असम, गुजरात, मध्य प्रदेश के यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के इंतजार में
असम, गुजरात और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं में इस वर्ष पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी अब तक नहीं मिली है, अधिकारियों ने बताया। गुजरात ने 24 मार्च, असम ने 27 मई और मध्य प्रदेश ने 21 जुलाई को विधेयक पारित किया। असम के विधेयक से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है, जो राज्य की आबादी का 12.45% हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू होगी। सहयोगी जेडी(यू), टीडीपी और एलजेपी इस योजना से असहज हैं।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- UCC bills passed by Assam, Gujarat and Madhya Pradesh assemblies await Presidential approval — Attributed in source to unnamed Gujarat, Assam and Madhya Pradesh government officials.
- Amit Shah on September 13 promised all NDA-ruled states will have UCC before the 2029 Lok Sabha elections — Stated in source as a promise by the Union home minister; date appears in source, no direct quote given.
- Uttarakhand implemented a state-specific UCC on January 27, 2025, with Presidential assent coming 32 days after the bill's passage on February 7, 2024 — Dates and figures appear in the source; internally consistent.
- Assam's UCC bill excludes scheduled tribes, who form 12.45% of the state's population — Figure appears in source without an attributed data source.
- JD(U), TDP and LJP are uneasy about UCC; Nagaland and Meghalaya allies oppose it — Supported by quotes attributed to named party leaders and chief ministers in the source.
विश्लेषकों की राय राय
यूसीसी पर भाजपा का रास्ता अब साफ है — संसद से एक राष्ट्रीय कानून नहीं, बल्कि राज्य विधानसभाओं के जरिए टुकड़ों में अमल। यह राजनीतिक रूप से सस्ता विकल्प है क्योंकि सहयोगियों से सीधी टकराहट टल जाती है, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित रहने से प्रचार का नैरेटिव कानून की किताब से आगे निकल गया है। असम में 12.45% अनुसूचित जनजातियों को छूट देने से साफ है कि 'अपवादों' की राजनीति ही तय करेगी कि हर राज्य में यूसीसी का स्वरूप क्या होगा।
- राम मंदिर और अनुच्छेद 370 के बाद बचा तीसरा घोषणापत्र वादा राज्यों के रास्ते पूरा करना भाजपा के लिए कम राजनीतिक लागत का विकल्प है।
- 13 सितंबर को गृह मंत्री की यह घोषणा कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले हर एनडीए शासित राज्य में यूसीसी होगा, इस मुद्दे को अभी से चुनावी एजेंडे में बांध देती है।
- जद(यू), तेदेपा और लोजपा (रामविलास) की असहजता खुली बगावत नहीं, बल्कि अपने वोट समीकरणों को देखते हुए सतर्क दूरी बनाए रखना दिखती है।
- नगालैंड और मेघालय में भाजपा के ही सहयोगियों का विरोध पूर्वोत्तर में सांस्कृतिक और जनजातीय अधिकारों की सीमा दिखाता है — असम की छूट को उसी दबाव के जवाब के तौर पर पढ़ा जाना चाहिए।
- राजस्थान में विधेयक चर्चा के लिए न आना और छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र में विशेषज्ञ समितियों का काम जारी रहना भाजपा शासित राज्यों में भी असमान रफ्तार का संकेत है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राष्ट्रपति की मंजूरी किस क्रम और कब आती है, जद(यू) की गृह मंत्री से प्रस्तावित बातचीत का नतीजा क्या रहता है, और बिहार-आंध्र प्रदेश जैसे सहयोगी शासित राज्यों का रुख बदलता है या नहीं।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि मंजूरी क्यों लंबित है — इसके पीछे कोई राजनीतिक विचार है या यह सामान्य परीक्षण प्रक्रिया है — न ही विधेयकों की पूरी सामग्री या सहयोगियों का अंतिम रुख स्पष्ट है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) भाजपा के घोषणापत्र का पुराना वादा है, जो राम मंदिर निर्माण और अनुच्छेद 370 हटाने के साथ त्रिकोण बनाता है। पहले दो वादे पूरे हो चुके हैं और यूसीसी के लिए भाजपा ने राज्य-दर-राज्य विधेयक पारित कराने का रास्ता चुना है। उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को राज्य-विशिष्ट यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना। अब असम, गुजरात और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं से पारित यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के इंतजार में हैं।
मुख्य तथ्य
- गुजरात विधानसभा ने यूसीसी विधेयक 24 मार्च 2026 को पारित किया और अगले सप्ताह राज्यपाल को भेजा; राज्यपाल ने इसे राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर दिया।
- असम विधानसभा ने 27 मई को यूसीसी विधेयक पारित किया; मसौदा लगभग 10 दिनों में तैयार किया गया था।
- असम के यूसीसी विधेयक से अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखा गया है, जो राज्य की आबादी का 12.45% हैं।
- मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को विधेयक पारित किया और अगले दिन राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेज दिया।
- उत्तराखंड में विधेयक 7 फरवरी 2024 को पारित हुआ और राष्ट्रपति की मंजूरी 32 दिन बाद मिली; कानून 27 जनवरी 2025 को लागू हुआ।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 सितंबर को कहा कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू होगी।
- राजस्थान सरकार ने 21 अगस्त को विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया, लेकिन उस पर चर्चा नहीं हुई है।
- छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र ने विशेषज्ञ समितियां गठित की हैं, ओडिशा समिति गठन की प्रक्रिया में है, पश्चिम बंगाल ने कानून की घोषणा की है।
समयरेखा
- सितंबर 2023नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने राज्य को यूसीसी से छूट मांगी, कहा कि यह नगा संस्कृति व रीति-रिवाजों के लिए खतरा हो सकता है।
- 7 फरवरी 2024उत्तराखंड विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया; 32 दिन बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
- जनवरी 2025मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने यूसीसी को भारत जैसे विविध देश के लिए न 'उपयुक्त' न 'व्यावहारिक' बताया।
- 27 जनवरी 2025उत्तराखंड राज्य-विशिष्ट यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना, विस्तृत नियम बनाने के बाद।
- 24 मार्च 2026गुजरात विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया; अगले सप्ताह राज्यपाल को भेजा गया।
- 27 मईचुनाव में वापसी के बाद असम विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया।
- 21 जुलाईमध्य प्रदेश विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया; अगले दिन राष्ट्रपति को भेजा।
- 21 अगस्तराजस्थान सरकार ने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया।
- 13 सितंबरअमित शाह ने वादा किया कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी होगी।
- सोमवार (हाल में)जेडी(यू) कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पार्टी यूसीसी लागू करने पर गृह मंत्री शाह से बात करेगी।
किसका दाँव
- राष्ट्रपति — राज्यपालों द्वारा आरक्षित असम, गुजरात और मध्य प्रदेश के यूसीसी विधेयकों पर मंजूरी का निर्णय लंबित है।
- असम, गुजरात, मध्य प्रदेश सरकारें — पारित विधेयकों को कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार; अधिकारी शीघ्र स्वीकृति की आशा जता रहे हैं।
- भाजपा — घोषणापत्र का तीसरा बड़ा वादा राज्यों के जरिए पूरा करना; 2029 से पहले एनडीए राज्यों में यूसीसी का लक्ष्य।
- एनडीए सहयोगी – जेडी(यू), टीडीपी, एलजेपी (रामविलास) — यूसीसी योजना से असहज; जेडी(यू) शाह से बात करेगी, टीडीपी हितधारकों से चर्चा करेगी, चिराग पासवान ने 'एकरूपता और विविधता' की बात कही।
- अनुसूचित जनजातियाँ (असम) और पूर्वोत्तर राज्य — असम विधेयक में एसटी बाहर; नगालैंड व मेघालय में भाजपा के सहयोगियों ने यूसीसी का विरोध किया, रीति-रिवाजों पर असर की चिंता।
- अन्य राज्य – राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश — मसौदा समितियों, लंबित विधेयक या चुनावी वादे के जरिए यूसीसी की दिशा में विभिन्न चरणों में।
क्यों अहम है
यूसीसी विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों को छूती है, इसलिए राज्यों के अलग-अलग विधेयकों और राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया संघीय ढांचे और केंद्र-राज्य संबंधों का महत्वपूर्ण परीक्षण है। जनजातीय समुदायों को छूट देने की व्यवस्था दिखाती है कि 'एकरूपता' व्यवहार में कितनी अपवाद-सहित है। एनडीए सहयोगियों की असहजता से यह गठबंधन राजनीति का भी मुद्दा बन गया है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को राज्य-विशिष्ट यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना।
- उत्तराखंड यूसीसी विधेयक 7 फरवरी 2024 को पारित; राष्ट्रपति की मंजूरी 32 दिन बाद।
- 2026 में गुजरात (24 मार्च), असम (27 मई) और मध्य प्रदेश (21 जुलाई) ने यूसीसी विधेयक पारित किए – सभी राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित।
- असम यूसीसी विधेयक अनुसूचित जनजातियों को बाहर रखता है; एसटी राज्य की आबादी के 12.45%।
- भाजपा के तीन प्रमुख वादे: राम मंदिर, अनुच्छेद 370 का निरसन, और यूसीसी।
- राजस्थान ने 21 अगस्त को विधेयक पेश किया; छत्तीसगढ़ व महाराष्ट्र में विशेषज्ञ समितियाँ।
मेन्स दृष्टिकोण
समान नागरिक संहिता को राष्ट्रीय कानून के बजाय राज्य-दर-राज्य विधेयकों के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है – उत्तराखंड के मॉडल पर असम, गुजरात और मध्य प्रदेश ने 2026 में विधेयक पारित किए, जो राज्यपालों द्वारा आरक्षित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के इंतजार में हैं। इससे कई सवाल उठते हैं: व्यक्तिगत कानूनों पर राज्य-विशिष्ट संहिताएँ बनने से देश में एकरूपता के बजाय भिन्नताएँ बढ़ सकती हैं; असम में अनुसूचित जनजातियों (आबादी का 12.45%) की छूट और नगालैंड-मेघालय के मुख्यमंत्रियों का विरोध दर्शाता है कि जनजातीय रीति-रिवाजों की रक्षा और एकरूपता के बीच तनाव है; तथा राष्ट्रपति की मंजूरी में लगने वाला समय संघीय प्रक्रिया की गति पर सवाल खड़ा करता है। राजनीतिक रूप से जेडी(यू), टीडीपी और एलजेपी की असहजता बताती है कि गठबंधन सहमति के बिना 2029 से पहले सभी एनडीए राज्यों में यूसीसी का लक्ष्य कठिन है। आगे का रास्ता – जैसा उत्तराखंड के अनुभव से दिखता है – मंजूरी के बाद विस्तृत नियम बनाना, अधिकारियों की भूमिकाएँ तय करना, तथा हितधारकों (टीडीपी के शब्दों में) व विविध समुदायों से व्यापक परामर्श करना है, जिसे चिराग पासवान ने संवैधानिक ढांचे में "एकरूपता और विविधता" कहा।
मुख्य शब्द
- समान नागरिक संहिता (यूसीसी)
- विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए एक समान संहिता; यहाँ राज्य-विशिष्ट कानूनों के रूप में लाई जा रही है।
- राष्ट्रपति की मंजूरी (विधेयक आरक्षित करना)
- राज्यपाल किसी राज्य विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर सकते हैं; मंजूरी के बाद ही वह कानून बनता है।
- अनुसूचित जनजाति छूट
- असम के यूसीसी विधेयक में अनुसूचित जनजातियों को दायरे से बाहर रखा गया, जो राज्य की आबादी का 12.45% हैं।
- एनडीए
- राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन; अमित शाह के अनुसार 2029 से पहले इसके सभी शासित राज्यों में यूसीसी लाने का लक्ष्य।
- जीएडी (सामान्य प्रशासन विभाग)
- मध्य प्रदेश का विभाग, जिसके अधिकारी ने यूसीसी विधेयक पर राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार बताया।
अभ्यास प्रश्न
- राज्य-विशिष्ट समान नागरिक संहिताओं के जरिए यूसीसी लागू करने की रणनीति के संघीय ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ते हैं? असम, गुजरात और मध्य प्रदेश के उदाहरणों से समझाइए।
- असम के यूसीसी विधेयक में अनुसूचित जनजातियों को छूट देना और पूर्वोत्तर राज्यों का विरोध – 'एकरूपता' और 'विविधता' के बीच संतुलन के प्रश्न पर चर्चा कीजिए।
- राज्य विधेयकों को राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करने की प्रक्रिया क्या है और उत्तराखंड यूसीसी का अनुभव इस प्रक्रिया की समय-सीमा के बारे में क्या बताता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
