वित्त वर्ष 26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये

एक विश्लेषण के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 25 से 62.66% अधिक है। नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले यह 686 करोड़ रुपये था। भारतीय उपकरण अब 80 से अधिक देशों को जाते हैं और निर्यातकों की संख्या 128 से 145 हुई। 7-10 मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस में रुचि बढ़ी; वियतनाम और इंडोनेशिया ने अनुबंध किए। लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • India's defence exports rose to Rs 38,424 crore in FY26, up 62.66% on FY25, from Rs 686 crore before Modi took office — Figures appear in the source and are repeated in its own summary; attributed to the article, not to a named document.
  • Defence Ministry called the rise a sign of 'increasing global acceptance of Indian-made defence products' — Direct quote attributed to the Defence Ministry in the source.
  • Rajnath Singh said about 14-15 countries have demanded the BrahMos missile — Quote attributed to the Defence Minister; date given as two months after Operation Sindoor.
  • Vietnam and Indonesia have confirmed BrahMos contracts, with terms undisclosed — Attributed to Defence Secretary Rajesh Kumar Singh and a July 7 announcement; commercial terms unverified in source.
  • SIPRI ranked India the world's second-largest arms importer in 2021-25 at 8.2% of global imports — Attributed to SIPRI within the source; figure appears in source text.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

रक्षा निर्यात के ये आंकड़े अब सिर्फ अर्थशास्त्र नहीं, सरकार के राजनीतिक विमर्श का केंद्रीय हिस्सा हैं। 686 करोड़ रुपये से 38,424 करोड़ रुपये तक की छलांग को मोदी के जन्मदिन के इर्द-गिर्द रखना 'आत्मनिर्भर भारत' ब्रांड को राष्ट्रीय गौरव से जोड़ने की कोशिश है। लेकिन निर्यात अब भी उत्पादन का करीब 22% है, ऑर्डर बुक ब्रह्मोस पर बहुत टिकी है, और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक बना हुआ है — यही कमजोर कड़ियां विपक्ष के काम आ सकती हैं।

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस में बढ़ी दिलचस्पी का जिक्र सरकार को सुरक्षा की कहानी को औद्योगिक उपलब्धि में बदलने का राजनीतिक लाभ देता है।
  • रक्षा मंत्रालय द्वारा इस वृद्धि को 'भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता' कहना नीतिगत फैसलों का श्रेय लेने की स्पष्ट कोशिश है।
  • आर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड को सात कंपनियों में बांटना और रक्षा एफडीआई सीमा 74% करना राजनीतिक रूप से संवेदनशील सुधार थे; निर्यात के आंकड़े अब उनके बचाव का तर्क बनते हैं।
  • सार्वजनिक उपक्रमों का निर्यात 151% और निजी क्षेत्र का केवल 14% बढ़ना प्लेटफॉर्म ऑर्डरों के एकमुश्त स्वभाव को दिखाता है, साथ ही 'निजीकरण' के आरोपों का जवाब भी देता है।
  • 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य अब राजनीतिक कसौटी बन गया है; करीब 9% सालाना वृद्धि संभव है, पर कोई भी गिरावट वाला साल विपक्ष का हथियार बनेगा।

किस पर नज़र रखें — वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस की डिलिवरी समयसीमा तथा मलेशिया का लंबित फैसला देखिए — यही तय करेगा कि सिंदूर सुर्खियों से हटने के बाद यह विमर्श टिकता है या नहीं।

यह खबर एक विश्लेषण पर आधारित है और यह स्थापित नहीं करती कि सौदों का मूल्य क्या है, रुचि दिखाने वाले देश वाकई खरीदेंगे या नहीं, और वृद्धि में नीतियों का हिस्सा कितना है बनाम वैश्विक हथियार बाजार की परिस्थितियों का।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 26 में 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो वित्त वर्ष 25 की तुलना में 62.66% अधिक है। मोदी सरकार बनने से एक वर्ष पहले यह आंकड़ा केवल 686 करोड़ रुपये था। 2020 में रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से 74% विदेशी निवेश, पांच स्वदेशीकरण सूचियां, iDEX और 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड को सात कंपनियों में बांटने जैसे कदमों ने घरेलू उत्पादन बढ़ाया। 7-10 मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हथियारों के इस्तेमाल के बाद ब्रह्मोस जैसी प्रणालियों में विदेशी रुचि बढ़ी है, लेकिन सवाल यह है कि सुर्खियां शांत होने के बाद निर्यात ऊंचा बना रहेगा या नहीं।

मुख्य तथ्य

  • वित्त वर्ष 26 में रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये; वित्त वर्ष 25 से 62.66% अधिक। मोदी के सत्ता में आने से एक साल पहले यह 686 करोड़ रुपये था।
  • भारतीय रक्षा उपकरण 80 से अधिक देशों को जाते हैं; निर्यातकों की संख्या 128 से बढ़कर 145।
  • सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों का निर्यात 21,071 करोड़ रुपये (151% वृद्धि); निजी कंपनियों का 17,353 करोड़ रुपये (14% वृद्धि, कुल का 45%)।
  • औद्योगिक लाइसेंस 2015 के 258 से मार्च 2026 तक 834 हुए, यानी 223% वृद्धि; पांच स्वदेशीकरण सूचियों में 5,000 से अधिक वस्तुएं।
  • 2026-27 का रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये, 2013-14 से 210% अधिक; 2025-26 में उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये।
  • 2021 तक 41 आयुध कारखाने एक सरकारी विभाग के रूप में काम करते थे; इन्हें सात सरकारी कंपनियों में बांटा गया।
  • SIPRI के अनुसार 2021-25 में भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक, वैश्विक आयात का 8.2%; आयात पिछली अवधि से 4% घटा।
  • सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये निर्यात, जिसके लिए लगभग 9% वार्षिक वृद्धि चाहिए; निर्यात अब वार्षिक रक्षा उत्पादन का करीब 22%।

समयरेखा

  1. 1998ब्रह्मोस संयुक्त उद्यम (भारत-रूस) की शुरुआत, जिसने निर्यात का आधार तैयार किया।
  2. 2020रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से विदेशी निवेश की सीमा 74% की गई।
  3. 2021आयुध निर्माणी बोर्ड के 41 कारखानों को सात सरकारी कंपनियों में पुनर्गठित किया गया।
  4. जनवरी 2022फिलीपींस ने लगभग 375 मिलियन डॉलर में तीन तटवर्ती ब्रह्मोस बैटरियों का पहला अनुबंध किया।
  5. अप्रैल 2024फिलीपींस को ब्रह्मोस की आपूर्ति शुरू; एक साल बाद दूसरी बैटरी पहुंची।
  6. 7-10 मई 2025ऑपरेशन सिंदूर; पाकिस्तान के साथ संघर्ष में भारतीय ड्रोन, मिसाइल, निर्देशित गोला-बारूद और वायु रक्षा प्रणालियों का उपयोग।
  7. 30 मई 2025शांगरी-ला डायलॉग में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा कि वियतनाम के साथ अनुबंध "पहले ही हस्ताक्षरित" हो चुका है।
  8. 7 जुलाई 2025मोदी की यात्रा के दौरान इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस अनुबंध की घोषणा की; शर्तें सार्वजनिक नहीं।
  9. जुलाई 2025राजनाथ सिंह ने कहा कि करीब 14-15 देशों ने ब्रह्मोस की मांग की; 50,000 करोड़ के लक्ष्य को दोहराया।
  10. सितंबर 2025मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने वायु-प्रक्षेपित ब्रह्मोस पर विचार की बात कही, निर्णय नहीं।

किसका दाँव

  • रक्षा मंत्रालय — निर्यात वृद्धि को "भारतीय रक्षा उत्पादों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता" का संकेत बताया; 2029 तक 50,000 करोड़ का लक्ष्य पूरा करना।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां व सात नई आयुध कंपनियां — हेलीकॉप्टर और नौसैनिक पोत जैसे बड़े प्लेटफॉर्म ऑर्डर पर 151% निर्यात वृद्धि; अब अपने बोर्ड और परिणामों के लिए जवाबदेह।
  • निजी रक्षा कंपनियां और स्टार्ट-अप (iDEX) — कुल निर्यात का 45% हिस्सा; कलपुर्जों से पूर्ण प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ने की चुनौती।
  • ब्रह्मोस संयुक्त उद्यम (भारत-रूस) — ऑर्डर बुक में अग्रणी; एक ही मिसाइल पर निर्भरता से जोखिम।
  • फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया — दक्षिण चीन सागर व नातुना द्वीप क्षेत्र में तटवर्ती एंटी-शिप क्षमता; समय पर आपूर्ति, प्रशिक्षण व स्पेयर पर निर्भरता।
  • DRDO — राजनाथ सिंह का निर्देश—शुरुआत से ही निर्यात के लिए डिजाइन करें।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका — फ्यूजलेज जैसे सब-सिस्टम का बड़ा गंतव्य; आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण।

क्यों अहम है

रक्षा निर्यात अब वार्षिक रक्षा उत्पादन का करीब 22% है, जिससे भारत आयातक से आपूर्तिकर्ता की ओर बढ़ता दिखता है—हालांकि SIPRI के अनुसार 2021-25 में वह अब भी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (8.2%) है। दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रह्मोस की बिक्री बिना सैन्य अड्डों के भी भारत को रणनीतिक उपस्थिति देती है। असली परीक्षा आपूर्ति कार्यक्रम, निजी क्षेत्र की क्षमता और ब्रह्मोस से इतर उत्पादों के ऑर्डर होंगे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • वित्त वर्ष 26 रक्षा निर्यात: 38,424 करोड़ रुपये (62.66% वृद्धि); लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये।
  • 2020 में रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से FDI सीमा 74%।
  • 2021 में आयुध निर्माणी बोर्ड के 41 कारखाने सात सरकारी कंपनियों में पुनर्गठित।
  • पांच स्वदेशीकरण सूचियां: 5,000 से अधिक वस्तुओं के आयात पर क्रमिक प्रतिबंध; iDEX से स्टार्ट-अप जुड़े।
  • SIPRI 2021-25: भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक, वैश्विक आयात में 8.2% हिस्सा।
  • ब्रह्मोस: भारत-रूस संयुक्त उद्यम (1998 से); पहला निर्यात अनुबंध फिलीपींस, जनवरी 2022, ~375 मिलियन डॉलर।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत के रक्षा निर्यात में उछाल आपूर्ति-पक्ष सुधारों और मांग की निश्चितता—74% स्वचालित FDI, 258 से 834 तक बढ़े औद्योगिक लाइसेंस, 5,000+ वस्तुओं की स्वदेशीकरण सूचियां, आयुध निर्माणी बोर्ड का सात कंपनियों में निगमीकरण, iDEX, तथा 7.85 लाख करोड़ रुपये के रक्षा बजट—का परिणाम है, जिसे ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी प्रणालियों के प्रदर्शन से मिली विश्वसनीयता ने और बल दिया; वियतनाम व इंडोनेशिया के ब्रह्मोस अनुबंध और 14-15 देशों की रुचि इसका प्रमाण हैं। रणनीतिक रूप से तटवर्ती एंटी-शिप मिसाइलें दक्षिण चीन सागर और नातुना क्षेत्र के देशों को सस्ते विकल्प देती हैं और भारत को अड्डों या गठबंधन के बिना 'फॉरवर्ड प्रेजेंस' देती हैं। परंतु सीमाएं स्पष्ट हैं: एक अच्छा वर्ष प्रवृत्ति नहीं है, निर्यात उत्पादन का केवल ~22% है, ऑर्डर बुक एक ही मिसाइल पर झुकी है, प्लेटफॉर्म ऑर्डर एकमुश्त आते हैं, निजी क्षेत्र मुख्यतः कलपुर्जों तक सीमित है, और भारत अब भी दूसरा सबसे बड़ा आयातक है—जिसमें 140 तक लड़ाकू विमान और छह पनडुब्बियों की नियोजित खरीद शामिल है। आगे का रास्ता: फिलीपींस, वियतनाम व इंडोनेशिया को समयबद्ध आपूर्ति, निजी कंपनियों का पूर्ण प्लेटफॉर्म निर्माण तक उन्नयन, तथा ड्रोन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों व गोला-बारूद के लिए स्वतंत्र ऑर्डर, और DRDO में शुरुआत से निर्यात-केंद्रित डिजाइन।

मुख्य शब्द

ऑपरेशन सिंदूर
7-10 मई 2025 तक चला भारत-पाकिस्तान संघर्ष, जिसमें भारतीय ड्रोन, मिसाइल, निर्देशित गोला-बारूद और वायु रक्षा प्रणालियां इस्तेमाल हुईं।
ब्रह्मोस
1998 से चल रहा भारत-रूस संयुक्त उद्यम; भारत की निर्यात ऑर्डर बुक में अग्रणी सुपरसोनिक मिसाइल प्रणाली।
स्वदेशीकरण सूचियां
पांच सूचियां जिनमें 5,000 से अधिक वस्तुएं शामिल; इनके आयात पर क्रमिक प्रतिबंध से घरेलू निर्माताओं को निश्चित मांग मिलती है।
आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB)
2021 तक 41 आयुध कारखानों को एक सरकारी विभाग के रूप में चलाने वाला निकाय; अब सात सरकारी कंपनियों में विभाजित।
iDEX
रक्षा नवाचार पहल जिसने स्टार्ट-अप्स को रक्षा उत्पादन के प्रयास में शामिल किया।
SIPRI
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट, जिसने 2021-25 में भारत को दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक (8.2%) बताया।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत के रक्षा निर्यात में हुई वृद्धि के प्रमुख नीतिगत कारणों की चर्चा करें और बताएं कि यह वृद्धि टिकाऊ क्यों नहीं मानी जा रही है।
  2. रक्षा निर्यात किस प्रकार बिना सैन्य अड्डों के भी भारत की रणनीतिक उपस्थिति बढ़ा सकते हैं? दक्षिण-पूर्व एशिया के उदाहरणों से समझाइए।
  3. भारत एक साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक और बढ़ता निर्यातक कैसे है? इस विरोधाभास का विश्लेषण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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