शिक्षा तमिलनाडु

सहायक प्राध्यापक परीक्षा: अभ्यर्थियों ने स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन समिति की मांग की

तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड (टीआरबी) द्वारा पिछले दिसंबर में आयोजित सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में शामिल कुछ अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में विसंगतियों का हवाला देते हुए स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। सोमवार को पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पेपर-1 में 150 में से 100 से अधिक अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को 50 अंकों के पेपर-2 में इकाई अंक या शून्य मिले। उनका आरोप है कि टीआरबी ने उनके सवालों और आरटीआई आवेदनों का जवाब नहीं दिया।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Aspirants want the Higher Education Department to form an independent panel, including a statistician, to re-evaluate Paper II scripts — Attributed to unnamed aspirants at a Monday media conference; no official confirmation in source.
  • Some candidates scoring over 100 of 150 in Paper I scored single digits or zero in Paper II (maximum 50) — Figures appear in source but are based on aspirants' own reading of the merit list; not independently verified in text.
  • TRB stonewalled questions and RTI queries — Direct quote from an unnamed aspirant; TRB response absent.
  • Paper II answer keys were supplied under Madras High Court orders and show deviations — Attributed to aspirants who filed cases; court order details not specified.
  • TRB did not scale Paper II scores despite multiple evaluations — Unattributed assertion by aspirants; no official source given.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह मूलतः किसी एक नतीजे की नहीं, बल्कि परीक्षा-प्रणाली के डिज़ाइन की शिकायत है — अभ्यर्थी जो पैटर्न बता रहे हैं, यानी वस्तुनिष्ठ पेपर में ऊँचे अंक और निबंध पेपर में इकाई अंक या शून्य, वह विषयनिष्ठ मूल्यांकन में असमानता की ओर इशारा कर सकता है। बहुस्तरीय मूल्यांकन के बावजूद पेपर-2 के अंकों को स्केल न करने का आरोप, यदि सही निकले, तो यह प्रक्रियागत चूक होगी। लेकिन बहुविकल्पीय पेपर में अच्छे अंक का अर्थ यह नहीं कि निबंध लेखन भी उतना ही मज़बूत होगा — इसलिए पैटर्न अपने आप में प्रमाण नहीं है।

  • असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति करियर तय करने वाला फैसला है, इसलिए मूल्यांकन पद्धति में पारदर्शिता शासन की ज़िम्मेदारी है, रियायत नहीं।
  • वस्तुनिष्ठ पेपर का मूल्यांकन यांत्रिक होता है, पर निबंध पेपर में परीक्षक-दर-परीक्षक अंतर आता है — इसीलिए कई प्रतियोगी परीक्षाओं में स्केलिंग और मॉडरेशन जैसे सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।
  • पेपर-2 की उत्तर-कुंजी कथित रूप से अदालत के आदेश पर ही मिली और आरटीआई प्रश्न अनुत्तरित रहे — यह दिखाता है कि सूचना नियमित पारदर्शिता से नहीं, मुकदमेबाज़ी के रास्ते आ रही है।
  • योजनाओं के उद्देश्य और प्रभाव पूछने वाले प्रश्न में परिचय, कार्यान्वयन और निष्कर्ष के लिए अलग अंक देने की आपत्ति, प्रश्न और अंक-योजना के बीच तालमेल की समस्या उठाती है।
  • सांख्यिकीविद् सहित स्वतंत्र समिति की मांग महत्वपूर्ण है — यह केवल उत्तर-पुस्तिकाएँ दोबारा जाँचने की नहीं, अंकों के वितरण की पड़ताल की मांग है, और बोर्ड की आंतरिक समीक्षा से अधिक विश्वसनीय कसौटी है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि टीआरबी या उच्च शिक्षा विभाग अपनी मूल्यांकन और स्केलिंग पद्धति स्पष्ट करता है या नहीं, और मद्रास उच्च न्यायालय में लंबित मामले किस दिशा में बढ़ते हैं।

यह खबर यह सिद्ध नहीं करती कि मूल्यांकन में वास्तव में गड़बड़ी हुई — ये नाम न बताने वाले अभ्यर्थियों के आरोप हैं, और इसमें टीआरबी का पक्ष शामिल नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड (टीआरबी) ने पिछले वर्ष दिसंबर में सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें पेपर-1 (विषय आधारित बहुविकल्पीय, कुल 150 अंक) और पेपर-2 (सामान्य निबंध, अधिकतम 50 अंक) शामिल थे। टीआरबी द्वारा जारी मेरिट सूची में मूल्यांकन संबंधी विसंगतियों का आरोप लगाते हुए कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। कुछ अभ्यर्थी मद्रास उच्च न्यायालय भी गए, जिसके आदेश पर उन्हें हाल ही में पेपर-2 की उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि टीआरबी ने उनके प्रश्नों और आरटीआई आवेदनों का उत्तर नहीं दिया।

मुख्य तथ्य

  • टीआरबी ने सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा पिछले वर्ष दिसंबर में आयोजित की थी।
  • पेपर-1 विषय आधारित बहुविकल्पीय प्रकार का था और कुल 150 अंकों का था; पेपर-2 सामान्य निबंध का था जिसमें अधिकतम अंक 50 थे।
  • पेपर-1 में 150 में से 100 से अधिक अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों को पेपर-2 में बहुत कम अंक मिले — कुछ को इकाई अंक (सिंगल डिजिट) या शून्य।
  • इसी तरह, पेपर-1 में 50% से कम अंक पाने वाले कई अभ्यर्थियों ने पेपर-2 में उच्च अंक प्राप्त किए।
  • अभ्यर्थियों की मांग: उच्च शिक्षा विभाग मूल्यांकन और शिक्षणशास्त्र में अनुभवी विषय विशेषज्ञों की समिति बनाए, जिसमें एक सांख्यिकीविद् भी शामिल हो।
  • मद्रास उच्च न्यायालय में मामला दायर करने वाले अभ्यर्थियों को अदालत के आदेश पर हाल ही में पेपर-2 की उत्तर कुंजी दी गई, जिसमें भी कई विचलन पाए गए।
  • उत्तर कुंजी में तमिलनाडु की योजनाओं के उद्देश्य और प्रभाव पर पूछे गए प्रश्न में उद्देश्य व प्रभाव के लिए दो-दो अंक के अलावा भूमिका, कार्यान्वयन और निष्कर्ष के लिए अलग अंक दिए गए थे।
  • अभ्यर्थियों के अनुसार टीआरबी ने पेपर-2 के अंकों का स्केलिंग नहीं किया, जबकि कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में यह प्रथा है, भले ही उत्तर पुस्तिकाओं का कई बार मूल्यांकन हुआ।

समयरेखा

  1. पिछले वर्ष दिसंबरटीआरबी द्वारा सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का आयोजन (पेपर-1 और पेपर-2)।
  2. तिथि स्रोत में नहीं बताई गईटीआरबी द्वारा मेरिट सूची जारी; अभ्यर्थियों ने अंकों में असामान्य पैटर्न देखकर बोर्ड से स्पष्टीकरण और आरटीआई के जरिए जानकारी मांगी।
  3. तिथि स्रोत में नहीं बताई गईकुछ अभ्यर्थियों ने विसंगतियों के विरुद्ध मद्रास उच्च न्यायालय में मामले दायर किए।
  4. हाल ही मेंअदालत के आदेश के अनुसार अभ्यर्थियों को पेपर-2 की उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई।
  5. सोमवार (समाचार 22 सितंबर 2026 को प्रकाशित)अभ्यर्थियों ने पत्रकार सम्मेलन कर स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से पुनर्मूल्यांकन की मांग की।

किसका दाँव

  • परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी — सहायक प्राध्यापक पदों पर नियुक्ति का अवसर; पेपर-2 के मूल्यांकन में कथित विसंगतियों से मेरिट सूची में स्थान प्रभावित।
  • तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड (टीआरबी) — परीक्षा संचालन और मूल्यांकन की विश्वसनीयता; अभ्यर्थियों के प्रश्नों व आरटीआई आवेदनों का उत्तर न देने का आरोप।
  • उच्च शिक्षा विभाग, तमिलनाडु — अभ्यर्थियों की मांग है कि वह विषय विशेषज्ञों व एक सांख्यिकीविद् वाली पुनर्मूल्यांकन समिति गठित करे।
  • मद्रास उच्च न्यायालय — विसंगतियों पर दायर मामलों की सुनवाई; इसके आदेश से पेपर-2 की उत्तर कुंजी अभ्यर्थियों को मिली।
  • मूल्यांकनकर्ता/परीक्षक — पेपर-2 की उत्तर पुस्तिकाओं का कई बार मूल्यांकन हुआ, परंतु अंकों की स्केलिंग नहीं की गई।

क्यों अहम है

सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं की वैधता उनके मूल्यांकन की पारदर्शिता और एकरूपता पर टिकी होती है; निबंध जैसे व्यक्तिपरक पेपर में असामान्य अंक पैटर्न भरोसे को कमजोर करता है। अभ्यर्थियों के अनुसार सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी न मिलने पर उन्हें अदालत जाना पड़ा, जिससे जवाबदेही का प्रश्न खड़ा होता है। उच्च शिक्षा संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति की गुणवत्ता और निष्पक्षता सीधे छात्रों व संस्थागत मानकों को प्रभावित करती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड (टीआरबी) राज्य में सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा आयोजित करता है।
  • इस परीक्षा में पेपर-1: विषय आधारित बहुविकल्पीय, 150 अंक; पेपर-2: सामान्य निबंध, अधिकतम 50 अंक।
  • अभ्यर्थियों की मांग — उच्च शिक्षा विभाग विषय विशेषज्ञों और एक सांख्यिकीविद् की समिति बनाकर पुनर्मूल्यांकन कराए।
  • मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर अभ्यर्थियों को पेपर-2 की उत्तर कुंजी उपलब्ध कराई गई।
  • आरोप: पेपर-2 के अंकों की स्केलिंग नहीं की गई, जबकि कई प्रतियोगी परीक्षाओं में यह प्रथा है।
  • समाचार प्रकाशन तिथि: 22 सितंबर 2026; परीक्षा पिछले वर्ष दिसंबर में आयोजित।

मेन्स दृष्टिकोण

तमिलनाडु में टीआरबी की सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का विवाद वस्तुनिष्ठ और व्यक्तिपरक पत्रों के बीच मूल्यांकन की असंगति का उदाहरण है: पेपर-1 (150 अंक, बहुविकल्पीय) में 100 से अधिक अंक पाने वाले कुछ अभ्यर्थी पेपर-2 (निबंध, 50 अंक) में इकाई अंक या शून्य पर सिमट गए, तो 50% से कम अंक वालों ने निबंध में उच्च अंक पाए। अभ्यर्थियों के अनुसार कारण हैं — बहु-मूल्यांकन के बावजूद अंकों की स्केलिंग का अभाव, उत्तर कुंजी में विचलन (उदाहरणतः योजनाओं के उद्देश्य व प्रभाव पर पूछे प्रश्न में भूमिका, कार्यान्वयन, निष्कर्ष के लिए भी अलग अंक) और बोर्ड द्वारा प्रश्नों व आरटीआई आवेदनों पर चुप्पी। इसके निहितार्थ गंभीर हैं: मेरिट सूची की वैधता पर संदेह, अभ्यर्थियों का न्यायालय की शरण लेना और भर्ती में विलंब। आगे का रास्ता अभ्यर्थियों की मांग में निहित दिखता है — मूल्यांकन व शिक्षणशास्त्र में अनुभवी विषय विशेषज्ञों तथा एक सांख्यिकीविद् वाली स्वतंत्र समिति द्वारा पुनर्मूल्यांकन, उत्तर कुंजी व मूल्यांकन मानदंडों का सक्रिय प्रकटीकरण, और आरटीआई प्रश्नों का समयबद्ध उत्तर, जिससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता व विश्वास बहाल हो। (स्रोत में सरकार या टीआरबी की प्रतिक्रिया नहीं बताई गई है।)

मुख्य शब्द

टीआरबी (तमिलनाडु शिक्षक भर्ती बोर्ड)
वह निकाय जिसने पिछले दिसंबर में सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा आयोजित की और मेरिट सूची जारी की।
पेपर-1
विषय आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नपत्र, कुल 150 अंक।
पेपर-2
सामान्य निबंध प्रश्नपत्र, अधिकतम 50 अंक; इसी के मूल्यांकन पर विवाद है।
स्केलिंग
अंकों को समतुल्य बनाने की प्रक्रिया, जो कई प्रतियोगी परीक्षाओं में होती है; अभ्यर्थियों का आरोप है कि पेपर-2 में यह नहीं की गई।
उत्तर कुंजी (आंसर की)
मूल्यांकन का आधार दस्तावेज; अदालत के आदेश पर पेपर-2 की उत्तर कुंजी अभ्यर्थियों को दी गई, जिसमें विचलन बताए गए।
आरटीआई
सूचना का अधिकार, जिसके तहत मांगी गई जानकारी अभ्यर्थियों के अनुसार टीआरबी ने नहीं दी।

अभ्यास प्रश्न

  1. सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में व्यक्तिपरक (निबंध) पत्रों के मूल्यांकन में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है? टीआरबी सहायक प्राध्यापक परीक्षा विवाद के आलोक में चर्चा करें।
  2. क्या भर्ती बोर्डों के लिए उत्तर कुंजी और मूल्यांकन मानदंडों का सक्रिय प्रकटीकरण अनिवार्य होना चाहिए? आरटीआई और न्यायिक हस्तक्षेप की भूमिका के संदर्भ में परीक्षण करें।
  3. प्रतियोगी परीक्षाओं में अंकों की 'स्केलिंग' क्या है और बहु-मूल्यांकन वाली परीक्षाओं में इसकी आवश्यकता क्यों मानी जाती है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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