तिरुपति जिले में आईटी नौकरी छोड़ खेती की ओर युवा

तिरुपति के आसपास के गांवों में नौकरी, आईटी क्षेत्र और शहरी जीवन छोड़कर खेती अपनाने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। वडमालपेट मंडल की स्वयंसेवी संस्था ग्लोविल 'युवा किसान आंदोलन' के तहत मृदा परीक्षण, फसल योजना और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण दे रही है। कोरोना काल में हैदराबाद की आईटी नौकरी गंवाने वाले सुशीलु (28) जैविक सब्जियों से हर सप्ताह 15 हजार रुपये तक कमा रहे हैं। बीटेक कर चुकी रम्या (26) यूट्यूब से सीखकर हाइड्रोपोनिक्स खेती कर रही हैं। जिले के आंकड़ों के अनुसार दो वर्षों में 18-35 आयु के 400 युवा किसान खेती में आए।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Around 400 young farmers aged 18-35 entered agriculture in Tirupati district in two years — Figure appears in source as district statistics, but no issuing agency or survey is named.
  • Susheelu (28) of Tiruchanoor mandal lost an IT job in Hyderabad during COVID-19 and now earns up to Rs 15,000 a week from organic vegetables — Stated in source as a case study; income figure unattributed to any document or official record.
  • Ramya (26) of Renigunta, a B.Tech graduate, learnt hydroponics on YouTube and sells in Tirupati — Personal account reported in source; not independently corroborated in the text.
  • Glovil, an NGO in Vadamalapeta mandal, runs a 'young farmer movement' offering soil testing, crop planning, digital marketing training and loan guidance — Attributed to the organisation; founder director Nuthan Venkateswara Varma is quoted on technology-linked rural employment.
  • 10-15 percent of the youth concerned moved from urban areas to villages — Source text shows a garbled figure ('1015 percent'), read as 10-15 percent; requires confirmation.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह ज़मीन की ओर लौटने की भावुक कहानी से ज़्यादा शहरी नौकरियों की गुणवत्ता पर एक संकेत है। कथन खुद इस बदलाव की वजह महामारी में नौकरी जाना, ठेके पर काम, कम वेतन और शहर के ऊंचे खर्च बताता है — आर्थिक भाषा में, युवा स्नातक शहर की तनख्वाह की तुलना पारिवारिक ज़मीन पर स्वरोज़गार से कर रहे हैं, जहां घर और भोजन का खर्च पहले से ही तय है। दिए गए उदाहरण सीमित स्तर पर उत्साहजनक हैं — एक 28 वर्षीय युवक जैविक सब्ज़ियों से कथित रूप से हफ़्ते में करीब 15 हज़ार रुपये कमा रहा है, दूसरी युवती ने यूट्यूब से सीखकर हाइड्रोपोनिक्स शुरू किया — लेकिन दो साल में एक जिले में 18-35 आयु वर्ग के 400 युवा एक छोटा दायरा है, श्रम बाज़ार का पलटाव नहीं।

  • यहां अर्थशास्त्र मूल्य-वर्धित खास खंडों पर टिका है — तिरुपति की शहरी मांग को बेचे जाने वाले जैविक उत्पाद और हाइड्रोपोनिक्स — पारंपरिक खेती पर नहीं, जहां मार्जिन पतला रहता है।
  • असली अड़चन आमतौर पर पूंजी और बाज़ार तक पहुंच होती है, और ठीक यहीं स्वयंसेवी संस्था की भूमिका मायने रखती है: मिट्टी परीक्षण, फसल योजना, डिजिटल मार्केटिंग और बैंक ऋण-सब्सिडी तक पहुंच में मदद प्रवेश लागत घटाती है।
  • ऑनलाइन बाज़ार लिंक से बिचौलियों को हटाना छोटे किसान के लिए मार्जिन का सबसे बड़ा सहारा है, और मात्रा तथा प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर सबसे नाज़ुक भी।
  • एक वास्तविक सार्वजनिक लाभ यह है कि तिरुपति के आसपास बेकार पड़ी ज़मीन फिर खेती में आ रही है, जिससे उत्पादन, स्थानीय आपूर्ति और कुछ ग्रामीण मज़दूरी के अवसर भी बढ़ते हैं।
  • दूसरी ओर जोखिम एकाग्रता का है: अगर बहुत से नए किसान एक ही शहर के बाज़ार में उसी प्रीमियम जैविक और हाइड्रोपोनिक खंड में उतरें, तो कीमतें और बताई गई आय तेज़ी से दब सकती हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि ये उद्यम पहली बड़ी कीमत गिरावट या फसल नुकसान से बच पाते हैं या नहीं, और विशेषज्ञ जिस नीति की मांग कर रहे हैं — ग्रामीण विकास, कृषि और युवा रोज़गार को जोड़ने वाली — वह एकमुश्त सब्सिडी के बजाय ऋण और कोल्ड-चेन सहयोग के रूप में सामने आती है या नहीं।

कथन में बताई गई आय के पीछे की लागत, ज़मीन का आकार, निवेश या शुद्ध मुनाफ़ा स्पष्ट नहीं है, न ही यह कि 400 युवा किसानों में से कितने आज भी खेती कर रहे हैं — इसलिए यह तय नहीं होता कि यह टिकाऊ लाभदायक मॉडल है या बेहतर शहरी नौकरियों के लौटने तक का अस्थायी सहारा।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तिरुपति जिले के आसपास के गांवों में एक नया रुझान दिख रहा है — नौकरी, आईटी क्षेत्र और शहरी जीवन छोड़कर युवा खेती की ओर लौट रहे हैं। वडमालपेट मंडल की स्वयंसेवी संस्था ग्लोविल 'युवा किसान आंदोलन' नाम से कार्यक्रम चलाकर इस बदलाव को प्रेरणा दे रही है। कोरोना काल में नौकरी छूटना, नौकरी की असुरक्षा, कम वेतन, शहरी तनाव और खर्च इस वापसी के प्रमुख कारण बताए गए हैं। पहले तिरुपति के आसपास की जो जमीनें बेकार पड़ी रहती थीं, अब वे फसलों से लहलहा रही हैं।

मुख्य तथ्य

  • तिरुपति जिले के आंकड़ों के अनुसार दो वर्षों में 400 युवा किसान खेती में आए।
  • इन युवा किसानों की आयु 18-35 वर्ष के बीच है।
  • स्रोत में दर्ज आंकड़े के अनुसार 10-15 प्रतिशत युवा शहरी क्षेत्रों से गांवों की ओर लौटे।
  • तिरुचानूर मंडल के सुशीलु (28) हैदराबाद में आईटी नौकरी करते थे; कोरोना काल में नौकरी गई और अब जैविक सब्जियों से हर सप्ताह 15 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।
  • रेणिगुंटा क्षेत्र की रम्या (26) ने बीटेक किया, नौकरी न मिलने पर यूट्यूब से सीखकर हाइड्रोपोनिक्स खेती शुरू की; उत्पादों को तिरुपति में अच्छा बाजार मिल रहा है।
  • ग्लोविल संस्था मृदा परीक्षण, फसल योजना और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण देती है।
  • संस्था उत्पाद सीधे बेचने के लिए ऑनलाइन मार्केट लिंक और बैंक ऋण व सब्सिडी पाने में मार्गदर्शन देती है।
  • स्रोत में उल्लिखित सरकारी योजनाएं: रैतु भरोसा, पीएम किसान और सब्सिडी प्रोत्साहन।

समयरेखा

  1. कोरोना कालसुशीलु की हैदराबाद की आईटी नौकरी चली गई; उन्होंने पारिवारिक छोटी जमीन पर जैविक सब्जियां उगाना शुरू किया।
  2. पिछले दो वर्षतिरुपति जिले में 18-35 आयु वर्ग के 400 युवा खेती में आए।
  3. वर्तमानग्लोविल 'युवा किसान आंदोलन' के तहत प्रशिक्षण और बाजार जोड़ रही है; सुशीलु सप्ताह में 15 हजार रुपये तक कमा रहे हैं।

किसका दाँव

  • युवा (18-35 वर्ष) — शहरी तनाव, अस्थायी नौकरियां, कम वेतन और नौकरी की असुरक्षा से मुक्ति; खेती में आय व आत्मनिर्भरता की तलाश।
  • ग्लोविल स्वयंसेवी संस्था, वडमालपेट मंडल — 'युवा किसान आंदोलन' के जरिये प्रशिक्षण, ऑनलाइन बाजार लिंक, ऋण-सब्सिडी मार्गदर्शन देना।
  • नूतन वेंकटेश्वर्मा, संस्थापक निदेशक, ग्लोविल — रोबोटिक्स, मौसम पूर्वानुमान जैसी तकनीकी सेवाओं में युवाओं के रोजगार अवसर बढ़ने को बदलाव का कारण बताते हैं।
  • राज्य सरकार — विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण विकास, कृषि और युवाओं की रुचि को जोड़ने वाली नीति बनाने की जिम्मेदारी।
  • तिरुपति के आसपास के गांव और भू-स्वामी — पहले बेकार पड़ी जमीनें अब फसलों से आबाद; ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार।
  • तिरुपति का उपभोक्ता बाजार — जैविक सब्जियों और हाइड्रोपोनिक्स उत्पादों की स्थानीय मांग व स्वस्थ जीवनशैली।

क्यों अहम है

यह उल्टा पलायन बताता है कि शहरी नौकरियों की अनिश्चितता के दौर में खेती युवाओं के लिए व्यवहारिक आय विकल्प बन सकती है, बशर्ते प्रशिक्षण, तकनीक और बाजार पहुंच मिले। जैविक खेती और हाइड्रोपोनिक्स जैसे तरीके बेकार पड़ी जमीन को उत्पादक बना रहे हैं और स्वास्थ्य व जलवायु चिंताओं से भी जुड़ते हैं। विशेषज्ञों की मांग है कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास, कृषि और युवाओं की रुचि को जोड़ने वाली नीति बनाए।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • ग्लोविल — वडमालपेट मंडल (तिरुपति जिला) की स्वयंसेवी संस्था, 'युवा किसान आंदोलन' कार्यक्रम की संचालक।
  • तिरुपति जिले में दो वर्षों में 18-35 आयु वर्ग के 400 युवा किसान खेती में आए; 10-15% शहरों से गांव लौटे।
  • हाइड्रोपोनिक्स — मिट्टी के बिना खेती; रेणिगुंटा की रम्या (26) ने यूट्यूब से सीखकर अपनाई।
  • स्रोत में उल्लिखित योजनाएं — रैतु भरोसा और पीएम किसान, साथ में सब्सिडी प्रोत्साहन।
  • ग्लोविल की सेवाएं — मृदा परीक्षण, फसल योजना, डिजिटल मार्केटिंग प्रशिक्षण, ऑनलाइन मार्केट लिंक, ऋण-सब्सिडी मार्गदर्शन।
  • नूतन वेंकटेश्वर्मा — ग्लोविल के संस्थापक निदेशक।

मेन्स दृष्टिकोण

तिरुपति जिले का यह उदाहरण दिखाता है कि कृषि से युवाओं का पलायन अपरिवर्तनीय नहीं है। कारण दोहरे हैं — धक्का (कोरोना काल में नौकरी जाना, अस्थायी नौकरियां, नौकरी की असुरक्षा, कम वेतन, महानगरों का तनाव, खर्च और मानसिक थकान) तथा खिंचाव (जैविक सब्जियों व हाइड्रोपोनिक्स उत्पादों का स्थानीय बाजार, यूट्यूब जैसे मुफ्त ज्ञान-स्रोत, रैतु भरोसा व पीएम किसान जैसी योजनाओं का सहारा, और रोबोटिक्स तथा मौसम पूर्वानुमान जैसी तकनीकी सेवाओं में उभरते अवसर)। इसके निहितार्थ हैं — बेकार पड़ी जमीन का पुनः उपयोग, ग्रामीण रोजगार, स्वास्थ्यकर खाद्य आपूर्ति और जलवायु-संवेदी खेती। परंतु यह बदलाव अभी छोटे पैमाने पर और एक स्वयंसेवी संस्था के सहारे है; सुशीलु की साप्ताहिक 15 हजार रुपये की आय को टिकाऊ बनाने के लिए मृदा परीक्षण, फसल योजना, डिजिटल मार्केटिंग, ऑनलाइन बिक्री लिंक तथा ऋण-सब्सिडी तक संस्थागत पहुंच जरूरी है। आगे का रास्ता, जैसा विशेषज्ञ सुझाते हैं, यह है कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास, कृषि और युवाओं की रुचि को एक साथ जोड़ने वाली स्पष्ट नीति बनाए, ताकि व्यक्तिगत सफलता की कहानियां व्यापक मॉडल बन सकें।

मुख्य शब्द

ग्लोविल
वडमालपेट मंडल की स्वयंसेवी संस्था, जो 'युवा किसान आंदोलन' चलाकर युवाओं को खेती में प्रशिक्षण व बाजार सहायता देती है।
युवा किसान आंदोलन
ग्लोविल द्वारा गांवों में चलाया गया विशेष कार्यक्रम, जिसमें मृदा परीक्षण, फसल योजना और डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण शामिल है।
हाइड्रोपोनिक्स खेती
स्रोत में उल्लिखित खेती की पद्धति, जिसे रम्या ने यूट्यूब से सीखकर अपनाया और तिरुपति में बाजार पाया।
जैविक (सेंद्रिय) खेती
रसायन-मुक्त खेती, जिसे स्रोत स्वस्थ जीवनशैली और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ से जोड़ता है।
रैतु भरोसा
स्रोत में नामित सरकारी योजना, जो किसानों को प्रोत्साहन देती है।
पीएम किसान
स्रोत में नामित केंद्र सरकार की किसान सहायता योजना।

अभ्यास प्रश्न

  1. तिरुपति जिले के उदाहरण के आधार पर बताइए कि युवाओं के कृषि की ओर लौटने के 'धक्का' और 'खिंचाव' कारक कौन-से हैं और नीति इन्हें कैसे मजबूत कर सकती है?
  2. स्वयंसेवी संस्थाएं (जैसे ग्लोविल) कृषि में प्रशिक्षण, बाजार पहुंच और वित्तीय समावेशन की खाई कैसे भरती हैं? चर्चा कीजिए।
  3. जैविक खेती और हाइड्रोपोनिक्स जैसी पद्धतियां छोटे जोत वाले किसानों की आय बढ़ाने में कितनी कारगर हो सकती हैं? तिरुपति के अनुभव से उदाहरण दें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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