कृषि गोलिया खुर्द

पंजाब में 'घरेलू बगीची' मॉडल, गेहूं-धान से आगे की खेती

पंजाब के मोगा जिले के गोलिया खुर्द गांव के सीमांत किसान और नर्सरी उत्पादक गुरप्रीत सिंह (35) अपने मार्गदर्शक, लुधियाना के पोहिर गांव के जगदेव सिंह (62) के सहयोग से 'घरेलू बगीची' यानी घरेलू फल बगीचे का मॉडल बढ़ावा दे रहे हैं। अलग-अलग पकने की अवधि वाली किस्में लगाकर साल भर फल मिलते रहते हैं। दोनों ने सैकड़ों बगीचियां स्थापित कराई हैं। गुरप्रीत के अनुमान से नर्सरी खेती से प्रति एकड़ एक चक्र में 3-5 लाख रुपये मिलते हैं, जबकि गेहूं-धान से सालाना 90 हजार से 1 लाख रुपये।

स्रोत

Indian Express — Cities · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Nursery farming can generate Rs 3-5 lakh per acre in one cycle, with at least three cycles possible in a year. — Attributed in source to Gurpreet Singh as his own estimate; no independent data given.
  • Annual profit from wheat-paddy cultivation is around Rs 90,000 to Rs 1 lakh per acre. — Presented as Gurpreet Singh's estimate in the source; unverified externally.
  • Jagdev Singh has been developing the orchard model since 2005, starting on one kanal. — Attributed to Jagdev Singh in the source; figure appears in source.
  • Gurpreet expanded his holding to about two acres and runs a 2.5-acre nursery, reducing leased land to about 15 acres in 2022. — Figures appear in the source, sourced to the farmer's account.
  • Recommendations draw on Punjab Agricultural University and the Horticulture Department. — Attributed to Jagdev Singh; no direct comment from either institution in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

पंजाब में गेहूं-धान चक्र से सालाना मुनाफा प्रति एकड़ करीब 90 हजार से 1 लाख रुपये पर ठहरा हुआ है, ऐसे में नर्सरी आधारित 'घरेलू बगीची' मॉडल एक उच्च-मूल्य पर उच्च-श्रम वाले विकल्प के रूप में सामने आता है। गुरप्रीत सिंह का अनुमान है कि नर्सरी खेती से प्रति एकड़ एक चक्र में 3-5 लाख रुपये मिल सकते हैं और साल में तीन चक्र तक संभव हैं — फर्क बड़ा है, लेकिन इसके लिए रोज़ की निगरानी, ग्राफ्टिंग का हुनर और बेचने की क्षमता चाहिए। यानी अतिरिक्त आय ज़मीन से कम, श्रम, जानकारी और गुणवत्ता वाली पौध सामग्री से ज़्यादा आती है।

  • छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल आकर्षक है क्योंकि इसे एक कनाल (एकड़ का आठवां हिस्सा) से भी शुरू किया जा सकता है, जिससे पूंजी की बाधा कम रहती है।
  • नर्सरी की ऊंची आय श्रम-गहन आय है — सिंचाई, ग्राफ्टिंग, ग्रेडिंग और रोग प्रबंधन रोज़ ध्यान मांगते हैं, इसलिए यह मशीनीकृत और खरीद-आश्वासन वाली अनाज फसलों का सीधा विकल्प नहीं है।
  • परिवार के स्तर पर घर में उगा फल बाज़ार से फल खरीदने का खर्च घटाता है — यह आय नहीं, पर वास्तविक बचत है; प्रवर्तक पोषण लाभ का तर्क भी देते हैं।
  • गेहूं-धान की तरह फल पौधों को खरीद या समर्थन मूल्य का सहारा नहीं मिलता, इसलिए मांग और कीमत का जोखिम पूरी तरह उत्पादक पर रहता है।
  • सैकड़ों बगीचियां लगना अहम है, पर यह अभी व्यक्तिगत पहल के स्तर पर है; राज्यव्यापी फसल विविधीकरण के असर के लिए पौध आपूर्ति, प्रशिक्षण और बाज़ार जुड़ाव कई गुना बढ़ाना होगा।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि ऐसे नर्सरी-बागवानी मॉडल कुछ उद्यमी किसानों तक सीमित रहते हैं या पौध आपूर्ति, प्रशिक्षण और विपणन का तंत्र बनकर व्यापक कृषि आय विविधीकरण का रास्ता खोलते हैं।

खबर में दिए आय के आंकड़े गुरप्रीत सिंह के स्वयं के अनुमान हैं, स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं; निवेश लागत, जोखिम और कितने किसानों को वास्तव में ऐसी आय मिली, यह खबर स्पष्ट नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पंजाब की खेती लंबे समय से गेहूं-धान चक्र पर केंद्रित रही है, जिससे आय और पोषण दोनों के विकल्प सीमित रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में मोगा जिले के गोलिया खुर्द गांव के सीमांत किसान व नर्सरी उत्पादक गुरप्रीत सिंह (35) अपने मार्गदर्शक, लुधियाना के पोहिर गांव के जगदेव सिंह (62) के साथ मिलकर 'घरेलू बगीची' यानी घरेलू फल बगीचे का मॉडल बढ़ावा दे रहे हैं। यह केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि रूट स्टॉक, कलमी पौधे, भूमि का आकार-दिशा, पेड़ों की वृद्धि और विभिन्न किस्मों की पकने की अवधि को एक साथ ध्यान में रखकर बगीचे की योजना बनाना है। उद्देश्य है साल भर घर पर ताजे फल की उपलब्धता के साथ-साथ खेती की आय में विविधता।

मुख्य तथ्य

  • गुरप्रीत सिंह (35), गांव गोलिया खुर्द, मोगा जिला — सीमांत किसान व नर्सरी उत्पादक; मार्गदर्शक जगदेव सिंह (62), पोहिर गांव, लुधियाना, पेशे से इंजीनियर।
  • जगदेव सिंह 2005 से इस अवधारणा पर काम कर रहे हैं; उन्होंने अपने घर पर एक कनाल से शुरुआत की और किस्मों को 3-4 साल परखने के बाद सिफारिश की।
  • दोनों ने मिलकर सैकड़ों 'घरेलू बगीचियां' स्थापित करने में मदद की है और पंजाब तथा अन्य जगहों के किसानों-परिवारों का मार्गदर्शन किया है।
  • गुरप्रीत का अनुमान: नर्सरी खेती से एक चक्र में प्रति एकड़ 3-5 लाख रुपये; एक एकड़ से साल में कम से कम तीन चक्र संभव।
  • तुलना में गेहूं-धान से सालाना लाभ प्रति एकड़ लगभग 90,000 रुपये से 1 लाख रुपये का अनुमान।
  • गुरप्रीत ने 12-13 वर्ष की उम्र में पिता के साथ पट्टे की जमीन पर सब्जी उगाना शुरू किया; शुरुआती जोत पांच कनाल थी, जो बढ़कर लगभग दो एकड़ हुई और 2.5 एकड़ की नर्सरी बनी।
  • एक समय 25-30 एकड़ पट्टे की जमीन पर खेती की, जिसे 2022 में घटाकर लगभग 15 एकड़ किया; वहां बासमती, आलू, सरसों और गर्मी की मूंग उगाते हैं।
  • फल क्रम: मार्च में बेर, शहतूत, लोकाट; फिर आड़ू, आलूबुखारा, सतलुज पर्पल, काला अमृतसरी, सेब; अंजीर, फालसा, अंगूर, चीकू; अक्टूबर तक दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, राम केला आम।

समयरेखा

  1. 2005जगदेव सिंह ने अपने घर पर एक कनाल में विभिन्न फल किस्में लगाकर 'घरेलू बगीची' अवधारणा विकसित करना शुरू किया।
  2. गुरप्रीत की 12-13 वर्ष की उम्रपिता के साथ पट्टे की जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती शुरू; तब जोत पांच कनाल थी।
  3. लगभग 2014-15गुरप्रीत ने जगदेव सिंह से नर्सरी उत्पादन, रूट स्टॉक तैयारी और ग्राफ्टिंग सीखना शुरू किया।
  4. पिछले पांच वर्षगुरप्रीत बीज से रूट स्टॉक तैयार कर, कठोर देसी/स्थानीय अनुकूल सामग्री पर उन्नत किस्मों की ग्राफ्टिंग कर रहे हैं।
  5. 2022नर्सरी में समय अधिक लगने के कारण पट्टे की खेती 25-30 एकड़ से घटाकर लगभग 15 एकड़ की।

किसका दाँव

  • सीमांत व छोटे किसान — एक कनाल (एक-आठवां एकड़) जितनी जमीन पर भी बगीची संभव; गेहूं-धान से आगे आय विविधीकरण का रास्ता।
  • गुरप्रीत सिंह, नर्सरी उत्पादक — रूट स्टॉक, कलमी पौधे और लाखों सब्जी पौध बेचकर आय; जोत पांच कनाल से बढ़ाकर लगभग दो एकड़ की।
  • जगदेव सिंह, मार्गदर्शक — क्या, कहां लगाएं और फल उत्पादन को कैसे क्रमबद्ध करें — इसकी पूरी परामर्श सेवा देते हैं।
  • ग्रामीण व शहरी परिवार — घर पर ताजे फल की उपलब्धता; कम या बिना खुली जमीन वाले शहरी घर गमलों में मॉडल अपना सकते हैं।
  • पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी व बागवानी विभाग — जगदेव की किस्म-सिफारिशें इनकी जानकारी और अपने क्षेत्रीय अवलोकन पर आधारित हैं।

क्यों अहम है

गेहूं-धान चक्र पर टिकी पंजाब की खेती में यह मॉडल दिखाता है कि छोटी जोत पर भी नर्सरी और फल बगीची से कई गुना अधिक आय संभव है — प्रति एकड़ एक चक्र में 3-5 लाख रुपये के मुकाबले गेहूं-धान से 90 हजार से 1 लाख रुपये सालाना। साथ ही जगदेव सिंह के अनुसार यह आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों में भी फैले कुपोषण और रसायनयुक्त भोजन की समस्या का सस्ता उत्तर है। मॉडल 'परिवार के लिए फल सुरक्षा' और 'खेती की आय में विविधीकरण' दोनों जोड़ता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 'घरेलू बगीची' = घरेलू फल बगीचा; मोगा के गुरप्रीत सिंह और लुधियाना के जगदेव सिंह द्वारा पंजाब में प्रचारित।
  • एक कनाल = एक एकड़ का एक-आठवां हिस्सा (स्रोत के अनुसार)।
  • नर्सरी खेती: प्रति एकड़ एक चक्र में 3-5 लाख रुपये; साल में कम से कम तीन चक्र संभव।
  • गेहूं-धान से अनुमानित वार्षिक लाभ: प्रति एकड़ लगभग 90,000 रुपये से 1 लाख रुपये।
  • किस्म सिफारिशों के स्रोत: पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, बागवानी विभाग और स्वयं के क्षेत्रीय अवलोकन।
  • आम की उल्लिखित किस्में: दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली, राम केला; अन्य — सतलुज पर्पल, काला अमृतसरी।

मेन्स दृष्टिकोण

पंजाब में गेहूं-धान चक्र की एकरूपता ने किसानों की आय के विकल्प सीमित किए हैं और घरेलू पोषण के लिए बाजार पर निर्भरता बढ़ाई है। 'घरेलू बगीची' मॉडल इसका एक सूक्ष्म-स्तरीय उत्तर प्रस्तुत करता है: पहले भूमि की योजना, फिर पौधों का चयन; बड़े, मध्यम और छोटे पेड़ों का संयोजन जिससे जमीन के हर इंच का उपयोग हो और मार्च के बेर-शहतूत-लोकाट से अक्टूबर तक के आमों तक 'एक फल कैलेंडर' बने, न कि एक बार की फसल। आर्थिक पक्ष नर्सरी से जुड़ता है — गुरप्रीत रूट स्टॉक बीज से तैयार कर, मातृ पौधे संभालकर, कमजोर व रोगग्रस्त सामग्री हटाकर हर साल हजारों फल पौधे और लाखों सब्जी पौध तैयार करते हैं, जिससे प्रति एकड़ प्रति चक्र 3-5 लाख रुपये का अनुमान बनता है। सीमाएं भी स्पष्ट हैं: नर्सरी में लगातार निगरानी — सिंचाई, ग्राफ्टिंग, ग्रेडिंग, रोग प्रबंधन — और फंगल रोग तथा रूट-नॉट निमेटोड जैसी मृदाजनित समस्याएं; पौध 20 से 40-60 दिन में तैयार होती है। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार यही है कि मॉडल को एक कनाल से दो-चार कनाल तक और शहरी घरों में गमलों-छोटी जगहों तक विस्तारित किया जाए, जिससे परिवार को फल सुरक्षा और किसान को आय विविधीकरण मिले।

मुख्य शब्द

घरेलू बगीची
घर के पास नियोजित छोटा फल बगीचा, जिसमें अलग-अलग पकने की अवधि वाली किस्में लगाकर साल भर फल मिलते रहें।
रूट स्टॉक
पौधे का जड़वाला आधार भाग, जिस पर उन्नत किस्म की कलम चढ़ाई जाती है; गुरप्रीत इसे बीज से तैयार करते हैं।
ग्राफ्टिंग (कलम बांधना)
उपयुक्त रूट स्टॉक पर उन्नत किस्म का जोड़ लगाकर कलमी पौधा तैयार करने की तकनीक।
कनाल
पंजाब में प्रचलित भूमि माप; स्रोत के अनुसार एक कनाल एक एकड़ का एक-आठवां भाग।
रूट-नॉट निमेटोड
जड़ों में गांठ बनाने वाला मृदाजनित सूत्रकृमि, जिसकी निगरानी नर्सरी में जरूरी बताई गई है।
मातृ पौधे
नर्सरी में रखे गए चयनित पौधे, जिनसे कलम व प्रवर्धन सामग्री ली जाती है।

अभ्यास प्रश्न

  1. पंजाब में गेहूं-धान चक्र से विविधीकरण की चुनौतियों के संदर्भ में 'घरेलू बगीची' जैसे सूक्ष्म-स्तरीय बागवानी मॉडल की संभावनाओं और सीमाओं का परीक्षण कीजिए।
  2. नर्सरी उत्पादन और कलम तकनीक छोटे व सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में कैसे सहायक हो सकती है? स्रोत में दिए आर्थिक अनुमानों के आधार पर चर्चा कीजिए।
  3. 'फल सुरक्षा' और पोषण सुरक्षा के बीच संबंध को स्पष्ट करते हुए बताइए कि शहरी घरों में यह मॉडल किस प्रकार अनुकूलित किया जा सकता है।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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