कुपोषण विशाखापत्तनम में सर्वाधिक, कृष्णा में सबसे कम: आंध्र आंकड़े
राज्य सरकार की जून 2022 की ग्रोथ मॉनिटरिंग डिटेल्ड रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में कुपोषित बच्चों का अनुपात विशाखापत्तनम जिले में सबसे अधिक और कृष्णा जिले में सबसे कम है। विशाखापत्तनम में 2.40 प्रतिशत बच्चे कम वजन के, 2.18 प्रतिशत वेस्टेड और 7.27 प्रतिशत गंभीर रूप से स्टंटेड पाए गए, जबकि कृष्णा में यह क्रमशः 0.44, 0.39 और 0.99 प्रतिशत रहा। वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना में पंजीकृत 26,20,797 बच्चों और 67,866 प्रवासी बच्चों पर अध्ययन हुआ; 25,88,707 बच्चों की लंबाई और वजन मापा गया।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Visakhapatnam recorded the highest share of underweight (2.40%), wasted (2.18%) and severely stunted (7.27%) children; Krishna the lowest (0.44%, 0.39%, 0.99%). — Figures appear in the source, attributed to the State government's Growth Monitoring Detailed Report for June 2022.
- Statewide severe deficiency rates were 1.03% underweight, 1.12% wasted and 2.74% stunted. — Figures appear in the source as reported by the GMDR; the source's wording on the underweight figure is imprecise.
- The study covered 26,20,797 registered children and 67,866 migrant children, with height and weight measured for 25,88,707. — Numbers appear in the source; no independent verification possible.
- 26,686 children were found severely underweight, 28,949 severely wasted and 70,843 severely stunted. — Figures appear in the source, drawn from the same government report.
- Lack of awareness among mothers about nutritious food is a main reason for underweight children. — Attributed quote from Dr G Swarupa, consultant dietician, Andhra Hospitals, Vijayawada; opinion, not data.
विश्लेषकों की राय राय
हर महीने ग्रोथ मॉनिटरिंग रिपोर्ट तैयार करना और करीब 25.88 लाख बच्चों की लंबाई-वजन नापना प्रशासनिक रूप से एक बड़ी क्षमता है — यह वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना को 'भोजन बांटने' से 'नतीजे नापने' की दिशा में ले जाता है। लेकिन इस रिपोर्ट के आंकड़े (2.74 प्रतिशत गंभीर स्टंटेड) एनएफएचएस-5 में दर्ज स्तरों (ग्रामीण क्षेत्रों में 34.2 प्रतिशत स्टंटेड) से कहीं कम हैं, और दोनों अध्ययन अलग आयु वर्ग तथा अलग मापन पद्धति पर आधारित हैं। इसलिए 'विशाखापट्टनम में सर्वाधिक, कृष्णा में सबसे कम' वाली रैंकिंग को केवल वास्तविक पोषण स्थिति नहीं, बल्कि मापन की गुणवत्ता और नामांकन के दायरे का संकेत भी माना जाना चाहिए।
- मासिक मापन और जिलेवार आंकड़े नीति-निर्माण में इनपुट आधारित वितरण से नतीजा आधारित निगरानी की ओर बदलाव दर्शाते हैं।
- कर्नूल में अधिकारियों द्वारा तराजू और मापक उपकरणों की स्थिति जांचने के लिए विशेष अभियान चलाना यह परोक्ष स्वीकारोक्ति है कि आंकड़ों की गुणवत्ता अभी स्थिर नहीं है।
- विशाखापट्टनम और कृष्णा के बीच पांच से सात गुना का अंतर असली पोषण खाई है या जिलों में रिपोर्टिंग की सख्ती का फर्क — रिपोर्ट इसे अलग नहीं करती।
- दायरा योजना और सरकारी स्कूलों में पंजीकृत बच्चों तक सीमित है; 67,866 प्रवासी बच्चों को शामिल करना सराहनीय है, पर योजना से बाहर के बच्चे संरचनात्मक रूप से अदृश्य रह जाते हैं।
- अधिक वजन वाले बच्चों का ब्यौरा न होना एक नीतिगत चूक है, क्योंकि एनएफएचएस रुझान शहरी क्षेत्रों में इसकी धीमी बढ़त दिखाते हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आने वाली मासिक रिपोर्टों में विशाखापट्टनम-कृष्णा का अंतर बना रहता है या उपकरणों के सुधार और आंगनवाड़ी कर्मियों के प्रशिक्षण के बाद बदल जाता है — इससे आंकड़ों की विश्वसनीयता तय होगी।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि विशाखापट्टनम की स्थिति क्यों सबसे खराब है, योजना से नतीजे सुधरे हैं या नहीं, और पोषण पुनर्वास केंद्रों में भेजे गए बच्चों का क्या हुआ।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
आंध्र प्रदेश सरकार हर महीने ग्रोथ मॉनिटरिंग डिटेल्ड रिपोर्ट (GMDR) तैयार करती है, जिसमें सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य पर तीन मानकों — कम वजन (underweight), वेस्टेड (लंबाई के अनुपात में कम वजन) और स्टंटेड (उम्र के अनुपात में कम लंबाई) — के आधार पर नजर रखी जाती है। प्रत्येक मानक को सामान्य, मध्यम और गंभीर श्रेणियों में बांटा जाता है। जून 2022 की यह रिपोर्ट वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना के तहत प्रकाशित हुई है और इसमें जिलेवार कुपोषण की तस्वीर सामने आई है, जिसमें विशाखापत्तनम सबसे खराब और कृष्णा सबसे बेहतर स्थिति में है।
मुख्य तथ्य
- जून 2022 की GMDR के अनुसार विशाखापत्तनम में कम वजन वाले बच्चों का अनुपात सर्वाधिक 2.40 प्रतिशत और कृष्णा में सबसे कम 0.44 प्रतिशत रहा।
- वेस्टेड बच्चों में भी विशाखापत्तनम शीर्ष पर — 2.18 प्रतिशत, कृष्णा में सबसे कम 0.39 प्रतिशत।
- गंभीर रूप से स्टंटेड बच्चों का सर्वाधिक अनुपात विशाखापत्तनम में 7.27 प्रतिशत, सबसे कम कृष्णा में 0.99 प्रतिशत।
- राज्य स्तर पर गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चे 1.03 प्रतिशत, गंभीर वेस्टेड 1.12 प्रतिशत और स्टंटेड 2.74 प्रतिशत दर्ज हुए।
- अध्ययन संपूर्ण पोषण योजना में पंजीकृत 26,20,797 बच्चों और 67,866 प्रवासी बच्चों पर किया गया; 25,88,707 बच्चों की लंबाई-वजन मापी गई।
- माप में 26,686 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन, 28,949 गंभीर रूप से वेस्टेड और 70,843 गंभीर रूप से स्टंटेड पाए गए।
- NFHS-5 (2019-20) के अनुसार राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के स्टंटेड बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों में 34.2 प्रतिशत, कम वजन ग्रामीण में 31.4 प्रतिशत।
- NFHS-5 में शहरी क्षेत्रों में वेस्टेड 17.6 प्रतिशत, गंभीर वेस्टेड 6.4 प्रतिशत और अधिक वजन वाले बच्चे 3.0 प्रतिशत दर्ज हुए।
समयरेखा
- 2015-16NFHS-4 के आंकड़े, जिनकी तुलना में बाद में बदलाव आंका गया।
- 2019-20NFHS-5: स्टंटेड, वेस्टेड और कम वजन वाले बच्चों की दर घटी, पर गंभीर वेस्टेड व अधिक वजन वाले बच्चों की दर धीरे-धीरे बढ़ी।
- जून 2022वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना के तहत ग्रोथ मॉनिटरिंग डिटेल्ड रिपोर्ट प्रकाशित; विशाखापत्तनम में सर्वाधिक और कृष्णा में सबसे कम कुपोषण।
- रिपोर्ट के बादकुरनूल जिले में स्वास्थ्य सूचकांक तथा तौल-माप उपकरणों की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।
किसका दाँव
- आंध्र प्रदेश सरकार — GMDR के जरिए मासिक निगरानी और संपूर्ण पोषण योजना के क्रियान्वयन की जवाबदेही।
- विशाखापत्तनम जिले के बच्चे — कम वजन, वेस्टिंग और स्टंटिंग के सर्वाधिक अनुपात के कारण सर्वाधिक जोखिम में।
- कृष्णा जिला — सभी तीन मानकों पर सबसे कम कुपोषण — तुलनात्मक संदर्भ बिंदु।
- महिला एवं बाल कल्याण विभाग (कुरनूल), परियोजना निदेशक केएलआरके कुमारी — आंकड़ों की सटीकता, आंगनवाड़ी स्टाफ का प्रशिक्षण और NRC तक बच्चों को पहुंचाना।
- माताएं और अभिभावक — पोषण संबंधी जागरूकता और प्रसव के बाद आहार प्रतिबंधों से बाहर आना; माता कुपोषित होने पर बच्चे भी प्रभावित।
- आंगनवाड़ी कर्मी व पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) — कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल और पोषण शिक्षा का जिम्मा।
क्यों अहम है
जिलेवार आंकड़े बताते हैं कि राज्य के औसत के पीछे भारी भौगोलिक असमानता छिपी है — विशाखापत्तनम में गंभीर स्टंटिंग 7.27 प्रतिशत है, जो कृष्णा के 0.99 प्रतिशत से कई गुना अधिक। कम वजन बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर करता है, स्टंटेड बच्चे सामाजिक मेलजोल और स्कूल से दूर रहते हैं, और वेस्टेड बच्चों में रुग्णता-मृत्यु दर तथा कम उम्र में गंभीर दीर्घकालिक रोगों का जोखिम अधिक होता है। इसलिए लक्षित जिलास्तरीय हस्तक्षेप ही असर दिखा सकता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना के तहत आंध्र प्रदेश में मासिक ग्रोथ मॉनिटरिंग डिटेल्ड रिपोर्ट (GMDR) तैयार होती है।
- GMDR के तीन मानक: underweight (कम वजन), wasted (लंबाई के अनुपात में कम वजन), stunted (उम्र के अनुपात में कम लंबाई); श्रेणियां — सामान्य, मध्यम, गंभीर।
- जून 2022: विशाखापत्तनम में सर्वाधिक (2.40% underweight, 2.18% wasted, 7.27% गंभीर stunted); कृष्णा में सबसे कम (0.44%, 0.39%, 0.99%)।
- राज्य स्तर पर गंभीर underweight 1.03%, गंभीर wasted 1.12%, stunted 2.74%।
- NFHS-5 (2019-20) आंध्र: ग्रामीण स्टंटिंग 34.2%, ग्रामीण underweight 31.4%, शहरी wasting 17.6%, शहरी गंभीर wasting 6.4%, शहरी overweight 3.0%।
- प्रत्येक जिले में पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल के लिए उपलब्ध।
मेन्स दृष्टिकोण
आंध्र प्रदेश की जून 2022 की GMDR रिपोर्ट बाल कुपोषण की दो सच्चाइयां उजागर करती है: राज्य औसत तुलनात्मक रूप से कम दिखता है (गंभीर underweight 1.03%, wasted 1.12%, stunted 2.74%), पर जिलेवार अंतर तीखा है — विशाखापत्तनम में गंभीर स्टंटिंग 7.27% बनाम कृष्णा में 0.99%। कारणों में स्रोत के अनुसार माताओं में पर्याप्त पौष्टिक आहार लेने की जागरूकता की कमी और प्रसव के बाद आहार प्रतिबंध शामिल हैं; माता के कुपोषित होने पर बच्चा भी प्रभावित होता है। परिणाम गंभीर हैं — कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, स्टंटेड बच्चों का सामाजिक-शैक्षिक अलगाव, तथा वेस्टेड बच्चों में उच्च रुग्णता-मृत्यु दर और कम उम्र में दीर्घकालिक रोग। NFHS-5 दर्शाता है कि NFHS-4 की तुलना में स्टंटिंग, वेस्टिंग और underweight घटे, लेकिन गंभीर वेस्टिंग और overweight बढ़े — यानी अल्पपोषण और अतिपोषण का दोहरा बोझ, जबकि GMDR में overweight का विवरण ही नहीं है। आगे का रास्ता: कुरनूल जैसे विशेष अभियान — तौल व माप उपकरणों की जांच से आंकड़ों की सटीकता, आंगनवाड़ी कर्मियों को पोषण प्रशिक्षण, अभिभावकों को NRC भेजने के लिए प्रेरित करना, और सबसे प्रभावित जिलों पर केंद्रित हस्तक्षेप।
मुख्य शब्द
- GMDR (ग्रोथ मॉनिटरिंग डिटेल्ड रिपोर्ट)
- आंध्र प्रदेश में हर महीने बनने वाली रिपोर्ट, जो सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य पर तीन मानकों से नजर रखती है।
- वाईएसआर संपूर्ण पोषण योजना
- आंध्र प्रदेश की पोषण योजना, जिसके तहत GMDR प्रकाशित होती है; इसमें 26,20,797 बच्चे पंजीकृत हैं।
- वेस्टेड (Wasted)
- लंबाई के अनुपात में कम वजन; ऐसे बच्चों में रुग्णता-मृत्यु दर और कम उम्र में गंभीर रोगों का जोखिम अधिक।
- स्टंटेड (Stunted)
- उम्र के अनुपात में कम लंबाई; ऐसे बच्चे प्रायः अन्य बच्चों से मेलजोल, स्कूल व खेल से दूर रहते हैं।
- NFHS
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण; NFHS-5 (2019-20) और NFHS-4 (2015-16) की तुलना पोषण रुझान दर्शाती है।
- पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC)
- प्रत्येक जिले में उपलब्ध केंद्र, जहां कुपोषित बच्चों की विशेष देखभाल की जाती है।
अभ्यास प्रश्न
- आंध्र प्रदेश की GMDR जून 2022 रिपोर्ट के आंकड़ों के आलोक में बाल कुपोषण में जिलेवार असमानता के कारणों और नीतिगत निहितार्थों की चर्चा करें।
- NFHS-4 और NFHS-5 की तुलना बताती है कि स्टंटिंग व underweight घटे पर गंभीर वेस्टिंग और overweight बढ़े — क्या यह 'कुपोषण के दोहरे बोझ' का संकेत है? परीक्षण करें।
- मासिक वृद्धि निगरानी (growth monitoring) और पोषण पुनर्वास केंद्रों की भूमिका का मूल्यांकन करते हुए आंकड़ों की गुणवत्ता सुधारने के उपाय सुझाएं।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
