दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी, पुतिन, शी साथ
भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 11 देशों के नेता शामिल हुए। भारत मंडपम की तस्वीरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग साथ दिखे। शी सात साल बाद भारत आए। अगस्त के एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद इस वर्ष तीनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात थी। मोदी और पुतिन ने रक्षा, ऊर्जा तथा अंतरिक्ष पर चर्चा की; मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The 18th BRICS Summit was hosted by India in New Delhi on September 12 and 13, with 11 countries participating, under the theme 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability'. — Stated directly in the source with dates and theme; no external attribution given.
- Modi held a bilateral meeting with Putin covering defence, energy, space, skill mobility, West Asia and the Black Sea, and gifted him a Russian translation of the Thirukkural. — Detailed in the source; consistent with images credited to PMO, but no official statement is quoted.
- Xi Jinping visited India after seven years, and the Modi-Xi-Putin meeting was their second this year after the SCO Summit in August. — Figure and sequence appear in the source; the SCO meeting location is referred to as Bishkek without further sourcing.
- Trump wrote: 'Looks like we've lost India and Russia to deepest, darkest, China. May they have a long and prosperous future together.' — Direct quote attributed to a post by US President Donald Trump; platform and date not specified.
- Critics linked India's closeness to Moscow and Beijing to 50% tariffs imposed on New Delhi. — Attributed vaguely to 'his critics'; unnamed sourcing.
विश्लेषकों की राय राय
బ్రిక్స్ ఆతిథ్యాన్ని మోదీ ప్రభుత్వం కేవలం దౌత్య కార్యక్రమంగా కాకుండా, ఒక రాజకీయ ప్రదర్శనగా మలచుకుంది — పుతిన్, షీ, పెజెష్కియాన్లతో కలిసి నడిచే దృశ్యాలు, 50% సుంకాల తర్వాత భారత్ ఒంటరిగా లేదని, దాని వద్ద ప్రత్యామ్నాయ ఎంపికలు ఉన్నాయని వాషింగ్టన్కు పంపిన సంకేతం. ఏడేళ్ల తర్వాత షీ ఢిల్లీకి రావడం, గల్వాన్ తర్వాత చైనాతో సాధారణీకరణను ప్రభుత్వం రాజకీయంగా భరించగలదని భావిస్తున్నదనే సూచన. అయితే ఇదే దృశ్యాలు దేశీయంగా రెండంచుల కత్తి — "చైనాతో సాన్నిహిత్యం" ప్రతిపక్షాలకు సరిహద్దు ప్రశ్నను తిరిగి లేవనెత్తే అవకాశం ఇస్తుంది.
- ఆతిథ్య దేశంగా అధ్యక్ష స్థానం మోదీకి 'గ్లోబల్ సౌత్ నాయకుడు' అనే ఇమేజ్ను బలపరిచే వేదికను ఇచ్చింది — ఇది బీజేపీ దౌత్య విజయ కథనానికి నేరుగా ఉపయోగపడుతుంది.
- ట్రంప్ సుంకాల నేపథ్యంలో ఈ చిత్రాలు 'ఒత్తిడికి తలొగ్గలేదు' అనే సందేశంగా ప్రభుత్వం ఉపయోగించుకోగలదు; అమెరికాతో బేరసారాల్లో ఇది ఒక పరపతి కార్డు.
- షీ పర్యటనను ప్రభుత్వం సాధారణీకరణ దిశగా చూపిస్తే, ప్రతిపక్షాలు సరిహద్దు యథాతథ స్థితిపై స్పష్టత కోరే అవకాశం ఉంది — గల్వాన్ అంశం దేశీయ రాజకీయాల్లో ఇంకా సజీవమే.
- ఇరాన్ అధ్యక్షుడితో కలిసి కనిపించడం భారత్ 'బహుముఖ దౌత్యం' వైఖరిని చాటుతుంది, కానీ పాశ్చాత్య రాజధానుల్లో అపార్థానికి ఆస్కారం ఇచ్చే ప్రమాదమూ ఉంది.
- ఇరాన్, సౌదీ, యూఏఈ వంటి పరస్పర విరుద్ధ ప్రయోజనాల దేశాలు ఒకే వేదికపై ఉండటం — బ్రిక్స్ ఐక్యత ప్రతీకాత్మకమే కావచ్చు, విధాన స్థాయిలో పరిమితం.
किस पर नज़र रखें — సదస్సు తర్వాత భారత్-అమెరికా వాణిజ్య చర్చల స్వరం, మరియు చైనాతో సాన్నిహిత్యంపై ప్రతిపక్షాలు, ప్రభుత్వ మిత్రపక్షాలు ఎలా స్పందిస్తాయో గమనించాలి.
ఈ కథనం చిత్రాలు, భేటీల అంశాలను మాత్రమే చెబుతుంది — సరిహద్దు వివాదంలో ఏదైనా పురోగతి, రక్షణ-ఇంధన ఒప్పందాల వివరాలు, లేదా అమెరికా సుంకాలపై ప్రభావం గురించి ఇది ఏమీ నిర్ధారించలేదు.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारत ने 2026 की अध्यक्षता के तहत नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें 11 देशों के नेता शामिल हुए। सम्मेलन का विषय था 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' और यह ब्रिक्स के तीसरे दशक में प्रवेश के समय हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरों ने पश्चिम को एकता का संदेश देने के रूप में देखा गया। शी सात साल बाद भारत आए, जबकि भारत-चीन सीमा विवाद (2020 गलवान घाटी झड़प के बाद तनाव) के बीच दोनों देश संबंध सुधारने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्य तथ्य
- 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हुआ; रविवार को समाप्त हुआ।
- सम्मेलन में 11 देशों के नेता दिल्ली पहुंचे; विषय था 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability'।
- चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आए।
- मोदी, शी और पुतिन की यह इस वर्ष दूसरी मुलाकात थी; पहली अगस्त में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में हुई थी।
- मोदी-पुतिन द्विपक्षीय बैठक में राजनीतिक-आर्थिक सहयोग, रक्षा और ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल गतिशीलता, जन-संपर्क तथा ब्रिक्स में भारत-रूस सहयोग पर चर्चा हुई।
- मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया; दोनों नेता बातचीत के बाद एक ही कार से भारत मंडपम गए।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बिश्केक मुलाकात पर लिखा: “Looks like we’ve lost India and Russia to deepest, darkest, China. May they have a long and prosperous future together.”
- आलोचकों के अनुसार नई दिल्ली पर लगाए गए 50% टैरिफ भारत के मॉस्को और बीजिंग के करीब जाने का कारण थे।
समयरेखा
- 2020गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों की झड़प, जिसके बाद सीमा तनाव बढ़ा।
- अगस्त (इस वर्ष)एससीओ शिखर सम्मेलन के इतर बिश्केक में मोदी, पुतिन और शी की मुलाकात; ट्रंप की तीखी टिप्पणी।
- 11 सितंबर 2026ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले नई दिल्ली में मोदी-पुतिन की मुलाकात का वीडियो जारी।
- 12 सितंबर 2026भारत मंडपम में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन शुरू; मोदी, पुतिन, शी की साझा तस्वीरें।
- 13 सितंबर 2026 (रविवार)शिखर सम्मेलन का समापन; मोदी की ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान से अलग बैठक।
किसका दाँव
- भारत (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) — 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता; रूस, चीन, ईरान और अमेरिका के बीच संतुलन तथा वैश्विक दक्षिण में नेतृत्व।
- रूस (राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन) — रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कौशल गतिशीलता में भारत के साथ पुराने संबंधों को मजबूत करना।
- चीन (राष्ट्रपति शी जिनपिंग) — सात साल बाद भारत यात्रा; सीमा विवाद के बीच संबंध सुधारने और ब्रिक्स में प्रभाव।
- ईरान (राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान) — अमेरिका के साथ छह महीने से चल रहे युद्ध के बीच कूटनीतिक समर्थन; पश्चिम एशिया और वैश्विक दक्षिण पर चर्चा।
- अमेरिका (राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप) — 50% टैरिफ और ब्रिक्स नेताओं की निकटता; पश्चिम के वर्चस्व को चुनौती का प्रश्न।
- ब्रिक्स के अन्य सदस्य (सऊदी अरब, यूएई, इंडोनेशिया आदि) — प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय हितों के बीच सहमति निर्माण; वित्त, व्यापार, तकनीक और वैश्विक शासन पर समन्वय।
क्यों अहम है
यह शिखर सम्मेलन दिखाता है कि भारत अमेरिकी टैरिफ दबाव और चीन के साथ सीमा तनाव के बीच भी बहु-संरेखण की कूटनीति चला रहा है। मोदी, पुतिन और शी की एक साथ उपस्थिति ने ब्रिक्स को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के ऐसे मंच के रूप में रेखांकित किया जो आंतरिक मतभेदों के बावजूद पश्चिम के वर्चस्व को संतुलित करने का प्रयास करता है। ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रतिस्पर्धी हितों वाले देशों की मौजूदगी सहमति निर्माण की कठिनाई को भी उजागर करती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 12-13 सितंबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली; भारत की अध्यक्षता।
- शिखर सम्मेलन का विषय: 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability'।
- सम्मेलन में 11 देशों के नेता शामिल; ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है।
- शी जिनपिंग की भारत यात्रा सात साल बाद; 2020 गलवान घाटी झड़प के बाद संबंध सुधारने के प्रयास।
- मोदी, पुतिन, शी की पिछली मुलाकात अगस्त में एससीओ शिखर सम्मेलन (बिश्केक) के इतर।
- मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद उपहार में दिया।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की अध्यक्षता में हुआ 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन बदलती बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का परीक्षण है। एक ओर नई दिल्ली पर लगाए गए 50% टैरिफ और ट्रंप की टिप्पणी ने पश्चिम के साथ तनाव उजागर किया, दूसरी ओर रूस के साथ रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कौशल गतिशीलता पर गहरी साझेदारी तथा चीन के साथ सीमा विवाद के बावजूद संवाद जारी रहा—शी की सात वर्ष बाद यात्रा और लगातार सैन्य-कूटनीतिक वार्ताएं इसका संकेत हैं। ब्रिक्स वित्त, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विकास और वैश्विक शासन पर समन्वय का मंच बन चुका है, लेकिन ईरान, सऊदी अरब और यूएई जैसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय हितों वाले सदस्यों की मौजूदगी सहमति निर्माण को कठिन बनाती है; पश्चिम एशिया में छह महीने से चल रहे अमेरिका-ईरान युद्ध पर भारत ने संवाद और कूटनीति की पैरवी करते हुए दोनों पक्षों से द्विपक्षीय संबंध बनाए रखे। आगे का रास्ता यही है कि भारत मुद्दा-आधारित सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूती और सीमा पर विश्वास-बहाली के साथ संतुलन बनाए रखे—न किसी खेमे में जाए, न मंचों से पीछे हटे।
मुख्य शब्द
- ब्रिक्स (BRICS)
- उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह जो वित्त, व्यापार, प्रौद्योगिकी, विकास और वैश्विक शासन पर समन्वय करता है; 2026 में इसके 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत ने की।
- भारत मंडपम
- नई दिल्ली स्थित सम्मेलन स्थल, जहाँ 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
- एससीओ शिखर सम्मेलन
- शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन; अगस्त में इसके इतर बिश्केक में मोदी, पुतिन और शी मिले थे।
- गलवान घाटी झड़प (2020)
- भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव, जिसके बाद सीमा तनाव तेज हुआ और संबंध सुधार के लिए सैन्य-कूटनीतिक वार्ताएं चलीं।
- तिरुक्कुरल
- तमिल क्लासिक ग्रंथ, जिसका रूसी अनुवाद मोदी ने पुतिन को सांस्कृतिक और जन-संपर्क के प्रतीक रूप में भेंट किया।
- वैश्विक दक्षिण (Global South)
- विकासशील देशों का समूह, जिसके बढ़ते प्रभाव पर मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने चर्चा की।
अभ्यास प्रश्न
- भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में हुए 18वें शिखर सम्मेलन के आलोक में परखें कि अमेरिकी टैरिफ दबाव और चीन के साथ सीमा तनाव के बीच भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता कैसे संतुलित कर रहा है।
- क्या ब्रिक्स प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय हितों (ईरान, सऊदी अरब, यूएई) के बावजूद एक प्रभावी सहमति-आधारित मंच बन सकता है? तर्कसहित विवेचना करें।
- भारत-चीन संबंधों में शी जिनपिंग की सात वर्ष बाद यात्रा का क्या महत्व है और गलवान के बाद विश्वास-बहाली के लिए कौन-से कदम आवश्यक हैं?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।