स्वास्थ्य तमिलनाडु

असंगठित श्रमिकों के लिए ओएसएच ढांचा अब भी अपूर्ण

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पिछले पांच वर्षों में कम से कम तीन हितधारक बैठकें हुईं, लेकिन तमिलनाडु में व्यापक ढांचा अब भी लंबित है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि कई सिफारिशें कागजों पर ही रह गईं। लगभग एक दशक पहले बना व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग बाद में राज्य नोडल केंद्र बना। इसके प्रस्ताव पर अंतर-विभागीय समन्वय समितियां और 21 रोग एवं विशेषज्ञ समितियां गठित हुईं।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • At least three stakeholder meetings on occupational safety and health of unorganised workers were held in the past five years. — Figure appears in source, attributed to health officials; individuals not named.
  • A comprehensive OSH framework for unorganised workers is still pending in Tamil Nadu, with recommendations remaining on paper. — Attributed to health officials; internally consistent with the rest of the report.
  • The Directorate of Medical and Rural Health Services created an Occupational, Social and Environmental Health Wing nearly a decade ago, later made the State Nodal Centre for OSH of Unorganised Workers. — Stated in source without document citation; timeline given only as 'nearly a decade ago'.
  • State and district-level inter-department coordination committees and 21 disease and speciality-specific expert committees were constituted. — Figure appears in source; attributed to the Health department's action on the wing's proposal.
  • ILO and WHO have notified 107 diseases/hazards under occupational safety and health administration. — Source presents this as background in brackets; no direct citation of ILO/WHO documents given.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह नीति-सोच के अभाव की कहानी नहीं है, बल्कि ढाँचे और अमल के बीच की खाई की कहानी है। तमिलनाडु ने एक दशक पहले संस्थागत ढाँचा खड़ा किया — नोडल केंद्र, अंतर-विभागीय समितियाँ, 21 विशेषज्ञ समितियाँ — फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी स्वयं मानते हैं कि असंगठित कामगारों के लिए व्यापक व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य (OSH) नीति लंबित है और सिफारिशें कागज़ों तक सीमित रह गईं। यहाँ दिखती मूल डिज़ाइन कमज़ोरी है — सलाहकार निकाय बढ़े, पर स्पष्ट जवाबदेही, समयसीमा और बजट नहीं।

  • अड़चन समस्या की पहचान में नहीं है: पाँच साल में कम से कम तीन हितधारक बैठकों से सिफारिशें आईं, पर समयसीमा, वित्त और जवाबदेही वाला कोई नीति-उपकरण नहीं बना।
  • लक्षित वर्ग — असंगठित क्षेत्र, MSME और अंतर-राज्यीय प्रवासी मज़दूर — पारंपरिक कारखाना-कानून निरीक्षण दायरे से बाहर है, जहाँ नियोक्ता-कर्मचारी संबंध अनौपचारिक होता है; इसीलिए प्रवर्तन कठिन है।
  • नौकरी शुरू होने पर अनिवार्य स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य लॉगबुक और 107 रोगों/खतरों की अधिसूचना जैसे प्रस्ताव अकेले स्वास्थ्य विभाग नहीं कर सकता; श्रम व उद्योग विभागों और स्थानीय निरीक्षण क्षमता की ज़रूरत है।
  • OSH घटकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रमों में जोड़ना सबसे व्यावहारिक सुझाव है, क्योंकि यह समानांतर तंत्र बनाने की जगह मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचे का उपयोग करता है।
  • "कुछ हद तक स्वतंत्र" OSH प्रकोष्ठ का सुझाव बताता है कि सलाहकार समितियाँ कार्यकारी अधिकार वाले निकाय का विकल्प नहीं बन सकीं।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि मसौदा नीति या दिशानिर्देश वास्तव में अधिसूचित होते हैं या नहीं, राज्य 107 रोगों/खतरों को औपचारिक रूप से अधिसूचित करता है या नहीं, और प्रस्तावित OSH प्रकोष्ठ को स्टाफ व बजट मिलता है या एक और समिति बनकर रह जाता है।

कहानी यह नहीं बताती कि नीति क्यों रुकी, फाइल किस विभाग में अटकी है, या सरकार का आधिकारिक पक्ष क्या है; असंगठित कामगारों पर वर्तमान स्वास्थ्य बोझ का कोई आँकड़ा भी इसमें नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में विभिन्न क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए व्यापक व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य (ओएसएच) ढांचे की आवश्यकता बढ़ गई है। पिछले पांच वर्षों में सभी हितधारकों को शामिल करते हुए कम से कम तीन बैठकें हुईं और एक समर्पित नीति या दिशानिर्देश की योजना बनी, लेकिन ढांचा अब भी लंबित है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बैठकों की कई सिफारिशें कागजों पर ही रह गईं। चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने लगभग एक दशक पहले व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग बनाया था, जो बाद में राज्य नोडल केंद्र (एसएनसी-ओएसएच) बना।

मुख्य तथ्य

  • पिछले पांच वर्षों में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर सभी हितधारकों की कम से कम तीन बैठकें बुलाई गईं।
  • चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने लगभग एक दशक पहले व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग बनाया।
  • इस प्रभाग के प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग ने राज्य व जिला स्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय समितियां तथा 21 रोग व विशेषज्ञता-विशिष्ट विशेषज्ञ (तकनीकी) समितियां गठित कीं।
  • यह प्रभाग बाद में असंगठित श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए राज्य नोडल केंद्र (एसएनसी-ओएसएच) बनाया गया।
  • राज्य योजना आयोग ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की ओएसएच पर बैठकें बुलाईं; ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों, नियोक्ताओं, एनजीओ और असंगठित श्रमिकों के साथ व्यापक परामर्श सुझाया गया।
  • आईएलओ और डब्ल्यूएचओ ने व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य प्रशासन के तहत 107 रोग/खतरे अधिसूचित किए हैं; तमिलनाडु से भी इन्हें अधिसूचित करने की आवश्यकता उठाई गई।
  • 30 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत श्रमिकों सहित अंतर-राज्यीय प्रवासियों के लिए लॉग बुक/स्वास्थ्य प्रोफाइल रखने का प्रस्ताव रखा गया।
  • सिलिकोसिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, शोर-जनित श्रवण हानि, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस और व्यावसायिक कैंसर जैसी दीर्घकालिक बीमारियों की निगरानी की बात कही गई।

समयरेखा

  1. लगभग एक दशक पहलेचिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, एमएसएमई और अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों की जांच, निदान, उपचार, पुनर्वास व मुआवजे के लिए व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग बनाया।
  2. इसके बाद (तिथि स्रोत में नहीं)प्रभाग के प्रस्ताव पर राज्य व जिला स्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय समितियां और 21 विशेषज्ञ (तकनीकी) समितियां गठित; प्रभाग को एसएनसी-ओएसएच बनाया गया।
  3. पिछले पांच वर्षराज्य योजना आयोग सहित हितधारकों की कम से कम तीन बैठकें; नीति बनाने की योजना बनी, पर कोई प्रगति नहीं हुई।
  4. 22 सितंबर 2026रिपोर्ट प्रकाशित: तमिलनाडु में असंगठित श्रमिकों के लिए व्यापक ओएसएच ढांचा अब भी लंबित।

किसका दाँव

  • असंगठित क्षेत्र के श्रमिक — अनिवार्य स्वास्थ्य जांच, नियमित परीक्षण, उपचार, पुनर्वास और मुआवजे तक पहुंच; ढांचे के अभाव में व्यावसायिक बीमारियों का जोखिम।
  • अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक — तमिलनाडु में बढ़ती संख्या; स्वास्थ्य प्रोफाइल/लॉग बुक और दीर्घकालिक बीमारियों की निगरानी न होने से सुरक्षा कवच कमजोर।
  • चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय / एसएनसी-ओएसएच — स्क्रीनिंग, निदान, उपचार, पुनर्वास व मुआवजे के लिए नोडल जिम्मेदारी।
  • राज्य योजना आयोग — ओएसएच पर बैठकें बुलाना और व्यापक हितधारक परामर्श व नीति निर्माण की सिफारिश।
  • ट्रेड यूनियन, नियोक्ता और एनजीओ — व्यापक परामर्श में भागीदारी; नियोक्ताओं पर लॉग बुक रखने व अनिवार्य जांच कराने का दायित्व प्रस्तावित।
  • एमएसएमई और औद्योगिक/आर्थिक इकाइयां — श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच व अभिलेख रखने की संभावित अनिवार्यता।

क्यों अहम है

असंगठित क्षेत्र और प्रवासी श्रमिक ही उद्योग व निर्माण की रीढ़ हैं, लेकिन उनके लिए कोई व्यापक व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य ढांचा न होने से सिलिकोसिस, सीओपीडी, श्रवण हानि और व्यावसायिक कैंसर जैसी बीमारियां अनदेखी रह जाती हैं। समितियां और नोडल केंद्र बनने के बावजूद सिफारिशें कागजों पर रहने से संस्थागत ढांचे और कार्यान्वयन के बीच का अंतर उजागर होता है। नए उद्योगों के आने के साथ पहले से मानक संचालन प्रक्रिया न बनाने पर नई स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ने का खतरा है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एसएनसी-ओएसएच: असंगठित श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए तमिलनाडु का राज्य नोडल केंद्र, जो पूर्व व्यावसायिक, सामाजिक व पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग से बना।
  • स्वास्थ्य विभाग ने राज्य व जिला स्तरीय अंतर-विभागीय समन्वय समितियां तथा 21 रोग/विशेषज्ञता-विशिष्ट तकनीकी समितियां गठित कीं।
  • आईएलओ और डब्ल्यूएचओ ने ओएसएच प्रशासन के तहत 107 रोग/खतरे अधिसूचित किए हैं।
  • डब्ल्यूएचओ/आईएलओ मानकों के अनुसार बुनियादी व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएं और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज शामिल करने का सुझाव।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के सभी कार्यक्रमों में ओएसएच घटकों को एकीकृत करने की सिफारिश।
  • व्यावसायिक रोग उदाहरण: सिलिकोसिस, सीओपीडी, शोर-जनित श्रवण हानि, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, व्यावसायिक कैंसर।

मेन्स दृष्टिकोण

तमिलनाडु का अनुभव दर्शाता है कि असंगठित क्षेत्र में व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य की समस्या संस्थागत ढांचे के अभाव की नहीं, बल्कि कार्यान्वयन की है—एक दशक पहले बना व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग एसएनसी-ओएसएच में बदला, अंतर-विभागीय समन्वय समितियां और 21 तकनीकी समितियां बनीं, राज्य योजना आयोग ने बैठकें बुलाईं, फिर भी व्यापक ढांचा और नीति लंबित है और सिफारिशें कागजों पर हैं। कारणों में विभागों के बीच समन्वय की कमी, असंगठित कार्यस्थलों की बिखरी प्रकृति, नियोक्ताओं पर अभिलेख व अनिवार्य जांच का कोई बाध्यकारी दायित्व न होना और प्रवासी श्रमिकों की गतिशीलता शामिल हैं; परिणाम यह है कि सिलिकोसिस, सीओपीडी, श्रवण हानि व व्यावसायिक कैंसर जैसी दीर्घकालिक बीमारियां दर्ज ही नहीं होतीं और मुआवजा नहीं मिलता। आगे की राह के रूप में स्रोत में जो सुझाव आए हैं वे हैं—डब्ल्यूएचओ/आईएलओ मानकों के अनुरूप बुनियादी व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएं व सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, नौकरी में प्रवेश पर अनिवार्य जांच व नियमित परीक्षण, श्रमिकों की लॉग बुक/स्वास्थ्य प्रोफाइल, 107 रोगों/खतरों की अधिसूचना, एनएचएम कार्यक्रमों में ओएसएच का एकीकरण, एनसीडी जागरूकता व स्क्रीनिंग शिविर, तथा व्यापक अधिकार-क्षेत्र वाला कुछ स्वतंत्र ओएसएच प्रकोष्ठ और शुरुआत में ही मानक संचालन प्रक्रिया।

मुख्य शब्द

ओएसएच (व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य)
कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य जांच, उपचार, पुनर्वास व मुआवजे से जुड़ा ढांचा।
एसएनसी-ओएसएच
असंगठित श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए राज्य नोडल केंद्र, जो पूर्व स्वास्थ्य प्रभाग से बनाया गया।
व्यावसायिक, सामाजिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य प्रभाग
चिकित्सा एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा निदेशालय द्वारा असंगठित श्रमिकों, एमएसएमई व प्रवासी श्रमिकों की स्क्रीनिंग से मुआवजे तक के लिए बनाया गया प्रभाग।
सिलिकोसिस
धूल/सिलिका के संपर्क से होने वाला दीर्घकालिक फुफ्फुसीय व्यावसायिक रोग, जिसकी निगरानी लॉग बुक से प्रस्तावित है।
बुनियादी व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएं (बीओएचएस)
डब्ल्यूएचओ/आईएलओ मानकों पर आधारित न्यूनतम व्यावसायिक स्वास्थ्य सेवाएं, जिन्हें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज से जोड़ने का सुझाव।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम)
केंद्र प्रायोजित स्वास्थ्य कार्यक्रम, जिसके सभी कार्यक्रमों में ओएसएच घटक जोड़ने की सिफारिश की गई।

अभ्यास प्रश्न

  1. असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य ढांचे के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं की विवेचना कीजिए। तमिलनाडु के अनुभव के आलोक में सुधार के उपाय सुझाइए।
  2. "संस्थाएं बनीं, सिफारिशें कागजों पर रहीं"—असंगठित श्रमिकों के स्वास्थ्य शासन के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए।
  3. प्रवासी श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य प्रोफाइल/लॉग बुक और अनिवार्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था व्यावसायिक रोगों की रोकथाम में कैसे सहायक हो सकती है? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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