आईएमएफ, विश्व बैंक में उभरती अर्थव्यवस्थाओं को बड़ी भागीदारी की ब्रिक्स मांग

मुंबई में बैठक के बाद ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने संयुक्त बयान में आईएमएफ और विश्व बैंक में उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को कोटा एवं मतदान हिस्सेदारी में बदलाव सहित अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। बयान में किसी देश का नाम लिए बिना एकपक्षीय शुल्क और गैर-शुल्क उपायों पर गंभीर चिंता जताई गई, जिन्हें डब्ल्यूटीओ नियमों के विपरीत बताया गया। समूह ने स्थानीय मुद्राओं के उपयोग और सीमापार भुगतान पर काम जारी रखने का समर्थन किया, साझा मुद्रा की घोषणा नहीं की।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • BRICS finance ministers and central bank governors sought greater emerging-market representation in the IMF and World Bank, including quota and voting share changes. — Attributed to a joint statement issued after the Mumbai meeting; appears in source.
  • BRICS expressed 'serious concerns' over unilateral tariff and non-tariff measures inconsistent with WTO rules, without naming any country. — Direct quote from the joint statement as reported in the source.
  • US President Donald Trump announced reciprocal global tariffs declaring April 2, 2025, as 'Liberation Day'. — Background context in the source; no separate source given for the detail.
  • The tariffs were struck down by the US Supreme Court in February, after which additional 10 per cent tariffs were imposed on several countries including India from July 24. — Unattributed background claim; editor should verify independently as no source is cited.
  • BRICS central banks held 19 meetings and four in-person events and produced 13 reports during India's 2026 chairship; China takes over in 2027. — Figures explicitly attributed to the statement in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

आर्थिक नजरिये से ब्रिक्स का यह बयान कोई समझौता नहीं, बल्कि एक मोलभाव की स्थिति है। आईएमएफ और विश्व बैंक में कोटा तथा वोटिंग हिस्सेदारी बदलने का मतलब है उस ताकत का पुनर्वितरण जो तय करती है कि किसकी बात चलेगी और किसे किन शर्तों पर कर्ज मिलेगा — यानी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को जो मिलेगा, वह आज के बड़े शेयरधारकों को छोड़ना पड़ेगा। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमापार भुगतान पर काम जारी रखना लेनदेन और मुद्रा-विनिमय लागत घटा सकता है, लेकिन साझा मुद्रा की कोई घोषणा न होना बताता है कि यह लंबी, चरणबद्ध प्रक्रिया है।

  • एकपक्षीय शुल्कों और गैर-शुल्क उपायों पर चिंता मूलतः निर्यातकों और आपूर्ति शृंखला पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की लागत की चिंता है, जहां नीतिगत अनिश्चितता निवेश फैसलों को टाल देती है।
  • कोटा पुनर्संतुलन में हार-जीत का गणित साफ है: उभरते देशों का वोट-भार तभी बढ़ेगा जब मौजूदा बड़े शेयरधारकों का प्रभाव घटेगा, इसलिए यह तकनीकी नहीं, राजनीतिक मसला है।
  • स्वैच्छिक वित्तीय योगदान कोटा या वोटिंग शक्ति तय न करें और सबसे गरीब सदस्यों की हिस्सेदारी सुरक्षित रहे — यह मांग असल में पैसे से प्रभाव खरीदने की गुंजाइश रोकने की कोशिश है।
  • स्थानीय मुद्रा में निपटान और भुगतान प्रणालियों की आपसी संगतता विनिमय लागत व निपटान समय घटा सकती है, पर 'एक ही फॉर्मूला सबके लिए नहीं' वाली बात अमल की दिक्कतों की ओर इशारा करती है।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक की बड़ी भूमिका और बहुपक्षीय गारंटी पहल का मकसद परियोजनाओं की ऋण-पात्रता सुधारना, वित्तपोषण लागत घटाना और ढांचागत क्षेत्र में निजी पूंजी खींचना है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आईएमएफ की 16वीं समीक्षा के तहत तय कोटा वृद्धि कब लागू होती है और 17वीं समीक्षा में सार्थक पुनर्संतुलन पर सहमति बनती है या नहीं — इससे ही इन मांगों की आर्थिक कीमत तय होगी।

यह केवल एक साझा मांग है, नतीजा नहीं; खबर में कोटा बदलाव की समयसीमा, स्थानीय मुद्रा व्यापार का पैमाना या भुगतान पहल के अमल की तारीखें और अनुमानित लागत-बचत स्थापित नहीं होती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

मुंबई में ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक हुई, जिसके बाद जारी संयुक्त बयान में विस्तारित समूह ने आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार तथा उभरती एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को कोटा और मतदान हिस्सेदारी में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की। बैठक भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन और संरक्षणवाद के बीच हुई, जब अमेरिका की शुल्क नीतियों ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित किया है। समूह ने किसी देश का नाम लिए बिना एकपक्षीय शुल्क और गैर-शुल्क उपायों को डब्ल्यूटीओ नियमों के विपरीत बताया। 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और 2027 में यह चीन को मिलेगी।

मुख्य तथ्य

  • संयुक्त बयान में आईएमएफ और विश्व बैंक में उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए कोटा एवं मतदान हिस्सेदारी में बदलाव सहित अधिक आवाज व प्रतिनिधित्व की मांग की गई।
  • ब्रिक्स ने आईएमएफ से 16वीं सामान्य कोटा समीक्षा के तहत सहमत कोटा वृद्धि बिना और देरी के लागू करने और 17वीं समीक्षा में 'सार्थक कोटा पुनर्संयोजन' के तरीके शीघ्र विकसित करने को कहा।
  • बयान में कहा गया कि नए कोटा फॉर्मूले में सबसे गरीब सदस्यों की हिस्सेदारी सुरक्षित रहे और स्वैच्छिक वित्तीय योगदान कोटा आवंटन, शासन प्रतिनिधित्व या मतदान शक्ति को प्रभावित न करें।
  • आईएमएफ और विश्व बैंक के नेतृत्व चयन के लिए योग्यता-आधारित, समावेशी व पारदर्शी प्रक्रिया तथा अधिक क्षेत्रीय विविधता की मांग की गई।
  • भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स केंद्रीय बैंकों ने 19 बैठकें, चार व्यक्तिगत आयोजन किए और 13 रिपोर्ट व तकनीकी पत्र तैयार किए।
  • बयान में साझा ब्रिक्स मुद्रा या एकीकृत भुगतान प्रणाली की घोषणा नहीं की गई; ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान पर चर्चा की और माना कि कोई एक समान तरीका सबके लिए उपयुक्त नहीं है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को 'लिबरेशन डे' घोषित करते हुए भारत, ब्राजील, रूस और चीन सहित कई देशों पर पारस्परिक शुल्क पैकेज की घोषणा की थी।
  • स्रोत के अनुसार ये शुल्क फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने 24 जुलाई से भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाए।

समयरेखा

  1. 2 अप्रैल 2025ट्रंप ने 'लिबरेशन डे' घोषित करते हुए भारत, ब्राजील, रूस, चीन सहित कई देशों पर व्यापक पारस्परिक शुल्क की घोषणा की।
  2. फरवरी (स्रोत में वर्ष स्पष्ट नहीं)अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इन शुल्कों को रद्द किया।
  3. 24 जुलाई सेट्रंप प्रशासन ने भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाए।
  4. 2026 (भारत की अध्यक्षता)मुंबई में ब्रिक्स वित्त मंत्रियों व केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक; संयुक्त बयान जारी; सीमापार भुगतान पहल, ग्रोथ एंड डेवलपमेंट टास्क फोर्स व ब्रिक्स-एनडीबी नॉलेज पोर्टल पर प्रगति।
  5. 2026 के शेष महीनेसमूह सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने और वित्तीय-आर्थिक पहलों की गति बनाए रखने के लिए काम करेगा।
  6. 2027चीन ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालेगा।

किसका दाँव

  • ब्रिक्स वित्त मंत्री व केंद्रीय बैंक गवर्नर — वित्तीय सहयोग मजबूत करना, ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार की साझा मांग रखना और स्थानीय मुद्रा उपयोग बढ़ाना।
  • आईएमएफ और विश्व बैंक — कोटा, मतदान हिस्सेदारी और नेतृत्व चयन प्रक्रिया में सुधार का दबाव; शासन ढांचे को बदली वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बनाना।
  • भारत — 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता; ग्रोथ एंड डेवलपमेंट टास्क फोर्स की स्थापना और गिफ्ट सिटी आईएफएससी में ब्रिक्स रिस्क लैब की मेजबानी का प्रस्ताव; अतिरिक्त 10% अमेरिकी शुल्क से प्रभावित।
  • उभरती व विकासशील अर्थव्यवस्थाएं (ग्लोबल साउथ) — बयान के अनुसार एकपक्षीय व्यापार-वित्त कार्रवाइयों का सर्वाधिक बोझ इन पर पड़ता है; एनडीबी से विकास व अधोसंरचना वित्त की अपेक्षा।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) — ब्रिक्स व ग्लोबल साउथ में विकास-अधोसंरचना वित्तपोषण में बड़ी भूमिका; स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण विस्तार और संसाधन जुटाना।
  • डब्ल्यूटीओ — समूह ने डब्ल्यूटीओ को केंद्र में रखकर खुली, पारदर्शी, समावेशी, गैर-भेदभावपूर्ण और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली का समर्थन दोहराया।
  • अमेरिका (नाम लिए बिना संदर्भ) — स्रोत के अनुसार अमेरिकी व्यापार व शुल्क नीतियों ने वैश्विक व्यापार को अस्थिर किया; ब्रिक्स की आलोचना का अप्रत्यक्ष विषय।

क्यों अहम है

यह बयान दर्शाता है कि बढ़ते संरक्षणवाद और व्यापार विखंडन के दौर में उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक वित्तीय शासन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर एकमत हो रही हैं। साथ ही ब्रिक्स ने साझा मुद्रा की घोषणा से परहेज करते हुए व्यावहारिक रास्ता चुना है—स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और सीमापार भुगतान प्रणालियों की अंतरसंचालनीयता पर काम। भारत के लिए यह अध्यक्षता वर्ष में एजेंडा तय करने और अमेरिकी शुल्कों के दौर में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के पक्ष में आवाज उठाने का अवसर है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • ब्रिक्स अध्यक्षता: 2026 में भारत, 2027 में चीन।
  • आईएमएफ कोटा: 16वीं सामान्य समीक्षा की वृद्धि लागू करने और 17वीं समीक्षा में कोटा पुनर्संयोजन की ब्रिक्स मांग।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी): ब्रिक्स व ग्लोबल साउथ में विकास एवं अधोसंरचना वित्तपोषण; ब्रिक्स-एनडीबी नॉलेज पोर्टल शुरू।
  • भारत की अध्यक्षता में गठित: ब्रिक्स टास्क फोर्स ऑन ग्रोथ एंड डेवलपमेंट; ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स सीमापार भुगतान पर सक्रिय।
  • भारत का प्रस्ताव: गुजरात के गिफ्ट सिटी आईएफएससी में ब्रिक्स रिस्क लैब (बीमा व पुनर्बीमा क्षमता के लिए)।
  • जलवायु: यूएन जलवायु संधि व पेरिस समझौते के कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता, 'साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों व संबंधित क्षमताओं' के सिद्धांत पर जोर।

मेन्स दृष्टिकोण

मुंबई का ब्रिक्स वित्त बयान दो समानांतर प्रवृत्तियों को सामने रखता है—एक ओर भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन, संरक्षणवाद, नीतिगत अनिश्चितता, राजकोषीय व मुद्रास्फीतिक दबाव, ऋण एवं वित्तीय जोखिम से बढ़ती वैश्विक अस्थिरता; दूसरी ओर द्वितीय विश्वयुद्धोत्तर ब्रेटन वुड्स शासन ढांचे और बदली आर्थिक वास्तविकता के बीच बढ़ता अंतर। समूह का तर्क है कि एकपक्षीय शुल्क व गैर-शुल्क उपाय व्यापार को विकृत करते हैं, डब्ल्यूटीओ नियमों के विपरीत हैं और इनका सर्वाधिक बोझ उभरती व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है; इसलिए मांग है कि कोटा व मतदान हिस्सेदारी बदली जाए, सबसे गरीब सदस्यों की हिस्सेदारी सुरक्षित रहे, स्वैच्छिक योगदान से मतदान शक्ति प्रभावित न हो और नेतृत्व चयन योग्यता-आधारित व क्षेत्रीय रूप से विविध हो। आगे का रास्ता बयान में क्रमिक और सहमति-आधारित दिखता है: साझा मुद्रा की घोषणा नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्रा में निपटान, भुगतान व मैसेजिंग प्रणालियों की अंतरसंचालनीयता, एनडीबी की बड़ी भूमिका, ब्रिक्स बहुपक्षीय गारंटी पहल से निजी पूंजी जुटाना, प्रस्तावित न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर तकनीकी कार्य, और वित्तीय क्षेत्र में वार्षिक साइबर अभ्यास व सूचना साझाकरण। मूल्यांकन का प्रश्न यह है कि सदस्य देशों के भिन्न नियामकीय ढांचों और राष्ट्रीय संप्रभुता की शर्त के बीच ये पहलें कितनी तेजी से ठोस परिणाम दे पाती हैं।

मुख्य शब्द

ब्रेटन वुड्स संस्थाएं
आईएमएफ और विश्व बैंक; ब्रिक्स का कहना है कि उनका शासन ढांचा स्थापना के बाद बदली वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
कोटा समीक्षा (16वीं/17वीं)
आईएमएफ में सदस्य देशों की पूंजी हिस्सेदारी व मतदान शक्ति तय करने की समयबद्ध प्रक्रिया; ब्रिक्स 16वीं की वृद्धि लागू करने व 17वीं में पुनर्संयोजन चाहता है।
गैर-शुल्क उपाय
शुल्क के अलावा लगाए गए व्यापार प्रतिबंध; बयान के अनुसार ये व्यापार को विकृत करते हैं और डब्ल्यूटीओ नियमों के अनुरूप नहीं हैं।
ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स
सीमापार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान व निवेश पर काम करने वाला ब्रिक्स समूह।
ब्रिक्स बहुपक्षीय गारंटी पहल
निजी पूंजी जुटाने, परियोजनाओं की ऋण-पात्रता सुधारने और वित्तपोषण लागत घटाने के लिए बनाई गई गारंटी व्यवस्था।
साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां (CBDR-RC)
जलवायु कार्रवाई का सिद्धांत जिसके तहत देशों की जिम्मेदारी उनकी क्षमताओं के अनुसार भिन्न होती है; ब्रिक्स ने इस पर जोर दिया।

अभ्यास प्रश्न

  1. ब्रेटन वुड्स संस्थाओं के शासन सुधार की ब्रिक्स मांग के मुख्य तत्व क्या हैं और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए कोटा एवं मतदान हिस्सेदारी में बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है? परीक्षण करें।
  2. एकपक्षीय शुल्क व गैर-शुल्क उपायों के बढ़ते प्रयोग से नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ता है? डब्ल्यूटीओ-केंद्रित व्यवस्था की प्रासंगिकता पर चर्चा करें।
  3. साझा मुद्रा की घोषणा किए बिना स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और सीमापार भुगतान अंतरसंचालनीयता पर ब्रिक्स का क्रमिक दृष्टिकोण कितना व्यावहारिक है? भारत की 2026 अध्यक्षता के संदर्भ में मूल्यांकन करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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