आईआईटी परिसरों में छात्रों की आत्महत्या, हालात को लेकर प्रदर्शन

आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की 18 सितंबर 2026 को आत्महत्या के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया और 18 सूत्री ज्ञापन सौंपा; उनके माता-पिता ने एक प्रोफेसर पर जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाया। संस्थान ने 24 सितंबर को दस सदस्यीय जांच समिति की घोषणा की। आईआईटी दिल्ली में छात्र ऋषिकेश कुमार की मृत्यु के बाद छह दिन प्रदर्शन हुए। छात्रों और शिक्षकों ने अपर्याप्त ढांचा, घटते प्लेसमेंट, फीस वृद्धि और सख्त नियमों को कारण बताया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • IIT Bombay BTech student Sahil Wakode died by suicide on September 18, 2026, and his parents alleged casteist harassment by a professor. — Attributed to the parents' allegation in the source; the harassment claim is an allegation, not a finding.
  • Students submitted an 18-point memorandum, the director signed it after three days of protests, and a ten-member committee was announced on September 24. — Figures and dates appear in the source; the director's signing is attributed to media reports.
  • IIT Delhi students protested after the suicide of Rishikesh Kumar and paused after six days when a committee was formed; his parents declined compensation. — Stated in the source without named institutional source.
  • 120 students died of suicide or unnatural causes at IITs in the last 10 years against 51 in the previous decade, with SC/ST rates about twice those of general category students. — Attributed to data compiled by Dheeraj Singh of the Global IIT Alumni Support group; not independently verifiable here.
  • Placements fell significantly in 22 of 23 IITs between 2021-22 and 2023-24. — Attributed in the source to data the Centre submitted to a Parliamentary Standing Committee in 2025.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि नीतिगत असंतुलन की कहानी है: आईआईटी में छात्रों की संख्या बढ़ी, लेकिन ढांचा और सहायता तंत्र उसी रफ़्तार से नहीं बढ़े। आईआईटी बॉम्बे का 18 सूत्री ज्ञापन और 24 सितंबर को घोषित दस सदस्यीय समिति उसी पुराने क्रम को दोहराते हैं — घटना, प्रदर्शन, समिति। असली शासन-कमज़ोरी यही है कि प्रतिक्रिया घटना-आधारित है, ढांचागत सुधार नहीं।

  • समिति बनाना संस्थानों का सामान्य उपाय है, लेकिन आईआईटी दिल्ली में ऋषिकेश कुमार की मृत्यु के बाद छह दिन चले प्रदर्शन बताते हैं कि समिति के बाद वास्तव में क्या बदला, यह बताने वाला पारदर्शी तंत्र नदारद है।
  • भीतर शिकायत रखने के मंच सीमित हैं — 2023 के नियमों में प्रदर्शन और मीडिया से बात करने के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है — जिससे असंतोष संवाद की जगह आंदोलन का रूप ले लेता है।
  • जातिगत उत्पीड़न के आरोप में शोकसंतप्त परिवार और नामित प्रोफ़ेसर, दोनों को विश्वसनीय जाँच प्रक्रिया चाहिए; आंतरिक समिति यह भरोसा मुश्किल से जुटा पाती है, इसीलिए आईआईटी दिल्ली के छात्रों ने बाहरी जाँच की मांग की।
  • फीस वृद्धि (2022 में आईआईटी बॉम्बे में एमटेक और पीएचडी शुल्क बढ़ोतरी पर महीने भर का प्रदर्शन), कमज़ोर प्लेसमेंट और कर्ज़ का बोझ मिलकर आर्थिक दबाव बढ़ाते हैं — ये सीधे कल्याण-नीति के प्रश्न हैं।
  • प्रवेश बढ़ाने की नीति के साथ कक्षाओं, छात्रावासों, पेयजल-स्वच्छता और काउंसलिंग स्टाफ़ के लिए संसाधन न देना ही विस्तार नीति की मुख्य कार्यान्वयन चूक है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि बॉम्बे समिति की समय-सीमा, दायरा और निष्कर्ष सार्वजनिक होते हैं या नहीं, और 18 मांगों में से कितनी स्थायी नीति बनती हैं।

यह रिपोर्ट जातिगत उत्पीड़न के आरोप को सिद्ध नहीं करती; वह जाँच के दायरे में एक आरोप है और मृत्यु के कारण पर कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद परिसर में छात्र प्रदर्शन शुरू हुए। वाकोडे के माता-पिता ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को एक प्रोफेसर से जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पिछले महीने आईआईटी दिल्ली में भी छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद छह दिन प्रदर्शन हुए थे। आईआईटी परिसर आम तौर पर छात्र राजनीति के केंद्र नहीं माने जाते, इसलिए इन प्रदर्शनों की तीव्रता उल्लेखनीय रही; छात्रों और शिक्षकों ने अपर्याप्त ढांचा, सामाजिक अलगाव, घटते प्लेसमेंट, फीस वृद्धि और सख्त नियमों को असंतोष का कारण बताया।

मुख्य तथ्य

  • 18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के बीटेक छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या; माता-पिता ने एक प्रोफेसर पर जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाया।
  • छात्रों ने 18 सूत्री ज्ञापन सौंपा; तीन दिन के प्रदर्शन के बाद निदेशक ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए और 24 सितंबर को संस्थान ने दस सदस्यीय जांच समिति की घोषणा की।
  • आईआईटी दिल्ली में छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद छह दिन प्रदर्शन चला; समिति गठन के बाद प्रदर्शन रुका, परिवार ने मुआवज़ा लेने से इनकार किया।
  • ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप के संस्थापक धीरज सिंह के आंकड़ों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में 120 छात्रों की आत्महत्या या अप्राकृतिक कारणों से मौत हुई, उससे पहले के दशक में यह संख्या 51 थी।
  • इन आंकड़ों के अनुसार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों में आत्महत्या की दर सामान्य श्रेणी के छात्रों से लगभग दोगुनी है।
  • 2023 से आईआईटी दिल्ली में कुल आठ छात्रों की आत्महत्या; इस वर्ष अकेले आईआईटी बॉम्बे में तीन छात्रों की आत्महत्या।
  • 2025 में संसदीय स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल) को केंद्र द्वारा दिए आंकड़ों के अनुसार 23 में से 22 आईआईटी में 2021-'22 से 2023-'24 के बीच प्लेसमेंट में बड़ी गिरावट आई।
  • 2022 में आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने एमटेक की 39% और पीएचडी की 45% फीस वृद्धि के खिलाफ महीने भर प्रदर्शन किया; संस्थान ने आंशिक रूप से वृद्धि वापस ली।

समयरेखा

  1. 2015आईआईटी मद्रास ने छात्र समूह 'अंबेडकर पेरियार रीडिंग सर्कल' की मान्यता रद्द की; देशभर के छात्रों के विरोध के बाद एक सप्ताह में फैसला वापस लिया।
  2. 2018अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों के समर्थन में प्रस्तावित मार्च से पहले आईआईटी खड़गपुर ने 'राजनीतिक/गैर-राजनीतिक सभा' पर रोक का परिपत्र जारी किया।
  3. 2020संविधान संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शनों के दौरान आईआईटी बॉम्बे के निदेशक ने छात्रों से राजनीति परिसर से बाहर रखने को कहा।
  4. 2022आईआईटी बॉम्बे में फीस वृद्धि के विरुद्ध महीने भर चला छात्र प्रदर्शन; फीस आंशिक रूप से वापस।
  5. 2023आईआईटी बॉम्बे ने नियमों में स्पष्ट किया कि सभी प्रदर्शनों, मार्च और सभाओं के लिए संस्थान तथा स्थानीय पुलिस की पूर्व अनुमति आवश्यक।
  6. 2025मीडिया से 'अनधिकृत टिप्पणी' के आरोप में एक छात्र निलंबित; अदालत का रुख करने पर उसके पक्ष में फैसला और बहाली।
  7. जुलाई (इस वर्ष)कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन शुरू, जिससे आईआईटी छात्रों को प्रेरणा मिली; आईआईटी रुड़की ने अनुमति बिना राजनीतिक गतिविधि से परहेज करने को कहा।
  8. अगस्त 2026 (पिछले महीने)आईआईटी दिल्ली में ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद छह दिन प्रदर्शन; बाहरी जांच समिति और मुआवज़े की मांग।
  9. 18 सितंबर 2026आईआईटी बॉम्बे के साहिल वाकोडे की आत्महत्या; प्रदर्शन और 18 सूत्री ज्ञापन।
  10. 24 सितंबर 2026आईआईटी बॉम्बे ने घटना की जांच के लिए दस सदस्यीय समिति की घोषणा की।

किसका दाँव

  • साहिल वाकोडे का परिवार — प्रोफेसर पर जातिगत उत्पीड़न का आरोप और एससी/एसटी अत्याचार कानून के तहत कार्रवाई की मांग; निष्पक्ष जांच पर भरोसा।
  • ऋषिकेश कुमार का परिवार (आईआईटी दिल्ली) — बाहरी जांच समिति की मांग; परिवार ने मुआवज़ा लेने से इनकार किया।
  • आईआईटी बॉम्बे प्रशासन/निदेशक — 18 सूत्री ज्ञापन पर हस्ताक्षर, दस सदस्यीय जांच समिति; संस्थान की प्रतिष्ठा और अनुशासन नियमों का सवाल।
  • आईआईटी के छात्र (विशेषकर एससी/एसटी/ओबीसी) — ऋण लेकर पढ़ाई, सामाजिक अलगाव, आत्महत्या की दोगुनी दर, परामर्श सेवाओं की कमी।
  • शिक्षक/फैकल्टी — बढ़ी कक्षाओं को पढ़ाने की कठिनाई; परिवार द्वारा जाति का मुद्दा उठाने के बाद कई आईआईटी के शिक्षक आरोपित प्रोफेसर के समर्थन में आए।
  • धीरज सिंह / ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप — आत्महत्या और अप्राकृतिक मौतों के आंकड़े संकलित कर जवाबदेही की मांग।
  • संसदीय स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल) — केंद्र से आईआईटी प्लेसमेंट आंकड़े प्राप्त कर संस्थागत प्रदर्शन की निगरानी।

क्यों अहम है

आईआईटी को सफलता और सुरक्षित भविष्य की गारंटी माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ती आत्महत्याएँ, हाशिये के छात्रों पर असमान बोझ, अपर्याप्त ढांचा और गिरते प्लेसमेंट इस छवि पर सवाल उठाते हैं। प्रदर्शनों पर पूर्व अनुमति और मीडिया से बात करने पर रोक जैसे नियम दिखाते हैं कि शिकायत रखने के संस्थागत मंच सिमट गए हैं, जिससे असंतोष आत्महत्या जैसी घटनाओं पर ही फूटता है। यह उच्च शिक्षा में विस्तार बिना संसाधन, और समावेशन बिना अपनेपन की व्यापक नीतिगत चुनौती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • साहिल वाकोडे: आईआईटी बॉम्बे बीटेक छात्र, आत्महत्या 18 सितंबर 2026; 24 सितंबर को दस सदस्यीय जांच समिति।
  • धीरज सिंह (आईआईटी कानपुर पूर्व छात्र) के आंकड़े: 10 वर्षों में 120 मौतें, पिछले दशक में 51; एससी/एसटी दर लगभग दोगुनी।
  • 2025 में संसदीय स्थायी समिति को दिए आंकड़े: 23 में से 22 आईआईटी में 2021-'22 से 2023-'24 के बीच प्लेसमेंट में गिरावट।
  • 2022 फीस वृद्धि: आईआईटी बॉम्बे में एमटेक 39%, पीएचडी 45%; आंशिक वापसी।
  • आईआईटी मद्रास के नियम: छात्र संगठन बनाने की अनुमति, पर बाहरी राजनीतिक दलों से संबद्धता नहीं; 2015 में अंबेडकर पेरियार रीडिंग सर्कल की मान्यता रद्द, एक सप्ताह में वापस।
  • 2023 के आईआईटी बॉम्बे नियम: प्रदर्शन/मार्च हेतु संस्थान व स्थानीय पुलिस की पूर्व अनुमति; मीडिया से बात करने पर पूर्व स्वीकृति अनिवार्य।

मेन्स दृष्टिकोण

आईआईटी परिसरों में छात्र आत्महत्याओं के बाद उठे प्रदर्शन एक संस्थागत संकट का लक्षण हैं। कारण बहुस्तरीय हैं: छात्र संख्या बढ़ने के अनुपात में कक्षाओं, छात्रावासों, पेयजल और स्वच्छता जैसे ढांचे का विस्तार न होना; 23 में से 22 आईआईटी में 2021-'22 से 2023-'24 के बीच प्लेसमेंट में गिरावट के कारण ऋण लेकर पढ़ने वाले छात्रों पर दबाव; 2022 जैसी बड़ी फीस वृद्धि; परामर्श सेवाओं पर अविश्वास; और अलगाव पैदा करने वाला परिसर-डिज़ाइन। साथ ही असहमति के मंचों का सिकुड़ना—2023 के नियमों में प्रदर्शन और मीडिया संवाद पर पूर्व अनुमति, 2025 में एक छात्र का निलंबन (अदालत ने पलटा), 2018 खड़गपुर परिपत्र, 2015 में अंबेडकर पेरियार रीडिंग सर्कल की मान्यता रद्द—असंतोष को केवल त्रासदी के बाद ही अभिव्यक्ति देता है। जातिगत आयाम सबसे गंभीर है: एससी/एसटी छात्रों में आत्महत्या दर लगभग दोगुनी, और वाकोडे मामले में परिवार के आरोप के बाद प्रोफेसर के पक्ष में शिक्षकों का एकजुट होना जवाबदेही की कमी दर्शाता है। आगे का रास्ता: हर घटना पर अस्थायी समिति के बजाय समयबद्ध, पारदर्शी और बाहरी सदस्यों वाली जांच, प्लेसमेंट व आत्महत्या आंकड़ों का नियमित प्रकाशन, ढांचे व परामर्श क्षमता में निवेश, फीस निर्धारण में छात्र प्रतिनिधित्व, और शिकायत-निवारण तथा संवाद के वैध मंच—जिनके अभाव को छात्र और शिक्षक दोनों स्वीकार करते हैं।

मुख्य शब्द

18 सूत्री ज्ञापन
आईआईटी बॉम्बे के छात्रों द्वारा निष्पक्ष जांच और बेहतर छात्र सहायता तंत्र की मांग वाला दस्तावेज़, जिस पर निदेशक ने तीन दिन के प्रदर्शन बाद हस्ताक्षर किए।
एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून
अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों पर अत्याचार रोकने वाला कानून; वाकोडे के परिवार ने इसका सहारा लिया, जिसके बाद कई आईआईटी के शिक्षक प्रोफेसर के बचाव में आए।
ग्लोबल आईआईटी एलुमनाई सपोर्ट ग्रुप
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह द्वारा स्थापित समूह, जिसने आईआईटी में आत्महत्या व अप्राकृतिक मौतों के आंकड़े संकलित किए।
कॉकरोच जनता पार्टी प्रदर्शन
जुलाई में शुरू हुआ आंदोलन, जिससे कई आईआईटी छात्रों को अपनी मांगें उठाने की प्रेरणा मिली (स्रोत में विवरण नहीं)।
अंबेडकर पेरियार रीडिंग सर्कल
आईआईटी मद्रास का छात्र समूह, जिसकी मान्यता 2015 में रद्द हुई और देशव्यापी विरोध के बाद एक सप्ताह में बहाल कर दी गई।
संसदीय स्थायी समिति (शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल)
संसदीय समिति, जिसे 2025 में केंद्र ने आईआईटी में प्लेसमेंट गिरावट के आंकड़े सौंपे।

अभ्यास प्रश्न

  1. आईआईटी जैसे उच्च प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्र आत्महत्याओं के संस्थागत और सामाजिक कारणों का परीक्षण करें। हाशिये के समुदायों के छात्रों के लिए ये चुनौतियाँ क्यों अधिक गंभीर हैं?
  2. क्या परिसरों में प्रदर्शन और मीडिया संवाद पर पूर्व अनुमति की शर्तें छात्रों के शिकायत-निवारण को कमजोर करती हैं? आईआईटी बॉम्बे के 2023 के नियमों के संदर्भ में चर्चा करें।
  3. उच्च शिक्षा में छात्र संख्या का विस्तार बिना समुचित ढांचे और संसाधनों के—इसके परिणामों का मूल्यांकन करें, प्लेसमेंट व फीस वृद्धि के आंकड़ों के आलोक में।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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