कृषि Uttarakhand

उत्तराखंड में आईवीएफ से साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछड़ी को जन्म

केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक से शुक्रवार को एक स्वस्थ बद्री बछड़ी का जन्म हुआ। बद्री भ्रूण को साहीवाल गाय में प्रत्यारोपित किया गया था। बद्री उत्तराखंड में पाई जाने वाली देशी गोवंश नस्ल है। आईसीएआर-एनडीआरआई करनाल और जीबी पंत विश्वविद्यालय, पंतनगर ने मिलकर काम किया, वित्तीय सहयोग उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल का रहा। एक अन्य गाय 5-7 दिनों में बछड़े को जन्म देगी।

स्रोत

indianexpress.com · मूल ख़बर पढ़ें ↗

#ivf#badri cattle#indigenous breeds#uttarakhand#icar-ndri#livestock

डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • A healthy Badri female calf was born on Friday, September 11, through OPU-IVF technology after a Badri embryo was transferred into a Sahiwal recipient cow. — Attributed to a statement by the Union Ministry of Agriculture and Farmers' Welfare.
  • The work was a collaboration between ICAR-NDRI Karnal and GB Pant University of Agriculture and Technology, Pantnagar, with funding from the Uttarakhand Biotechnology Council, Haldi. — Quoted directly from the ministry statement in the source.
  • ICAR-NDRI earlier produced calves from Sahiwal and Gir breeds using the same technology. — Attributed to Dr Dheer Singh, Director, ICAR-NDRI, speaking to The Indian Express.
  • Another synchronised crossbred recipient cow is expected to deliver a Badri calf within 5-7 days. — Ministry projection reported in the source; forward-looking and unverifiable at publication.
  • The programme is exploring cloning of elite high-producing Badri cows and has generated cloned Badri embryos. — Source uses 'reportedly' for the cloning exploration; embryo claim attributed to the ministry statement.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह OPU-IVF सफलता तात्कालिक आर्थिक लाभ से ज्यादा एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखी जानी चाहिए, जिसका मुख्य उद्देश्य देशी नस्ल के जर्मप्लाज्म का संरक्षण है। चूंकि इसे सार्वजनिक शोध संस्थानों और राज्य बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल से फंडिंग मिल रही है, इसलिए अभी इसकी लागत करदाताओं पर है जबकि लाभ भविष्य में नस्ल संरक्षण और संभवतः किसानों तक पहुंचने की उम्मीद है।

  • यह तकनीक पारंपरिक प्रजनन के मुकाबले आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ देशी गायों की तेज़ी से बढ़ोतरी का वादा करती है, जो नस्ल सुधार को गति दे सकती है।
  • फंडिंग अभी सार्वजनिक संस्थानों (आईसीएआर-एनडीआरआई, एक राज्य विश्वविद्यालय और उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल) से आ रही है, जिससे यह बाज़ार-चालित के बजाय राज्य-सब्सिडी वाला शोध प्रयास बनता है।
  • बद्री जैसी सहनशील देशी नस्लों के दीर्घकालिक संरक्षण से किसानों को जलवायु अनुकूलन और दूध गुणवत्ता के ज़रिए आर्थिक लाभ मिल सकता है, हालांकि यह बड़े स्तर पर अभी अप्रमाणित है।
  • कहानी में लागत या स्केलेबिलिटी के आंकड़े नहीं दिए गए हैं, इसलिए यह स्पष्ट नहीं कि यह तकनीक सामान्य किसानों के लिए कितनी सुलभ होगी।
  • समानांतर क्लोनिंग प्रयास भी चल रहा है, जो विस्तार को और तेज़ कर सकता है लेकिन भविष्य की लागत और नियामक रास्तों पर सवाल भी उठाता है।

किस पर नज़र रखें — यह देखना होगा कि यह तकनीक शोध संस्थानों से आगे बढ़कर किसान स्तर तक कितनी जल्दी और किफायती रूप से पहुंचती है, और क्लोनिंग चरण कैसे आगे बढ़ता है।

यह रिपोर्ट प्रक्रिया की लागत, किसी व्यावसायीकरण योजना, या किसानों के लिए मात्रात्मक आर्थिक लाभ को स्पष्ट नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

उत्तराखंड की देशी गोवंश नस्ल 'बद्री' के संरक्षण और तेज़ गुणन के लिए उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार ओवम पिक-अप एवं इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक से 11 सितंबर (शुक्रवार) को एक स्वस्थ बद्री बछड़ी का जन्म हुआ, जिसमें बद्री भ्रूण को एक साहीवाल रिसिपिएंट (धारक) गाय में प्रत्यारोपित किया गया था। यह काम ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के सहयोग से हुआ, जिसे उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल, हल्दी से वित्तीय सहायता मिली।

मुख्य तथ्य

  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि OPU-IVF तकनीक से एक "स्वस्थ" बद्री बछड़ी का जन्म हुआ।
  • बछड़ी का जन्म शुक्रवार, 11 सितंबर को हुआ; बद्री भ्रूण साहीवाल रिसिपिएंट गाय में प्रत्यारोपित किया गया था।
  • बद्री उत्तराखंड में पाई जाने वाली देशी गोवंश (indigenous cattle) नस्ल है।
  • सहयोगी संस्थान: ICAR-NDRI करनाल और जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर; वित्तीय सहयोग उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल, हल्दी का।
  • बद्री पर शोध कार्यक्रम 2023 में तत्कालीन कुलपति डॉ. एम एस चौहान के नेतृत्व व पहल पर शुरू हुआ।
  • चयनित बद्री डोनर गायों से अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओवम पिक-अप द्वारा ओसाइट्स लिए गए और उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त श्रेष्ठ बद्री सांड के वीर्य से इन विट्रो निषेचन किया गया।
  • मंत्रालय के अनुसार एक अन्य सिंक्रोनाइज़्ड क्रॉसब्रेड रिसिपिएंट गाय अगले 5-7 दिनों में बद्री बछड़े को जन्म देगी।
  • ICAR-NDRI ने इससे पहले इसी तकनीक से साहीवाल और गिर नस्ल के बछड़े पैदा किए थे (निदेशक डॉ. धीर सिंह)।

समयरेखा

  1. 2023जीबी पंत विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एम एस चौहान की पहल पर बद्री गोवंश पर शोध कार्यक्रम शुरू।
  2. 11 सितंबर (शुक्रवार)साहीवाल रिसिपिएंट गाय ने OPU-IVF से उत्पन्न स्वस्थ बद्री बछड़ी को जन्म दिया।
  3. 12 सितंबर (शनिवार)केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बयान जारी कर उपलब्धि की घोषणा की।
  4. अगले 5-7 दिनएक अन्य सिंक्रोनाइज़्ड क्रॉसब्रेड रिसिपिएंट गाय से बद्री बछड़े के जन्म की संभावना।
  5. अगला चरणOPU-IVF और क्लोनिंग से बने भ्रूण साहीवाल, क्रॉसब्रेड और बद्री रिसिपिएंट गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना।

किसका दाँव

  • ICAR-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल — तकनीक का क्रियान्वयन; पहले साहीवाल व गिर में भी सफलता; देशी नस्लों के संरक्षण में वैज्ञानिक नेतृत्व।
  • जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर — 2023 से बद्री शोध कार्यक्रम की अगुवाई और सहयोगी अनुसंधान।
  • उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल, हल्दी — परियोजना को वित्तीय सहायता प्रदान करने वाली संस्था।
  • उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड — आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ बद्री सांड का वीर्य उपलब्ध कराया।
  • केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय — देशी गोवंश संरक्षण व आनुवंशिक सुधार की नीतिगत जिम्मेदारी और घोषणा।
  • उत्तराखंड के पशुपालक/किसान — श्रेष्ठ बद्री जर्मप्लाज्म के तेज़ गुणन से बेहतर उत्पादकता वाली देशी गायों की उपलब्धता।
  • एग्रीन्नोवेट इंडिया (सीईओ डॉ. प्रवीण मलिक) — इसे देशी नस्लों के संरक्षण में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

क्यों अहम है

देशी गोवंश नस्लों की संख्या और आनुवंशिक गुणवत्ता बनाए रखना पशुधन अर्थव्यवस्था और जैव-विविधता दोनों के लिए अहम है; OPU-IVF आनुवंशिक रूप से श्रेष्ठ मादा पशुओं से पारंपरिक प्रजनन की तुलना में कई गुना तेज़ी से भ्रूण और संतति पैदा करने में सक्षम बनाता है। बद्री जैसी पहाड़ी क्षेत्र की देशी नस्ल में यह सफलता संरक्षण, गुणन और नियोजित नस्ल-सुधार कार्यक्रम की राह खोलती है। साथ ही यह दर्शाता है कि रिसिपिएंट के रूप में साहीवाल या क्रॉसब्रेड गायों का उपयोग करके सीमित संख्या वाली नस्लों का विस्तार संभव है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • बद्री – उत्तराखंड की देशी गोवंश नस्ल; OPU-IVF से पहली बछड़ी 11 सितंबर को जन्मी।
  • OPU-IVF = ओवम पिक-अप और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन; अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओसाइट संग्रह के बाद प्रयोगशाला में निषेचन।
  • ICAR-NDRI का मुख्यालय करनाल (हरियाणा) में; इसने पहले साहीवाल व गिर बछड़े इसी तकनीक से पैदा किए।
  • परियोजना में वित्तीय सहयोग: उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल, हल्दी; सांड का वीर्य: उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड।
  • बद्री शोध कार्यक्रम 2023 में जीबी पंत विश्वविद्यालय (पंतनगर) के तत्कालीन कुलपति डॉ. एम एस चौहान की पहल पर शुरू।
  • कार्यक्रम में श्रेष्ठ व अधिक दूध देने वाली बद्री गायों की क्लोनिंग की भी खोज; क्लोन बद्री भ्रूण तैयार किए जा चुके।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की देशी गोवंश नस्लें जलवायु-सहिष्णुता और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर सीमित संख्या और धीमे पारंपरिक प्रजनन चक्र के कारण इनके गुणन और आनुवंशिक सुधार में बाधा रही है। उत्तराखंड की बद्री नस्ल में OPU-IVF से बछड़ी का जन्म दिखाता है कि उन्नत प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी—अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओवम पिक-अप, प्रयोगशाला में निषेचन व भ्रूण संवर्धन, और सिंक्रोनाइज़्ड रिसिपिएंट (साहीवाल/क्रॉसब्रेड) गायों में प्रत्यारोपण—से श्रेष्ठ मादा जर्मप्लाज्म का गुणन तेज़ किया जा सकता है। इसकी सफलता संस्थागत सहयोग (ICAR-NDRI करनाल, जीबी पंत विश्वविद्यालय), राज्य वित्तपोषण (उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल) और गुणवत्तापूर्ण वीर्य आपूर्ति (उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड) के तालमेल पर निर्भर रही। आगे की राह में मंत्रालय द्वारा बताई गई योजना—OPU-IVF व क्लोनिंग-जनित भ्रूणों का साहीवाल, क्रॉसब्रेड व बद्री गायों में प्रत्यारोपण—के साथ संरचित नस्ल-सुधार और जर्मप्लाज्म-संरक्षण कार्यक्रम खड़ा करना अहम होगा, जैसा डॉ. धीर सिंह ने रेखांकित किया।

मुख्य शब्द

OPU-IVF
ओवम पिक-अप एवं इन विट्रो फर्टिलाइजेशन: दानदाता गाय से अंडाणु लेकर प्रयोगशाला में निषेचन कर भ्रूण तैयार करने की तकनीक।
बद्री
उत्तराखंड में पाई जाने वाली देशी गोवंश नस्ल, जिसके संरक्षण व गुणन के लिए यह कार्यक्रम चल रहा है।
रिसिपिएंट गाय
वह सिंक्रोनाइज़्ड गाय जिसमें तैयार भ्रूण प्रत्यारोपित किया जाता है; यहाँ साहीवाल व क्रॉसब्रेड गायों का उपयोग।
ओसाइट
अपरिपक्व अंडाणु, जिसे अल्ट्रासाउंड-गाइडेड ओवम पिक-अप से एकत्र कर प्रयोगशाला में परिपक्व किया जाता है।
जर्मप्लाज्म
किसी नस्ल की आनुवंशिक सामग्री, जिसका संरक्षण व सुधार पशुधन कार्यक्रमों का लक्ष्य होता है।
ICAR-NDRI, करनाल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान; इसने साहीवाल व गिर बछड़े भी इसी तकनीक से पैदा किए।

अभ्यास प्रश्न

  1. OPU-IVF जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकें भारत की देशी गोवंश नस्लों के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार में कैसे योगदान कर सकती हैं? बद्री बछड़ी के उदाहरण से समझाइए।
  2. देशी पशु नस्लों के गुणन में संस्थागत सहयोग (केंद्रीय अनुसंधान संस्थान, राज्य विश्वविद्यालय, राज्य बोर्ड व वित्तपोषण एजेंसी) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
  3. पशुधन में क्लोनिंग और भ्रूण-प्रत्यारोपण तकनीकों के संभावित लाभ तथा उनसे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

अगली ख़बरवेंकटेश की 'आदर्श कुटुंबम' का टीजर जारी, 2 अक्टूबर को रिलीज →
← सभी ख़बरें