकारी विभागों से शास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर सितंबर के अंत तक खाली कर सौंपने को कहा है, जिससे मध्य दिल्ली में कर्तव्य भवन 4 और 5 के निर्माण का रास्ता खुलेगा। केबी-4 और केबी-5 का टेंडर पहले जनवरी 2026 में निकाला गया और जून में फिर जारी हुआ। अब लागत ₹3,155.41 करोड़ आंकी गई है, जो जनवरी में ₹3,006.07 करोड़ थी, यानी ₹149.34 करोड़ या करीब 4.97% की वृद्धि। पहले तीन कर्तव्य भवन ₹3,690 करोड़ में बने और अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका उद्घाटन किया।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- CPWD has asked departments to vacate Shastri Bhawan and Krishi Bhawan by end of September. — Attributed to CPWD in the source; no document cited.
- Current tender pegs KB-4 and KB-5 cost at ₹3,155.41 crore against ₹3,006.07 crore in January, a rise of ₹149.34 crore or nearly 4.97%. — Figures appear in the source and are internally consistent.
- Tender was first floated in January 2026 and re-tendered in June. — Attributed to earlier HT reporting; date sequence cannot be externally verified here.
- Revised tender expands combined CCS-4 and CCS-5 footprint by 115 sq m due to design optimisation. — Attributed to an unnamed official quoted in the source.
- First three Kartavya Bhawan buildings cost ₹3,690 crore and were inaugurated by PM Modi in August this year. — Figure appears in source; attribution is to officials/HT reporting.
विश्लेषकों की राय राय
सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास अब प्रतीकात्मक चरण से प्रशासनिक चरण में पहुंच गया है — शास्त्री भवन और कृषि भवन को खाली कराने का अर्थ है 1950-60 के दशक के सचिवालय भवनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना, जिसका राजनीतिक संदेश स्पष्ट है। अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पहले तीन कर्तव्य भवनों के उद्घाटन के तुरंत बाद अगला चरण शुरू करना 'काम पूरा करने वाली सरकार' की छवि को मजबूत करता है। दूसरी ओर, ₹149.34 करोड़ (लगभग 4.97%) की वृद्धि और दोबारा टेंडर निकालने की जरूरत विपक्ष को लागत और प्राथमिकताओं पर पुराना हमला दोहराने का मौका देती है।
- नया नाम और पुराने भवनों की जगह नया निर्माण — यह केवल ढांचागत परियोजना नहीं, राजधानी के स्वरूप पर राजनीतिक मुहर भी है।
- अगस्त के उद्घाटन के कुछ ही महीनों में अगला चरण शुरू करना दिखने वाली डिलीवरी और रफ्तार पर टिकी रणनीति के अनुरूप है।
- करीब 5% की लागत वृद्धि तकनीकी रूप से मामूली है, लेकिन बड़े आंकड़े (अब ₹3,155 करोड़, पहले ₹3,690 करोड़) राजनीतिक बहस में आसान हथियार बन जाते हैं।
- अधिकारियों द्वारा वृद्धि को डिजाइन बदलाव और महंगी लेकिन तेज तकनीक से जोड़ना बताता है कि समयसीमा में पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है — राजनीतिक रूप से समझ में आने वाला विकल्प।
- मंत्रालयों के स्थानांतरण और अंतरिम व्यवस्थाओं में दिक्कत आने पर नौकरशाही की खामोश नाराजगी भी एक छोटी मगर वास्तविक राजनीतिक लागत हो सकती है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सितंबर अंत की समयसीमा कायम रहती है या नहीं, टेंडर कब तय होता है, और विपक्ष लागत बढ़ोतरी के मुद्दे को कितनी मजबूती से उठाता है।
इस खबर में किसी दल का रुख या आलोचना दर्ज नहीं है; परियोजना के पीछे की राजनीतिक गणना, स्थानांतरण की व्यवस्था या अंतिम लागत के बारे में यह कुछ भी सिद्ध नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने सरकारी विभागों से मध्य दिल्ली स्थित शास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर सितंबर के अंत तक खाली करने को कहा है। ये दोनों भवन स्वतंत्रता के बाद 1950 और 1960 के दशक में केंद्रीय सचिवालय के विस्तार के दौरान बने थे, ताकि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक से आगे बढ़ती केंद्र सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को जगह मिल सके। अब इनकी जगह केंद्रीय सचिवालय पुनर्विकास के अगले चरण में कर्तव्य भवन (केबी) 4 और 5 बनाए जाएंगे। पहले तीन कर्तव्य भवनों का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अगस्त में किया था।
मुख्य तथ्य
- सीपीडब्ल्यूडी ने विभागों से शास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर सितंबर के अंत तक खाली कर सौंपने को कहा है।
- शास्त्री भवन और कृषि भवन 1950 व 1960 के दशक में केंद्रीय सचिवालय के विस्तार के दौरान बनाए गए थे।
- केबी-4 और केबी-5 का टेंडर पहले जनवरी 2026 में निकाला गया, फिर जून में दोबारा जारी किया गया।
- मौजूदा टेंडर में परियोजना लागत ₹3,155.41 करोड़ आंकी गई, जनवरी के टेंडर में यह ₹3,006.07 करोड़ थी।
- लागत में ₹149.34 करोड़ यानी करीब 4.97% की वृद्धि हुई है।
- संशोधित टेंडर में सीसीएस-4 और सीसीएस-5 का कुल संयुक्त क्षेत्रफल 115 वर्ग मीटर बढ़ाया गया है।
- पहले तीन कर्तव्य भवन ₹3,690 करोड़ की स्वीकृत लागत पर बने और अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन किया।
- नई इमारतें सात मंजिला होंगी और निर्माण की समय-सीमा दो वर्ष रखी गई है।
समयरेखा
- 1950 और 1960 का दशकस्वतंत्रता के बाद केंद्रीय सचिवालय के विस्तार में शास्त्री भवन और कृषि भवन का निर्माण।
- जनवरी 2026 (स्रोत के अनुसार)केबी-4 और केबी-5 के निर्माण का टेंडर पहली बार ₹3,006.07 करोड़ की लागत पर जारी।
- जूनलगभग 5% अधिक लागत ₹3,155.41 करोड़ पर दोबारा टेंडर जारी।
- अगस्त (इस वर्ष)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले तीन कर्तव्य भवनों का उद्घाटन किया।
- सितंबर के अंत तकशास्त्री भवन और कृषि भवन परिसर खाली कर सीपीडब्ल्यूडी को सौंपने की समय-सीमा।
किसका दाँव
- सीपीडब्ल्यूडी — भवन खाली कराने, टेंडर प्रक्रिया और केबी-4, केबी-5 के निर्माण को दो वर्ष में पूरा करने की जिम्मेदारी।
- शास्त्री भवन और कृषि भवन में स्थित सरकारी विभाग — सितंबर के अंत तक परिसर खाली करना और कार्यालयों का स्थानांतरण।
- आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल) — केंद्रीय सचिवालय पुनर्विकास और कर्तव्य भवन परियोजना की निगरानी।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — अगस्त में पहले तीन कर्तव्य भवनों का उद्घाटन; परियोजना की राजनीतिक-प्रशासनिक पहल।
- करदाता/जनता — ₹3,155.41 करोड़ की सार्वजनिक लागत और लागत वृद्धि का असर।
क्यों अहम है
शास्त्री भवन और कृषि भवन को खाली कराना केंद्रीय सचिवालय के पुनर्विकास का अगला ठोस चरण है, जिससे दशकों पुराने सरकारी कार्यालय ढांचे की जगह नए कर्तव्य भवन लेंगे। इससे मंत्रालयों के कामकाज का स्थान, लागत और समय-सीमा तीनों प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में आ जाते हैं। लागत में ₹149.34 करोड़ की वृद्धि बड़ी सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में डिजाइन संशोधन और तकनीक चयन के वित्तीय असर को भी सामने रखती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- सीपीडब्ल्यूडी = केंद्रीय लोक निर्माण विभाग; कर्तव्य भवन निर्माण की क्रियान्वयन एजेंसी।
- केबी-4 और केबी-5 की मौजूदा अनुमानित लागत ₹3,155.41 करोड़; पहले ₹3,006.07 करोड़ थी।
- लागत वृद्धि ₹149.34 करोड़ यानी लगभग 4.97%।
- पहले तीन कर्तव्य भवन ₹3,690 करोड़ की स्वीकृत लागत पर; अगस्त में प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन।
- शास्त्री भवन व कृषि भवन 1950-60 के दशक में नॉर्थ व साउथ ब्लॉक से आगे सचिवालय विस्तार के तहत बने।
- नए भवन सात मंजिला; निर्माण अवधि दो वर्ष प्रस्तावित।
मेन्स दृष्टिकोण
केंद्रीय सचिवालय के पुनर्विकास का यह चरण दिखाता है कि प्रशासनिक बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण स्थान-प्रबंधन, लागत नियंत्रण और कार्य-निरंतरता के तीन दबावों के बीच होता है। शास्त्री भवन और कृषि भवन, जो 1950-60 के दशक में बढ़ती सरकारी मशीनरी को जगह देने के लिए बने थे, अब सितंबर के अंत तक खाली कराए जा रहे हैं ताकि केबी-4 और केबी-5 बन सकें। लागत ₹3,006.07 करोड़ से ₹3,155.41 करोड़ हो गई; अधिकारियों के अनुसार इसका कारण डिजाइन में "मामूली संशोधन" और नियोजन का अनुकूलन है, जिसमें पहले खुले या साझा रखे गए क्षेत्रों को उपयोग योग्य कार्यालय स्थान में बदला गया, जिससे निर्मित क्षेत्र 115 वर्ग मीटर बढ़ा। साथ ही, दो वर्ष में सात मंजिला ढांचे पूरे करने के लिए अपेक्षाकृत महंगी तकनीक अपनाई जा रही है—अर्थात समय बचाने की कीमत लागत में जुड़ती है। आगे की राह में पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया, विभागों के स्थानांतरण की सुचारू योजना, और घोषित दो-वर्षीय समय-सीमा तथा लागत अनुमानों की सख्त निगरानी अहम रहेगी, ताकि सार्वजनिक धन का प्रभावी उपयोग हो।
मुख्य शब्द
- सीपीडब्ल्यूडी
- केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, जो सरकारी भवनों के निर्माण व रखरखाव का काम करता है; इसने भवन खाली कराने को कहा।
- कर्तव्य भवन (केबी)
- केंद्रीय मंत्रालयों के लिए बनाए जा रहे नए सचिवालय भवन; पहले तीन का उद्घाटन अगस्त में हुआ।
- सीसीएस (कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट)
- साझा केंद्रीय सचिवालय भवन शृंखला; सीसीएस-4 व सीसीएस-5 का क्षेत्रफल 115 वर्ग मीटर बढ़ाया गया।
- शास्त्री भवन व कृषि भवन
- मध्य दिल्ली के सरकारी कार्यालय परिसर, 1950-60 के दशक में सचिवालय विस्तार में निर्मित।
- री-टेंडर
- टेंडर दोबारा जारी करना; यहाँ जून में लगभग 5% अधिक लागत पर टेंडर पुनः निकाला गया।
अभ्यास प्रश्न
- केंद्रीय सचिवालय के पुनर्विकास में पुराने सरकारी भवनों को हटाकर नए भवन बनाने के प्रशासनिक और वित्तीय निहितार्थों की चर्चा कीजिए।
- बड़ी सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में डिजाइन संशोधन और महंगी तकनीक के चयन से लागत वृद्धि होती है—इसे समय-सीमा के लाभ के साथ कैसे संतुलित किया जाए?
- केबी-4 और केबी-5 परियोजना के टेंडर और लागत आंकड़ों के आधार पर परियोजना निगरानी व पारदर्शिता की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
