केरल में 20,000 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं चल रहीं: वैष्णव
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को कहा कि केरल में इस समय 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं क्रियान्वयन में हैं। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने बताया कि चल रहे कार्यों में नौ मल्टीट्रैकिंग और नई लाइन परियोजनाएं, 145 फ्लाईओवर व अंडरपास तथा 19 स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं शामिल हैं। मंगलुरु रेल क्षेत्र को तीन जोन में बांटने से परिचालन समस्याएं पैदा हुईं, जिसे एसडब्ल्यूआर में रखने से हल होगा। केरल का रेल आवंटन 2014 के 372 करोड़ से बढ़कर एफवाई26-27 में 3,795 करोड़ रुपये हुआ।
स्रोत
Railways / IT / I&B — Ashwini Vaishnaw · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Projects worth more than Rs 20,000 crore are under execution in Kerala. — Attributed to Union Railway Minister Ashwini Vaishnaw; figure appears in source.
- Ongoing works cover nine multitracking and new-line projects, 145 flyovers and underpasses, and 19 station redevelopment projects. — Attributed to Vaishnaw's posts on X; source elsewhere says 35 stations are being redeveloped under Amrit Bharat, a possible internal inconsistency.
- Only 78 hectares of 618 hectares required have been acquired, and Rs 1,976 crore deposited with the Kerala government. — Figures appear in source, attributed to the minister; percentages stated as 13% acquired and 87% pending.
- Railway allocation for Kerala rose to Rs 3,795 crore in FY26-27 from Rs 372 crore in 2014. — Attributed to Vaishnaw; not independently verifiable here.
- Kerala Chief Minister is V D Satheesan; tweet dated September 21, 2026. — Stated in source without further sourcing; editor should confirm before publication.
विश्लेषकों की राय राय
केरल में रेल परियोजनाओं की लंबी सूची गिनाते हुए और 2014 के रु.372 करोड़ बनाम एफवाई26-27 के रु.3,795 करोड़ आवंटन की तुलना रखते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव उस राज्य में भाजपा के लिए 'विकास' का आख्यान मजबूत कर रहे हैं, जहां पार्टी परंपरागत रूप से कमजोर रही है। साथ ही यह रेखांकित करना कि भूमि अधिग्रहण केवल 13 प्रतिशत हुआ है और देरी से चल रही 52 आरओबी/आरयूबी परियोजनाओं में 34 भूमि अधिग्रहण के कारण अटकी हैं, देरी की जिम्मेदारी राज्य तंत्र की ओर मोड़ने की कोशिश है। केरल के सांसदों और अलग से मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन से मुलाकात का जिक्र सहयोग का संकेत देता है, पर केंद्र को ही प्रगति का मुख्य कर्ता बनाकर रखता है।
- रु.20,000 करोड़ की चालू परियोजनाएं, 19 स्टेशन पुनर्विकास और 145 फ्लाईओवर/अंडरपास जैसे आंकड़े केंद्र पर केरल की अनदेखी के आरोप का सीधा जवाब जैसे हैं।
- 2014 से तुलना करना केंद्र सरकार की जानी-पहचानी आख्यान शैली है, जो नाम लिए बिना पुराने दौर से तुलना करा देती है।
- 87 प्रतिशत भूमि अभी अधिग्रहित होनी है और रु.1,976 करोड़ राज्य के पास जमा हो चुके हैं — यह कहकर जवाबदेही का सवाल राज्य सरकार के दरवाजे पर रखा गया है।
- मंगलूरु को दक्षिण पश्चिम रेलवे में रखने का निर्णय केरल-कर्नाटक सीमावर्ती समन्वय से जुड़ा है, और जोन सीमाओं के मामले आमतौर पर स्थानीय व क्षेत्रीय संवेदनाएं छेड़ते हैं।
- रु.3,801 करोड़ की अंगमाली-सबरीमला नई लाइन की घोषणा राजनीतिक रूप से वजनदार है, क्योंकि तीर्थ संपर्क व्यापक वर्गों को छूता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि भूमि अधिग्रहण की गति और जमा राशि के उपयोग पर केंद्र-राज्य आरोप-प्रत्यारोप तेज होते हैं या नहीं, और 800 किलोमीटर से अधिक तीसरी-चौथी लाइन की डीपीआर कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं।
यह खबर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया, भूमि अधिग्रहण में देरी पर केरल का पक्ष, या इन घोषणाओं के चुनावी लाभ में बदलने की कोई पुष्टि नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को केरल के सांसदों तथा मुख्यमंत्री वी डी सतीशन से मुलाकात के बाद राज्य में चल रही और स्वीकृत रेल परियोजनाओं का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि केरल में इस समय 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं क्रियान्वयन में हैं और राज्य रेल विस्तार के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। बैठक में मंगलुरु रेल क्षेत्र को तीन जोन में बांटने से पैदा हुई परिचालन समस्याओं पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने एक्स पर श्रृंखलाबद्ध पोस्ट के जरिये मल्टीट्रैकिंग, स्टेशन पुनर्विकास, फ्लाईओवर-अंडरपास और भूमि अधिग्रहण की स्थिति साझा की।
मुख्य तथ्य
- केरल में 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाएं क्रियान्वयन में; इनमें नौ मल्टीट्रैकिंग व नई लाइन परियोजनाएं, 145 फ्लाईओवर-अंडरपास और 19 स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं शामिल।
- केरल के लिए केंद्र का रेल आवंटन 2014 के 372 करोड़ रुपये से बढ़कर एफवाई26-27 में 3,795 करोड़ रुपये।
- छह खंडों में 800 किलोमीटर से अधिक तीसरी-चौथी लाइन के लिए डीपीआर तैयार हो रही: शोरनूर-कोयंबटूर (99 किमी), मंगलुरु-शोरनूर (307 किमी), शोरनूर-एर्नाकुलम (106 किमी), एर्नाकुलम-कायनकुलम (115 किमी), कायनकुलम-तिरुवनंतपुरम (105 किमी), तिरुवनंतपुरम-नागरकोइल (71 किमी)।
- स्वीकृत परियोजनाओं में 116 किमी अंगमाली-सबरीमाला नई लाइन 3,801 करोड़ रुपये और 87 किमी त्रिवेंद्रम-कन्याकुमारी दोहरीकरण 4,509 करोड़ रुपये की।
- 2014 से 670 किमी की छह प्रमुख दोहरीकरण व गेज परिवर्तन परियोजनाएं कुल 4,316 करोड़ रुपये की लागत से पूरी।
- 4,786 करोड़ रुपये की लागत से 145 आरओबी/आरयूबी निर्माणाधीन (136 आरओबी, 8 आरयूबी, एक पैदल सबवे); इनमें 52 परियोजनाएं विलंबित—34 भूमि अधिग्रहण, 13 अलाइनमेंट, 5 एजेंसी न मिलने से।
- 618 हेक्टेयर आवश्यकता के मुकाबले केवल 78 हेक्टेयर (13%) अधिग्रहित; 540 हेक्टेयर (87%) शेष; रेलवे ने केरल सरकार के पास 1,976 करोड़ रुपये जमा कराए।
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत 3,111 करोड़ रुपये से 35 स्टेशनों का पुनर्विकास, इनमें 16 पूरे; राज्य में छह वंदे भारत एक्सप्रेस सेवाएं चालू।
समयरेखा
- 2014केरल के लिए रेल आवंटन 372 करोड़ रुपये था; इसके बाद से 670 किमी की छह दोहरीकरण/गेज परिवर्तन परियोजनाएं 4,316 करोड़ रुपये से पूरी हुईं।
- पिछले 12 वर्षकेरल में 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण, दोहरीकरण व गेज परिवर्तन पूरे, 131 फ्लाईओवर-अंडरपास बने, अमृत भारत योजना में 16 स्टेशन पुनर्विकसित।
- पिछले पांच वर्षकेरल में 180 से अधिक नए ठहराव (स्टॉपेज) दिए गए।
- पिछले दो वर्ष22 नई ट्रेन सेवाएं शुरू की गईं; एर्नाकुलम-कायमकुलम, शोरनूर-निलंबूर रोड, कोल्लम-एर्नाकुलम व पालक्काड-पोल्लाची पर मेमू सेवाएं।
- 21 सितंबर 2026 (सोमवार)वैष्णव ने केरल के सांसदों व मुख्यमंत्री वी डी सतीशन से चर्चा की, एक्स पर परियोजनाओं का ब्योरा दिया।
- एफवाई26-27केरल के लिए रेल आवंटन 3,795 करोड़ रुपये।
किसका दाँव
- रेल मंत्रालय / अश्विनी वैष्णव — केरल में क्षमता विस्तार, मल्टीट्रैकिंग, स्टेशन पुनर्विकास और परिचालन समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी।
- केरल सरकार व मुख्यमंत्री वी डी सतीशन — भूमि अधिग्रहण में सहयोग; रेलवे ने 1,976 करोड़ रुपये राज्य के पास जमा किए, 87% भूमि अभी अधिग्रहित होनी है।
- केरल के सांसद — मंगलुरु रेल क्षेत्र की परिचालन समस्याओं और राज्य के रेल नेटवर्क विकास को उठाना।
- दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) — मंगलुरु को एसडब्ल्यूआर में रखने के निर्णय से तीन जोन में बंटे क्षेत्र की परिचालन दिक्कतें हल होने की अपेक्षा।
- यात्री व स्थानीय समुदाय — छह वंदे भारत, 22 नई ट्रेनें, 180+ नए ठहराव, मेमू सेवाएं तथा स्टेशन पुनर्विकास से बेहतर कनेक्टिविटी।
- भूमि मालिक/प्रभावित परिवार — अंगमाली-सबरीमाला नई लाइन व पैच दोहरीकरण के लिए अधिग्रहण—मुआवजा और विस्थापन के मुद्दे।
क्यों अहम है
केरल का संकरा उत्तर-दक्षिण रेल गलियारा राज्य की आर्थिक धमनी है और तीसरी-चौथी लाइन तथा दोहरीकरण से ही क्षमता की अड़चन दूर हो सकती है। लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि धन की तुलना में भूमि अधिग्रहण बड़ी बाधा है—618 हेक्टेयर में से मात्र 13% ही मिली है और 145 में से 52 पुल-परियोजनाएं विलंबित हैं। इससे केंद्र-राज्य समन्वय, परियोजना क्रियान्वयन क्षमता और जोन पुनर्गठन जैसे प्रशासनिक मुद्दे केंद्र में आ जाते हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- अमृत भारत स्टेशन योजना: केरल में 35 स्टेशनों का 3,111 करोड़ रुपये से पुनर्विकास, 16 पूरे।
- मंगलुरु रेल क्षेत्र को दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) जोन में रखने का निर्णय; पहले तीन जोन में बंटा था।
- केरल में 100 प्रतिशत रेल विद्युतीकरण पिछले 12 वर्षों में पूरा।
- अंगमाली-सबरीमाला नई लाइन: 116 किमी, 3,801 करोड़ रुपये (भूमि अधिग्रहण के कारण विलंबित, 111 किमी के रूप में भी उल्लिखित)।
- केरल में छह वंदे भारत एक्सप्रेस—मंगलुरु सेंट्रल-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, कासरगोड-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल, केएसआर बेंगलुरु-एर्नाकुलम जंक्शन (दोनों दिशाओं में)।
- केरल का रेल आवंटन: 2014 में 372 करोड़ रुपये, एफवाई26-27 में 3,795 करोड़ रुपये।
मेन्स दृष्टिकोण
केरल का रेल नेटवर्क मुख्यतः एकल/दोहरी लाइन वाले उत्तर-दक्षिण गलियारे पर निर्भर है, जिससे क्षमता संतृप्ति और परिचालन अड़चनें पैदा होती हैं; इसी कारण नौ मल्टीट्रैकिंग व नई लाइन परियोजनाएं, छह खंडों में 800 किमी से अधिक तीसरी-चौथी लाइन की डीपीआर, तथा 145 आरओबी/आरयूबी जैसे कार्य लिए गए हैं, और आवंटन 2014 के 372 करोड़ से एफवाई26-27 में 3,795 करोड़ रुपये हो गया है। परंतु क्रियान्वयन की असली बाधा वित्त नहीं, भूमि है—618 हेक्टेयर में से केवल 78 हेक्टेयर (13%) अधिग्रहित, 1,976 करोड़ रुपये राज्य सरकार के पास जमा होने के बावजूद; 52 पुल-परियोजनाएं विलंबित हैं जिनमें 34 भूमि अधिग्रहण, 13 अलाइनमेंट और पांच एजेंसी की नियुक्ति न होने से। दूसरा मुद्दा प्रशासनिक भूगोल का है—मंगलुरु क्षेत्र का तीन जोन में विभाजन परिचालन समस्या बना, जिसका समाधान उसे एसडब्ल्यूआर में रखने में देखा जा रहा है। आगे का रास्ता केंद्र-राज्य संयुक्त भूमि अधिग्रहण तंत्र, अलाइनमेंट का समयबद्ध निर्धारण, निविदा/एजेंसी चयन में तेजी, और अमृत भारत स्टेशन योजना तथा वंदे भारत-मेमू सेवाओं के विस्तार को क्षमता वृद्धि के साथ जोड़ने में है।
मुख्य शब्द
- मल्टीट्रैकिंग
- मौजूदा मार्ग पर तीसरी-चौथी लाइन या दोहरीकरण जोड़कर ट्रेन क्षमता बढ़ाने का कार्य।
- अमृत भारत स्टेशन योजना
- स्टेशनों के पुनर्विकास की रेलवे योजना; केरल में 35 स्टेशन, 3,111 करोड़ रुपये, 16 पूरे।
- एसडब्ल्यूआर (दक्षिण पश्चिम रेलवे)
- रेलवे का जोन जिसमें मंगलुरु को रखने का निर्णय परिचालन समस्याएं सुलझाने के लिए लिया गया।
- डीपीआर
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट—परियोजना स्वीकृति से पहले तैयार तकनीकी-वित्तीय दस्तावेज।
- आरओबी / आरयूबी
- रोड ओवरब्रिज और रोड अंडरब्रिज—समपार फाटक हटाकर सड़क-रेल क्रॉसिंग सुरक्षित बनाने वाले ढांचे।
- मेमू
- मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट—कम दूरी की उपनगरीय/क्षेत्रीय विद्युत ट्रेन सेवा।
अभ्यास प्रश्न
- केरल में रेल परियोजनाओं के विलंब में भूमि अधिग्रहण की भूमिका का परीक्षण कीजिए। केंद्र-राज्य समन्वय सुधारने के उपाय सुझाइए।
- रेलवे जोन के प्रशासनिक विभाजन (जैसे मंगलुरु का तीन जोन में बंटना) से परिचालन दक्षता कैसे प्रभावित होती है? उदाहरण सहित चर्चा कीजिए।
- क्षमता वृद्धि (मल्टीट्रैकिंग) और यात्री सुविधा (स्टेशन पुनर्विकास, वंदे भारत) के बीच निवेश प्राथमिकता कैसे तय की जानी चाहिए? तर्क दीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
