चार साल से छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप पर लाल चेतावनी का प्रस्ताव
भारत का दवा नियामक कफ सिरप के लेबल पर लाल रंग की चेतावनी छापने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें कहा जाएगा कि यह दवा चार साल से कम उम्र के बच्चों को न दी जाए; साथ में स्कूल जाने वाले बच्चों का चित्र भी होगा। ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में बदलाव मांगने वाला प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी के पास है। शिकायत के मुताबिक अक्टूबर 2025 की डीजीएचएस सलाह के बाद भी दो साल से छोटे बच्चों को सिरप दिए जा रहे थे। 9 जून की संशोधित नियमावली से सिरप अब पर्चे पर ही मिलेंगे।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- India's drug regulator is examining a proposal for a red warning on cough syrup labels saying the product should not be used in children below four years — Attributed to a proposal 'seen by ET'; wording of the warning quoted in source, proposal not yet approved.
- The proposal, submitted to the Drugs Consultative Committee, seeks changes to Rule 96 of the Drugs Rules, 1945, and suggests a pictorial of school-age children on labels — Figures and rule number appear in the source as part of the proposal document.
- An October 2025 DGHS advisory recommended cough and cold medicines not be prescribed to children below two years, but the practice continued — Attributed to DGHS advisory plus an unnamed 'person familiar with the matter' and a complaint; individual not identified.
- A CDSCO internal technical committee took up the issue in April 2026 and suggested consulting ICMR, which said it was not working on cough syrup labelling — Attributed to source narrative without named officials; internally consistent.
- Drugs (Fifth Amendment) Rules, 2026, notified on June 9, removed 'syrups' from Schedule K, making a prescription mandatory — Attributed to the health ministry notification and dates given in source.
विश्लेषकों की राय राय
यह उस स्थिति का उदाहरण है जहाँ सलाह से काम न चलने पर नियामक उत्पाद के डिज़ाइन पर हाथ डालता है। अक्टूबर 2025 की डीजीएचएस सलाह में दो साल से छोटे बच्चों को खाँसी-जुकाम की दवा न देने की बात कही गई थी, पर शिकायत के मुताबिक यह चलन जारी रहा — इसलिए अब प्रस्तावित उपाय जिम्मेदारी डॉक्टर के विवेक से हटाकर उत्पाद पर डालता है, यानी 1945 औषधि नियमों के नियम 96 में संशोधन के ज़रिये लेबल पर लाल चेतावनी और स्कूल-उम्र के बच्चों का चित्र। 9 जून के उस संशोधन के साथ पढ़ें, जिसने सिरप को शेड्यूल K से हटाकर पर्चा-अनिवार्य बनाया, तो दोहरी रणनीति दिखती है: काउंटर पर पहुँच सीमित करना और बोतल पर उम्र-सीमा को अनदेखा न रह जाने देना। डिज़ाइन का तर्क ठीक है, पर अगर असली वजह प्रिस्क्रिप्शन की आदतें हैं तो लेबलिंग प्रवर्तन का सबसे कमज़ोर औज़ार है।
- प्रस्ताव का असली महत्व यह स्वीकारोक्ति है कि नरम सलाह असरदार नहीं रही — लेबलिंग सख्त, नियम-आधारित विकल्प है, जिसके लिए नए सर्कुलर की जगह नियम 96 में संशोधन ज़रूरी है।
- चित्र वाला हिस्सा उस कमी को छूता है जहाँ सलाहें नहीं पहुँचतीं — घर पर खुद खुराक देने वाले अभिभावक, जो बारीक अक्षरों की चेतावनी नहीं पढ़ते या नहीं समझते।
- उम्र-सीमा में एक अस्पष्ट अंतर है — डीजीएचएस ने दो साल से कम कहा, लेबल प्रस्ताव में चार साल से कम — और खबर यह नहीं बताती कि व्यापक सीमा का नैदानिक या प्रशासनिक आधार क्या है।
- क्रम मायने रखता है: 9 जून से सिरप शेड्यूल K से बाहर और पर्चा-अनिवार्य होने के बाद लेबल चेतावनी मुख्यतः डॉक्टरों और केमिस्टों पर असर डालेगी, इसलिए असली अड़चन छपाई नहीं, बल्कि प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट और खुदरा अनुपालन है।
- प्रक्रिया काफी विचार-विमर्श वाली रही है — सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति, आईसीएमआर से परामर्श (जिसने कहा कि वह इस पर काम नहीं कर रहा), मार्केटिंग व्यवहार्यता पर हितधारकों से बातचीत और अब डीसीसी — पर हर चरण एक जारी समस्या के समाधान में देरी जोड़ता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि डीसीसी नियम 96 संशोधन को मंजूरी देती है या नहीं, कौन-सी उम्र-सीमा टिकती है — दो या चार — और क्या इसके साथ बाल-चिकित्सा प्रिस्क्रिप्शन तथा केमिस्ट-स्तर पर निगरानी का कोई तंत्र जुड़ता है, जिसके बिना लेबल केवल दिखावटी रह सकता है।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि कम उम्र के बच्चों को दवा देने का चलन कितना व्यापक है, चार साल की सीमा का आधार क्या है, डीसीसी प्रस्ताव मानेगी या नहीं, और लागू होने की समय-सीमा क्या होगी।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारत में कफ सिरप सबसे अधिक लिखी और बिना पर्चे खरीदी जाने वाली दवाओं में हैं, और बहुत छोटे बच्चों में इनका उपयोग लंबे समय से स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता का विषय रहा है। अक्टूबर 2025 में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने सलाह दी थी कि दो साल से छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं और न दी जाएं, लेकिन शिकायत मिली कि यह चलन जारी रहा। अब दवा नियामक एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जिसमें कफ सिरप की बोतल के लेबल पर लाल रंग की चेतावनी और स्कूल जाने वाले बच्चों का चित्र लगाने की बात है, ताकि चार साल से छोटे बच्चों में इनके उपयोग को हतोत्साहित किया जाए। जून 2026 में नियम संशोधन के बाद सिरप-आधारित दवाएं ओवर-द-काउंटर श्रेणी से हटाकर पर्चे के दायरे में ला दी गई हैं।
मुख्य तथ्य
- प्रस्तावित लेबल चेतावनी: "WARNING: Cough syrup should not be used in children below 4 years of age" — बोतल के लेबल पर लाल रंग में प्रमुखता से।
- प्रस्ताव में बोतल के लेबल पर स्कूल जाने की उम्र के बच्चों का चित्रात्मक चित्रण जोड़ने की भी बात है, ताकि स्पष्ट हो कि दवा बड़े बच्चों के लिए है।
- प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) के पास विचार के लिए भेजा गया है और इसमें ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में बदलाव मांगा गया है।
- अक्टूबर 2025 की डीजीएचएस सलाह में विशेष रूप से कहा गया था कि दो साल से छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न लिखी जाएं और न दी जाएं।
- शिकायत मिली कि डीजीएचएस के निर्देश के बाद भी दो साल से छोटे शिशुओं को कफ सिरप लिखे जा रहे थे।
- अप्रैल 2026 में सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने मामला उठाया और आईसीएमआर से परामर्श की सिफारिश की; आईसीएमआर ने कहा कि वह कफ सिरप लेबलिंग पर कोई काम नहीं कर रहा।
- ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 को स्वास्थ्य मंत्रालय ने 9 जून को अधिसूचित किया; अनुसूची K से "सिरप" शब्द हटा दिया गया।
- यह संशोधन 29 दिसंबर 2025 की मसौदा अधिसूचना के बाद आया, जिसमें हितधारकों और जनता से सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थीं।
समयरेखा
- अक्टूबर 2025डीजीएचएस ने सलाह जारी की — बाल रोगियों में खांसी-जुकाम की दवाएं सावधानी से दें; दो साल से छोटे बच्चों को न दी जाएं।
- 29 दिसंबर 2025स्वास्थ्य मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना जारी कर हितधारकों और जनता से सुझाव व आपत्तियां मांगीं।
- अप्रैल 2026सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने मुद्दा उठाया; आईसीएमआर से परामर्श और हितधारकों से लेबलिंग बदलाव की व्यवहार्यता पर चर्चा की सिफारिश।
- 9 जूनड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित; सिरप-आधारित दवाएं ओटीसी श्रेणी से हटीं, अब पर्चा अनिवार्य।
- वर्तमानचार साल से छोटे बच्चों के लिए लाल चेतावनी और चित्र वाला लेबलिंग प्रस्ताव डीसीसी के विचाराधीन।
किसका दाँव
- सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) — राष्ट्रीय दवा नियामक; उसकी आंतरिक तकनीकी समिति ने अप्रैल 2026 में मामला उठाया और लेबलिंग बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
- ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) — नियम 96 में प्रस्तावित संशोधन पर विचार करने वाली संस्था।
- डीजीएचएस (स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय) — अक्टूबर 2025 की सलाह जारी की, जिसका पालन न होने की शिकायत मिली।
- आईसीएमआर — परामर्श के लिए संपर्क किया गया; बताया कि वह कफ सिरप लेबलिंग पर कोई काम नहीं कर रहा।
- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय — ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित किए; ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से परामर्श के बाद निर्णय।
- शिशु, छोटे बच्चे और उनके अभिभावक — सुरक्षा सबसे ज्यादा दांव पर; चार साल से छोटे बच्चों में सिरप के उपयोग को हतोत्साहित करने का लक्ष्य।
- डॉक्टर, केमिस्ट और दवा कंपनियां — पर्चा अनिवार्य होने और नए लेबलिंग नियमों से नुस्खा लिखने, बिक्री व पैकेजिंग प्रक्रिया प्रभावित।
क्यों अहम है
कफ सिरप भारत में सबसे अधिक लिखी और बिना पर्चे खरीदी जाने वाली दवाओं में हैं, और बहुत छोटे बच्चों में इनका उपयोग विशेषज्ञों की पुरानी चिंता है। केवल सलाह जारी करने से चलन नहीं बदला, इसलिए नियामक अब लेबल पर दृश्य चेतावनी और पर्चा अनिवार्यता जैसे कानूनी-प्रवर्तनीय उपायों की ओर बढ़ रहा है। यह दिखाता है कि दवा सुरक्षा में सलाह से नियम तक का रास्ता कैसे तय होता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- ड्रग्स रूल्स, 1945 — औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के अंतर्गत बने; दवाओं के निर्माण, बिक्री व वितरण को नियंत्रित करते हैं।
- प्रस्तावित लेबलिंग बदलाव ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में किया जाना है; प्रस्ताव डीसीसी के पास।
- ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 — 9 जून को अधिसूचित; अनुसूची K से "सिरप" शब्द हटाया गया।
- अनुसूची K उन दवा श्रेणियों को सूचीबद्ध करती है जिन्हें अधिनियम की कुछ शर्तों से छूट मिलती है।
- ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) — देश की दवा नियमन से जुड़ी सर्वोच्च तकनीकी संस्था।
- अक्टूबर 2025 डीजीएचएस सलाह — दो साल से छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम की दवाएं न दी जाएं।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत में कफ सिरप का व्यापक ओवर-द-काउंटर उपयोग और शिशुओं में इनका नुस्खा एक स्थायी औषधि-सुरक्षा समस्या रहा है। अक्टूबर 2025 में डीजीएचएस की सलाह के बावजूद दो साल से छोटे बच्चों को सिरप दिए जाने की शिकायत मिली, जो यह दर्शाता है कि गैर-बाध्यकारी सलाहें नुस्खा-व्यवहार बदलने में सीमित असर रखती हैं। इसके जवाब में नियामक तंत्र दो स्तरों पर बढ़ा है — एक, ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के जरिये अनुसूची K से "सिरप" हटाकर इन दवाओं को पर्चे के दायरे में लाना; दो, नियम 96 में संशोधन कर लेबल पर लाल चेतावनी और स्कूल जाने की उम्र के बच्चों का चित्र अनिवार्य करने का प्रस्ताव, जो कम साक्षरता वाले उपभोक्ताओं तक भी संदेश पहुंचा सकता है। आगे की राह में चुनौतियां हैं: अप्रैल 2026 में सीडीएससीओ की तकनीकी समिति ने आईसीएमआर से परामर्श सुझाया था, पर आईसीएमआर ने कहा कि वह इस विषय पर काम नहीं कर रहा — यानी स्वदेशी साक्ष्य-आधार कमजोर है। साथ ही समिति ने लेबलिंग बदलाव की नियामकीय व विपणन व्यवहार्यता पर हितधारक परामर्श सुझाया, जो दर्शाता है कि उद्योग-अनुपालन और प्रवर्तन (केमिस्ट स्तर पर पर्चे की जांच) निर्णायक होंगे।
मुख्य शब्द
- सीडीएससीओ
- केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन — भारत का दवा नियामक; इसकी आंतरिक तकनीकी समिति ने यह मामला उठाया।
- डीसीसी (ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी)
- वह समिति जिसके पास नियम 96 में लेबलिंग संशोधन का प्रस्ताव विचार के लिए भेजा गया है।
- डीजीएचएस
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, जिसने अक्टूबर 2025 में बाल रोगियों को खांसी-जुकाम की दवाएं देने पर सतर्कता की सलाह दी।
- अनुसूची K (Schedule K)
- ड्रग्स रूल्स की वह अनुसूची जिसमें कुछ शर्तों से छूट प्राप्त दवा श्रेणियां सूचीबद्ध हैं; इससे "सिरप" शब्द हटा दिया गया।
- ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड
- दवा नियमन से जुड़ी देश की शीर्ष तकनीकी संस्था, जिसके परामर्श के बाद जून का संशोधन किया गया।
- ओवर-द-काउंटर (ओटीसी)
- बिना डॉक्टर के पर्चे के खरीदी जा सकने वाली दवाएं; सिरप अब इस श्रेणी से बाहर हैं।
अभ्यास प्रश्न
- क्या दवाओं पर चित्रात्मक और रंगीन चेतावनियां उपभोक्ता व्यवहार बदलने में प्रभावी होती हैं? भारत में कफ सिरप के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
- सलाह (एडवाइजरी) और नियम (रूल) में क्या अंतर है? अक्टूबर 2025 की डीजीएचएस सलाह और जून के ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के उदाहरण से समझाइए।
- भारत में सिरप-आधारित दवाओं को ओटीसी श्रेणी से हटाने के संभावित लाभ और व्यावहारिक चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।