राजनीति कोलकाता

बंगाल में अब कट-मनी की संस्कृति नहीं: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में अब कट-मनी की संस्कृति नहीं है। उन्होंने राज्य की करीब 1.5 करोड़ महिला लाभार्थियों को अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त के ₹3,000 जारी करने के बाद वर्चुअल संबोधन में यह बात कही। उन्होंने कहा कि बिना किसी बिचौलिये के पैसा सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जाता है। कोई पात्र महिला लाभ से वंचित नहीं रहेगी और 50 लाख से अधिक परिवारों को पक्के घर दिए जाएंगे।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • There is no longer a culture of cut-money in West Bengal. — Direct quote attributed to PM Narendra Modi; presented as his assertion, not independently verified in the source.
  • Modi released the fourth instalment of ₹3,000 under Annapurna Yojana to around 1.5 crore women in West Bengal. — Figures appear in the source as reported detail; no separate government document cited.
  • Trinamool Congress's Lakshmir Bhandar gave ₹1,500 per month to over 2.2 crore beneficiaries. — Comparative figure stated by the publication without an attributed source.
  • More than 50 lakh families will be identified and given pucca houses. — Attributed to Modi's address; forward-looking commitment, not an outcome.
  • Some women have protested, claiming denial of benefits despite eligibility. — Reported by the publication in general terms; no numbers, locations or named sources given.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह कार्यक्रम कल्याणकारी योजना से ज़्यादा पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शुरुआती महीनों का राजनीतिक हिसाब-किताब था। अन्नपूर्णा योजना की नकद राशि को "कट-मनी खत्म हो गई" के दावे से जोड़कर श्री मोदी भ्रष्टाचार-विरोधी चुनावी वादे को 1.5 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में महसूस किए जाने वाले अनुभव में बदलना चाहते हैं — यही वह वर्ग है जिसे तृणमूल कांग्रेस लक्ष्मीर भंडार के ज़रिये साधती रही। कमज़ोरी योजना के ढांचे में ही है: पुरानी योजना सार्वभौमिक थी, यह पात्रता और सत्यापन पर आधारित है, और हर छूटी हुई महिला विपक्ष के लिए एक मुद्दा बन सकती है।

  • सीधा बैंक हस्तांतरण यहां केवल प्रशासनिक नहीं, राजनीतिक तर्क के रूप में इस्तेमाल हो रहा है — दलील यह है कि बिचौलिया हटने से कमीशन लेने वाला स्थानीय राजनीतिक मध्यस्थ भी हट जाता है।
  • महिला मतदाता बंगाल में भाजपा की रणनीति का केंद्र दिखती हैं, जो उसी वर्ग को लक्षित करने वाली तृणमूल की मासिक नकद सहायता की रणनीति का प्रतिबिंब है।
  • सार्वभौमिक बनाम लक्षित योजना का अंतर सबसे तीखी राजनीतिक दरार है: खबर के मुताबिक पुरानी योजना 2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं तक पहुंचती थी, जबकि अन्नपूर्णा की सत्यापित सूची करीब 1.5 करोड़ है।
  • "एक भी पात्र महिला वंचित नहीं रहेगी" वाला आश्वासन उन प्रदर्शनों और बहिष्करण के विपक्षी आरोपों के खिलाफ पूर्व-सुरक्षा जैसा लगता है, जिनका ज़िक्र खबर में है।
  • 50 लाख से अधिक परिवारों को पक्के मकान का ऐलान और "रुकी हुई केंद्रीय योजनाओं" की बात इस तर्क को एक योजना से आगे बढ़ाकर यह व्यापक दावा बनाती है कि बंगाल को पहले उसका हक नहीं मिला।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सत्यापन के बाद लाभार्थियों की सूची पुरानी सार्वभौमिक पहुंच के करीब बढ़ती है या नहीं, और विपक्ष बिखरे विरोध प्रदर्शनों को राज्यव्यापी अभियान में बदल पाता है या नहीं।

यह खबर कट-मनी के वास्तव में खत्म होने की कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं देती, न ही यह बताती है कि कितनी पात्र महिलाएं छूट गई हैं या उन प्रदर्शनों पर सरकार का जवाब क्या है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में मई 2026 में विधानसभा चुनाव जीतकर भाजपा सरकार बनी और उसने चुनावी वादे के तहत महिलाओं के लिए 'अन्नपूर्णा योजना' शुरू की। यह योजना तृणमूल कांग्रेस सरकार की सार्वभौमिक 'लक्ष्मीर भंडार' योजना के जवाब में लाई गई थी, जिसमें 2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने ₹1,500 मिलते थे। 17 सितंबर 2026 को 'अन्नपूर्णा दिवस' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल संबोधन के जरिये योजना की चौथी किस्त जारी की और कहा कि राज्य में अब 'कट-मनी' की संस्कृति नहीं है। विपक्ष ने लाभार्थी सत्यापन की प्रक्रिया को वादे से पीछे हटना बताया है और कुछ महिलाओं ने पात्र होने के बावजूद लाभ न मिलने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किए हैं।

मुख्य तथ्य

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2026 (गुरुवार) को वर्चुअल संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल में अब कट-मनी की संस्कृति नहीं है।
  • अन्नपूर्णा योजना की चौथी किस्त के रूप में ₹3,000 राज्य की करीब 1.5 करोड़ महिला लाभार्थियों को जारी किए गए।
  • मोदी ने कहा कि पैसा बिना किसी बिचौलिये के सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जाता है।
  • यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन के दिन आयोजित हुआ।
  • तृणमूल कांग्रेस सरकार की लक्ष्मीर भंडार योजना में 2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रति माह ₹1,500 मिल रहे थे।
  • लक्ष्मीर भंडार सार्वभौमिक योजना थी, जबकि अन्नपूर्णा योजना में पात्रता मानदंड है।
  • मोदी ने कहा कि 50 लाख से अधिक परिवारों की पहचान कर उन्हें पक्के घर दिए जाएंगे।
  • कोलकाता के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी, राज्य कैबिनेट मंत्री तपस रॉय, राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती और मालती रावा रॉय उपस्थित रहे।

समयरेखा

  1. विधानसभा चुनाव प्रचार (तिथि स्रोत में नहीं)भाजपा ने अन्नपूर्णा योजना का वादा किया और कट-मनी भ्रष्टाचार रोकने का आश्वासन दिया।
  2. मई 2026भाजपा सत्ता में आई; सरकार बनने के कुछ दिनों में अन्नपूर्णा योजना पर काम शुरू और लाभार्थियों का सत्यापन शुरू हुआ।
  3. 17 सितंबर 2026'अन्नपूर्णा दिवस' कार्यक्रम; प्रधानमंत्री ने वर्चुअल संबोधन में चौथी किस्त ₹3,000 जारी की।
  4. 18 सितंबर 2026समाचार रिपोर्ट प्रकाशित (04:07 पूर्वाह्न IST)।

किसका दाँव

  • पश्चिम बंगाल की महिला लाभार्थी (करीब 1.5 करोड़) — अन्नपूर्णा योजना के तहत ₹3,000 की किस्त सीधे बैंक खाते में; पात्रता मानदंड के कारण लाभ से वंचित रहने का डर।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा नेतृत्व — कट-मनी रोकने और योजना पहुंचाने के चुनावी वादे को पूरा दिखाने की जवाबदेही।
  • पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार (मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी) — योजना का क्रियान्वयन, लाभार्थी सत्यापन और 50 लाख से अधिक परिवारों को पक्के घर देने का लक्ष्य।
  • तृणमूल कांग्रेस/विपक्ष — लक्ष्मीर भंडार की सार्वभौमिकता के मुकाबले सत्यापन प्रक्रिया को वादे से भटकाव बताकर राजनीतिक मुद्दा बनाना।
  • प्रदर्शन कर रही महिलाएं — पात्र होने के बावजूद योजना का लाभ न मिलने की शिकायत।
  • स्थानीय राजनेता/बिचौलिये — प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से कट-मनी वसूली की गुंजाइश घटने का दावा।

क्यों अहम है

बंगाल में महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाएं अब सीधे चुनावी और शासन-संबंधी बहस का केंद्र हैं—सार्वभौमिक लाभ बनाम पात्रता-आधारित लाभ। कट-मनी का दावा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से बिचौलियों की भूमिका खत्म होने के तर्क को आगे बढ़ाता है, जबकि सत्यापन से वंचित होने की शिकायतें इस मॉडल की सीमाएं दिखाती हैं। 1.5 करोड़ महिलाओं और 50 लाख से अधिक परिवारों के आवास वादे का पैमाना इसे राज्य की सबसे बड़ी कल्याण बहस बनाता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • अन्नपूर्णा योजना: पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार की महिला नकद हस्तांतरण योजना; चौथी किस्त ₹3,000, लगभग 1.5 करोड़ लाभार्थी।
  • लक्ष्मीर भंडार: तृणमूल कांग्रेस सरकार की सार्वभौमिक योजना; 2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह।
  • कट-मनी: सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले स्थानीय नेताओं द्वारा वसूला जाने वाला कमीशन।
  • पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार मई 2026 में सत्ता में आई; मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी।
  • 17 सितंबर 2026: 'अन्नपूर्णा दिवस' कार्यक्रम, प्रधानमंत्री का 76वां जन्मदिन।
  • प्रधानमंत्री की घोषणा: 50 लाख से अधिक परिवारों की पहचान कर पक्के घर दिए जाएंगे।

मेन्स दृष्टिकोण

पश्चिम बंगाल का अन्नपूर्णा योजना प्रकरण भारतीय कल्याण-राजनीति की दो प्रवृत्तियों को एक साथ दिखाता है: महिला-केंद्रित प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण का चुनावी विस्तार, और लाभार्थी चयन में सार्वभौमिकता बनाम लक्षित पात्रता का द्वंद्व। भाजपा ने चुनाव प्रचार में लक्ष्मीर भंडार (2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹1,500 मासिक) के जवाब में अन्नपूर्णा योजना का वादा किया और मई 2026 में सत्ता में आने के बाद इसे शुरू करते हुए लाभार्थी सत्यापन आरंभ किया; प्रधानमंत्री का दावा है कि बिचौलियों के बिना सीधे बैंक खाते में भुगतान से कट-मनी की संस्कृति समाप्त हो गई है। दूसरी ओर विपक्ष ने सत्यापन को वादे से भटकाव कहा है और कुछ महिलाओं ने पात्र होने के बावजूद बाहर किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किए हैं—यह लक्षित योजनाओं में समावेशन-त्रुटि (eligible पर वंचित) की क्लासिक समस्या है। आगे का रास्ता स्रोत में नीति के रूप में नहीं बताया गया, पर स्रोत-आधारित निष्कर्ष यही है कि सरकार का घोषित लक्ष्य किसी भी पात्र महिला को वंचित न रखना तथा 50 लाख से अधिक परिवारों को पक्के घर देना है; इसकी सफलता पारदर्शी सत्यापन, शिकायत निवारण और रुकी योजनाओं की बहाली पर निर्भर करेगी।

मुख्य शब्द

कट-मनी
सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए स्थानीय राजनेताओं द्वारा नागरिकों से वसूला जाने वाला कमीशन।
अन्नपूर्णा योजना
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार की महिला नकद हस्तांतरण योजना, जिसमें पात्रता मानदंड लागू है; चौथी किस्त ₹3,000।
लक्ष्मीर भंडार
तृणमूल कांग्रेस सरकार की सार्वभौमिक महिला नकद योजना, जिसमें 2.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह मिल रहे थे।
अन्नपूर्णा दिवस
17 सितंबर 2026 को कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम, जिसमें प्रधानमंत्री ने वर्चुअल संबोधन कर चौथी किस्त जारी की।
लाभार्थी सत्यापन
पात्रता जांच की प्रक्रिया, जो भाजपा सरकार ने मई 2026 में सत्ता में आने के बाद शुरू की; विपक्ष ने इसकी आलोचना की।
पक्के घर
स्थायी आवास; प्रधानमंत्री के अनुसार 50 लाख से अधिक परिवारों की पहचान कर उन्हें दिए जाएंगे।

अभ्यास प्रश्न

  1. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण किस हद तक 'कट-मनी' जैसे स्थानीय भ्रष्टाचार को समाप्त कर सकता है? पश्चिम बंगाल के अनुभव के आलोक में परीक्षण करें।
  2. कल्याणकारी योजनाओं में सार्वभौमिक बनाम पात्रता-आधारित मॉडल के गुण-दोषों की तुलना लक्ष्मीर भंडार और अन्नपूर्णा योजना के उदाहरण से कीजिए।
  3. महिला-केंद्रित नकद हस्तांतरण योजनाएं महिला सशक्तीकरण और चुनावी राजनीति दोनों को कैसे प्रभावित करती हैं? चर्चा करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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