दो चरणों की नीट, स्थायी परीक्षा संस्था समेत सुधार सुझाव
सार्वजनिक परीक्षा सुधारों पर नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले उच्चस्तरीय कार्यबल (एचपीटीएफ) को हितधारकों ने प्रस्ताव सौंपे हैं। इनमें दो चरणों की नीट, संसद के अधिनियम के जरिये स्थायी सांविधिक परीक्षा प्राधिकरण, परीक्षा मानकों का ऑडिट करने वाली स्वतंत्र संस्था और प्रश्नपत्रों का एन्क्रिप्टेड प्रेषण शामिल हैं। सुझाव एबीवीपी, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दिए। एनटीए की परीक्षाओं सहित संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और शासन की समीक्षा के लिए केंद्र ने जुलाई में छह सदस्यीय कार्यबल गठित किया था।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- A two-stage NEET, a permanent statutory national examination authority and an independent exam-standards audit body are among proposals submitted to the High-Powered Task Force. — Attributed in source to submissions by named stakeholder groups; contents of submissions not independently shown.
- ABVP proposed a two-stage model for major competitive exams and suggested examining the feasibility of holding NEET twice a year with the better score counted. — Attributed to ABVP in source, with quoted phrasing on question-paper security.
- UDF sought a permanent statutory examination authority through an Act of Parliament with divisions for cybersecurity, digital forensics, psychometrics, statistics and logistics. — Attributed to UDF; direct quotes cited in source.
- Educators Federation of India president Keshav Agarwal submitted a 15-page document proposing a two-stage NEET pilot with offline prelims and a single-day mains. — Specific figure and name appear in source, attributed to the document.
- The six-member HPTF was constituted by the Centre in July under Nandan Nilekani. — Stated as fact in source without citing an order or official document.
विश्लेषकों की राय राय
इन सुझावों में एक बात समान है — परीक्षा प्रबंधन को तात्कालिक इंतज़ामों से हटाकर स्थायी, वैधानिक ढांचे में लाना। संसद के अधिनियम से बनी स्थायी परीक्षा संस्था और रोज़मर्रा के संचालन से अलग रखा गया ऑडिट निकाय, उस पुरानी डिज़ाइन ख़ामी को सुधारने की कोशिश है जिसमें संचालक और नियामक एक ही होते हैं — यह मॉडल अन्य क्षेत्रों में पहले से परिचित है। लेकिन दो-चरणीय नीट जैसे बदलाव दोतरफ़ा हैं: सुरक्षा का दायरा घट सकता है, मगर छात्रों पर एक और चरण, खर्च और कोचिंग पर निर्भरता बढ़ सकती है — यह संतुलन अभी तय नहीं है।
- वैधानिक संस्था का प्रस्ताव इस तर्क पर खड़ा है कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल फ़ॉरेंसिक, साइकोमेट्रिक्स और लॉजिस्टिक्स जैसी विशेषज्ञ क्षमता के लिए स्थायी और प्रशिक्षित कर्मचारी ज़रूरी हैं।
- मानक तय करने और ऑडिट करने वाली परिषद को संचालन से अलग रखना उस टकराव को दूर करता है जिसमें एजेंसी अपनी ही जाँच करती है।
- एन्क्रिप्टेड प्रसारण, जीपीएस ट्रैकिंग, दर्ज चेन ऑफ़ कस्टडी और केंद्र/कक्ष/बुकलेट पहचान चिह्न केवल रोकथाम नहीं, बल्कि जवाबदेही और चूक का स्रोत पकड़ने की व्यवस्था हैं।
- रद्दीकरण या पुनर्परीक्षा पर पूर्वनिर्धारित, वस्तुनिष्ठ मानदंडों की मांग पिछले परीक्षा संकटों की अस्पष्टता का सीधा जवाब है, जिसमें सबके लिए दोबारा परीक्षा की जगह आनुपातिक उपाय सुझाए गए हैं।
- सुझाव देने वाले पक्ष — छात्र संगठन, डॉक्टरों का संगठन और कोचिंग क्षेत्र के प्रतिनिधि — अलग-अलग हितों वाले हैं, इसलिए दो-चरणीय मॉडल से किसे सबसे अधिक लाभ होगा, इसकी स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नीलेकणि टास्क फ़ोर्स की सिफ़ारिशों में इनमें से कौन-से सुझाव टिकते हैं, और केंद्र नया कानूनी रास्ता चुनता है या मौजूदा एनटीए को ही मज़बूत करता है।
ये केवल हितधारकों के प्रस्ताव हैं; यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि टास्क फ़ोर्स या सरकार ने इन्हें स्वीकार किया है, या कोई बदलाव कब लागू होगा।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद केंद्र ने जुलाई में इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यबल (एचपीटीएफ) गठित किया। कार्यबल को सार्वजनिक परीक्षाओं—जिनमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा संचालित परीक्षाएं भी शामिल हैं—के संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और शासन में व्यापक सुधार सुझाने का काम दिया गया है। कार्यबल ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा निकायों और तकनीकी विशेषज्ञों से सुझाव मांगे थे। इसी के जवाब में एबीवीपी, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) और एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अपने प्रस्ताव सौंपे हैं।
मुख्य तथ्य
- केंद्र ने जुलाई में नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यबल (एचपीटीएफ) गठित किया।
- एचपीटीएफ का दायरा सार्वजनिक परीक्षाओं के 'संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और शासन' में व्यापक सुधार है, जिसमें एनटीए की परीक्षाएं भी शामिल हैं।
- एबीवीपी ने बड़ी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए दो चरणों का मॉडल सुझाया—पहला चरण शॉर्टलिस्टिंग, दूसरा अंतिम चयन के लिए।
- एबीवीपी ने नीट साल में दो बार कराने की व्यवहार्यता जांचने और बेहतर स्कोर मानने का सुझाव दिया।
- यूडीएफ ने संसद के अधिनियम के जरिये स्थायी सांविधिक परीक्षा प्राधिकरण बनाने की मांग की, जिसमें साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, साइकोमेट्रिक्स, सांख्यिकी और परीक्षा लॉजिस्टिक्स के विशेष प्रभाग हों।
- यूडीएफ ने प्रश्नपत्रों के लिए मानकीकृत 'चेन ऑफ कस्टडी', तथा भौतिक परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग व टैम्पर-एविडेंट पैकेजिंग प्रस्तावित की।
- एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष केशव अग्रवाल ने 15 पृष्ठ का दस्तावेज सौंपा, जिसमें व्यापक ऑफलाइन प्रीलिम्स के बाद सुरक्षित एक-दिवसीय मेन्स वाला दो चरणीय नीट पायलट सुझाया गया।
- एजुकेटर्स फेडरेशन ने परीक्षा संचालन से अलग स्थायी 'नेशनल असेसमेंट इंटिग्रिटी एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल' प्रस्तावित की, जो तकनीकी मानक जारी करे, केंद्रों को मान्यता दे और ऑडिटर सूचीबद्ध करे।
समयरेखा
- जुलाईकेंद्र ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यबल (एचपीटीएफ) गठित किया।
- इसके बादएचपीटीएफ ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, संस्थानों, परीक्षा निकायों और तकनीकी विशेषज्ञों से सुझाव आमंत्रित किए।
- उसके बादएबीवीपी, यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने परीक्षा सुरक्षा, डिजाइन, शासन, तकनीक व पारदर्शिता पर प्रस्ताव सौंपे।
किसका दाँव
- एचपीटीएफ (नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता) — सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को 'मजबूत, सुरक्षित, पारदर्शी, समतामूलक और भविष्य-तैयार' बनाने की सिफारिशें तय करना।
- राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) — इसकी परीक्षाओं का संचालन, सुरक्षा और शासन समीक्षा के दायरे में है; प्राधिकरण के पुनर्गठन का प्रस्ताव।
- एबीवीपी (आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन) — दो चरणीय परीक्षा मॉडल, साल में दो बार नीट, प्रश्नपत्र सुरक्षा और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की मांग।
- यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) — नीट-यूजी व जेईई के लिए स्थायी सांविधिक प्राधिकरण और समझौता हुई परीक्षाओं पर पूर्वनिर्धारित तंत्र चाहता है।
- एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (अध्यक्ष केशव अग्रवाल) — दो चरणीय नीट पायलट, एन्क्रिप्टेड प्रेषण और स्थायी मानक परिषद का प्रस्ताव।
- छात्र और अभिभावक — त्रुटि-रहित, पारदर्शी परीक्षा; परीक्षा बाधित होने पर अनुपातिक उपाय और छात्र कल्याण।
क्यों अहम है
नीट-यूजी और जेईई जैसी परीक्षाएं लाखों छात्रों के करियर तय करती हैं, इसलिए पेपर लीक या रद्दीकरण का असर पूरे बैच पर पड़ता है। सौंपे गए प्रस्ताव परीक्षा को एक बार की उच्च-जोखिम घटना से हटाकर दो चरणीय, तकनीक-आधारित और स्वतंत्र रूप से ऑडिट होने वाली व्यवस्था की ओर ले जाने की बात करते हैं। स्थायी सांविधिक प्राधिकरण और अलग मानक परिषद के सुझाव परीक्षा शासन में जवाबदेही के ढांचे का सवाल उठाते हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- उच्चस्तरीय कार्यबल (एचपीटीएफ): जुलाई में गठित, छह सदस्य, अध्यक्ष नंदन नीलेकणि (इन्फोसिस सह-संस्थापक)।
- कार्यबल का दायरा: सार्वजनिक परीक्षाओं का संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और शासन—एनटीए की परीक्षाएं शामिल।
- एबीवीपी: आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन; साल में दो बार नीट और बेहतर स्कोर मानने का सुझाव।
- यूडीएफ: संसद के अधिनियम से स्थायी सांविधिक परीक्षा प्राधिकरण की मांग—साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, साइकोमेट्रिक्स प्रभागों सहित।
- एजुकेटर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया: 15 पृष्ठ का दस्तावेज; 'नेशनल असेसमेंट इंटिग्रिटी एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल' का प्रस्ताव।
- प्रश्नपत्र सुरक्षा उपाय: एन्क्रिप्टेड प्रेषण, सीसीटीवी व दोहरी अभिरक्षा में मुद्रण, केंद्र/कक्ष/बुकलेट पहचानक, जीपीएस ट्रैकिंग।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं एक ही दिन, एक ही प्रश्नपत्र और विशाल लॉजिस्टिक्स पर टिकी हैं, जिससे एक भी सुरक्षा चूक पूरे परिणाम की विश्वसनीयता को खतरे में डाल देती है; इसी पृष्ठभूमि में केंद्र ने जुलाई में नीलेकणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय एचपीटीएफ गठित किया। हितधारकों के प्रस्ताव तीन दिशाओं में जाते हैं—डिजाइन (दो चरणीय नीट/प्रतिस्पर्धी परीक्षाएं, साल में दो बार परीक्षा, जिससे उच्च-सुरक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा ढांचे की जरूरत घटे), तकनीक व प्रक्रिया (एन्क्रिप्टेड प्रेषण, परीक्षा से कुछ पहले सीसीटीवी और दोहरी अभिरक्षा में मुद्रण, चेन ऑफ कस्टडी, जीपीएस व टैम्पर-एविडेंट पैकेजिंग, बुकलेट-स्तरीय पहचानक), और शासन (संसदीय अधिनियम से स्थायी सांविधिक प्राधिकरण, तथा संचालन से अलग स्वतंत्र मानक व ऑडिट परिषद)। साथ में परीक्षा बाधित होने पर वस्तुनिष्ठ मानदंडों पर आधारित पूर्वनिर्धारित तंत्र और अनुपातिक उपाय—व्यापक पुनर्परीक्षा केवल तब जब उल्लंघन प्रणालीगत हो—की मांग है, जो छात्र हित और प्रशासनिक व्यवहार्यता के संतुलन का प्रश्न है। आगे की राह इन सुझावों की व्यवहार्यता, केंद्रों की एकरूपता, अभ्यर्थी सत्यापन और पारदर्शी उत्तर-कुंजी व नॉर्मलाइजेशन प्रणाली पर एचपीटीएफ की सिफारिशों पर निर्भर करेगी।
मुख्य शब्द
- एचपीटीएफ (उच्चस्तरीय कार्यबल)
- जुलाई में केंद्र द्वारा गठित छह सदस्यीय कार्यबल, अध्यक्ष नंदन नीलेकणि, जो सार्वजनिक परीक्षा सुधारों की जांच कर रहा है।
- एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी)
- राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था, जिसकी परीक्षाएं भी एचपीटीएफ की समीक्षा के दायरे में हैं।
- दो चरणीय नीट
- प्रस्तावित मॉडल जिसमें व्यापक ऑफलाइन प्रीलिम्स से शॉर्टलिस्टिंग और उसके बाद सुरक्षित एक-दिवसीय मेन्स से अंतिम चयन।
- चेन ऑफ कस्टडी
- प्रश्नपत्र सौंपने-लेने वाले व्यक्तियों की पहचान, समय, स्थान और सामग्री की स्थिति दर्ज करने की मानकीकृत प्रक्रिया।
- नेशनल असेसमेंट इंटिग्रिटी एंड स्टैंडर्ड्स काउंसिल
- एजुकेटर्स फेडरेशन द्वारा प्रस्तावित स्थायी निकाय, जो तकनीकी मानक जारी करे, केंद्रों को मान्यता दे, ऑडिटर सूचीबद्ध करे व साइकोमेट्रिक रिपोर्ट देखे।
- नॉर्मलाइजेशन
- विभिन्न पालियों/प्रश्नपत्रों के अंकों को तुलनीय बनाने की सांख्यिकीय प्रक्रिया, जिसे पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।
अभ्यास प्रश्न
- राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में पेपर सुरक्षा और विश्वसनीयता के संकट के कारणों की चर्चा करें और एचपीटीएफ को सौंपे गए सुधार प्रस्तावों का मूल्यांकन करें।
- क्या संसद के अधिनियम द्वारा गठित स्थायी सांविधिक परीक्षा प्राधिकरण मौजूदा व्यवस्था से बेहतर जवाबदेही दे सकता है? पक्ष-विपक्ष में तर्क दें।
- दो चरणीय नीट मॉडल और साल में दो बार परीक्षा के प्रस्ताव के छात्र कल्याण, समता और प्रशासनिक लागत पर संभावित प्रभावों का परीक्षण करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
