आर्थिक संकट के बीच मालदीव ने भारत का 15 करोड़ डॉलर कर्ज चुकाया

आर्थिक संकट से जूझ रहे मालदीव ने भारत से लिया 15 करोड़ डॉलर का कर्ज पूरी तरह चुका दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ट्रेजरी बिलों की अंतिम 5 करोड़ डॉलर की किश्त 17 सितंबर को चुकाई गई। ये बिल एसबीआई ने 2019 में खरीदे थे और छह बार बढ़ाए गए। पांच साल में करीब 4.5 करोड़ डॉलर ब्याज भारत सरकार ने वहन किया। भारत ने 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा भी दी। अगस्त अंत में मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार 64.38 करोड़ डॉलर था।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Maldives settled the final $50 million tranche of $150 million in treasury bills subscribed by SBI on September 17. — Attributed to external affairs ministry spokesperson Randhir Jaiswal at a media briefing; figures appear in source.
  • India bore interest payments of close to $45 million on the treasury bills over five years. — Direct quote attributed to Jaiswal in the source.
  • SBI has subscribed to treasury bonds worth $350 million valid till 2029 and 2030, and India extended a ₹30 billion currency swap facility. — Attributed to Jaiswal; figures appear in source.
  • Maldives' foreign exchange reserves stood at $643.8 million at end-August and will dip below $600 million after repayment. — Reserve figure attributed to the Maldivian Monetary Authority; the post-repayment projection is stated without explicit attribution.
  • India agreed to provide over ₹6,300 crore in support during President Mohamed Muizzu's October 2024 visit. — Background stated in source without a named source.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

मालदीव का भारत से लिया 15 करोड़ डॉलर का ट्रेजरी बिल कर्ज पूरा चुकाना बहीखाते की घटना से ज़्यादा एक रणनीतिक संकेत है। पाँच साल में छह बार अवधि बढ़ाई गई और करीब 4.5 करोड़ डॉलर का ब्याज भारत सरकार ने खुद उठाया — यह बताता है कि दिल्ली इसे व्यापारिक कर्ज नहीं, हिंद महासागर में प्रभाव का निवेश मानती रही। साथ ही, इस भुगतान से माले का विदेशी मुद्रा भंडार 60 करोड़ डॉलर से नीचे खिसकने की स्थिति में आना दिखाता है कि रिश्ते की दिशा अभी भी द्वीप देश की आर्थिक कमज़ोरी तय कर रही है।

  • "इंडिया आउट" अभियान के बल पर सत्ता में आए राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू के कार्यकाल में ही यह भुगतान होना दिखाता है कि चुनावी बयानबाज़ी पर आर्थिक ज़रूरतें भारी पड़ी हैं।
  • 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा और एसबीआई द्वारा खरीदे गए 35 करोड़ डॉलर के बॉन्ड (2029 और 2030 तक वैध) भारत को दीर्घकालिक आर्थिक लीवरेज देते रहेंगे।
  • एक कर्ज चुकने से कुल निर्भरता कम नहीं होती — आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, क्रेडिट लाइन और स्वैप के ज़रिये भारत मालदीव की अर्थव्यवस्था में गहराई तक जुड़ा हुआ है।
  • भुगतान के बाद भंडार और घटा तो माले को नए बाहरी सहारे की ज़रूरत पड़ सकती है, और वह जगह कौन भरता है यह हिंद महासागर की प्रतिस्पर्धा के लिहाज़ से अहम है।
  • ब्याज का बोझ खुद उठाकर भारत को यह कूटनीतिक तर्क भी मिलता है कि उसकी पड़ोसी सहायता अन्य ऋणदाताओं पर लगते "कर्ज जाल" के आरोपों से अलग है।

किस पर नज़र रखें — आने वाले महीनों में मालदीव के विदेशी मुद्रा भंडार की दिशा, करेंसी स्वैप के इस्तेमाल और क्या माले फिर भारत या किसी अन्य साझेदार से मदद मांगता है — इन पर नज़र रखें।

यह खबर केवल कर्ज चुकाए जाने की पुष्टि करती है; यह नहीं बताती कि पैसा कहाँ से आया, मालदीव का कुल कर्ज कितना है, या दूसरे देशों के साथ उसके वित्तीय इंतज़ाम किस स्थिति में हैं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

मालदीव पिछले कुछ वर्षों से भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) और सॉवरेन कर्ज संकट से जूझ रहा है, जिसकी वजह उच्च सार्वजनिक कर्ज, कम विदेशी मुद्रा भंडार और पर्यटन तथा आयात पर भारी निर्भरता है। भारत ने इस दौरान ऋण सुविधाएं, करेंसी स्वैप और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के जरिये मदद दी है। इसी कड़ी में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा 2019 में खरीदे गए 15 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बिल थे, जिन्हें छह बार एक-एक साल के लिए बढ़ाया गया। अब मालदीव ने इस पूरे कर्ज का भुगतान कर दिया है। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के "इंडिया आउट" अभियान के बाद बिगड़े संबंध 2024 से सुधरते रहे हैं।

मुख्य तथ्य

  • मालदीव ने भारत से लिया 15 करोड़ डॉलर का कर्ज चुका दिया; अंतिम 5 करोड़ डॉलर की किश्त 17 सितंबर को चुकाई गई।
  • ये ट्रेजरी बिल भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने 2019 में खरीदे थे और छह बार, हर बार एक साल के लिए, बढ़ाए गए।
  • मूलधन मालदीव सरकार ने चुकाया, पर पांच वर्षों का ब्याज भारत सरकार ने वहन किया — लगभग 4.5 करोड़ डॉलर।
  • विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार की नियमित मीडिया ब्रीफिंग में यह जानकारी दी।
  • भारत ने मालदीव की वित्तीय प्रणाली को सहारा देने के लिए 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा भी दी।
  • एसबीआई ने 35 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बॉन्ड भी खरीदे हैं, जो 2029 और 2030 तक वैध हैं।
  • मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) के अनुसार अगस्त के अंत में विदेशी मुद्रा भंडार 64.38 करोड़ डॉलर था; कर्ज चुकाने के बाद यह 60 करोड़ डॉलर से नीचे आ जाएगा।
  • अक्टूबर 2024 में भारत ने 40 करोड़ डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा दी और 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की मदद पर सहमति जताई।

समयरेखा

  1. 2019एसबीआई ने मालदीव के 15 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बिल खरीदे; इसके बाद छह बार एक-एक साल के लिए अवधि बढ़ाई गई।
  2. 2024 (प्रधानमंत्री मोदी का शपथ ग्रहण)राष्ट्रपति मुइज़्ज़ू को क्षेत्रीय नेताओं के साथ आमंत्रित किया गया; इसके बाद भारत-मालदीव संबंधों में सुधार शुरू हुआ।
  3. अक्टूबर 2024मुइज़्ज़ू की भारत यात्रा; 40 करोड़ डॉलर की करेंसी स्वैप सुविधा और 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता।
  4. अगस्त 2025 का अंत (स्रोत अनुसार अगस्त अंत)एमएमए के अनुसार मालदीव का विदेशी मुद्रा भंडार 64.38 करोड़ डॉलर रहा।
  5. 17 सितंबरमालदीव ने ट्रेजरी बिलों की अंतिम 5 करोड़ डॉलर की किश्त चुकाकर पूरा 15 करोड़ डॉलर का कर्ज निपटाया।

किसका दाँव

  • मालदीव सरकार — कर्ज चुकाने से साख बेहतर होगी, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार 60 करोड़ डॉलर से नीचे गिरने का दबाव।
  • भारत सरकार / विदेश मंत्रालय — पड़ोस में विकास साझेदारी और प्रभाव; पांच साल का लगभग 4.5 करोड़ डॉलर ब्याज स्वयं वहन किया।
  • भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) — ट्रेजरी बिलों की सदस्यता ली थी; 2029-30 तक वैध 35 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बॉन्ड में अब भी निवेश।
  • मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) — विदेशी मुद्रा भंडार और तरलता प्रबंधन की जिम्मेदारी।
  • राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू — "इंडिया आउट" अभियान से सत्ता में आए, पर आर्थिक संकट में भारत से सहयोग जारी रखने की बाध्यता।
  • मालदीव के नागरिक/अर्थव्यवस्था — पर्यटन व आयात पर निर्भरता तथा भारत से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर सीधा असर।

क्यों अहम है

यह घटनाक्रम दिखाता है कि राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत-मालदीव आर्थिक अंतर्निर्भरता कायम है और भारत हिंद महासागर के इस पड़ोसी के लिए अंतिम सहारा ऋणदाता की भूमिका निभा रहा है। कर्ज चुकाने से मालदीव का भंडार 60 करोड़ डॉलर से नीचे आने की आशंका है, जो उसकी नाजुक बाहरी स्थिति को उजागर करता है। भारत के लिए यह चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच "पड़ोसी पहले" कूटनीति की परीक्षा भी है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एसबीआई ने 2019 में मालदीव के 15 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बिल खरीदे; अंतिम 5 करोड़ डॉलर की किश्त 17 सितंबर को चुकी।
  • पांच वर्षों का ब्याज (लगभग 4.5 करोड़ डॉलर) भारत सरकार ने वहन किया।
  • भारत ने मालदीव को 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप सुविधा दी; अक्टूबर 2024 में 40 करोड़ डॉलर की स्वैप सुविधा।
  • सार्क करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत भी भारत ने मालदीव को सहायता दी।
  • मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (एमएमए) के अनुसार अगस्त अंत में भंडार 64.38 करोड़ डॉलर।
  • एसबीआई के पास मालदीव के 35 करोड़ डॉलर के ट्रेजरी बॉन्ड, अवधि 2029 और 2030 तक।

मेन्स दृष्टिकोण

मालदीव का 15 करोड़ डॉलर का भारतीय कर्ज चुकाना एक ही समय में दो कहानियां कहता है — एक, द्वीपीय देश की भुगतान प्रतिबद्धता; दो, उसकी बाहरी वित्तीय नाजुकता, क्योंकि इस भुगतान से उसका विदेशी मुद्रा भंडार 60 करोड़ डॉलर से नीचे जा सकता है (अगस्त अंत में 64.38 करोड़ डॉलर)। संकट के मूल कारण स्रोत के अनुसार उच्च सार्वजनिक कर्ज, कम भंडार और पर्यटन व आयात पर भारी निर्भरता हैं। भारत की भूमिका बहुआयामी रही है: एसबीआई द्वारा ट्रेजरी बिल/बॉन्ड की सदस्यता (35 करोड़ डॉलर के बॉन्ड 2029-30 तक वैध), 30 अरब रुपये की करेंसी स्वैप, सार्क करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत सहायता, अक्टूबर 2024 में 40 करोड़ डॉलर की स्वैप तथा 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की मदद, और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति। उल्लेखनीय है कि भारत ने पांच वर्षों का करीब 4.5 करोड़ डॉलर ब्याज स्वयं वहन किया, जो रियायती सहायता का संकेत है। राजनीतिक रूप से, "इंडिया आउट" अभियान से शुरू हुआ तनाव 2024 में मुइज़्ज़ू की भागीदारी और यात्रा के बाद पिघला — यह दर्शाता है कि आर्थिक यथार्थ कूटनीति को पुनः संतुलित करता है। आगे का रास्ता: मालदीव के लिए राजस्व स्रोतों का विविधीकरण और कर्ज पुनर्गठन, तथा भारत के लिए अल्पकालिक तरलता सहायता के साथ दीर्घकालिक, पारदर्शी विकास साझेदारी को जोड़ना।

मुख्य शब्द

ट्रेजरी बिल (टी-बिल)
सरकार द्वारा जारी अल्पकालिक ऋण प्रपत्र; यहां एसबीआई ने मालदीव के 15 करोड़ डॉलर के बिल खरीदे थे।
करेंसी स्वैप सुविधा
दो देशों के बीच मुद्रा विनिमय की व्यवस्था, जिससे तरलता व विदेशी मुद्रा दबाव कम होता है; भारत ने 30 अरब रुपये की सुविधा दी।
सार्क करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क
सार्क देशों को अल्पकालिक विदेशी मुद्रा सहायता देने की व्यवस्था, जिसके तहत भारत ने मालदीव की मदद की।
भुगतान संतुलन संकट
जब देश के बाहरी भुगतान उसकी विदेशी मुद्रा आमदनी से अधिक हो जाएं; मालदीव इसी तथा सॉवरेन कर्ज संकट से जूझा।
मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (एमएमए)
मालदीव का केंद्रीय बैंकिंग प्राधिकरण, जिसने भंडार के 64.38 करोड़ डॉलर के आंकड़े दिए।
"इंडिया आउट" अभियान
राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू के सत्ता में आने से जुड़ा अभियान, जिसके बाद कुछ वर्ष भारत-मालदीव संबंध बिगड़े थे।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत-मालदीव आर्थिक सहयोग के उपकरणों (ट्रेजरी बिल/बॉन्ड, करेंसी स्वैप, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति) का परीक्षण करते हुए बताइए कि ये भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति को कैसे आगे बढ़ाते हैं।
  2. छोटे द्वीपीय अर्थव्यवस्थाएं पर्यटन और आयात पर निर्भरता के कारण बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील क्यों होती हैं? मालदीव के उदाहरण से समझाइए।
  3. "राजनीतिक बयानबाजी के बावजूद आर्थिक अंतर्निर्भरता कूटनीति को पुनर्संतुलित कर देती है।" भारत-मालदीव संबंधों के हाल के घटनाक्रम के आलोक में परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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