कृषि हरियाणा

हरियाणा के सीएम ने प्राकृतिक खेती, जल सुरक्षा पैकेज मांगा

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने राज्य के लिए केंद्र से 'एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा वित्त पोषण पैकेज' की मांग की है। वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित 'विकसित भारत' वित्त पोषण सम्मेलन के बाद शनिवार को उन्होंने यह बात कही। सैनी ने कहा कि राज्य में प्राकृतिक और जैविक खेती का क्षेत्र 2026-27 में चार गुना बढ़कर लगभग 50,000 एकड़ और 2030-31 तक 1.50 लाख एकड़ हो जाएगा। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से केंद्र को उर्वरक सब्सिडी में करीब 900 करोड़ रुपये की बचत हुई, जबकि 6 लाख एकड़ जलभराव से प्रभावित है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Haryana has sought an 'Integrated Natural Farming and Water Security Funding Package' from the Centre. — Attributed to CM Nayab Singh Saini speaking to media after the Finance Ministry conference.
  • Natural and organic farming area to rise fourfold to about 50,000 acres in 2026-27, targeting 1.50 lakh acres by 2030-31. — Projection stated by the Chief Minister; figures appear in source, no independent data cited.
  • Meri Fasal-Mera Byora portal linkage saved about Rs 900 crore in fertiliser subsidy for the Centre. — Figure attributed to the Chief Minister; no supporting documentation in source.
  • Nearly 6 lakh acres in Haryana are affected by waterlogging due to a rising water table. — State claim raised at the conference as reported in an official release.
  • The two-day conference on 'Financing India's Journey Towards Viksit Bharat' was organised by the Finance Ministry. — Stated in source; event attribution consistent throughout the text.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह केंद्र से पैसा मांगने की कोई सामान्य मांग नहीं है — इसे एक आर्थिक सौदे की तरह पेश किया गया है: 'हमने केंद्र के करीब 900 करोड़ रुपये बचाए, अब हमारी पूंजी जरूरतें पूरी करें।' हरियाणा ने जो दो समस्याएं उठाई हैं — भूजल का गिरता स्तर और लगभग 6 लाख एकड़ में जलभराव — वे लंबी अवधि में खेती की उत्पादकता को चुपचाप खा जाती हैं, इसलिए ड्रेनेज, रिचार्ज और माइक्रो-इरिगेशन पर खर्च को सब्सिडी नहीं, निवेश मानना ज्यादा सही है। पर प्राकृतिक खेती का असली आर्थिक सवाल — संक्रमण के वर्षों में पैदावार और किसान की आय पर असर — इस खबर में तय नहीं होता।

  • उर्वरक सब्सिडी में 900 करोड़ रुपये की बचत का दावा दिखाता है कि पोर्टल से जुड़ी, मांग के अनुसार आपूर्ति केंद्र के खजाने को सीधा लाभ देती है — और हरियाणा इसे मोलभाव की ताकत बना रहा है।
  • प्राकृतिक व जैविक खेती को करीब 50,000 एकड़ से 2030-31 तक 1.50 लाख एकड़ तक ले जाना प्रतिशत में बड़ा लगता है, लेकिन हरियाणा के कुल बोए क्षेत्र का यह छोटा हिस्सा ही है, इसलिए अनाज आपूर्ति और कीमतों पर तत्काल असर सीमित रहने की संभावना है।
  • लगभग 6 लाख एकड़ में जलभराव का मतलब आज खोई हुई उपज और किसान की खोई हुई आय है; शुरुआती पूंजी निवेश उस जमीन को फिर उत्पादक संपत्ति बना सकता है।
  • कई केंद्रीय योजनाओं के संसाधनों को एक समन्वित ढांचे में लाने की मांग नए पैसे से ज्यादा खर्च की कार्यक्षमता का मामला है — लेकिन यही मांग दूसरे राज्य भी रखें तो केंद्र के सामने बड़ा राजकोषीय सवाल खड़ा होगा।
  • एफपीओ तंत्र को मजबूत करना और सोलर व हरित ऊर्जा का विस्तार वे दो उपाय हैं जो समय के साथ किसान की मोलभाव क्षमता बढ़ा सकते हैं और लागत घटा सकते हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि केंद्र इसे अलग केंद्र प्रायोजित पैकेज के रूप में मानता है या मौजूदा योजनाओं को ही नए रूप में पेश करता है — इससे तय होगा कि कितने और राज्य ऐसी मांग रखते हैं।

खबर यह नहीं बताती कि मांगे गए पैकेज का आकार क्या है, केंद्र का जवाब क्या रहा, या प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते किसानों की पैदावार और आय पर असर कैसा होगा; 900 करोड़ रुपये की बचत राज्य का बताया आंकड़ा है, यहां स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 'विकसित भारत की दिशा में भारत का वित्त पोषण' (Financing India's Journey Towards Viksit Bharat) विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया, जिसमें राज्यों ने कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने की भावी योजनाओं पर चर्चा की। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसमें भाग लिया और शनिवार को मीडिया से बातचीत में राज्य के लिए केंद्र से 'एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा वित्त पोषण पैकेज' की मांग रखी। हरियाणा ने प्राकृतिक व जैविक खेती, बागवानी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल तथा जलभराव जैसी अपनी विशिष्ट परिस्थितियों को सम्मेलन में सामने रखा।

मुख्य तथ्य

  • हरियाणा में प्राकृतिक और जैविक खेती का रकबा 2026-27 में पिछले वर्ष की तुलना में चार गुना बढ़कर लगभग 50,000 एकड़ होने की संभावना है।
  • 2030-31 तक इस रकबे को 1.50 लाख एकड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • कुरुक्षेत्र में 2,000 एकड़ का प्राकृतिक खेती मॉडल क्लस्टर विकसित किया जा रहा है; मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक सब्जी खेती का मॉडल बनाने का निर्णय।
  • मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से उर्वरक खरीद जोड़ने पर केंद्र सरकार को उर्वरक सब्सिडी में लगभग 900 करोड़ रुपये की बचत हुई।
  • जलस्तर बढ़ने के कारण हरियाणा में लगभग 6 लाख एकड़ भूमि जलभराव से प्रभावित है।
  • मांगे गए पैकेज में भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के विस्तार के लिए पूंजी निवेश शामिल करने का अनुरोध।
  • केंद्र से विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के संसाधनों को समन्वित वित्तीय ढांचे में लाकर विशेष केंद्र प्रायोजित एकीकृत वित्तीय पैकेज पर विचार करने का आग्रह।
  • केंद्र ने देशभर में एफपीओ इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर दिया; हरियाणा ने हाल ही में अपना एफपीओ मिशन शुरू किया है।

समयरेखा

  1. 20 सितंबर (समाचार तिथि), नई दिल्लीवित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित 'विकसित भारत' वित्त पोषण सम्मेलन में मुख्यमंत्री की भागीदारी की खबर।
  2. शनिवारदो दिवसीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद मुख्यमंत्री सैनी ने मीडिया को संबोधित करते हुए एकीकृत पैकेज की मांग की।
  3. हाल ही मेंहरियाणा ने एफपीओ मिशन शुरू किया।
  4. 2026-27प्राकृतिक व जैविक खेती का रकबा लगभग 50,000 एकड़ (चार गुना वृद्धि) होने की संभावना।
  5. 2030-31रकबा 1.50 लाख एकड़ तक विस्तार का लक्ष्य।

किसका दाँव

  • हरियाणा सरकार / मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी — प्राकृतिक खेती के विस्तार, जल सुरक्षा और जलभराव समाधान के लिए केंद्र से एकीकृत वित्तीय पैकेज हासिल करना।
  • केंद्रीय वित्त मंत्रालय — सम्मेलन का आयोजक; राज्यों की मांगों व केंद्र प्रायोजित समन्वित वित्तीय ढांचे पर निर्णय।
  • हरियाणा के किसान — मांग के अनुसार उर्वरक उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई, प्राकृतिक खेती क्लस्टर और जलभराव से राहत।
  • किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) — केंद्र के जोर और राज्य के एफपीओ मिशन से इकोसिस्टम मजबूत होने की संभावना।
  • अन्य राज्य — सम्मेलन में अपने विचार साझा किए; निर्णयों से देशभर के राज्यों को लाभ की अपेक्षा।
  • कुरुक्षेत्र व मोरनी ब्लॉक — क्रमशः 2,000 एकड़ प्राकृतिक खेती क्लस्टर और प्राकृतिक सब्जी खेती मॉडल के स्थल।

क्यों अहम है

हरियाणा देश के अन्नभंडार भरने और खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता में बड़ा योगदान देता है, लेकिन बढ़ते जलस्तर से 6 लाख एकड़ जलभराव की चपेट में है — यानी उत्पादकता और संसाधन स्थायित्व दोनों दांव पर हैं। प्राकृतिक खेती के विस्तार के साथ भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई को एक पैकेज में जोड़ने की मांग कृषि नीति को जल सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश दर्शाती है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा से 900 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचत दिखाती है कि डिजिटल पंजीकरण से लक्षित वितरण और राजकोषीय बचत संभव है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 'विकसित भारत की दिशा में भारत का वित्त पोषण' दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजक: केंद्रीय वित्त मंत्रालय।
  • हरियाणा की मांग: 'एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा वित्त पोषण पैकेज'।
  • कुरुक्षेत्र में 2,000 एकड़ का प्राकृतिक खेती मॉडल क्लस्टर; मोरनी ब्लॉक — प्राकृतिक सब्जी खेती मॉडल।
  • मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल से उर्वरक खरीद जुड़ने पर केंद्र को ~900 करोड़ रुपये सब्सिडी बचत।
  • हरियाणा में जलस्तर बढ़ने से लगभग 6 लाख एकड़ जलभराव प्रभावित।
  • प्राकृतिक/जैविक खेती लक्ष्य: 2026-27 में ~50,000 एकड़, 2030-31 तक 1.50 लाख एकड़।

मेन्स दृष्टिकोण

हरियाणा का मामला दर्शाता है कि हरित क्रांति वाले सघन सिंचित राज्यों में कृषि की चुनौती अब उत्पादन से हटकर संसाधन-स्थायित्व की ओर बढ़ रही है: एक ओर रासायनिक निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक व जैविक खेती का विस्तार (2026-27 में ~50,000 एकड़, 2030-31 तक 1.50 लाख एकड़), दूसरी ओर बढ़ते जलस्तर से 6 लाख एकड़ भूमि पर जलभराव। राज्य का तर्क है कि इन परस्पर जुड़ी समस्याओं के लिए बिखरी हुई केंद्रीय योजनाओं के बजाय एक समन्वित वित्तीय ढांचा चाहिए, जिसमें भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई के लिए पूंजी निवेश शामिल हो। संस्थागत पक्ष पर दो उपाय सामने आते हैं — डिजिटल पंजीकरण (मेरी फसल-मेरा ब्योरा) से उर्वरक की मांग-आधारित आपूर्ति, जिससे केंद्र को ~900 करोड़ रुपये की सब्सिडी बचत हुई, और एफपीओ इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए राज्य का एफपीओ मिशन। आगे की राह में मॉडल क्लस्टर (कुरुक्षेत्र, मोरनी) को व्यापक पैमाने पर दोहराना, जलभराव प्रबंधन को सिंचाई नियोजन से जोड़ना, तथा सौर व हरित ऊर्जा के विस्तार को कृषि-जल-ऊर्जा संबंध के हिस्से के रूप में देखना शामिल है; स्रोत में केंद्र के निर्णय का उल्लेख नहीं है।

मुख्य शब्द

एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा वित्त पोषण पैकेज
हरियाणा द्वारा केंद्र से मांगा गया पैकेज, जिसमें भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन व सूक्ष्म सिंचाई हेतु पूंजी निवेश शामिल करने का अनुरोध।
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल
हरियाणा का पोर्टल, जिससे किसानों की उर्वरक खरीद जोड़ी गई ताकि मांग के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध हो सके।
एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन)
किसानों के सामूहिक संगठन; केंद्र ने इनका इकोसिस्टम मजबूत करने पर जोर दिया, हरियाणा ने एफपीओ मिशन शुरू किया।
जलभराव (वाटरलॉगिंग)
जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी रुक जाना; हरियाणा में लगभग 6 लाख एकड़ भूमि प्रभावित।
प्राकृतिक खेती मॉडल क्लस्टर
कुरुक्षेत्र में विकसित हो रहा 2,000 एकड़ का समूह, जो प्राकृतिक खेती के प्रसार का प्रदर्शन-मॉडल है।
विकसित भारत वित्त पोषण सम्मेलन
वित्त मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन, जिसमें राज्यों की अर्थव्यवस्था, कृषि व ऊर्जा पर चर्चा हुई।

अभ्यास प्रश्न

  1. हरित क्रांति वाले राज्यों में जलभराव और भूजल असंतुलन की समस्या के कारण बताते हुए चर्चा करें कि प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा को एक एकीकृत वित्तीय ढांचे में जोड़ना क्यों आवश्यक है।
  2. डिजिटल फसल पंजीकरण पोर्टल (जैसे मेरी फसल-मेरा ब्योरा) उर्वरक सब्सिडी के लक्षित वितरण और राजकोषीय बचत में कैसे सहायक हो सकते हैं? हरियाणा के अनुभव के आधार पर परीक्षण करें।
  3. किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का इकोसिस्टम मजबूत करना छोटे किसानों की आय और बाजार पहुंच के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? समीक्षा करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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