सोलर हब की भूमि के मुआवजे को लेकर अनंतपुर के किसानों का आंदोलन

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के नंबूलापूलकुंटा में सोलर हब के लिए जमीन ली जाने के बाद मुआवजा न मिलने के विरोध में सैकड़ों किसान आंदोलन कर रहे हैं। परियोजना का निर्माण एनटीपीसी को सौंपा गया और दस हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई। ग्राम सभाओं में मंत्रियों और राजस्व अधिकारियों ने प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये, रोजगार, कुछ भूमि तथा बकरी-भेड़ देने का आश्वासन दिया था। सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात ने एनपी कुंटा का दौरा कर प्रति एकड़ कम से कम 10 लाख रुपये और भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के क्रियान्वयन की मांग की।

स्रोत

Anantapur — politics · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Ten thousand acres at Nambulapoolakunta were taken over for a solar hub built by NTPC — Figure and agency appear in source; no government document cited.
  • Ministers and revenue officials promised Rs 2.10 lakh per acre, jobs, land, and goats/sheep in gram sabhas — Attributed to assurances in gram sabhas; source later cites Rs 2 lakh per acre, an internal inconsistency.
  • Prakash Karat demanded at least Rs 10 lakh per acre and implementation of the Land Acquisition Act, 2013 — Directly quoted and attributed to Karat in the source.
  • The state government proposes to acquire 15 lakh acres for industries and airports; process described as 'land-grabbing' — Allegation attributed to Karat; no official confirmation in source.
  • Section 144 was imposed within a 500-metre radius of the project site and 22 CPI(M) district leaders were issued bind-over summons — Stated as fact in source without naming the issuing authority.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

नवीकरणीय ऊर्जा का आर्थिक तर्क जितना मजबूत हो, अगर भूमि अधिग्रहण का बिल अनसुलझा रहे तो परियोजना की लागत आखिर में बढ़ती ही है — नंबुलपूलकुंट विवाद का यही सार है। दस हजार एकड़ पर प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये का मतलब है अधिग्रहण लागत तुलनात्मक रूप से कम; सीपीआई(एम) की 10 लाख रुपये की मांग मानी जाए तो परियोजना का भूमि-गणित काफी बदल जाएगा। खबर के अनुसार सैकड़ों किसानों को वादा किया गया मुआवजा भी नहीं मिला, यानी फिलहाल यह लागत विस्थापित परिवार ही उठा रहे हैं।

  • प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये के साथ निर्माण में रोजगार, कुछ जमीन और बकरी-भेड़ का पैकेज नकदी में हल्का है और आजीविका के वादों पर टिका है, जो खबर के मुताबिक पूरे नहीं हुए।
  • पट्टा आधारित मुआवजा उन किसानों को नुकसान में डालता है जो दशकों से असाइन्ड या सरकारी जमीन जोत रहे थे — आय का नुकसान वास्तविक है, भले कागज न हो।
  • भूमि अधिग्रहण कानून 2013 लागू करने की मांग मूलतः आर्थिक है: ऊंचा मुआवजा और औपचारिक आर एंड आर पैकेज शुरुआती लागत बढ़ाते हैं, पर मुकदमेबाजी और देरी का जोखिम घटाते हैं।
  • मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार के आरोप, जो खबर में सिद्ध नहीं हैं, सही निकलें तो इसका अर्थ है सार्वजनिक धन का लक्षित लाभार्थियों तक न पहुंचना — सबसे महंगा परिणाम।
  • राज्य में 15 लाख एकड़ अधिग्रहण के प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में एनपी कुंट एक मानक बन जाता है; यहां तय दर आगे की परियोजनाओं की भूमि-लागत धारणा तय करेगी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सरकार प्रति एकड़ दर संशोधित करती है, 2013 कानून के तहत आर एंड आर पैकेज देती है और वितरण की जांच कराती है या नहीं — ये तीनों परियोजना की लागत और समयसीमा तय करेंगे।

खबर में सरकार या एनटीपीसी का पक्ष, अब तक बंटी राशि, परियोजना का निवेश मूल्य और रोजगार अनुमान नहीं हैं, और भ्रष्टाचार के दावे आरोप भर हैं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश सरकार ने अनंतपुर जिले के नंबूलापूलकुंटा (एनपी कुंटा) मंडल में एक सोलर हब स्थापित करने का निर्णय लिया और इसके निर्माण की जिम्मेदारी एनटीपीसी को दी गई। परियोजना के लिए दस हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में वे किसान शामिल हैं जो दशकों से सरकारी या असाइन्ड (आवंटित) भूमि पर खेती कर रहे थे। ग्राम सभाओं में मंत्रियों और राजस्व अधिकारियों द्वारा दिए गए मुआवजे व पुनर्वास के आश्वासन पूरे न होने पर सैकड़ों किसान आंदोलन पर हैं और सीपीआई(एम) ने पिछले तीन महीनों में धरने-प्रदर्शन किए। पोलित ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात ने क्षेत्र का दौरा कर भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के पूर्ण क्रियान्वयन की मांग की।

मुख्य तथ्य

  • सोलर हब के लिए नंबूलापूलकुंटा में दस हजार एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई; निर्माण की जिम्मेदारी एनटीपीसी को सौंपी गई।
  • ग्राम सभाओं में राज्य के मंत्रियों व राजस्व अधिकारियों ने प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये मुआवजा, निर्माण कार्यों में रोजगार, कुछ भूमि तथा पालन हेतु बकरी-भेड़ का आश्वासन दिया था।
  • स्रोत के अनुसार प्रति एकड़ 2 लाख रुपये का मुआवजा सैकड़ों किसानों को नहीं मिला; मुआवजा आवंटन में भ्रष्टाचार से कुछ पट्टाधारक भी वंचित रह गए।
  • प्रकाश करात ने प्रति एकड़ कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा तथा भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अक्षरशः क्रियान्वयन की मांग की।
  • करात ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से वर्तमान में तय राशि से चार गुना अधिक मुआवजा सुनिश्चित करने की मांग की।
  • करात के अनुसार सरकार ने औद्योगीकरण और हवाई अड्डों के निर्माण के लिए राज्य में 15 लाख एकड़ भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा है।
  • जिला प्रशासन ने पहले दौरे व सार्वजनिक सभा की अनुमति देने से इनकार किया और परियोजना स्थल के 500 मीटर दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 लागू की; अंतिम समय में अनुमति दी गई।
  • पुलिस ने पूर्व के विरोध प्रदर्शन में शामिल सीपीआई(एम) के 22 जिला नेताओं को बाइंड ओवर समन जारी किए।

समयरेखा

  1. तिथि स्रोत में नहींआंध्र प्रदेश सरकार ने नंबूलापूलकुंटा में सोलर हब स्थापित करने का निर्णय लिया; निर्माण एनटीपीसी को सौंपा गया।
  2. तिथि स्रोत में नहींग्राम सभाओं में मंत्रियों व राजस्व अधिकारियों ने प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये, रोजगार, कुछ भूमि और बकरी-भेड़ देने का आश्वासन दिया; दस हजार एकड़ भूमि ली गई।
  3. पिछले तीन महीनेमुआवजा न मिलने पर सीपीआई(एम) ने धरने और आंदोलन आयोजित किए; एक पूर्व प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच टकराव हुआ।
  4. दौरे से पहलेजिला अधिकारियों ने सभा की अनुमति नकारी, परियोजना स्थल के 500 मीटर दायरे में धारा 144 लगाई; 22 पार्टी नेताओं को बाइंड ओवर समन।
  5. दौरे के दिनप्रकाश करात एनपी कुंटा पहुंचे; पुलिस बैरिकेड हटाए गए, मंडल मुख्यालय पर सार्वजनिक सभा हुई।
  6. इसके बादकरात ने कुरनूल में पार्टी कार्यालय में किसान आत्महत्याओं पर मीडिया से बात की, पीड़ित परिवारों से मिले और साकुनाला गांव में किसानों को संबोधित किया।

किसका दाँव

  • नंबूलापूलकुंटा के सैकड़ों किसान — दशकों से जोती जा रही असाइन्ड/सरकारी भूमि गंवाई, वादा किया गया मुआवजा, रोजगार व पुनर्वास लाभ नहीं मिला।
  • आंध्र प्रदेश सरकार / मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू — सोलर हब और 15 लाख एकड़ अधिग्रहण प्रस्ताव पर आगे बढ़ना; मुआवजे व भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देना।
  • एनटीपीसी — सोलर हब के निर्माण की जिम्मेदारी; भूमि विवाद से परियोजना प्रभावित हो सकती है।
  • सीपीआई(एम) और प्रकाश करात — किसानों की ओर से आंदोलन, प्रति एकड़ 10 लाख रुपये व 2013 कानून के क्रियान्वयन की मांग, मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का निर्णय।
  • पुलिस व जिला प्रशासन — धारा 144, बैरिकेड और बाइंड ओवर समन के जरिये कानून-व्यवस्था बनाम प्रदर्शन के अधिकार का संतुलन।
  • पट्टाधारक किसान — मुआवजा आवंटन में भ्रष्टाचार व रिकॉर्ड में हेराफेरी के कारण वैध हकदार वंचित होने का आरोप।
  • ओरवाकल/कुरनूल क्षेत्र के किसान — सोलर प्लांट व औद्योगिक इकाइयों के नाम पर भूमि अधिग्रहण का विरोध।

क्यों अहम है

नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगीकरण के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण अब भारत में विकास बनाम आजीविका का केंद्रीय टकराव बन गया है; यहां दस हजार एकड़ लेने के बाद भी मुआवजे व पुनर्वास के वादे अधूरे रहने का आरोप है। असाइन्ड/सरकारी भूमि पर दशकों से खेती करने वाले किसानों का मामला दिखाता है कि कानूनी हकदारी न होने पर पुनर्वास किस तरह छूट जाता है। यह भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के आर एंड आर प्रावधानों के वास्तविक क्रियान्वयन और अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • नंबूलापूलकुंटा (एनपी कुंटा), अनंतपुर जिला, आंध्र प्रदेश — सोलर हब के लिए 10,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित।
  • सोलर हब के निर्माण की जिम्मेदारी एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) को दी गई।
  • वादा किया गया मुआवजा: प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये; सीपीआई(एम) की मांग: प्रति एकड़ कम से कम 10 लाख रुपये।
  • प्रकाश करात — सीपीआई(एम) पोलित ब्यूरो सदस्य; राज्य नेता वंगला सुब्बा राव व वाई वेंकटेश्वरलु साथ रहे।
  • परियोजना स्थल के 500 मीटर दायरे में सीआरपीसी की धारा 144 लागू; 22 जिला नेताओं को बाइंड ओवर समन।
  • करात के अनुसार: राज्य में उद्योग व हवाई अड्डों के लिए 15 लाख एकड़ अधिग्रहण का प्रस्ताव; भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) दो हवाई अड्डों के बीच 100 किमी से कम दूरी की अनुमति नहीं देता।

मेन्स दृष्टिकोण

अनंतपुर का सोलर हब विवाद हरित ऊर्जा संक्रमण और भूमि-आधारित आजीविका के बीच बढ़ते टकराव का उदाहरण है। सरकार ने एनटीपीसी को निर्माण सौंपते हुए दस हजार एकड़ ली और ग्राम सभाओं में प्रति एकड़ 2.10 लाख रुपये मुआवजा, रोजगार, कुछ भूमि तथा बकरी-भेड़ का आश्वासन दिया, परंतु स्रोत के अनुसार सैकड़ों किसानों—विशेषतः दशकों से असाइन्ड या सरकारी भूमि जोतने वालों—को यह नहीं मिला, और आवंटन में भ्रष्टाचार व रिकॉर्ड में हेराफेरी के कारण कुछ पट्टाधारक भी वंचित रहे। कारणों में हकदारी के अस्पष्ट अभिलेख, भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) प्रावधानों का अपूर्ण पालन और निजी कंपनियों के लिए सरकार द्वारा अधिग्रहण की भूमिका पर विवाद शामिल हैं; इसके परिणाम हैं किसान आंदोलन, पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव, धारा 144 व बाइंड ओवर समन जैसी दमनकारी प्रतिक्रियाएं तथा जिले में किसान आत्महत्याओं का मुद्दा। आगे का रास्ता स्रोत में उठाई गई मांगों के अनुरूप है—2013 कानून का अक्षरशः क्रियान्वयन, आर एंड आर पैकेज पूर्ण होने से पहले परियोजना न बढ़ाना, मुआवजा दर पर पुनर्विचार, अधिग्रहण सौदों की गहन जांच और फर्जी लाभार्थियों का उन्मूलन तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता।

मुख्य शब्द

सोलर हब
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा नंबूलापूलकुंटा में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना, जिसका निर्माण एनटीपीसी को सौंपा गया।
एनटीपीसी
नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन — इस सोलर हब के निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की विद्युत कंपनी।
भूमि अधिग्रहण कानून, 2013
अधिग्रहण में मुआवजा तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) सुनिश्चित करने वाला संसद द्वारा पारित कानून, जिसके पूर्ण पालन की मांग की गई।
असाइन्ड/सरकारी भूमि
वह भूमि जिसे किसान दशकों से जोत रहे थे परंतु पूर्ण मालिकाना हक न होने से मुआवजे में विवाद उत्पन्न हुआ।
सीआरपीसी की धारा 144
सार्वजनिक सभा पर रोक लगाने वाला प्रावधान, जो परियोजना स्थल के 500 मीटर दायरे में लागू किया गया।
बाइंड ओवर समन
शांति भंग की आशंका में व्यक्तियों को बाध्य करने हेतु जारी पुलिस नोटिस; यहां 22 सीपीआई(एम) जिला नेताओं को जारी किया गया।

अभ्यास प्रश्न

  1. नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण करते समय भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्रावधानों का पालन क्यों अनिवार्य है? अनंतपुर सोलर हब के उदाहरण से समझाइए।
  2. असाइन्ड या सरकारी भूमि पर दशकों से खेती करने वाले किसानों की मुआवजा हकदारी की समस्या पर चर्चा कीजिए और समाधान सुझाइए।
  3. क्या सरकार को निजी कंपनियों के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहित करनी चाहिए? इस बहस के पक्ष-विपक्ष का परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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