नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना के अमल का इंतजार

पूर्ववर्ती पालमूरु जिले के मकतल, नारायणपेट और कोडंगल क्षेत्रों की सूखी ऊपरी भूमि को सिंचाई देने वाली नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना दस साल से अमल में नहीं आई। 23 मई 2014 को जीओ नंबर 69 जारी हुआ था। पहले चरण के लिए 133.50 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, जिनमें सर्वेक्षण के लिए 3.36 करोड़ और भूमि अधिग्रहण के लिए 130.50 करोड़ रुपये शामिल थे। प्रस्ताव के तहत भूतपुर जलाशय से चार चरणों में पानी उठाकर एक लाख एकड़ को सिंचाई दी जाएगी। किसान जीओ 69 पर दिए वादे को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।

स्रोत

Narayanpet — నీరు · సాగునీరు · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • GO No. 69 was issued on 23 May 2014 by the then Governor to implement the orders for the lift irrigation scheme. — Specific date and GO number appear in the source; attributed to official orders but no document cited.
  • First-phase administrative sanction of Rs 133.50 crore, with Rs 3.36 crore for preliminary survey and Rs 130.50 crore for land acquisition. — Figures appear in the source; internally the components do not sum exactly to the stated total, an editor should check.
  • The scheme is designed to lift water from Bhoothpur reservoir in four stages up to Kanukurti and then by gravity via Doultabad and Kodangal to Bommarraspet, irrigating one lakh acres. — Attributed in the source to local leaders, not to an official project report.
  • Revanth Reddy promised during the elections to implement GO 69 and provide irrigation to Makthal, Narayanpet and Kodangal constituencies. — Attributed to election campaign statements as relayed by local public organisations; no direct quote given.
  • CPM district secretary Venkatram Reddy says 7.5 TMC was allotted to the scheme and cycle rallies were held from 2005. — Directly quoted and attributed to a named person in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह मूल रूप से अवसर-लागत की कहानी है। 2014 में जीओ 69 के तहत पहले चरण के लिए 133.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिली — इसमें 130.50 करोड़ भूमि अधिग्रहण और 3.36 करोड़ सर्वे के लिए — पर दस साल में काम शुरू नहीं हुआ, और मक्तल, नारायणपेट व कोडंगल के शुष्क क्षेत्र के किसान बारिश और बोरवेल पर ही निर्भर रहे। एक लाख एकड़ को भरोसेमंद सिंचाई मिले तो फसल सघनता, उपज और ग्रामीण मजदूरी के दिन बढ़ सकते हैं; लेकिन चार चरणों की लिफ्ट योजना का मतलब स्थायी बिजली व रखरखाव खर्च भी है, और यह कौन उठाएगा, खबर में स्पष्ट नहीं है।

  • देरी मुफ्त नहीं पड़ती: निर्माण लागत और जमीन के दाम समय के साथ बढ़ते हैं, इसलिए 2014 का 133.50 करोड़ का अनुमान आज उसी काम के लिए पर्याप्त होने की संभावना कम है।
  • पहले चरण की लगभग पूरी राशि (130.50 करोड़) भूमि अधिग्रहण की है, यानी यह शुरुआती खर्च है, पूरी परियोजना की पूंजी आवश्यकता नहीं — जो खबर में बताई नहीं गई।
  • लाभार्थी स्पष्ट हैं: जुराला, नेट्टेमपाडु, भीमा और कलवकुर्ती से वंचित रह गए ऊंचे शुष्क इलाकों के किसान, जहां जल सुरक्षा से कृषि आय, भूमि मूल्य और स्थानीय कारोबार सुधर सकते हैं।
  • लिफ्ट सिंचाई की स्थायी आर्थिक कमजोरी बिजली का बिल है — चार चरणों में पानी उठाने का मतलब हर साल सब्सिडी का बोझ, जो अंततः राज्य बजट पर पड़ता है।
  • मार्ग का चुनाव भी आर्थिक बहस है: स्थानीय संगठनों का तर्क है कि 150 किमी ऊपर से पानी लाने की तुलना में नजदीकी भूतपुर जलाशय सस्ता पड़ेगा, और कम डूब क्षेत्र का अर्थ कम पुनर्वास लागत भी है।

किस पर नज़र रखें — आगामी राज्य बजट में इस योजना के लिए अलग आवंटन, संशोधित लागत अनुमान और भूमि अधिग्रहण की वास्तविक शुरुआत — तभी वादा खर्च में बदलता दिखेगा।

खबर परियोजना की कुल लागत, कोई संशोधित अनुमान, वित्त का स्रोत, पूरा होने की समयसीमा या नई सरकार कब काम शुरू करेगी, इनमें से कुछ भी स्थापित नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तेलंगाना के पूर्ववर्ती पालमूरु (महबूबनगर) जिले के मकतल, नारायणपेट और कोडंगल निर्वाचन क्षेत्रों की ऊपरी/मेट्ट (सूखी) भूमि तक अब तक कृष्णा का पानी नहीं पहुँचा है, जबकि कृष्णा नदी राज्य में नारायणपेट जिले के कृष्णा मंडल के तंगिडिगी के पास ही प्रवेश करती है। इन क्षेत्रों के लिए भूतपुर जलाशय से पानी उठाकर एक लाख एकड़ को सिंचाई देने वाली नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना प्रस्तावित हुई और 23 मई 2014 को जीओ नंबर 69 जारी हुआ, लेकिन दस साल में अमल नहीं हुआ। बीआरएस सरकार ने पालमूरु-रंगारेड्डी योजना से पानी देने का वादा किया था, जो साढ़े नौ साल में पूरा नहीं हुआ; 2023 के चुनाव में रेवंत रेड्डी ने जीओ 69 लागू करने का वादा किया।

मुख्य तथ्य

  • 23 मई 2014 को तत्कालीन राज्यपाल ने नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना से जुड़े आदेश लागू करने के लिए जीओ नंबर 69 जारी किया।
  • पहले चरण के लिए 133.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
  • इसमें 3.36 करोड़ रुपये प्राथमिक सर्वेक्षण और 130.50 करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण के लिए आवंटित किए गए।
  • योजना का लक्ष्य: भीमा लिफ्ट योजना के हिस्से भूतपुर जलाशय से चार चरणों में कानुकुर्ति तक पानी उठाना, वहाँ से गुरुत्व प्रवाह से दौलताबाद, कोडंगल होकर बोम्मरासपेट तक तालाब भरते हुए एक लाख एकड़ को सिंचाई।
  • सीपीएम जिला सचिव वेंकट्रामरेड्डी के अनुसार इस योजना के लिए साढ़े सात टीएमसी पानी निर्धारित किया गया था।
  • पहले पालमूरु-रंगारेड्डी योजना को जुराला के बैकवॉटर से शुरू करने, नर्वा मंडल के एल्लंपल्ली से पानी उठाकर कोयिलकोंडा में जलाशय बनाने की योजना थी; अधिक डूब क्षेत्र के कारण दिशा बदली गई।
  • पूर्ववर्ती पालमूरु जिले में जुराला, नेट्टेंपाडु, भीमा और कल्वकुर्ति लिफ्ट योजनाओं से सिंचाई हो रही है, पर मकतल, नारायणपेट, कोडंगल की मेट्ट भूमि को इनसे पानी नहीं मिल सकता।
  • जन संगठनों की मांग: कृष्णा नदी में 150 किलोमीटर ऊपर जाकर पानी लाने की तुलना में जीओ 69 लागू कर लिफ्ट के जरिये निकर (शुद्ध) जल दिया जाए।

समयरेखा

  1. वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के मुख्यमंत्रित्व काल मेंजयम्मा चेरुवु लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए साइकिल रैली निकालकर ज्ञापन दिया गया।
  2. 2005 के बादसीपीएम के नेतृत्व में साइकिल यात्रा; योजना को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया, बाद में इसे कोडंगल-नारायणपेट लिफ्ट योजना में बदला गया।
  3. 23 मई 2014तत्कालीन राज्यपाल द्वारा जीओ नंबर 69 जारी; पहले चरण के लिए 133.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति।
  4. 2014 के बाद लगभग साढ़े नौ वर्षबीआरएस सरकार का पालमूरु-रंगारेड्डी योजना से इस क्षेत्र को सिंचाई देने का वादा अमल में नहीं आया; जल साधन समिति के नेतृत्व में पदयात्राएँ व आम सभाएँ।
  5. 2023 के चुनावरेवंत रेड्डी ने कांग्रेस सत्ता में आने पर जीओ 69 लागू करने और मकतल, नारायणपेट, कोडंगल को सस्यश्यामल करने का वादा किया।
  6. 31 दिसंबर 2023रिपोर्ट प्रकाशित; किसान नई सरकार से तुरंत योजना शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

किसका दाँव

  • मकतल, नारायणपेट और कोडंगल की मेट्ट (सूखी ऊपरी) भूमि के किसान — मौजूदा लिफ्ट योजनाओं से पानी न मिलने के कारण सिंचाई का एकमात्र भरोसा यही योजना; एक लाख एकड़ की सिंचाई दांव पर।
  • तेलंगाना की नई कांग्रेस सरकार / मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी — जीओ 69 लागू करने के चुनावी वादे को पूरा करने का दबाव।
  • पूर्ववर्ती बीआरएस (केसीआर) सरकार — पालमूरु-रंगारेड्डी योजना से पानी देने का वादा साढ़े नौ साल में पूरा न होने पर आलोचना।
  • जल साधन समिति व स्थानीय जन संगठन — जीओ 69 के अमल के लिए पदयात्रा, आम सभाओं के जरिये आंदोलन; पालमूरु-रंगारेड्डी विकल्प का विरोध।
  • सीपीएम (जिला सचिव वेंकट्रामरेड्डी) — जयम्मा चेरुवु योजना को कोडंगल तक विस्तार देने की पुरानी मांग और आंदोलन का नेतृत्व।
  • भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होने वाले लोग — 130.50 करोड़ रुपये के भूमि अधिग्रहण तथा वैकल्पिक मार्ग में डूब क्षेत्र का प्रश्न।

क्यों अहम है

कृष्णा नदी जिस जिले से तेलंगाना में प्रवेश करती है, उसी के ऊपरी इलाके दस साल बाद भी सिंचाई से वंचित हैं — यह जल वितरण की भौगोलिक विषमता और परियोजना क्रियान्वयन की सुस्ती का उदाहरण है। सरकारी आदेश (जीओ 69) जारी होने और धन मंजूर होने के बाद भी काम शुरू न होना यह दिखाता है कि प्रशासनिक स्वीकृति और जमीनी अमल के बीच बड़ी खाई है। यह मामला चुनावी वादों की जवाबदेही और वर्षा-निर्भर मेट्ट खेती की आय-सुरक्षा से भी जुड़ा है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • जीओ नंबर 69: 23 मई 2014 को जारी, नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना से संबंधित।
  • पहले चरण की मंजूरी 133.50 करोड़ रुपये — 3.36 करोड़ सर्वेक्षण, 130.50 करोड़ भूमि अधिग्रहण।
  • कृष्णा नदी तेलंगाना में नारायणपेट जिले के कृष्णा मंडल के तंगिडिगी के पास प्रवेश करती है।
  • पूर्ववर्ती पालमूरु जिले की प्रमुख लिफ्ट योजनाएँ: जुराला, नेट्टेंपाडु, भीमा और कल्वकुर्ति।
  • भूतपुर जलाशय भीमा लिफ्ट सिंचाई योजना का हिस्सा है; यहाँ से चार चरणों में पानी उठाने का प्रस्ताव।
  • प्रस्तावित लक्ष्य: एक लाख एकड़ सिंचाई; योजना के लिए साढ़े सात टीएमसी पानी का उल्लेख।

मेन्स दृष्टिकोण

नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना यह दर्शाती है कि भारत में सिंचाई परियोजनाओं की समस्या केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि प्राथमिकता, डिजाइन-विवाद और राजनीतिक निरंतरता की भी है। एक ओर पूर्ववर्ती पालमूरु जिले में जुराला, नेट्टेंपाडु, भीमा और कल्वकुर्ति जैसी योजनाएँ चल रही हैं, दूसरी ओर मकतल, नारायणपेट और कोडंगल की ऊँची मेट्ट भूमि इनके कमान क्षेत्र से बाहर रह गई; इसी अंतर को भरने के लिए भूतपुर जलाशय से चार चरणों में पानी उठाकर गुरुत्व प्रवाह से तालाब भरने और एक लाख एकड़ सींचने का प्रस्ताव बना, जिसके लिए 2014 में जीओ 69 और 133.50 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिली। पर अमल नहीं हुआ — विकल्प के रूप में पालमूरु-रंगारेड्डी योजना पर भरोसा किया गया, जिसका स्थानीय जन संगठन विरोध करते रहे क्योंकि इसमें नदी में लगभग 150 किलोमीटर ऊपर जाकर पानी लाना पड़ता है; पहले के मार्ग (जुराला बैकवॉटर–एल्लंपल्ली–कोयिलकोंडा) को अधिक डूब क्षेत्र के कारण बदला गया। आगे का रास्ता यह है कि सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की मंजूर राशि को समयबद्ध ढंग से खर्च किया जाए, डूब व पुनर्वास के प्रश्न पारदर्शी तरीके से सुलझाए जाएँ, और किफायती जल-उठाव विकल्प का तकनीकी-आर्थिक मूल्यांकन सार्वजनिक हो, ताकि चुनावी वादा स्थायी सिंचाई अधिकार में बदले।

मुख्य शब्द

लिफ्ट (एत्तिपोतल) सिंचाई योजना
पंपों से पानी को ऊँचाई पर उठाकर ऊपरी/सूखी भूमि तक पहुँचाने वाली सिंचाई व्यवस्था।
जीओ नंबर 69
23 मई 2014 को जारी सरकारी आदेश, जिसमें योजना के पहले चरण के अमल के निर्देश थे।
मेट्ट भूमि
नहर के कमान क्षेत्र से बाहर की ऊँची, वर्षा-निर्भर सूखी खेती वाली भूमि।
भूतपुर जलाशय
भीमा लिफ्ट सिंचाई योजना का हिस्सा; प्रस्तावित नारायणपेट-कोडंगल योजना का जल-स्रोत।
पालमूरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई परियोजना
बीआरएस सरकार की परियोजना, जिससे इस क्षेत्र को सिंचाई देने का वादा किया गया था।
टीएमसी
हजार मिलियन क्यूबिक फीट — जल आवंटन मापने की इकाई; इस योजना के लिए साढ़े सात टीएमसी का उल्लेख।

अभ्यास प्रश्न

  1. नारायणपेट-कोडंगल लिफ्ट सिंचाई योजना के उदाहरण से समझाइए कि प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद भी सिंचाई परियोजनाएँ क्यों अटक जाती हैं।
  2. वर्षा-निर्भर 'मेट्ट' (ऊपरी सूखी) भूमि तक जल पहुँचाने में लिफ्ट सिंचाई की उपयोगिता और सीमाओं की समीक्षा कीजिए।
  3. नदी-बेसिन के भीतर जल वितरण की भौगोलिक विषमता किसानों की आय-सुरक्षा को कैसे प्रभावित करती है? तेलंगाना के पूर्ववर्ती पालमूरु जिले के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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