आठ उच्च न्यायालय न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश नियुक्त
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को विभिन्न उच्च न्यायालयों के आठ न्यायाधीशों को अलग-अलग उच्च न्यायालयों का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने एक्स पर कहा कि यह नियुक्तियां संविधान से प्राप्त शक्तियों के तहत और भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गईं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल राजस्थान उच्च न्यायालय, दिल्ली के न्यायमूर्ति वल्लूरी कामेश्वर राव पटना उच्च न्यायालय तथा बॉम्बे के न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनेंगे।
स्रोत
Supreme Court / CJI · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- President Droupadi Murmu appointed eight High Court judges as Chief Justices on September 5, 2026. — Attributed in source to appointments notified on Saturday and announced by Law Minister Arjunram Meghwal on X; eight named appointments are listed, consistent with the figure.
- Appointments were made under constitutional powers in consultation with the Chief Justice of India. — Attributed to Law and Justice Minister Arjunram Meghwal's social media announcement.
- Justice Sanjay Kumar Agarwal of Chhattisgarh HC becomes Chief Justice of Rajasthan HC amid a controversy involving Acting Chief Justice Sanjeev Prakash Sharma. — Figure and names appear in source; controversy linkage is the source's characterisation, not an official statement.
- Supreme Court judge Justice Sandeep Mehta wrote to CJI Surya Kant raising concerns about Justice Sharma's conduct, triggering lawyer protests in Rajasthan. — Stated in source without documentary attribution; no letter text or official confirmation cited.
- Justice Sharma denied the charges as baseless and said he submitted his response to the CJI. — Attributed to Justice Sharma; denial recorded in source and must be carried alongside the allegations.
विश्लेषकों की राय राय
कागज़ पर यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन आठ उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक साथ नियुक्ति राजस्थान उच्च न्यायालय के हाल के विवाद के बीच राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय पर हुई है। कॉलेजियम की सिफ़ारिशों और सरकारी मंज़ूरी के बीच जो खींचतान आमतौर पर दिखती है, वह इस बार नहीं दिखी — संकेत यह कि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच कामकाजी तालमेल अभी सहज है। क़ानून मंत्री ने स्वयं 'एक्स' पर घोषणा करते हुए संवैधानिक अधिकार और सीजेआई से परामर्श का ज़िक्र किया, जिसे आलोचना से पहले ही बचाव की कोशिश के रूप में पढ़ा जा सकता है।
- राजस्थान को नया मुख्य न्यायाधीश उस समय मिला है जब कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पर आरोप और वकीलों का प्रदर्शन चर्चा में है, इसलिए कुछ लोग इसे विवाद शांत करने की कोशिश के रूप में देखेंगे।
- जस्टिस शर्मा ने आरोपों से इनकार किया है और सीजेआई को जवाब भेजने की बात कही है, इसलिए इस नियुक्ति को किसी पर फ़ैसले के तौर पर पढ़ना ख़बर से आगे जाना होगा।
- एक ही दिन आठ उच्च न्यायालयों का नेतृत्व बदलना राज्य स्तरीय न्यायिक प्रशासन में बड़ा बदलाव है।
- 'संवैधानिक अधिकार' और 'सीजेआई से परामर्श' का स्पष्ट उल्लेख कार्यपालिका के दख़ल के आम आरोप का पहले से उत्तर देने जैसा लगता है।
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की नियुक्ति क्षेत्र की राजनीतिक संवेदनशीलता के कारण अतिरिक्त ध्यान खींचेगी।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राजस्थान में वकीलों का आंदोलन थमता है या नहीं, और जस्टिस शर्मा के मामले में सीजेआई के स्तर पर आगे क्या होता है — इसी से इन नियुक्तियों का राजनीतिक वज़न तय होगा।
यह ख़बर न यह साबित करती है कि राजस्थान का विवाद इन नियुक्तियों का कारण था, न किसी आरोप की सत्यता, और कॉलेजियम की सिफ़ारिशों की तारीख़ या कारण भी इसमें नहीं हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 सितंबर 2026 (शनिवार) को विभिन्न उच्च न्यायालयों के आठ न्यायाधीशों को अलग-अलग उच्च न्यायालयों का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया। विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह नियुक्तियां भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में और भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गईं। इन नियुक्तियों में राजस्थान उच्च न्यायालय के लिए नया मुख्य न्यायाधीश देना भी शामिल है, जो वहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा से जुड़े हाल के विवाद के बीच हुआ है।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार, 5 सितंबर 2026 को आठ उच्च न्यायालय न्यायाधीशों को विभिन्न उच्च न्यायालयों का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
- विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के अनुसार नियुक्तियां संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत और भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गईं।
- छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार अग्रवाल राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
- दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति वल्लूरी कामेश्वर राव पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए; बॉम्बे के न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे कलकत्ता उच्च न्यायालय का नेतृत्व करेंगे।
- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को उसी न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- ओडिशा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के, और गुजरात के न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे।
- इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालेंगे।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
समयरेखा
- हाल में (तारीख स्रोत में नहीं)उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत को पत्र लिखकर राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के आचरण पर चिंता जताई।
- इसके बादआरोप सार्वजनिक होने पर राजस्थान में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया; न्यायमूर्ति शर्मा ने आरोपों को निराधार बताते हुए प्रधान न्यायाधीश को अपना जवाब सौंपा।
- 5 सितंबर 2026 (शनिवार)राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आठ उच्च न्यायालय न्यायाधीशों की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति अधिसूचित की।
- 6 सितंबर 2026, रात 12:29 बजे ISTसमाचार प्रकाशित।
किसका दाँव
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू — संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करने वाला संवैधानिक प्राधिकारी।
- भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत — नियुक्तियों में परामर्श की भूमिका; न्यायमूर्ति शर्मा के आचरण से जुड़ी शिकायत और उनका जवाब भी उनके पास।
- विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल — नियुक्तियों की घोषणा एक्स पर करने वाले मंत्री; सरकार की ओर से अधिसूचना प्रक्रिया।
- आठ संबंधित उच्च न्यायालय (राजस्थान, पटना, कलकत्ता, पंजाब एवं हरियाणा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बॉम्बे, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख) — स्थायी नेतृत्व मिलने से प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज पर असर।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा — आचरण संबंधी आरोपों का सामना; उन्होंने आरोपों को निराधार बताया है।
- राजस्थान के वकील — आरोप सार्वजनिक होने पर विरोध प्रदर्शन किया; न्यायालय की साख और कामकाज से सीधा सरोकार।
क्यों अहम है
एक ही दिन में आठ उच्च न्यायालयों को नए मुख्य न्यायाधीश मिलना उच्च न्यायपालिका के शीर्ष प्रशासनिक नेतृत्व में बड़ा फेरबदल है, जो मुकदमों के प्रबंधन और न्यायालयों के रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करता है। राजस्थान उच्च न्यायालय में यह नियुक्ति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े विवाद के बीच हुई है, जिससे न्यायिक जवाबदेही और संस्थागत विश्वसनीयता का प्रश्न जुड़ जाता है। यह प्रकरण नियुक्तियों में राष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के परामर्श-आधारित तंत्र को भी रेखांकित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 5 सितंबर 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आठ उच्च न्यायालय न्यायाधीशों को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया।
- नियुक्तियां संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में और भारत के प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद की गईं।
- उस समय भारत के प्रधान न्यायाधीश: न्यायमूर्ति सूर्य कांत; विधि एवं न्याय मंत्री: अर्जुनराम मेघवाल।
- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के लिए एक संयुक्त उच्च न्यायालय है — न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी इसके मुख्य न्यायाधीश नियुक्त।
- न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को उसी (पंजाब एवं हरियाणा) उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया जहां वे न्यायाधीश थे।
- उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के आचरण पर CJI को पत्र लिखा।
मेन्स दृष्टिकोण
उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की एक साथ आठ नियुक्तियां दर्शाती हैं कि उच्च न्यायपालिका का नेतृत्व-रिक्तता और स्थानांतरण प्रबंधन एक सतत प्रशासनिक चुनौती है; कई न्यायालय कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों पर चलते हैं, जिससे नीतिगत और प्रशासनिक निरंतरता प्रभावित होती है। स्रोत के अनुसार यह नियुक्तियां संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत और प्रधान न्यायाधीश से परामर्श के बाद हुईं, जो नियुक्ति प्रक्रिया में कार्यपालिका-न्यायपालिका के बीच परामर्श की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है। राजस्थान का मामला दूसरा पहलू उजागर करता है — जब किसी कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के आचरण पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा CJI को लिखा पत्र सार्वजनिक होता है और वकील सड़कों पर उतरते हैं, तो न्यायिक जवाबदेही, आंतरिक शिकायत-निपटान की पारदर्शिता और संस्था की साख दांव पर लग जाती है। आगे की राह में समयबद्ध नियुक्तियां, स्थायी नेतृत्व की प्राथमिकता और आचरण संबंधी शिकायतों के निपटारे में स्पष्ट, विश्वसनीय आंतरिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण हैं; यहां न्यायमूर्ति शर्मा ने आरोपों को निराधार बताते हुए CJI को जवाब सौंपा है, अर्थात प्रक्रिया विचाराधीन है।
मुख्य शब्द
- मुख्य न्यायाधीश (उच्च न्यायालय)
- उच्च न्यायालय का प्रमुख, जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत CJI से परामर्श के बाद करते हैं।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश
- स्थायी मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में अस्थायी रूप से उच्च न्यायालय का नेतृत्व करने वाला न्यायाधीश — जैसे राजस्थान में न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा।
- भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI)
- उच्चतम न्यायालय के प्रमुख; इन नियुक्तियों में परामर्शदाता — स्रोत के अनुसार न्यायमूर्ति सूर्य कांत।
- विधि एवं न्याय मंत्रालय
- न्यायिक नियुक्तियों की अधिसूचना जारी करने वाला मंत्रालय; मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने घोषणा एक्स पर की।
- जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिए संयुक्त उच्च न्यायालय, जिसके मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी नियुक्त हुए।
अभ्यास प्रश्न
- उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया में राष्ट्रपति और भारत के प्रधान न्यायाधीश की भूमिका की चर्चा कीजिए।
- उच्च न्यायालयों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशों पर निर्भरता न्यायिक प्रशासन को कैसे प्रभावित करती है? हाल की आठ नियुक्तियों के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
- न्यायाधीशों के आचरण से जुड़े आरोपों के निपटारे में पारदर्शिता और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे साधा जाए? राजस्थान उच्च न्यायालय प्रकरण के आलोक में विश्लेषण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
