अनंतपुर में किसानों को 80 प्रतिशत सब्सिडी पर ड्रोन

संयुक्त अनंतपुर जिले में किसानों को सब्सिडी पर 70 किसान ड्रोन दिए जा रहे हैं। प्रत्येक ड्रोन की कीमत 9.80 लाख रुपये है। किसान के हिस्से के 2 लाख रुपये के बाद शेष 7.30 लाख रुपये सरकार किसान समूह के खातों में जमा करेगी, बैंक ऋण 4.90 लाख रुपये है। नियम शिथिल कर इंटर योग्यता पर्याप्त कर दी गई है। समूह में पाँच से अधिक सदस्य जरूरी हैं। आवेदन इस माह के अंत तक, चयनितों को गुंटूर के आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय में 12 दिन मुफ्त प्रशिक्षण मिलेगा।

स्रोत

Anantapur — వ్యవసాయం · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 70 Kisan drones are available for farmers; each costs Rs 9.80 lakh with a farmer share of Rs 4.90 lakh and a bank loan of Rs 4.90 lakh; after delivery the government credits Rs 7.30 lakh to farmer group accounts, leaving Rs 2 lakh as the farmer's share. — Figures appear in the source and are attributed to the scheme details; the internal arithmetic of the break-up is not explained in the source.
  • In 2023 the YSRCP government decided to give 189 drones, three per mandal, in the combined Anantapur district, later revised to one per mandal as no one applied. — Stated in source as a government decision; no order number or official named.
  • Eligibility relaxed to Intermediate qualification, with passport allowed before drone sanction; groups must have more than five members and the pilot needs Intermediate education and a pattadar passbook. — Attributed to the current coalition government's relaxation of rules; no order citation given.
  • A drone sprays one acre in seven minutes using 12 litres of water, against over two hours and up to 100 litres manually; cost Rs 350 per acre and 10 acres a day. — Attributed to experts and agriculture department officials in the source.
  • Selected candidates get 12 days of free drone training at Acharya N.G. Ranga Agricultural University, Guntur; applications close at the end of this month. — Stated in source; exact calendar deadline date is not specified.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह मशीन बाँटने की योजना से ज़्यादा सरकारी पैसे से खड़ा किया जा रहा एक ग्रामीण सेवा-कारोबार है। 9.80 लाख रुपये के ड्रोन में सरकार 7.30 लाख रुपये डाल रही है, जिससे किसान समूह की अपनी नकद हिस्सेदारी 2 लाख रुपये तक सीमित रहती है और साथ में 4.90 लाख रुपये का बैंक ऋण है। 70 इकाइयों का मतलब लगभग 6.86 करोड़ रुपये की संपत्ति — आकार छोटा है, लेकिन 350 रुपये प्रति एकड़ और दिन में 10 एकड़ की क्षमता पर इकाई का गणित चल सकता है। असली परीक्षा सब्सिडी नहीं, साल भर किराये की पर्याप्त मांग है।

  • लागत का बँटवारा साफ है: कुल मूल्य 9.80 लाख, सरकारी हिस्सा 7.30 लाख, किसान हिस्सा 2 लाख और बैंक ऋण 4.90 लाख रुपये — यानी जोखिम का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक धन पर, छोटा हिस्सा समूह पर।
  • उत्पादकता का तर्क अधिकारियों के आँकड़ों से ही मजबूत है: एक एकड़ में दो घंटे से ऊपर का मैनुअल छिड़काव सात मिनट में, और पानी की खपत करीब 100 लीटर से 12 लीटर पर — इससे मजदूरी लागत, दवा की बर्बादी और पानी तीनों घटते हैं।
  • मजदूरों की कमी वाले इलाके में यह किसान का समय और पैसा बचाता है, पर छिड़काव करने वाले मजदूरों के काम के दिन घटा भी सकता है — लाभ और नुकसान एक ही वर्ग पर नहीं पड़ते।
  • 2023 की प्रति मंडल तीन के हिसाब से 189 ड्रोन की योजना में कोई आगे नहीं आया और अब यह 70 पर सिमट गई है, जो बताता है कि अड़चन कीमत जितनी ही पात्रता शर्तों में थी; इंटर योग्यता और पासपोर्ट में ढील उसी का सीधा जवाब है।
  • 12 दिन का मुफ्त प्रशिक्षण और पाँच से अधिक सदस्यों के समूह की शर्त संपत्ति को बाँटती और संचालन कौशल बनाती है, लेकिन समूह के भीतर किराया आय, मरम्मत खर्च और ऋण चुकौती का बँटवारा कैसे होगा, यह खुला है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि महीने के अंत की समय-सीमा तक सभी 70 इकाइयों के लिए आवेदन भर पाते हैं या नहीं, और चयनित समूहों को बैंक 4.90 लाख रुपये का ऋण कितनी तेजी से मंजूर करते हैं — यही तय करेगा कि योजना कागज़ से खेत तक पहुँचती है।

कहानी में ड्रोन की उम्र, बीमा, बैटरी-मरम्मत खर्च, ऋण की ब्याज दर या साल में कितने एकड़ का काम मिलेगा, इसका कोई ब्योरा नहीं है — इसलिए 350 रुपये प्रति एकड़ पर लाभप्रदता अभी साबित नहीं हुई है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश के संयुक्त अनंतपुरम जिले में किसान ड्रोन योजना को नए सिरे से शुरू किया जा रहा है। 2023 में तत्कालीन वाईएसआरसीपी सरकार ने प्रति मंडल 3 यानी 189 ड्रोन देने का निर्णय लिया था, लेकिन डिप्लोमा/बीटेक-बीएससी (कृषि) योग्यता और अनिवार्य पासपोर्ट जैसी कड़ी शर्तों के कारण कोई आगे नहीं आया। अब कूटमी (गठबंधन) सरकार ने नियम शिथिल कर दिए हैं और कस्टम हायरिंग सेंटर की तरह किसान समूहों को सब्सिडी पर ड्रोन दिए जा रहे हैं। उद्देश्य है कीटनाशक छिड़काव में लगने वाले समय, मजदूरी और दवा की बर्बादी को घटाना तथा ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार देना।

मुख्य तथ्य

  • संयुक्त अनंतपुरम जिले में खेती के लिए कुल 70 किसान ड्रोन दिए जा रहे हैं।
  • प्रत्येक ड्रोन की कीमत 9.80 लाख रुपये; किसान का हिस्सा 4.90 लाख रुपये और बैंक ऋण 4.90 लाख रुपये।
  • ड्रोन मिलने के बाद किसान के 2 लाख रुपये के हिस्से को छोड़कर शेष 7.30 लाख रुपये सरकार किसान समूह के खातों में जमा करेगी।
  • 2023 में वाईएसआरसीपी सरकार ने प्रति मंडल 3 के हिसाब से 189 ड्रोन देने का निर्णय लिया था; कोई आगे न आने पर प्रति मंडल एक करने के आदेश जारी हुए।
  • पुरानी शर्त: डिप्लोमा, बीटेक एग्रीकल्चर (बीएससी) योग्यता के साथ पासपोर्ट अनिवार्य; नई शर्त: इंटर योग्यता पर्याप्त, ड्रोन मंजूर होने तक पासपोर्ट बनवाने की छूट।
  • समूह में पाँच से अधिक सदस्य होने चाहिए; इंटर पास और पट्टादार पासबुक रखने वाले एक सदस्य को पायलट के रूप में लिया जाएगा।
  • चयनित लोगों को गुंटूर स्थित आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय में 12 दिन का मुफ्त ड्रोन प्रशिक्षण मिलेगा; आवेदन की अवधि इस माह के अंत तक।
  • ड्रोन एक एकड़ में केवल 7 मिनट और 12 लीटर पानी से छिड़काव करता है, जबकि मजदूर से 2 घंटे से अधिक और 100 लीटर तक लगते हैं; ड्रोन से लागत 350 रुपये प्रति एकड़, दिन में 10 एकड़।

समयरेखा

  1. 2023वाईएसआरसीपी सरकार ने संयुक्त अनंतपुरम जिले में प्रति मंडल 3 यानी कुल 189 ड्रोन किसानों को देने का निर्णय लिया।
  2. इसके बाद (तारीख स्रोत में नहीं)कोई आवेदक आगे न आने पर प्रति मंडल एक ड्रोन मंजूर करने के आदेश जारी; योजना ठप पड़ी रही।
  3. हाल ही मेंकूटमी (गठबंधन) सरकार ने नियम शिथिल किए – इंटर योग्यता पर्याप्त, पासपोर्ट में छूट।
  4. इस माह के अंत तककिसान समूह सदस्यों और बेरोजगार युवाओं के आवेदन/चयन की अंतिम तिथि।
  5. चयन के बादजिला कृषि विभाग सूची राज्य स्तरीय उच्चाधिकारियों को भेजेगा; फिर गुंटूर में 12 दिन का मुफ्त प्रशिक्षण।

किसका दाँव

  • अनंतपुरम के किसान व किसान समूह — सब्सिडी पर ड्रोन, कीटनाशक छिड़काव में समय-धन की बचत और किराये पर देकर अतिरिक्त आय।
  • ग्रामीण बेरोजगार युवा — ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षण और स्वरोजगार का अवसर; अब इंटर योग्यता से ही पात्रता।
  • आंध्र प्रदेश की कूटमी (गठबंधन) सरकार — पूर्व सरकार में ठप पड़ी किसान ड्रोन योजना को नियम शिथिल कर लागू करना; प्रति ड्रोन 7.30 लाख रुपये का भार।
  • जिला कृषि विभाग / जिला कृषि अधिकारी उमामहेश्वरम्मा — चयन, सूची राज्य स्तर पर भेजना तथा तकनीकी ज्ञान व मेडिकल सर्टिफिकेट की जाँच।
  • आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय, गुंटूर — चयनित लाभार्थियों को 12 दिन का मुफ्त ड्रोन प्रशिक्षण देना।
  • बैंक — प्रत्येक ड्रोन पर 4.90 लाख रुपये का ऋण देना।

क्यों अहम है

खेती में मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत के बीच ड्रोन छिड़काव एक एकड़ का काम 7 मिनट और 12 लीटर पानी में पूरा कर देता है, जिससे समय, मजदूरी और कीटनाशक की बर्बादी घटती है। योजना केवल उपकरण सब्सिडी नहीं, बल्कि कस्टम हायरिंग मॉडल के जरिये ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार का रास्ता भी है। यह उदाहरण दिखाता है कि अव्यावहारिक पात्रता शर्तें कैसे एक अच्छी योजना को ठप कर देती हैं और शिथिलता से उसमें जान आ सकती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • किसान ड्रोन योजना: संयुक्त अनंतपुरम जिले में 70 ड्रोन, प्रति ड्रोन मूल्य 9.80 लाख रुपये।
  • वित्त संरचना: किसान हिस्सा 4.90 लाख, बैंक ऋण 4.90 लाख; ड्रोन मिलने पर 2 लाख किसान का, 7.30 लाख सरकार समूह खाते में जमा करेगी।
  • प्रशिक्षण केंद्र: आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय, गुंटूर – 12 दिन मुफ्त ड्रोन प्रशिक्षण।
  • नई पात्रता: इंटर उत्तीर्ण, पट्टादार पासबुक धारक सदस्य पायलट; समूह में पाँच से अधिक सदस्य अनिवार्य।
  • 2023 में प्रति मंडल 3 यानी 189 ड्रोन का लक्ष्य था, आवेदक न मिलने पर प्रति मंडल एक कर दिया गया।
  • दक्षता आँकड़े: ड्रोन – 1 एकड़/7 मिनट, 12 लीटर पानी, 350 रुपये प्रति एकड़, दिन में 10 एकड़; मानव श्रम – 2 घंटे से अधिक, 100 लीटर तक।

मेन्स दृष्टिकोण

कृषि में ड्रोन आधारित कीटनाशक छिड़काव श्रम की कमी, ऊँची लागत और दवा की बर्बादी जैसी समस्याओं का तकनीकी उत्तर है – स्रोत के अनुसार ड्रोन एक एकड़ में 7 मिनट और 12 लीटर पानी लेता है, जबकि मानव श्रम से 2 घंटे से अधिक और 100 लीटर तक पानी लगता है, तथा दवा सीधे पौधे पर पड़ने से अपव्यय नहीं होता। अनंतपुरम का अनुभव नीति-निर्माण का सबक भी देता है: 2023 में डिप्लोमा/बीटेक-बीएससी (कृषि) योग्यता और अनिवार्य पासपोर्ट जैसी शर्तों के कारण 189 ड्रोन का लक्ष्य निष्क्रिय रहा और प्रति मंडल एक तक सिमट गया; अब इंटर योग्यता, पासपोर्ट में छूट तथा पाँच से अधिक सदस्यों के किसान समूह के कस्टम हायरिंग मॉडल से भागीदारी बढ़ रही है। साथ ही 9.80 लाख रुपये के उपकरण में 4.90 लाख का बैंक ऋण और 2 लाख की किसान हिस्सेदारी लघु किसानों के लिए व्यवहार्यता का प्रश्न खड़ा करती है, जिसका उत्तर किराये से होने वाली आय (350 रुपये प्रति एकड़, दिन में 10 एकड़) में निहित है। आगे का रास्ता है – प्रशिक्षण (गुंटूर विश्वविद्यालय में 12 दिन), मेडिकल व तकनीकी जाँच, समयबद्ध चयन और सामूहिक स्वामित्व से ड्रोन का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना।

मुख्य शब्द

किसान ड्रोन योजना
फसलों पर कीटनाशक छिड़काव हेतु किसानों/किसान समूहों को सब्सिडी पर ड्रोन देने की योजना।
कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी)
कृषि यंत्र-उपकरण किराये पर देने वाला केंद्र; इसी मॉडल पर किसान समूह बनाकर ड्रोन दिए जा रहे हैं।
मंडल
आंध्र प्रदेश में जिले के भीतर प्रशासनिक इकाई; पहले प्रति मंडल 3, बाद में एक ड्रोन तय हुआ।
पट्टादार पासबुक
भूमि स्वामित्व/कृषि जोत दर्शाने वाला दस्तावेज, जो ड्रोन पायलट चयन की शर्त है।
आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय
गुंटूर स्थित कृषि विश्वविद्यालय, जहाँ चयनित लाभार्थियों को 12 दिन का मुफ्त ड्रोन प्रशिक्षण मिलेगा।
कूटमी सरकार
आंध्र प्रदेश की वर्तमान गठबंधन सरकार, जिसने ड्रोन योजना के नियम शिथिल किए।

अभ्यास प्रश्न

  1. कृषि में ड्रोन के उपयोग से श्रम, लागत और इनपुट-कुशलता में किस प्रकार सुधार होता है? अनंतपुरम की किसान ड्रोन योजना के आँकड़ों के आलोक में समझाइए।
  2. "अव्यावहारिक पात्रता शर्तें कल्याणकारी योजनाओं को निष्क्रिय कर देती हैं।" 2023 से 2025 तक अनंतपुरम की ड्रोन योजना के अनुभव से इस कथन का परीक्षण कीजिए।
  3. किसान समूह आधारित कस्टम हायरिंग मॉडल छोटे और सीमांत किसानों तक महँगी कृषि तकनीक पहुँचाने में कितना कारगर है? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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