लगभग 35 साल बाद सीबीएफसी ने नए दिशानिर्देश जारी किए

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने करीब 35 साल बाद पहली बार नए प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो दिसंबर 1991 के दिशानिर्देशों की जगह लेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 16 सितंबर को जारी दिशानिर्देशों में मौजूदा प्रावधान बरकरार हैं, साथ ही मादक पदार्थों के सेवन, उपयोग या तस्करी वाले दृश्यों पर चेतावनी अनिवार्य की गई है। यूए 7+, 13+ और 16+ आयु सूचक दोहराए गए, जो 2024 नियमों में आए थे। नौ साल बाद 18 सदस्यीय बोर्ड के पुनर्गठन के बाद यह कदम आया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • CBFC issued new film certification guidelines on September 16, via the Ministry of Information and Broadcasting, the first in nearly 35 years after December 1991. — Dates and issuing ministry appear in source; attributed to the guidelines document.
  • Scenes depicting consumption, use or trafficking of narcotic drugs or psychotropic substances must carry the warning 'Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.' — Quoted warning text appears verbatim in source.
  • Three UA markers — UA 7+, UA 13+, UA 16+ — are not new; introduced in Cinematograph (Certification) Rules, 2024 and added to guidelines by a May 2025 amendment. — Source states this explicitly and is internally consistent.
  • CBFC chairperson Shashi Shekhar Vempati said filmmakers must highlight markers in promotional material. — Attributed to his post on X and to remarks to Hindustan Times.
  • Government reconstituted an 18-member CBFC board including Suniel Shetty, Preity Zinta, Pankaj Tripathi, Prosenjit Chatterjee, Priyadarshan, Ricky Kej and Rupali Ganguly. — Names and board size appear in source; no order number cited.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

करीब 35 साल बाद आए ये सीबीएफसी दिशानिर्देश किसी बड़े बदलाव से ज़्यादा पुरानी व्यवस्था की पुष्टि हैं — 1991 का ढांचा लगभग जैसा था वैसा ही रखा गया है और नशीले पदार्थों वाले दृश्यों पर अनिवार्य चेतावनी ही एकमात्र नया ठोस प्रावधान है। राजनीतिक रूप से यह सरकार को 'सुधार' का श्रेय देता है, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा, सांप्रदायिक विषयों और लोक व्यवस्था पर वही व्यापक विवेकाधिकार बना रहता है। बोर्ड के पुनर्गठन के कुछ दिनों बाद ही इनका आना बताता है कि नई अगुवाई को स्पष्ट नियम-पुस्तिका देने की मंशा है।

  • निरंतरता बदलाव पर भारी है, जिससे सरकार को सुधार का श्रेय मिलता है और मौजूदा विवेकाधिकार भी बरकरार रहते हैं।
  • नशा-विरोधी चेतावनी राजनीतिक रूप से कम जोखिम वाला और व्यापक स्वीकार्यता वाला संदेश है, जिसका विरोध किसी दल के लिए मुश्किल है।
  • यूए 7+/13+/16+ मार्कर 2024 के नियमों में पहले से थे, इसलिए उन्हें दोहराना नीतिगत बदलाव नहीं बल्कि जागरूकता और संकेत देने की कवायद है, जैसा अध्यक्ष के जोर से भी झलकता है।
  • "राष्ट्र-विरोधी", "सांप्रदायिक" और "अवैज्ञानिक" जैसे शब्दों को बनाए रखने पर सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम नियंत्रण की बहस फिर गरमा सकती है।
  • नौ साल बाद 18 सदस्यीय बोर्ड, जिसमें जाने-पहचाने फ़िल्मी चेहरे हैं — यह नियामक की विश्वसनीयता और उद्योग की सहमति, दोनों जुटाने की कोशिश दिखती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नया बोर्ड किसी विवादित फ़िल्म पर अपना पहला फ़ैसला कैसे लेता है, और फ़िल्मकार व विपक्ष 1991 दौर के बचे प्रावधानों में सुधार की मांग औपचारिक रूप से उठाते हैं या नहीं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि व्यवहार में प्रमाणन के फ़ैसले कैसे बदलेंगे, या इस समय-चयन के पीछे कोई राजनीतिक गणित था या नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने लगभग 35 साल बाद नए फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो दिसंबर 1991 के दिशानिर्देशों की जगह लेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 16 सितंबर को जारी इन दिशानिर्देशों में हिंसा, अश्लीलता, यौन हिंसा, सांप्रदायिक सामग्री, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोक व्यवस्था से जुड़े पुराने प्रावधान बरकरार रखे गए हैं। तकनीकी रूप से एकमात्र नया ठोस प्रावधान मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों से जुड़े दृश्यों पर अनिवार्य चेतावनी है। यह कदम नौ साल बाद 18 सदस्यीय बोर्ड के पुनर्गठन के कुछ दिन बाद आया है।

मुख्य तथ्य

  • सीबीएफसी ने करीब 35 साल में पहली बार नए प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए; इससे पहले दिशानिर्देश दिसंबर 1991 में आए थे।
  • नए दिशानिर्देश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 16 सितंबर को जारी किए गए।
  • मादक पदार्थों/मन:प्रभावी पदार्थों के सेवन, उपयोग या तस्करी दिखाने वाले दृश्यों पर चेतावनी अनिवार्य: “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.”
  • 1991 के दिशानिर्देशों में कहा गया था कि नशे की लत को प्रोत्साहित, उचित ठहराने या ग्लैमराइज़ करने वाले दृश्य न दिखाए जाएं।
  • तीन यूए आयु सूचक — यूए 7+, यूए 13+ और यूए 16+ — दोहराए गए; ये सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 में आए थे और सिनेमैटोग्राफ अधिनियम में भी परिभाषित हैं।
  • सरकार ने मई 2025 में 1991 के दिशानिर्देशों में संशोधन कर तीनों आयु सूचकों को शामिल किया था।
  • सरकार ने नौ साल बाद सीबीएफसी का पुनर्गठन कर 18 सदस्यीय बोर्ड नियुक्त किया; पिछला पूर्ण पुनर्गठन 2017 में हुआ था।
  • नए बोर्ड में सुनील शेट्टी, प्रीति ज़िंटा, पंकज त्रिपाठी, प्रोसेनजित चटर्जी, फिल्मकार प्रियदर्शन, संगीतकार रिकी केज और रूपाली गांगुली शामिल हैं।

समयरेखा

  1. दिसंबर 1991सीबीएफसी ने पिछले फिल्म प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए।
  2. 2017सीबीएफसी के पूर्ण बोर्ड का पिछला पुनर्गठन।
  3. 2024सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 में यूए 7+, यूए 13+ और यूए 16+ आयु सूचक पेश किए गए।
  4. मई 20251991 के दिशानिर्देशों में संशोधन कर तीन आयु सूचक दिशानिर्देशों में शामिल किए गए; इसी माह शशि शेखर वेम्पति सीबीएफसी अध्यक्ष नियुक्त हुए।
  5. 16 सितंबरसूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नए प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए, जो बोर्ड पुनर्गठन के कुछ दिन बाद आए।

किसका दाँव

  • केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) — फिल्म प्रमाणन का ढांचा लागू करना; 35 साल बाद नए दिशानिर्देशों के तहत काम करना।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय — दिशानिर्देश जारी करने और बोर्ड के पुनर्गठन का अधिकार।
  • शशि शेखर वेम्पति, सीबीएफसी अध्यक्ष — आयु सूचकों के बारे में उद्योग और समाज में जागरूकता बढ़ाने पर ज़ोर; मई 2025 में नियुक्त।
  • फिल्म निर्माता व उद्योग — प्रचार सामग्री में आयु सूचक दिखाने और मादक पदार्थ वाले दृश्यों पर चेतावनी देने की बाध्यता।
  • दर्शक व अभिभावक — यूए 7+, 13+, 16+ सूचकों से बच्चों के लिए फिल्म देखने का निर्णय लेने में सहूलियत।
  • प्रसून जोशी — प्रसार भारती अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद सीबीएफसी अध्यक्ष पद से हटे।

क्यों अहम है

फिल्म प्रमाणन सीधे रचनात्मक अभिव्यक्ति और दर्शकों, विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए 35 साल बाद दिशानिर्देशों का नवीनीकरण नीति की दिशा बताता है। नए दस्तावेज़ में मादक पदार्थ चेतावनी के अलावा 1991 के विवादित प्रावधान—जैसे अपराधियों की कार्यप्रणाली न दिखाना और “सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, अवैज्ञानिक और राष्ट्र-विरोधी” प्रवृत्तियों पर रोक—बने रहने से सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है। साथ ही नौ साल बाद बोर्ड का पुनर्गठन प्रमाणन संस्थाओं की कार्यक्षमता और जवाबदेही पर सवाल उठाता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सीबीएफसी के नए प्रमाणन दिशानिर्देश 16 सितंबर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी; पिछले दिशानिर्देश दिसंबर 1991 के।
  • तीन आयु सूचक — यूए 7+, यूए 13+, यूए 16+ — सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024 में पेश; सिनेमैटोग्राफ अधिनियम में भी परिभाषित।
  • मई 2025 में 1991 के दिशानिर्देशों में संशोधन कर आयु सूचक शामिल किए गए।
  • मादक पदार्थ/मन:प्रभावी पदार्थ वाले दृश्यों पर अनिवार्य चेतावनी — एकमात्र तकनीकी रूप से नया ठोस प्रावधान।
  • सीबीएफसी बोर्ड का पुनर्गठन नौ साल बाद, 18 सदस्य; पिछला पूर्ण पुनर्गठन 2017 में।
  • शशि शेखर वेम्पति मई 2025 में सीबीएफसी अध्यक्ष बने, प्रसून जोशी के प्रसार भारती अध्यक्ष बनने के बाद।

मेन्स दृष्टिकोण

फिल्म प्रमाणन का ढांचा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बाल संरक्षण और लोक व्यवस्था के बीच संतुलन का प्रश्न है। 16 सितंबर के नए दिशानिर्देश 1991 के ढांचे को लगभग यथावत रखते हैं—हिंसा, अश्लीलता, यौन हिंसा, सांप्रदायिक सामग्री, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध, संप्रभुता और मानहानि से जुड़े प्रावधान बरकरार हैं—जबकि केवल मादक पदार्थों के सेवन, उपयोग या तस्करी वाले दृश्यों पर चेतावनी नया ठोस जोड़ है। आयु सूचक (यूए 7+, 13+, 16+) पहले ही 2024 के नियमों और मई 2025 के संशोधन से मौजूद थे; अध्यक्ष के अनुसार इनका दोहराव उद्योग और समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए है, और निर्माताओं को प्रचार सामग्री में इन्हें दिखाना चाहिए। आलोचना का केंद्र यह है कि अपराधियों की कार्यप्रणाली न दिखाने तथा “सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, अवैज्ञानिक और राष्ट्र-विरोधी” प्रवृत्तियों जैसे व्यापक व अस्पष्ट आधार जारी हैं। आगे का रास्ता: सूचना-आधारित (आयु सूचक व चेतावनी) दृष्टिकोण को मजबूत करना, बोर्ड का समय पर पुनर्गठन सुनिश्चित करना और प्रावधानों की स्पष्टता पर सार्वजनिक विमर्श—स्रोत में इससे आगे की नीति घोषणाएं नहीं बताई गई हैं।

मुख्य शब्द

सीबीएफसी
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड, जो फिल्मों को प्रमाणपत्र देता है; इसका पुनर्गठन नौ साल बाद 18 सदस्यों के साथ हुआ।
सिनेमैटोग्राफ (प्रमाणन) नियम, 2024
वे नियम जिनमें यूए 7+, यूए 13+ और यूए 16+ आयु सूचक पहली बार पेश किए गए।
यूए आयु सूचक
यूए 7+, 13+, 16+ — संबंधित आयु से कम बच्चों के लिए अभिभावकीय मार्गदर्शन की सलाह देने वाले संकेतक।
मन:प्रभावी पदार्थ (साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस)
मादक पदार्थों के साथ वह श्रेणी जिनके सेवन, उपयोग या तस्करी वाले दृश्यों पर अब चेतावनी अनिवार्य है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
वह मंत्रालय जिसने 16 सितंबर को नए प्रमाणन दिशानिर्देश जारी किए।
प्रसार भारती
सार्वजनिक प्रसारण संस्था, जिसके अध्यक्ष बनने पर प्रसून जोशी ने सीबीएफसी अध्यक्ष पद छोड़ा।

अभ्यास प्रश्न

  1. सीबीएफसी के 16 सितंबर के दिशानिर्देश 1991 के ढांचे से किन बिंदुओं पर भिन्न हैं, और आलोचना के मुख्य आधार क्या हैं?
  2. फिल्म प्रमाणन में आयु-आधारित यूए सूचक (7+, 13+, 16+) बाल संरक्षण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे साधते हैं? चर्चा करें।
  3. नौ साल बाद सीबीएफसी बोर्ड के पुनर्गठन से नियामक संस्थाओं की कार्यक्षमता और जवाबदेही पर क्या सवाल उठते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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