‘विमर्श’ में डीआरडीओ ने 13 साझेदारों को नौ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते सौंपे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक ‘विमर्श’ में 13 विनिर्माण साझेदारों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नौ लाइसेंसिंग समझौते सौंपे। इनमें उन्नत पनडुब्बीरोधी नौसैनिक माइन, कम दूरी की जहाजरोधी मिसाइल का प्रोपेलेंट, ZnTe सिंगल क्रिस्टल ग्रोथ और पनडुब्बी से बचाव के लिए हाइड्रो सूट शामिल हैं। एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप के लिए प्रवेश बाधाएं कम करने वाली नीतिगत पहल भी घोषित हुईं। रक्षा सचिव आरके सिंह ने कहा, अब तक 1,100 से अधिक उद्योगों को 2,300 से अधिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण दिए गए हैं।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Nine Licensing Agreements for Transfer of Technology were handed over to 13 manufacturing partners on Tuesday. — Figure appears in source; handover attributed to Defence Minister Rajnath Singh at 'VIMARSH' and to a Ministry of Defence statement.
- Bharat Dynamics Ltd and Apollo Micro Systems Ltd will co-produce a multi-influence ground mine for the Navy. — Named in source; no separate company confirmation cited.
- Over 2,300 technology transfers have been made to more than 1,100 industries to date. — Attributed in source to Defence Secretary RK Singh.
- Technologies of about 50 DRDO-developed missiles have been made available to industry. — Attributed to Defence Secretary RK Singh; not independently verifiable here.
- By 2047 India must achieve Aatmanirbharta in critical technologies and multi-fold growth in defence exports. — Direct quote attributed to Rajnath Singh; a stated goal, not a verified outcome.
विश्लेषकों की राय राय
ऊपर से यह तकनीक हस्तांतरण का कार्यक्रम है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह 'आत्मनिर्भर भारत' के आख्यान को मज़बूत करने का एक और मंच है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं 13 कंपनियों को नौ लाइसेंसिंग समझौते सौंपे और 2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य दोहराया — यानी प्रशासनिक उपलब्धि को दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ने का परिचित राजनीतिक ढांचा। सरकारी कंपनी बीडीएल को निजी भागीदार के साथ रखते हुए एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप्स को भी जगह देना इस आरोप को पहले ही संतुलित करने की कोशिश है कि रक्षा उदारीकरण से केवल बड़ी निजी पूंजी को लाभ होता है।
- रक्षा आत्मनिर्भरता अब सरकार के लिए राजनीतिक रूप से सुरक्षित मुद्दा है — विपक्ष गति और अमल पर सवाल उठा सकता है, लक्ष्य पर नहीं।
- एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए प्रवेश बाधाएं घटाने की घोषणा छोटे उद्योगों को सीधा संदेश है और इस शिकायत का जवाब है कि रक्षा ठेके कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहते हैं।
- साझेदारों में हैदराबाद स्थित अपोलो माइक्रो सिस्टम्स, अनंत टेक्नोलॉजीज़ और प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स का नाम तेलंगाना के रक्षा-एयरोस्पेस क्लस्टर के लिए क्षेत्रीय राजनीतिक महत्व रखता है।
- नौसैनिक माइन के लिए सार्वजनिक उपक्रम बीडीएल को निजी भागीदार के साथ जोड़ना संतुलन का कदम है, जो पीएसयू की उपेक्षा वाले श्रमिक संगठनों के तर्क को कमज़ोर करता है।
- 1,100 से अधिक उद्योगों को 2,300 से अधिक हस्तांतरण जैसे आंकड़े तैयार प्रचार-सामग्री हैं, पर राजनीतिक विश्वसनीयता इस पर टिकेगी कि इनमें से कितने वास्तविक उत्पादन और ऑर्डर में बदलते हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि विपक्ष संसद में हस्तांतरणों के वास्तविक उत्पादन, ऑर्डर और निर्यात में बदलने पर सवाल उठाता है या नहीं, और रक्षा क्लस्टर वाले राज्य बड़े हिस्से के लिए दबाव बढ़ाते हैं या नहीं।
यह खबर इन समझौतों के आर्थिक मूल्य, उत्पादन समयसीमा, रोज़गार पर असर या किसी राजनीतिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 2 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अपनी प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों का व्यावसायिक उत्पादन कराने के लिए उद्योगों को लाइसेंसिंग समझौतों (LAToT) के जरिये तकनीक हस्तांतरित करता है। नई दिल्ली में आयोजित डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक 'विमर्श 2026' (थीम: 'वार्ता से विकास') में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 विनिर्माण साझेदारों को नौ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते सौंपे। इसके साथ एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप के लिए तकनीकी व वित्तीय प्रवेश बाधाएं घटाने वाला ढांचा, सॉफ्टवेयर सोर्स कोड साझा करने की व्यवस्था और गुणवत्ता परिषद के साथ SAMAR 2.0 अनुबंध भी घोषित हुए। यह पहल 2047 तक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य से जुड़ी है।
मुख्य तथ्य
- 'विमर्श' बैठक में 13 विनिर्माण साझेदारों को नौ प्रौद्योगिकी हस्तांतरण लाइसेंसिंग समझौते (LAToTS) सौंपे गए।
- हस्तांतरित तकनीकों में उन्नत पानी के भीतर नौसैनिक माइन, कम दूरी की जहाजरोधी मिसाइल का प्रोपेलेंट व इग्नाइटर, ZnTe सिंगल क्रिस्टल ग्रोथ और पनडुब्बी से बचाव हेतु हाइड्रो सूट शामिल हैं।
- रक्षा सचिव आरके सिंह के अनुसार अब तक 1,100 से अधिक उद्योगों को 2,300 से अधिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण दिए गए हैं।
- आरके सिंह ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित लगभग 50 मिसाइलों से संबंधित प्रौद्योगिकियां उद्योग को उपलब्ध कराई गई हैं।
- रक्षा पीएसयू भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और हैदराबाद की अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड नौसेना के लिए 'मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन' का सह-उत्पादन करेंगी।
- प्रोपेलेंट व इग्नाइटर उत्पादन के लिए तीन निजी विस्फोटक कंपनियां चुनी गईं: सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस, प्रीमियर एक्सप्लोसिव्स और साल्वो इंडस्ट्रीज।
- अनंत टेक्नोलॉजीज और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स को सेमी एक्टिव होमिंग लेजर सिस्टम (SALHS) के उत्पादन के लिए चुना गया।
- डीआरडीओ ने घरेलू रक्षा उद्यमों की विनिर्माण परिपक्वता आंकने के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के साथ SAMAR संस्करण 2.0 का अनुबंध किया।
समयरेखा
- फरवरी (स्रोत में वर्ष नहीं बताया गया)जेसीबीएल प्राइवेट लिमिटेड ने घोषणा की कि डीआरडीओ की एडीआरडीई प्रयोगशाला द्वारा विकसित स्वदेशी 20 टन हेवी ड्रॉप सिस्टम को सेना ने मान्य कर दिया है।
- मंगलवार (प्रकाशन 15 सितंबर 2026)नई दिल्ली में 'विमर्श 2026' में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 साझेदारों को नौ LAToTS सौंपे; एमएसएमई/स्टार्टअप ढांचा, सॉफ्टवेयर सोर्स कोड फ्रेमवर्क और SAMAR 2.0 अनुबंध की घोषणा।
किसका दाँव
- डीआरडीओ — प्रयोगशालाओं में विकसित प्रौद्योगिकियों का उद्योग के जरिये व्यावसायिक उत्पादन कराना और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच देना।
- रक्षा मंत्रालय / रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह — अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन व विनिर्माण की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाकर भारत को रक्षा विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना।
- निजी उद्योग (अपोलो माइक्रो सिस्टम्स, अनंत टेक्नोलॉजीज, जेसीबीएल, बिलविन इंडस्ट्रीज, यूफ्लो, ऑटोटेक, एक्सेलर, एंट्स इनोवेशंस, प्रगति डिफेंस आदि) — लाइसेंस के आधार पर उन्नत रक्षा प्रणालियों का उत्पादन और आपूर्ति शृंखला में हिस्सेदारी।
- भारत डायनामिक्स लिमिटेड (सरकारी उपक्रम) — नौसेना के लिए मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन का सह-उत्पादन।
- एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप — सीधी वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन समर्थन और डीआरडीओ परीक्षण सुविधाओं तक समर्पित पहुंच से प्रवेश बाधाएं घटेंगी।
- सशस्त्र बल (नौसेना, वायुसेना, सेना) — नौसैनिक माइन, हाइड्रो सूट, C-130 व C-17 के लिए हेवी ड्रॉप सिस्टम जैसी स्वदेशी प्रणालियों की आपूर्ति।
- भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) — SAMAR 2.0 के जरिये घरेलू रक्षा उद्यमों की विनिर्माण परिपक्वता का आकलन व रेटिंग।
क्यों अहम है
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से डीआरडीओ की प्रयोगशाला-स्तर की तकनीकें बड़े पैमाने पर उत्पादन में बदलती हैं, जिससे आयात पर निर्भरता घटती है और निजी क्षेत्र रक्षा आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बनता है। एमएसएमई व डीप-टेक स्टार्टअप के लिए वित्त, इनक्यूबेशन और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच खोलने से नवाचार का आधार व्यापक होगा। रक्षा मंत्री के अनुसार 2047 तक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी अंश में वृद्धि और रक्षा निर्यात में कई गुना बढ़ोतरी लक्ष्य है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 'विमर्श 2026' — डीआरडीओ-उद्योग समन्वय बैठक, थीम 'वार्ता से विकास', नई दिल्ली।
- LAToTS = लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी; 13 साझेदारों को नौ समझौते सौंपे गए।
- अब तक 1,100 से अधिक उद्योगों को 2,300 से अधिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण; लगभग 50 मिसाइलों की तकनीक उद्योग को उपलब्ध।
- SAMAR 2.0 — भारतीय गुणवत्ता परिषद के साथ डीआरडीओ का अनुबंध, विनिर्माण परिपक्वता के बेंचमार्किंग हेतु।
- 20 टन हेवी ड्रॉप सिस्टम डीआरडीओ की एडीआरडीई प्रयोगशाला द्वारा विकसित; C-130 हरक्यूलिस और C-17 ग्लोबमास्टर के लिए तकनीक हस्तांतरित।
- रक्षा सचिव आरके सिंह के पास डीआरडीओ अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की रणनीति का एक केंद्रीय उपकरण डीआरडीओ से उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण है, क्योंकि सरकारी प्रयोगशालाएं विकास कर सकती हैं पर बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए औद्योगिक क्षमता आवश्यक है। 'विमर्श 2026' में नौ LAToTS का 13 साझेदारों को हस्तांतरण, अब तक 1,100 से अधिक उद्योगों को 2,300 से अधिक हस्तांतरण और लगभग 50 मिसाइल-संबंधी तकनीकों की उपलब्धता इस मॉडल के विस्तार को दर्शाती है; भारत डायनामिक्स तथा निजी कंपनियों की साझा भागीदारी सार्वजनिक-निजी सहअस्तित्व का उदाहरण है। चुनौती केवल हस्तांतरण नहीं, बल्कि गुणवत्ता, अवशिष्ट/अप्रचलन प्रबंधन और छोटी कंपनियों की तकनीकी-वित्तीय क्षमता है—इसीलिए एमएसएमई व डीप-टेक स्टार्टअप के लिए प्रत्यक्ष वित्तपोषण, इनक्यूबेशन और परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच का ढांचा, सोर्स कोड साझा करने की सुरक्षित व्यवस्था तथा QCI के साथ SAMAR 2.0 जैसी रेटिंग प्रणाली महत्वपूर्ण हैं। आगे का रास्ता, जैसा रक्षा मंत्री ने कहा, सहयोग को केवल उत्पादन तक सीमित न रखकर अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण, प्रमाणन और विनिर्माण की पूरी वैल्यू चेन तक विस्तारित करना है, ताकि 2047 तक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी अंश में वृद्धि और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में मजबूत उपस्थिति हासिल हो।
मुख्य शब्द
- LAToT (लाइसेंसिंग एग्रीमेंट फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी)
- वह समझौता जिसके तहत डीआरडीओ की विकसित तकनीक का व्यावसायिक उत्पादन उद्योग को लाइसेंस के आधार पर सौंपा जाता है।
- मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन
- आधुनिक जहाजों और पनडुब्बियों को निशाना बनाने वाली नौसैनिक माइन, जिसे बीडीएल और अपोलो माइक्रो सिस्टम्स सह-उत्पादित करेंगी।
- SALHS (सेमी एक्टिव होमिंग लेजर सिस्टम)
- लेजर-गाइडेड बम, मिसाइल व तोप गोलों में इस्तेमाल होने वाली मार्गदर्शन प्रणाली जो उच्च-मूल्य लक्ष्यों पर अत्यंत सटीक प्रहार कराती है।
- ZnTe सिंगल क्रिस्टल ग्रोथ
- जिंक टेल्यूराइड क्रिस्टल तकनीक—छिपे रसायन/विस्फोटक की पहचान, ब्रॉडबैंड टेराहर्ट्ज़ अनुप्रयोग और वायरलेस संचार में उपयोगी।
- हेवी ड्रॉप सिस्टम
- डीआरडीओ की एडीआरडीई प्रयोगशाला द्वारा विकसित 20 टन क्षमता की प्रणाली, जिससे C-130 व C-17 विमानों से भारी सामग्री गिराई जाती है।
- SAMAR 2.0
- सिस्टम फॉर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग असेसमेंट एंड रेटिंग—घरेलू रक्षा उद्यमों की विनिर्माण परिपक्वता मापने की QCI-समर्थित व्यवस्था।
अभ्यास प्रश्न
- डीआरडीओ से उद्योग को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता में किस प्रकार योगदान देता है? 'विमर्श 2026' के उदाहरणों सहित परीक्षण कीजिए।
- रक्षा विनिर्माण में एमएसएमई और डीप-टेक स्टार्टअप के समक्ष प्रवेश बाधाएं क्या हैं और नई नीतिगत पहलें इन्हें कैसे दूर करती हैं? चर्चा कीजिए।
- रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों की सह-उत्पादन साझेदारी के लाभ और सीमाएं क्या हैं? मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन के संदर्भ में समझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
