बाल सुरक्षा: उम्र सीमा नहीं, प्लेटफॉर्म डिज़ाइन पर नियम जरूरी
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए केवल उम्र सीमा पर्याप्त नहीं है, ओआरएफ के शोध सहायक पुरुषराज पटनायक ने विश्लेषण में कहा। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार 2024 में देश में 96.96 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, जो एक दशक पहले 25.15 करोड़ थे। कर्नाटक ने 16 वर्ष से कम, आंध्र प्रदेश ने 13 वर्ष से कम आयु पर रोक प्रस्तावित की। ऑस्ट्रेलिया में 10 दिसंबर 2025 से लागू नियम के बाद 10-15 वर्ष के बच्चों में खाता स्वामित्व 52 से 42 प्रतिशत रह गया। उन्होंने डीपीडीपी कानून की धारा 9(2), 9(3) को उत्पाद डिज़ाइन पर लागू करने का सुझाव दिया।
स्रोत
Observer Research Foundation (ORF) · मूल ख़बर पढ़ें ↗
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- India had 96.96 crore internet connections in 2024, up from 25.15 crore a decade earlier. — Attributed in the source to India's Economic Survey 2025-26; figure appears in source.
- NCRB recorded 1,238 cybercrimes against children under the IT Act in 2024, including 1,099 for publishing or transmitting sexually explicit material. — Attributed to the National Crime Records Bureau in the source; not independently verified here.
- Australia's under-16 rule took effect on 10 December 2025; account ownership among 10- to 15-year-olds fell from 52 to 42 percent in three months. — Attributed to the eSafety Commissioner's assessment of 31 July 2026 as cited in the source.
- A 2025 survey of 1,003 American minors found 11 percent had an online sexual interaction on a given platform. — Survey cited in the source without naming the conducting organisation; sourcing is partial.
- Meta settled a consumer protection suit by 51 US attorneys general in August 2026, agreeing to daily time limits and an unranked feed for minors. — Stated in the source without a cited document; unattributed claim an editor may wish to check.
विश्लेषकों की राय राय
इस ओआरएफ विश्लेषण की अहम बात यह है कि यह नियमन का निशाना प्रवेश द्वार से हटाकर भीतर की मशीनरी पर ले जाता है — रैंकिंग सिस्टम, ऑटोप्ले, स्ट्रीक काउंटर, अजनबियों से मैसेजिंग के डिफॉल्ट और शिकायत कतारें। तकनीकी रूप से यह मायने रखता है, क्योंकि ये इंजीनियरिंग फैसले बहुत पहले ऊपरी स्तर पर लिए जाते हैं, किसी मॉडरेटर के पोस्ट देखने से कहीं पहले; और भारत के पास डीपीडीपी कानून की धारा 9(2) व 9(3) में इसके सूत्र मौजूद हैं, जबकि 13 नवंबर 2025 को अधिसूचित नियम अब तक 'हानिकारक प्रभाव' या व्यवहारगत निगरानी की कसौटी तय नहीं करते। ऑस्ट्रेलिया का अनुभव चेतावनी है: 10 दिसंबर 2025 से लागू 16 वर्ष से कम आयु के नियम के बाद 10-15 वर्ष के बच्चों में खाता स्वामित्व 52 से 42 प्रतिशत पर आया, लेकिन कम से कम एक प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म का उपयोग 81 प्रतिशत से ऊपर बना रहा। 2024 में दर्ज 96.96 करोड़ इंटरनेट कनेक्शनों के पैमाने पर असली फर्क डिजाइन की परत पर ही पड़ता है।
- आयु सीमा एक जाँचने योग्य 'दरबान' जैसी जिम्मेदारी है, जबकि आईटी कानून की धारा 79 और आईटी नियम 2021 के नियम 4(4) के तहत भारत की व्यवस्था खुली-छोर वाली 'संरक्षक' जिम्मेदारी है — विश्लेषण का तर्क है कि डिजाइन नियम इसी दूसरी व्यवस्था से मेल खाते हैं।
- अगर किसी नाबालिग की फीड को उसके देखने के इतिहास पर रैंक करना औपचारिक रूप से धारा 9(3) के तहत व्यवहारगत निगरानी माना जाए, तो एक कानूनी सिद्धांत उस निर्देश में बदल जाता है जिसे प्रोडक्ट इंजीनियर वास्तव में लागू या बंद कर सकते हैं।
- मौजूदा माप गलत चीज नापते हैं: 2024 में बच्चों के खिलाफ आईटी कानून के तहत एनसीआरबी के 1,238 साइबर अपराध और मीआईटीवाई की दो घंटे की टेकडाउन समयसीमा शिकायतों और हटाने की गति को गिनते हैं, यह नहीं कि बच्चा कितनी बार हानिकारक सामग्री से टकराता है — वह आंकड़ा केवल प्लेटफॉर्म के पास है।
- उद्धृत सर्वे संकेत देते हैं कि जोखिम किसी एक पोस्ट से नहीं, उत्पाद से तय होता है — सर्वे में शामिल 1,003 अमेरिकी नाबालिगों में 11 प्रतिशत ने किसी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन यौन संवाद बताया, जो स्नैपचैट, किक और बीरियल पर 19 प्रतिशत तक था।
- अनुपालन लागत का सवाल वाकई विवादित है: यूरोपीय आयोग के अनुच्छेद 28(1) दिशानिर्देश और आईसीओ का चिल्ड्रन्स कोड आयु अनुमान व डिफॉल्ट सुरक्षा के जरिये लागत सेवाओं पर डालते हैं, जबकि हर उपयोगकर्ता की पहचान सत्यापन की शर्त यह बोझ घरों पर और पहुँच की स्थायी शर्त बना देगी।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि मीआईटीवाई सत्यापन योग्य सहमति से आगे बढ़कर 'हानिकारक प्रभाव' और व्यवहारगत निगरानी को उत्पाद की भाषा में परिभाषित करता है या नहीं — और रैंकिंग बदलावों पर डीएसए के अनुच्छेद 34 जैसी घोषणा या जोखिम-प्रकटीकरण जिम्मेदारियाँ धारा 79 से बाहर, तय दंड के साथ रखी जाती हैं या नहीं।
यह एक शोधकर्ता का नीतिगत तर्क है, सरकार का इरादा नहीं: कहानी यह स्थापित नहीं करती कि मीआईटीवाई या राज्य डिजाइन-नियमन का रास्ता अपनाएंगे, न ही यह भारत में ऐसे नियमों के अनुपालन बोझ, तकनीकी व्यावहारिकता या प्रभावशीलता को मापती है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारत में इंटरनेट पहुंच के तेज़ विस्तार के साथ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा नीति का केंद्रीय प्रश्न बदल गया है — अब सवाल यह नहीं कि बच्चों को ऑनलाइन कैसे लाया जाए, बल्कि ऑनलाइन आने के बाद उनके साथ क्या होता है। ओआरएफ के सेंटर फॉर डिजिटल सोसाइटीज़ के शोध सहायक पुरुषराज पटनायक का तर्क है कि कर्नाटक व आंध्र प्रदेश जैसी न्यूनतम आयु सीमा और दो घंटे की टेकडाउन समयसीमा जैसे "संख्यात्मक लक्ष्य" कमजोर हस्तक्षेप हैं। उनके अनुसार असली जोखिम रैंकिंग एल्गोरिदम, ऑटोप्ले, स्ट्रीक काउंटर और अजनबी-मैसेजिंग जैसे उत्पाद डिज़ाइन में तय होता है, इसलिए डीपीडीपी अधिनियम की धारा 9(2) और 9(3) को प्रवेश के बजाय डिज़ाइन पर लागू किया जाना चाहिए।
मुख्य तथ्य
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: 2024 में भारत में 96.96 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन, एक दशक पहले 25.15 करोड़ थे; सर्वेक्षण ने डिजिटल लत को सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम बताया।
- ग्रामीण 14 से 16 वर्ष के किशोरों में 89 प्रतिशत के घर में स्मार्टफोन है।
- ऑस्ट्रेलिया का 16 वर्ष से कम आयु का नियम 10 दिसंबर 2025 से लागू; ई-सेफ्टी कमिश्नर के 31 जुलाई 2026 आकलन में 10-15 वर्ष के बच्चों में खाता स्वामित्व तीन महीनों में 52 से 42 प्रतिशत हुआ।
- ऑस्ट्रेलिया में कम से कम एक प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म का उपयोग 85.9 प्रतिशत से घटकर 81 प्रतिशत से ऊपर बना रहा; लगभग आधे उपयोगकर्ताओं ने कहा प्लेटफॉर्म ने उम्र कभी जांची नहीं।
- 1,003 अमेरिकी अल्पवयस्कों के 2025 सर्वेक्षण में 11 प्रतिशत ने किसी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन यौन संवाद बताया, स्नैपचैट, किक और बीरियल पर 19 प्रतिशत; 7 प्रतिशत ने किसी अन्य बच्चे की एआई-निर्मित नग्न छवि देखी।
- 47 प्रतिशत अमेरिकी अल्पवयस्कों ने न्यूनतम आयु से पहले प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किया; 19 प्रतिशत को माता-पिता या बड़े भाई-बहन ने पहुंच दिलाई; कम आयु वालों में 41 प्रतिशत ने यौन संवाद बताया, बाकी में 13 प्रतिशत।
- एनसीआरबी: 2024 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत बच्चों के विरुद्ध 1,238 साइबर अपराध, जिनमें 1,099 यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने के।
- 89,000 शहरी अभिभावकों के सर्वेक्षण में 82 प्रतिशत ने शिकायत मार्ग को धीमा या अस्पष्ट बताया; यौन संवाद के बाद 75 प्रतिशत अल्पवयस्क खाता ब्लॉक करते हैं, 53 प्रतिशत रिपोर्ट करते हैं।
समयरेखा
- 2023डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम पारित; केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के डार्क पैटर्न दिशानिर्देश 13 इंटरफेस डिज़ाइनों की पहचान कर उन्हें प्रतिबंधित करते हैं।
- जुलाई 2025यूरोपीय आयोग के अनुच्छेद 28(1) दिशानिर्देश: सर्वाधिक जोखिम वाली सेवाओं के लिए दस्तावेज़ जांच, अन्यत्र आयु अनुमान स्वीकार्य।
- 13 नवंबर 2025डीपीडीपी नियम अधिसूचित — सत्यापन योग्य सहमति अनिवार्य, पर 'हानिकारक प्रभाव' या व्यवहारगत निगरानी की कसौटी व माप तय नहीं।
- 10 दिसंबर 2025ऑस्ट्रेलिया का 16 वर्ष से कम आयु पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू हुआ।
- मार्च 2026कर्नाटक ने 16 वर्ष से कम आयु पर सोशल मीडिया रोक प्रस्तावित की; आंध्र प्रदेश ने 13 वर्ष से कम; केंद्र ने श्रेणीबद्ध आयु वर्गों की जांच की।
- जुलाई 2026इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अल्पवयस्कों को रोबलॉक्स से दूर रखने की याचिका पर नोटिस जारी किया; मेइटी ने संसद को बताया कि शिकायत के दो घंटे में नग्नता व मॉर्फ्ड छवियां हटाना अनिवार्य।
- 31 जुलाई 2026ऑस्ट्रेलियाई ई-सेफ्टी कमिश्नर का आकलन प्रकाशित।
- अगस्त 2026मेटा ने 51 अमेरिकी अटॉर्नी जनरल के उपभोक्ता संरक्षण मुकदमे का निपटारा किया — अल्पवयस्कों के लिए दैनिक समय सीमा, रात्रिकालीन ब्लॉक और अनरैंक्ड फीड पर सहमति।
किसका दाँव
- बच्चे और किशोर — रैंकिंग, ऑटोप्ले और अजनबी-मैसेजिंग डिफॉल्ट से जोखिम; आयु सीमा नियम पालन करने वालों को रोकते हैं पर बचकर निकलने वालों को उसी जोखिम में छोड़ देते हैं।
- मेइटी (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) — धारा 9(2) व 9(3) को उत्पाद डिज़ाइन पर लागू करने, प्रतिबंधित डिज़ाइन सुविधाएं तय करने और टेकडाउन समयसीमा से आगे बढ़ने की जिम्मेदारी।
- बड़े प्लेटफॉर्म व डेटा फिड्यूशरी — रैंकिंग व इंटरफेस बदलने से पहले घोषणा दाखिल करने, अल्पवयस्कों के संपर्क का आंकड़ा प्रकाशित करने और स्वतंत्र ऑडिट का संभावित दायित्व; सेफ हार्बर पर असर।
- राज्य सरकारें (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश) — आयु आधारित रोक प्रस्तावित की; प्रभावशीलता पर सवाल क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई अनुभव में उपयोग 81 प्रतिशत से ऊपर बना रहा।
- अभिभावक व परिवार — 89,000 शहरी अभिभावकों में 82 प्रतिशत ने शिकायत मार्ग धीमा/अस्पष्ट बताया; साझा हैंडसेट व पहचान सत्यापन की लागत परिवारों पर पड़ सकती है।
- न्यायपालिका व एनसीआरबी — इलाहाबाद उच्च न्यायालय की याचिका सुनवाई; एनसीआरबी आंकड़े शिकायत पर आधारित हैं, वास्तविक संपर्क नहीं मापते।
क्यों अहम है
96.96 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन और ग्रामीण किशोरों के 89 प्रतिशत घरों में स्मार्टफोन के साथ बच्चों का ऑनलाइन होना अपरिहार्य है, इसलिए नीति की सफलता प्रवेश रोकने से नहीं बल्कि सेवा के निर्माण से तय होगी। एनसीआरबी के आंकड़े शिकायतें गिनते हैं, वास्तविक संपर्क नहीं — यानी नुकसान की माप ही अधूरी है। ऑस्ट्रेलिया का अनुभव दिखाता है कि आयु सीमा से खाता स्वामित्व घटा पर उपयोग नहीं, जिससे डिज़ाइन-केंद्रित नियमन की जरूरत उभरती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- डीपीडीपी अधिनियम 2023 की धारा 9(2): बच्चे के कल्याण पर हानिकारक प्रभाव वाला डेटा प्रोसेसिंग वर्जित; धारा 9(3): ट्रैकिंग, व्यवहारगत निगरानी व लक्षित विज्ञापन वर्जित।
- डीपीडीपी नियम 13 नवंबर 2025 को अधिसूचित — सत्यापन योग्य सहमति अनिवार्य।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 79 सेफ हार्बर को 'ड्यू डिलिजेंस' से जोड़ती है; आईटी नियम 2021 का नियम 4(4) बड़े प्लेटफॉर्म से बाल यौन शोषण सामग्री पहचानने का प्रयास मांगता है।
- सीसीपीए के डार्क पैटर्न दिशानिर्देश 2023 में 13 इंटरफेस डिज़ाइन चिन्हित, जिनमें फाल्स अर्जेंसी व सब्सक्रिप्शन ट्रैप शामिल।
- डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट का अनुच्छेद 34 जोखिम आकलन/घोषणा का मॉडल; यूरोपीय आयोग के अनुच्छेद 28(1) दिशानिर्देश जुलाई 2025।
- आईसीओ का चिल्ड्रन्स कोड: उम्र अनिश्चित होने पर सुरक्षा उपाय सभी उपयोगकर्ताओं पर लागू।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत का बाल ऑनलाइन सुरक्षा ढांचा 'एक बच्चा, एक खाता' की कल्पना पर बना है — न्यूनतम आयु सीमा (कर्नाटक: 16 वर्ष से कम, आंध्र प्रदेश: 13 वर्ष से कम) और दो घंटे की टेकडाउन समयसीमा — जो प्रवेश और निष्कासन को नियंत्रित करते हैं, पर बीच के अनुभव को नहीं। लेखक का तर्क है कि जोखिम उत्पाद में अंतर्निहित है: रैंकिंग एल्गोरिदम तय करता है कि 13 वर्षीय पहले क्या देखेगा, और ऑटोप्ले तथा अजनबी-मैसेजिंग डिफॉल्ट मॉडरेटर से बहुत पहले इंजीनियर व प्रोडक्ट टीम तय करते हैं; ग्रूमिंग किसी एक फीचर से नहीं, सामान्य फीचरों के एक साथ जुड़ने से होती है। मापन का संकट भी है — एनसीआरबी के 2024 के 1,238 मामले शिकायत से शुरू होते हैं, इसलिए वे रिपोर्टिंग गिनते हैं, संपर्क नहीं; 75 प्रतिशत बच्चे ब्लॉक करते हैं जिससे अगला बच्चा असुरक्षित रह जाता है। तुलनात्मक अनुभव सीमाएं दिखाते हैं: ऑस्ट्रेलिया में खाता स्वामित्व 52 से 42 प्रतिशत गिरा पर उपयोग 81 प्रतिशत से ऊपर रहा, और 47 प्रतिशत अमेरिकी अल्पवयस्क आयु सीमा से पहले ही प्लेटफॉर्म पर थे। आगे का रास्ता: संख्यात्मक लक्ष्यों के बजाय नियमों पर हस्तक्षेप — धारा 9(3) के तहत वॉच-हिस्ट्री आधारित रैंकिंग को व्यवहारगत निगरानी घोषित करना, धारा 9(2) के विरुद्ध डिफॉल्ट्स का न्यायोचित्य मांगना, डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों की तर्ज पर अल्पवयस्क खातों पर वर्जित डिज़ाइन सूचीबद्ध करना, डीएसए अनुच्छेद 34 जैसी पूर्व-घोषणा, स्वतंत्र ऑडिट सहित संपर्क-दर का प्रकाशन, और इन कर्तव्यों को धारा 79 से बाहर रखकर निर्धारित दंड से जोड़ना, साथ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 का वैकल्पिक मार्ग।
मुख्य शब्द
- आयु-गेटिंग (Age-gating)
- न्यूनतम आयु तय करके प्लेटफॉर्म में प्रवेश रोकने की व्यवस्था; स्रोत के अनुसार यह नियम मानने वालों को रोकती है और बचने वालों को उसी जोखिम में छोड़ देती है।
- धारा 9(2) व 9(3), डीपीडीपी अधिनियम 2023
- क्रमशः बच्चे के कल्याण पर हानिकारक प्रभाव वाली प्रोसेसिंग और बच्चों पर ट्रैकिंग, व्यवहारगत निगरानी व लक्षित विज्ञापन पर रोक।
- सेफ हार्बर (धारा 79, आईटी अधिनियम 2000)
- मध्यवर्तियों को तीसरे पक्ष की सामग्री पर मिलने वाली कानूनी छूट, जो 'ड्यू डिलिजेंस' के पालन से जुड़ी है।
- बाउंसर बनाम शैपरोन कर्तव्य
- बाउंसर कर्तव्य संकीर्ण व जांचने योग्य (दस्तावेज़ देखो, प्रवेश दो या मना करो); शैपरोन कर्तव्य खुला-अंत, गलत काम पहचानने व रोकने का — भारत शैपरोन व्यवस्था चलाता है।
- डार्क पैटर्न दिशानिर्देश 2023
- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के दिशानिर्देश, जो फाल्स अर्जेंसी व सब्सक्रिप्शन ट्रैप सहित 13 भ्रामक इंटरफेस डिज़ाइनों को प्रतिबंधित करते हैं।
- चिल्ड्रन्स कोड (आईसीओ)
- ब्रिटेन के सूचना आयुक्त कार्यालय का कोड जिसके तहत उम्र अनिश्चित होने पर सेवा सभी उपयोगकर्ताओं पर बाल-सुरक्षा उपाय लागू करती है।
अभ्यास प्रश्न
- आयु आधारित प्रतिबंध बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए अपर्याप्त क्यों हैं? ऑस्ट्रेलिया के अनुभव और उपलब्ध आंकड़ों के आलोक में परीक्षण करें।
- डीपीडीपी अधिनियम 2023 की धारा 9(2) और 9(3) को उत्पाद डिज़ाइन पर लागू करने से बाल सुरक्षा नियमन कैसे बदलेगा? संभावित चुनौतियों पर चर्चा करें।
- 'भारत की ऑनलाइन हानि नीति को इस आधार पर आंका जाए कि बच्चे कितनी कम बार हानिकारक सामग्री से टकराते हैं, न कि सामग्री कितनी तेजी से हटती है।' इस कथन का समीक्षात्मक मूल्यांकन करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
