धन संकट के बीच सिकुड़ता संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान

प्रोजेक्ट सिंडिकेट के एक विश्लेषण के अनुसार, 35 देशों में 65 सशस्त्र संघर्ष जारी हैं, जो 1946 के बाद सबसे अधिक हैं, और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान वित्तीय दबाव में है। अमेरिका ने इस माह 82.7 करोड़ डॉलर चुकाए, लेकिन उस पर अब भी लगभग 4.2 अरब डॉलर बाकी हैं, जिसमें 2.9 अरब डॉलर शांति अभियान के हैं। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बजट में करीब 15% कटौती कर एक-चौथाई शांति सैनिक हटाए। जून 2024 के 60,081 से घटकर संख्या इस जून में 44,208 रह गई।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • There are 65 ongoing armed conflicts in 35 countries, the most since 1946. — Figure appears in source, presented as context without a named dataset; no independent verification possible.
  • The US paid $827 million in UN dues this month but still owes about $4.2 billion, including $2.9 billion for peacekeeping. — Specific figures given in source with breakdown ($725m regular budget, $102m peacekeeping); no document cited.
  • Guterres cut the peacekeeping budget by about 15% and withdrew a quarter of peacekeepers. — Attributed in source to the liquidity crisis and the Secretary-General's report.
  • Uniformed UN peacekeepers fell to 44,208 in June from 60,081 in June 2024. — Figures appear in source; internally consistent with the stated one-quarter reduction.
  • The Security Council adopted 44 resolutions in 2025, the lowest since 1991, and 17 so far this year. — Figures appear in source but the two timeframes are stated ambiguously; editor should check dating.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

दुनिया 1946 के बाद सबसे अधिक सशस्त्र संघर्षों — 35 देशों में 65 — का सामना कर रही है, और ठीक इसी दौर में संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा वित्तीय कारणों से सिकुड़ रही है; यह केवल बजट की खबर नहीं, वैश्विक सुरक्षा ढांचे में एक सामरिक रिक्तता है। अमेरिका पर करीब 4.2 अरब डॉलर बकाया है (जिसमें 2.9 अरब शांति रक्षा का), जिसके चलते महासचिव को बजट में लगभग 15% कटौती और एक-चौथाई बल की वापसी करनी पड़ी; जून 2024 में 60,081 कर्मी थे, इस जून में 44,208 रह गए। लेख का पाठ यह है कि वाशिंगटन सभी मिशनों को एक तरह से नहीं देख रहा — हैती, गाजा और डीआरसी में अपने हितों से जुड़े अभियानों का समर्थन करते हुए अन्यत्र मिशन बंद करने पर जोर दे रहा है। यह शांति रक्षा के साझा बहुपक्षीय दायित्व से भू-राजनीतिक उपयोगिता आधारित चयन की ओर बदलाव दर्शाता है।

  • बलों की वापसी से बनने वाले सुरक्षा शून्य का लाभ सशस्त्र गुट उठा सकते हैं; यमन मिशन की समाप्ति और दिसंबर से शुरू होने वाली लेबनान वापसी इसकी तत्काल परीक्षा हैं।
  • मिशनों के चयन में सामरिक तर्क दिखता है — लेख डीआरसी में दीर्घकालिक मिशन को अमेरिकी समर्थन को सामरिक खनिज समझौते की कोशिशों से जोड़ता है, यानी संसाधन हित प्राथमिकताओं को प्रभावित कर रहे हैं।
  • अफ्रीकी संघ नेतृत्व वाले अभियानों के वित्तपोषण का 2023 का प्रस्ताव व्यवहार में निष्प्रभावी हो गया है, और सोमालिया में समर्थन घटने से बोझ क्षेत्रीय संगठनों पर आएगा तथा अन्य शक्तियों के लिए जगह खुलेगी।
  • सुरक्षा परिषद का गतिरोध संकट को गहरा करता है: 2025 में केवल 44 प्रस्ताव, 1991 के बाद सबसे कम; अफ्रीका के पास अब भी स्थायी सीट नहीं, और अमेरिका, चीन तथा रूस प्रतिद्वंद्वी के प्रवेश वाले सुधार रोक सकते हैं।
  • जब युद्ध ड्रोन, स्वचालित हथियार प्रणालियों और एआई-आधारित साइबर उपकरणों की ओर बढ़ रहा है, तब बल और बजट में कटौती क्षमता की खाई और चौड़ी करती है।

किस पर नज़र रखें — दो निकट संकेतक: नवंबर में मध्य अफ्रीकी गणराज्य मिशन के विस्तार पर सुरक्षा परिषद का निर्णय, जिस पर अमेरिका ने आपत्ति जताई है, और दिसंबर में शुरू होने वाली लेबनान वापसी।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि कटौती से जमीन पर हिंसा वास्तव में कितनी बढ़ी; विश्लेषण मुख्यतः एक टिप्पणी लेख पर आधारित है और अमेरिकी सरकार का अपना पक्ष इसमें दर्ज नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के समय दुनिया 1946 के बाद सबसे अधिक सशस्त्र संघर्षों का सामना कर रही है—35 देशों में 65 संघर्ष जारी हैं। प्रोजेक्ट सिंडिकेट में प्रिटोरिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अदेकेये अदेबाजो का विश्लेषण बताता है कि अमेरिका के बकाया अंशदान और ट्रम्प प्रशासन के दबाव से संयुक्त राष्ट्र नकदी संकट में है। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शांति अभियान बजट में लगभग 15% कटौती की और एक-चौथाई शांति सैनिक हटा लिए। लेखक का तर्क है कि सुरक्षा परिषद की बनावट और वीटो-आधारित गतिरोध के कारण गुटेरेस के सुधार प्रस्ताव व्यावहारिक रूप से अमल में नहीं आ सकते।

मुख्य तथ्य

  • 35 देशों में 65 सशस्त्र संघर्ष जारी हैं, जो 1946 के बाद सर्वाधिक हैं; 2021 के बाद युद्ध-संबंधी मौतें पिछले दो दशकों की कुल संख्या से अधिक हुई हैं।
  • अमेरिका ने इसी माह 82.7 करोड़ डॉलर अनिवार्य अंशदान चुकाया—72.5 करोड़ डॉलर नियमित बजट में और 10.2 करोड़ डॉलर शांति अभियान में।
  • अमेरिका पर अब भी लगभग 4.2 अरब डॉलर बकाया है, जिसमें 2.9 अरब डॉलर शांति अभियान का हिस्सा है।
  • नकदी संकट के चलते गुटेरेस ने शांति अभियान बजट में करीब 15% कटौती की और एक-चौथाई शांति सैनिक वापस बुलाए।
  • जून में वैश्विक स्तर पर 44,208 वर्दीधारी शांति सैनिक तैनात थे, जो जून 2024 के 60,081 से कम हैं।
  • यमन में संयुक्त राष्ट्र मिशन मार्च में समाप्त हुआ; लेबनान मिशन की वापसी दिसंबर में शुरू होगी; नवंबर में मध्य अफ्रीकी गणराज्य मिशन के विस्तार पर निर्णय होगा, जिस पर अमेरिका को आपत्ति है।
  • अफ्रीका संयुक्त राष्ट्र के 28% सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है, फिर भी सुरक्षा परिषद में उसका कोई स्थायी सदस्य (और वीटो) नहीं है।
  • 2025 में सुरक्षा परिषद ने 44 प्रस्ताव पारित किए—1991 के बाद सबसे कम; इस वर्ष अब तक केवल 17 पर सहमति बनी है।

समयरेखा

  1. 1946इसके बाद से दुनिया में सशस्त्र संघर्षों की संख्या का सबसे ऊँचा स्तर अब दर्ज हुआ है।
  2. 1991सुरक्षा परिषद द्वारा पारित प्रस्तावों की संख्या का वह स्तर, जिससे नीचे 2025 का आंकड़ा (44) गिरा।
  3. 1994रवांडा नरसंहार, जिससे न्यूयॉर्क स्थित सचिवालय कर्मियों द्वारा सुरक्षा परिषद को स्वतंत्र रिपोर्टिंग का विचार निकला था।
  4. दिसंबर 2023अफ्रीकी संघ नेतृत्व वाले शांति अभियानों को संयुक्त राष्ट्र निर्धारित अंशदान से केस-दर-केस वित्तपोषित करने का प्रस्ताव पारित।
  5. जून 2024वैश्विक स्तर पर 60,081 वर्दीधारी शांति सैनिक तैनात।
  6. मार्च (इस वर्ष)यमन में संयुक्त राष्ट्र मिशन समाप्त।
  7. जून (इस वर्ष)तैनात शांति सैनिकों की संख्या घटकर 44,208।
  8. इस माह (महासभा सत्र के दौरान)अमेरिका ने 82.7 करोड़ डॉलर अंशदान चुकाया; 4.2 अरब डॉलर बकाया शेष।
  9. नवंबरसुरक्षा परिषद मध्य अफ्रीकी गणराज्य मिशन के विस्तार पर निर्णय करेगी।
  10. दिसंबरलेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन की वापसी शुरू होगी।

किसका दाँव

  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस — बजट कटौती के बीच शांति अभियान चलाना; प्रतिनिधिक सुरक्षा परिषद, लचीले जनादेश, निष्पक्षता और निकास रणनीति जैसे सुधार प्रस्तावित किए।
  • अमेरिका (ट्रम्प प्रशासन) — सबसे बड़ा बकायादार; लागत-कटौती के नाम पर मिशन बंद करने की पैरवी, साथ ही अपने हित वाले अभियानों का समर्थन।
  • सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्य — अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन बनाम रूस-चीन की भू-राजनीतिक खेमेबंदी से गतिरोध; परिषद विस्तार रोकने की क्षमता।
  • अफ्रीकी संघ और अफ्रीकी देश — संयुक्त राष्ट्र सदस्यों का 28% होने पर भी स्थायी सीट नहीं; सोमालिया में एयू मिशन को संयुक्त राष्ट्र समर्थन समाप्त किया जा रहा है।
  • संघर्ष-प्रभावित देशों के नागरिक (यमन, लेबनान, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, डीआरसी, हैती, गाज़ा) — शांति सैनिकों की वापसी से नागरिक सुरक्षा और राजनीतिक समाधान की संभावना पर सीधा असर।
  • डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो — 27 वर्ष पुराने संयुक्त राष्ट्र मिशन को अमेरिकी समर्थन, जिसकी पृष्ठभूमि में सामरिक-खनिज सौदे का प्रयास है।

क्यों अहम है

युद्धों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर होने के समय ही संयुक्त राष्ट्र की शांति व्यवस्था सिकुड़ रही है—एक वर्ष में लगभग 16,000 शांति सैनिक कम हो गए, जिससे नागरिकों की सुरक्षा कमजोर पड़ती है। यह दिखाता है कि बहुपक्षीय संस्थाएँ कुछ बड़े अंशदाताओं के वित्तीय निर्णयों पर कितनी निर्भर हैं। साथ ही अफ्रीका की स्थायी प्रतिनिधित्वहीनता और वीटो-गतिरोध सुरक्षा परिषद सुधार की माँग को फिर केंद्र में लाते हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 1946 के बाद सर्वाधिक: 35 देशों में 65 सशस्त्र संघर्ष जारी (प्रोजेक्ट सिंडिकेट विश्लेषण)।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिक: जून 2024 में 60,081 से घटकर जून में 44,208; बजट में लगभग 15% कटौती।
  • अमेरिकी बकाया लगभग 4.2 अरब डॉलर, जिसमें 2.9 अरब डॉलर शांति अभियान का।
  • अफ्रीका संयुक्त राष्ट्र सदस्यता का 28% है, पर सुरक्षा परिषद में कोई स्थायी सीट/वीटो नहीं।
  • 2025 में सुरक्षा परिषद के 44 प्रस्ताव—1991 के बाद न्यूनतम।
  • दिसंबर 2023 प्रस्ताव: अफ्रीकी संघ नेतृत्व वाले शांति अभियानों का केस-दर-केस संयुक्त राष्ट्र निर्धारित अंशदान से वित्तपोषण।

मेन्स दृष्टिकोण

रिकॉर्ड संख्या में सशस्त्र संघर्षों (35 देशों में 65) और ड्रोन, स्वचालित हथियार प्रणालियों तथा एआई-चालित साइबर औजारों वाले नए युद्ध-युग के बीच संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान एक संरचनात्मक संकट में है। तात्कालिक कारण वित्तीय है—अमेरिका पर लगभग 4.2 अरब डॉलर बकाया, जिससे उत्पन्न नकदी संकट ने बजट में 15% कटौती और एक-चौथाई शांति सैनिकों की वापसी (60,081 से 44,208) को मजबूर किया; साथ ही लागत-कटौती के नाम पर यमन मिशन की समाप्ति, लेबनान में वापसी और मध्य अफ्रीकी गणराज्य पर आपत्ति। गहरा कारण राजनीतिक है: सुरक्षा परिषद की बनावट, जहाँ अफ्रीका 28% सदस्यता के बावजूद स्थायी प्रतिनिधित्व से वंचित है, और पाँच वीटोधारी सदस्य भू-राजनीतिक खेमों में बँटकर गतिरोध पैदा करते हैं—2025 में केवल 44 प्रस्ताव, 1991 के बाद न्यूनतम। लेखक का आकलन है कि गुटेरेस के प्रस्ताव—संघर्ष-रोकथाम, वैश्विक शांति साझेदारी, केंद्रित व लचीले जनादेश, सख्त निष्पक्षता, निकास रणनीति और नौकरशाही सुधार—आदर्श अधिक और यथार्थ कम हैं, क्योंकि इनके लिए बड़े वित्तीय-सैन्य संसाधन और महाशक्तियों का सहयोग चाहिए जो मौजूद नहीं। आगे का रास्ता अधिक प्रतिनिधिक परिषद, पूर्वानुमेय वित्तपोषण और क्षेत्रीय संगठनों (विशेषतः अफ्रीकी संघ) के साथ वास्तविक साझेदारी पर निर्भर है, वरना "आगामी पीढ़ियों को युद्ध की विभीषिका से बचाने" का मूल जनादेश कमजोर होता रहेगा।

मुख्य शब्द

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान (पीसकीपिंग)
संघर्ष क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा और राजनीतिक समाधान को आगे बढ़ाने के लिए वर्दीधारी बलों की संयुक्त राष्ट्र तैनाती।
अनिवार्य/निर्धारित अंशदान
सदस्य देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट और शांति अभियान बजट में देय बाध्यकारी भुगतान; इनका बकाया नकदी संकट पैदा करता है।
वीटो शक्ति
सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों का प्रस्ताव रोकने का अधिकार, जिससे मिशन और सुधार पर गतिरोध बनता है।
"अफ्रीका के विरुद्ध ऐतिहासिक अन्याय"
गुटेरेस द्वारा उल्लिखित स्थिति—संयुक्त राष्ट्र सदस्यता का 28% होने पर भी अफ्रीका को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट नहीं।
गैंग सप्रेशन फोर्स (हैती)
संयुक्त राष्ट्र प्राधिकृत बल, जो औपचारिक रूप से शांति अभियान नहीं है; अमेरिका ने इसका समर्थन किया।
इंटरनेशनल स्टेबिलाइज़ेशन फोर्स (गाज़ा)
गाज़ा के लिए प्रस्तावित बल, जिसे अमेरिका बढ़ावा दे रहा है।

अभ्यास प्रश्न

  1. रिकॉर्ड संख्या में सशस्त्र संघर्षों के दौर में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों का सिकुड़ना बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता को कैसे प्रभावित करता है? चर्चा करें।
  2. क्या सुरक्षा परिषद का ढाँचा—विशेषतः अफ्रीका का स्थायी प्रतिनिधित्वहीन रहना और वीटो-आधारित गतिरोध—शांति अभियानों की प्रभावशीलता की मूल बाधा है? परीक्षण करें।
  3. संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों को कुछ बड़े अंशदाताओं की वित्तीय निर्भरता से मुक्त करने के लिए कौन-से उपाय संभव हैं? स्रोत में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर विश्लेषण करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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