सेबी ने 25 लाख रुपये न्यूनतम निवेश वाला प्रिम मार्ग मंजूर किया

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 24 सितंबर 2026 को नया प्रिम (एमएफ-पीएमएस) मार्ग मंजूर किया, जिसके तहत पोर्टफोलियो मैनेजर ग्राहकों का धन म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान, ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विशेष निवेश फंड में लगा सकेंगे। न्यूनतम निवेश 25 लाख रुपये, नेटवर्थ 2 करोड़ रुपये और स्थिर प्रबंधन शुल्क ग्राहक एयूएम के 1 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। संबद्ध एएमसी योजनाओं में निवेश पर 25 प्रतिशत की सीमा है। आईपीओ, प्राथमिक ऋण निर्गम और विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की भी अनुमति दी गई।

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Sebi approved a new route, PRIM (MF-PMS), allowing portfolio managers to invest client money in direct plans of mutual funds, ETFs, index funds and SIFs. — Attributed to Sebi approval as stated in the source; figure and scheme details appear in source.
  • Minimum ticket size is Rs 25 lakh, net worth requirement Rs 2 crore, fixed management fee capped at 1% of client AUM, performance fee permitted. — All figures appear explicitly in the source's PRIM guidelines listing.
  • Investments in schemes of affiliated, group or associate AMCs capped at 25%. — Figure appears in source; no independent verification possible.
  • Discretionary PMS may invest up to 10% of client AUM in investment-grade, non-convertible unlisted debt with client consent. — Stated in source and echoed in an attributed quote from APMI chairman Vikas Khemani.
  • The measures were approved on 24 September 2026. — Date given in source without citing a specific Sebi document; editor should confirm.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

PRIM दरअसल उत्पाद नवाचार के लिबास में लागत-कटौती का कदम है: पोर्टफोलियो मैनेजमेंट को म्यूचुअल फंड के डायरेक्ट प्लान, ईटीएफ, इंडेक्स फंड और एसआईएफ के रास्ते मोड़कर सेबी वितरण कमीशन की परत हटा देता है और स्थिर प्रबंधन शुल्क को क्लाइंट एयूएम के 1% पर सीमित कर देता है। फायदा उस 25 लाख रुपये से ऊपर के निवेशक को है जो दो बार शुल्क दिए बिना पेशेवर एसेट एलोकेशन चाहता है; कीमत वितरण श्रृंखला चुकाएगी, जिसकी ट्रेल आय यह रास्ता बायपास करता है। आईपीओ, प्राइमरी डेट इश्यू, क्लाइंट एयूएम के 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट और विदेशी प्रतिभूतियों सहित व्यापक दायरा एक अलग दांव है — इससे रिटर्न के साधन बढ़ते हैं, पर जोखिम आंकना भी जटिल होता है।

  • PRIM का अर्थशास्त्र डायरेक्ट प्लान और 1% स्थिर शुल्क सीमा पर टिका है, जो कमीशन वाली बहुस्तरीय संरचनाओं की तुलना में निवेशक की कुल लागत घटाता है।
  • 25 लाख रुपये की न्यूनतम सीमा इसे संपन्न वर्ग तक सीमित रखती है, इसलिए निकट भविष्य में असर बड़े टिकट वाली बचत पर होगा, आम रिटेल भागीदारी पर नहीं।
  • संबद्ध या समूह एएमसी की योजनाओं पर 25% की सीमा हितों के टकराव पर अंकुश है, जिसका व्यापारिक पहलू यह है कि मैनेजर अपने ही उत्पादों में सीमित पैसा भेज सकेगा।
  • सीमित स्थिर शुल्क के साथ परफॉर्मेंस फीस की अनुमति मैनेजर की आय को नतीजों से जोड़ती है — इससे प्रोत्साहन संतुलित हो सकते हैं, पर अल्फा की तलाश में जोखिम बढ़ाने का सवाल भी उठता है।
  • आईपीओ, प्राइमरी डेट, सीमित अनलिस्टेड डेट और विदेशी प्रतिभूतियों की अनुमति शुल्क कमाने का दायरा बढ़ाती है और घरेलू पैसा प्राइमरी मार्केट तथा विदेशी परिसंपत्तियों की ओर मोड़ सकती है, पर अनलिस्टेड डेट में तरलता और मूल्यांकन जोखिम क्लाइंट का ही रहेगा।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि पोर्टफोलियो मैनेजर कितनी तेजी से अलग PRIM निवेश रणनीतियां पेश करते हैं और कमीशन वाले वितरण से पैसा डायरेक्ट-प्लान मैंडेट की ओर दिखाई देने लायक ढंग से खिसकता है या नहीं।

यह खबर अपेक्षित प्रवाह, पंजीकरण कराने वाले मैनेजरों की संख्या, परफॉर्मेंस फीस के बाद निवेशक की वास्तविक कुल लागत या 24 सितंबर 2026 की मंजूरी के आगे किसी क्रियान्वयन समयसीमा के बारे में कोई आंकड़ा स्थापित नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 1 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 24 सितंबर 2026 को पोर्टफोलियो प्रबंधन उद्योग के लिए कई बदलावों को मंजूरी दी, जिनमें सबसे प्रमुख है "प्रिम" (Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund units) मार्ग, जिसे आम भाषा में एमएफ-पीएमएस कहा जा रहा है। इसके तहत पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजर ग्राहकों का पैसा म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान, ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विशेष निवेश फंड (एसआईएफ) में लगा सकेंगे। अब तक पीएमएस में निवेश की न्यूनतम सीमा ऊँची होने और उत्पाद-चयन का बोझ निवेशक पर रहने की शिकायत रही है; प्रिम में न्यूनतम टिकट आकार 25 लाख रुपये रखा गया है। साथ ही सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजरों के लिए आईपीओ, प्राथमिक ऋण निर्गम, गैर-सूचीबद्ध ऋण और विदेशी प्रतिभूतियों का दायरा भी खोला है।

मुख्य तथ्य

  • सेबी ने 24 सितंबर 2026 को प्रिम (एमएफ-पीएमएस) मार्ग सहित कई प्रमुख उपायों को मंजूरी दी।
  • प्रिम के तहत न्यूनतम टिकट आकार 25 लाख रुपये और पोर्टफोलियो मैनेजर के लिए न्यूनतम नेटवर्थ 2 करोड़ रुपये निर्धारित।
  • प्रिम में अनुमत प्रतिभूतियाँ: भारतीय एएमसी की म्यूचुअल फंड डायरेक्ट प्लान, ईटीएफ, इंडेक्स फंड और एसआईएफ।
  • संबद्ध, समूह या सहयोगी एएमसी की योजनाओं में निवेश पर 25 प्रतिशत की सीमा।
  • स्थिर प्रबंधन शुल्क ग्राहक एयूएम के 1 प्रतिशत तक सीमित; प्रदर्शन-आधारित शुल्क मॉडल की अनुमति।
  • डीपीएमएस के तहत गैर-सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों में निवेश ग्राहक एयूएम के 10 प्रतिशत तक; प्रतिभूतियाँ निवेश-ग्रेड व गैर-परिवर्तनीय हों और ग्राहक की सहमति अनिवार्य।
  • पोर्टफोलियो मैनेजरों को आईपीओ तथा ऋण बाजार के प्राथमिक निर्गमों में निवेश की अनुमति।
  • डीपीएमएस और एनडीपीएमएस दोनों में विदेशी प्रतिभूतियाँ—सूचीबद्ध इक्विटी, ऋण, विदेशी रीट, ओवरसीज म्यूचुअल फंड, ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी ऋण—अनुमत।

समयरेखा

  1. 24 सितंबर 2026सेबी ने प्रिम (एमएफ-पीएमएस) मार्ग, आईपीओ व प्राथमिक ऋण निर्गम में निवेश, विदेशी प्रतिभूति ढांचा, आईएफएम और ईएफएम संबंधी उपायों को मंजूरी दी।

किसका दाँव

  • सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) — पूंजी बाजार नियामक, जिसने प्रिम के दिशानिर्देश, नेटवर्थ, शुल्क सीमा और गतिविधियों के पृथक्करण के नियम तय किए।
  • पोर्टफोलियो मैनेजर — मौजूदा मैनेजर अलग निवेश दृष्टिकोण के रूप में प्रिम पेश कर सकते हैं; नए आवेदक अलग पंजीकरण ले सकते हैं; आईएफएम की गतिविधियों की पूरी जिम्मेदारी उन पर रहेगी।
  • निवेशक (25 लाख रुपये से ऊपर वाले) — पेशेवर, विनियमित ढांचे में डायरेक्ट प्लान के जरिये पोर्टफोलियो प्रबंधन तक पहुँच; शुल्क 1 प्रतिशत तक सीमित।
  • एपीएमआई (एसोसिएशन ऑफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स इन इंडिया) — अध्यक्ष विकास खेमानी के अनुसार प्रिम पहुँच व्यापक बनाता है और गैर-सूचीबद्ध ऋण में 10 प्रतिशत छूट बेहतर जोखिम-समायोजित पोर्टफोलियो बनाने में मदद करेगी।
  • म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (एमएफडी) — एमएफडी और प्रिम गतिविधियों व ग्राहकों का पृथक्करण अनिवार्य, मान्यता प्राप्त निवेशकों को छोड़कर।
  • एसेट मैनेजमेंट कंपनियाँ (एएमसी) — डायरेक्ट प्लान में प्रवाह बढ़ने की संभावना, लेकिन संबद्ध/समूह एएमसी योजनाओं में 25 प्रतिशत की सीमा।

क्यों अहम है

प्रिम पहली बार म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान को एक विनियमित पोर्टफोलियो मैनेजर के अनुशासित निर्णय-तंत्र से जोड़ता है, जिससे फंड चयन, आवंटन और पुनर्संतुलन का दायित्व निवेशक से हटकर पेशेवर पर आता है। 1 प्रतिशत शुल्क सीमा, 25 प्रतिशत संबद्ध-एएमसी सीमा और एमएफडी-प्रिम पृथक्करण जैसे प्रावधान हितों के टकराव और लागत पर अंकुश लगाने का प्रयास हैं। आईपीओ, प्राथमिक ऋण निर्गम, गैर-सूचीबद्ध ऋण और विदेशी प्रतिभूतियों की अनुमति से पीएमएस उत्पादों का दायरा काफी चौड़ा होता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • प्रिम का पूरा नाम: Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Fund units; लोकप्रिय नाम एमएफ-पीएमएस।
  • प्रिम: न्यूनतम टिकट 25 लाख रुपये, नेटवर्थ 2 करोड़ रुपये, स्थिर शुल्क ग्राहक एयूएम के 1 प्रतिशत तक।
  • संबद्ध/समूह/सहयोगी एएमसी योजनाओं में निवेश सीमा 25 प्रतिशत।
  • डीपीएमएस में गैर-सूचीबद्ध, निवेश-ग्रेड, गैर-परिवर्तनीय ऋण में निवेश सीमा: ग्राहक एयूएम का 10 प्रतिशत, ग्राहक सहमति से।
  • आईएफएम (इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर) एक ही पोर्टफोलियो मैनेजर के अधीन काम कर सकता है, पर एक पोर्टफोलियो मैनेजर कई आईएफएम से जुड़ सकता है।
  • एपीएमआई के अध्यक्ष: विकास खेमानी (स्रोत के अनुसार)।

मेन्स दृष्टिकोण

सेबी द्वारा 24 सितंबर 2026 को स्वीकृत प्रिम मार्ग भारतीय परिसंपत्ति प्रबंधन ढांचे में एक संरचनात्मक बदलाव है: यह मानता है कि निवेशकों की मुख्य समस्या उत्पादों तक पहुँच नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो प्रबंधन की गुणवत्ता और अनुशासन है—कौन-से फंड रखें, कितना आवंटन करें, कब पुनर्संतुलन करें और बाजार चक्रों में स्थिर कैसे रहें (देज़र्व के सह-संस्थापक संदीप जेठवानी)। डायरेक्ट प्लान के अनिवार्य उपयोग, 1 प्रतिशत की स्थिर शुल्क सीमा और एमएफडी-प्रिम पृथक्करण से लागत और हितों के टकराव पर नियंत्रण का इरादा दिखता है, जबकि संबद्ध एएमसी योजनाओं पर 25 प्रतिशत की सीमा समूह-पक्षपात रोकने का उपाय है। दूसरी ओर, आईपीओ, प्राथमिक ऋण निर्गम, 10 प्रतिशत तक गैर-सूचीबद्ध निवेश-ग्रेड ऋण तथा विदेशी इक्विटी, ऋण, रीट व सरकारी बॉन्ड की अनुमति जोखिम-समायोजित रिटर्न के अवसर बढ़ाती है, पर तरलता, मूल्यांकन और उपयुक्तता के जोखिम भी लाती है—इसीलिए ग्राहक सहमति, निवेश-ग्रेड व गैर-परिवर्तनीय शर्तें रखी गई हैं। आगे की राह में 25 लाख रुपये के न्यूनतम आकार के कारण सीमित पहुँच, प्रदर्शन शुल्क के ढांचे की पारदर्शिता, तथा आईएफएम की गतिविधियों के लिए पोर्टफोलियो मैनेजर की पूर्ण उत्तरदायित्व-व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन प्रमुख कसौटियाँ होंगी।

मुख्य शब्द

प्रिम (PRIM)
म्यूचुअल फंड यूनिट में निवेश के लिए पोर्टफोलियो मैनेजर मार्ग; डायरेक्ट प्लान, ईटीएफ, इंडेक्स फंड व एसआईएफ में निवेश की अनुमति, न्यूनतम 25 लाख रुपये।
एसआईएफ (विशेष निवेश फंड)
भारतीय एएमसी द्वारा पेश की जाने वाली योजनाओं की श्रेणी, जो प्रिम के तहत अनुमत प्रतिभूतियों में शामिल है।
डीपीएमएस / एनडीपीएमएस
विवेकाधीन और गैर-विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाएँ; दोनों में विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश अनुमत, गैर-सूचीबद्ध ऋण केवल डीपीएमएस में 10 प्रतिशत तक।
आईएफएम (इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर)
पंजीकृत पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ जुड़कर ग्राहक पोर्टफोलियो प्रबंधित करने वाला मैनेजर; जिम्मेदारी व दायित्व पोर्टफोलियो मैनेजर का रहेगा।
ईएफएम ढांचा
एलिजिबल फंड मैनेजर निवेश ढांचा, जो विदेशी प्रतिभूतियों जैसे पात्र निवेशों के प्रबंधन और परामर्श के लिए पेश किया गया।
एयूएम
प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियाँ; प्रिम में स्थिर शुल्क और गैर-सूचीबद्ध ऋण सीमा इसी के प्रतिशत में तय होती है।

अभ्यास प्रश्न

  1. सेबी के प्रिम (एमएफ-पीएमएस) मार्ग की मुख्य विशेषताएँ बताते हुए परखें कि यह भारतीय खुदरा-उच्च निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो प्रबंधन की गुणवत्ता कैसे बदल सकता है।
  2. पोर्टफोलियो मैनेजरों को आईपीओ, प्राथमिक ऋण निर्गम, गैर-सूचीबद्ध ऋण और विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति देने के लाभ और जोखिमों का विश्लेषण कीजिए।
  3. प्रिम में 1 प्रतिशत शुल्क सीमा, 25 प्रतिशत संबद्ध एएमसी सीमा और एमएफडी-प्रिम पृथक्करण जैसे प्रावधान हितों के टकराव को किस हद तक संबोधित करते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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