राष्ट्रीय कोलकाता

कोलकाता में स्वदेशी समुद्र अनुसंधान पोत 'सागर मंथन' लॉन्च

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बुधवार को कोलकाता स्थित ऋषि बंकिम शिपयार्ड में स्वदेशी समुद्र अनुसंधान पोत 'सागर मंथन' लॉन्च किया। डीप ओशन मिशन के तहत राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए बनाया जा रहा 840 करोड़ रुपये का यह पोत 2028 की शुरुआत तक तैयार होने की उम्मीद है, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया। जीआरएसई के अनुसार, 89.5 मीटर लंबा और 18.8 मीटर चौड़ा यह पोत 5,900 टन ग्रॉस टनेज वाला है और 6 किलोमीटर गहराई तक भूभौतिकीय सर्वेक्षण कर सकता है।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • GRSE launched indigenous ocean research vessel 'Sagar Manthan' on September 9, 2026 at its Rishi Bankim Shipyard in Kolkata. — Stated in source with date and venue; attributed to GRSE and event reporting.
  • The vessel costs ₹840 crore and is expected to be ready for use by early 2028. — Figure appears in source, attributed to an unnamed 'top government official'.
  • The vessel is 89.5 m long, 18.8 m wide, has 5,900 tonnes gross tonnage and a speed of 14 knots at 90% MCR. — Specifications appear in source without individual attribution, consistent with GRSE data in the article.
  • It can conduct multibeam and geophysical seismic surveys up to 6 km depth and deploy AUVs and ROVs developed by NIOT. — Attributed to GRSE statement and Earth Sciences secretary Srinivasa Kumar Tummala.
  • The vessel was launched barely five months after keel laying. — Attributed to GRSE managing director Cmde PR Hari (Retd.).

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

'सागर मंथन' का जलावतरण मूल रूप से एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, लेकिन इसका राजनीतिक संदेश साफ है — स्वदेशी जहाज निर्माण, डीप ओशन मिशन और ब्लू इकॉनमी, तीनों एक ही मंच पर। यह कोलकाता स्थित जीआरएसई के शिपयार्ड में हुआ, जिससे केंद्र को पश्चिम बंगाल में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम के जरिये क्षमता और रोजगार का आख्यान पेश करने का अवसर मिलता है। पर ₹840 करोड़ का यह पोत 2028 की शुरुआत तक ही तैयार होगा, यानी ठोस नतीजों का श्रेय भविष्य पर टला हुआ है।

  • कील रखे जाने के मात्र पांच महीने में जलावतरण का जीआरएसई का दावा सरकार को स्वदेशी निर्माण दक्षता पर तैयार तर्क देता है।
  • केंद्रीय मंत्री की शुभकामनाएं और भू-विज्ञान सचिव की उपस्थिति उस परिचित शैली को दिखाती है जिसमें विभागीय पड़ाव को राष्ट्रीय उपलब्धि बनाकर पेश किया जाता है।
  • मैंगनीज नोड्यूल्स और पॉलीमेटालिक सल्फाइड्स का जिक्र इसे समुद्री संसाधन रणनीति से जोड़ता है, जिसे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की क्षमता के प्रदर्शन के रूप में रखा जा सकता है।
  • बंगाल में केंद्रीय पीएसयू का दिखने वाला प्रदर्शन केंद्र के लिए श्रेय लेने का उपयोगी पत्ता है, हालांकि इस खबर में कोई राज्य-स्तरीय प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।
  • चूंकि पोत 2028 से पहले सेवा में नहीं आएगा, राजनीतिक लाभ तत्काल नतीजों से ज्यादा 'शुरू की गई परियोजनाओं' की सूची तक सीमित रहेगा।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 2028 की समयसीमा और ₹840 करोड़ की लागत टिकती है या नहीं — देरी या लागत वृद्धि होने पर यही परियोजना विपक्ष के लिए आलोचना का हथियार बन सकती है।

यह खबर किसी चुनावी गणित, दलीय प्रतिक्रिया या राज्य सरकार के रुख को स्थापित नहीं करती; यहां दी गई राजनीतिक व्याख्या अनुमान है, रिपोर्टेड तथ्य नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने 9 सितंबर 2026 को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में स्वदेशी समुद्र अनुसंधान पोत (ओआरवी) 'सागर मंथन' (यार्ड 3041) लॉन्च किया। यह पोत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के लिए सरकार के डीप ओशन मिशन के तहत बनाया जा रहा है। 840 करोड़ रुपये लागत का यह पोत 2028 की शुरुआत तक उपयोग के लिए तैयार होने की उम्मीद है और भारत की गहरे समुद्र में खोज तथा वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को बढ़ाएगा।

मुख्य तथ्य

  • जीआरएसई ने 9 सितंबर 2026 (बुधवार) को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में ओआरवी 'सागर मंथन' (यार्ड 3041) लॉन्च किया।
  • पोत की लागत 840 करोड़ रुपये है और यह 2028 की शुरुआत तक उपयोग के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
  • पोत 89.5 मीटर लंबा, 18.8 मीटर चौड़ा, 5,900 टन ग्रॉस टनेज वाला है; 90 प्रतिशत मैक्सिमम कंटीन्यूअस रेटिंग पर गति 14 नॉट होगी।
  • जीआरएसई के प्रबंध निदेशक कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त) के अनुसार कील रखे जाने के मात्र पांच महीने बाद पोत लॉन्च किया गया।
  • पोत 6 किलोमीटर गहराई तक स्वाथ मल्टीबीम और भूभौतिकीय सिस्मिक सर्वेक्षण कर सकेगा, साथ ही सीटीडी प्रोफाइलिंग व जल नमूनाकरण करेगा।
  • पोत भूमध्यरेखीय हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अंटार्कटिका के आसपास के जल सहित दक्षिणी महासागर में अनुसंधान कर सकेगा।
  • राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) द्वारा डीप ओशन मिशन के तहत विकसित किए जा रहे एयूवी और आरओवी को लॉन्च व रिकवर करने में सक्षम होगा।
  • पृथ्वी विज्ञान सचिव श्रीनिवास कुमार टुम्मला के अनुसार पोत मैंगनीज नोड्यूल्स और पॉलीमेटैलिक सल्फाइड जैसे समुद्री खनिज संसाधनों की खोज में मदद करेगा।

समयरेखा

  1. लॉन्च से लगभग पांच महीने पहलेजीआरएसई के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में पोत की कील रखी गई (तारीख स्रोत में नहीं दी गई)।
  2. 9 सितंबर 2026कोलकाता में ओआरवी 'सागर मंथन' का लॉन्च व नामकरण समारोह; केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुभकामनाएं दीं।
  3. 2028 की शुरुआतपोत के उपयोग के लिए तैयार होने की अपेक्षित समयसीमा।

किसका दाँव

  • एनसीपीओआर (राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र) — पोत इसी के लिए बन रहा है और यही इसका समन्वय करेगा; अनुसंधान बेड़े में बड़ी वृद्धि।
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय — डीप ओशन मिशन के तहत पोत का स्वामित्व व वैज्ञानिक क्षमता विस्तार; सचिव श्रीनिवास कुमार टुम्मला लॉन्च में उपस्थित।
  • जीआरएसई (गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स) — निर्माणकर्ता; समयसीमा से पहले निर्माण मील के पत्थर हासिल करने की क्षमता का प्रदर्शन।
  • राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) — डीप ओशन मिशन के तहत विकसित एयूवी व आरओवी की तैनाती के लिए मंच मिलेगा।
  • वैज्ञानिक व तकनीशियन समुदाय — पोत पर विश्लेषणात्मक कार्य, डेटा प्रोसेसिंग तथा प्रशिक्षण व शिक्षा सुविधाएं।
  • केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान जितेंद्र सिंह — लॉन्च व नामकरण पर जीआरएसई और मंत्रालय को बधाई दी।
  • ब्लू इकॉनमी से जुड़े क्षेत्र — समुद्री संसाधन, शिपिंग, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स व पर्यटन से जुड़े अनुसंधान को समर्थन।

क्यों अहम है

'सागर मंथन' भारत को हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिणी महासागर में उच्च स्तर के समुद्रविज्ञानीय तथा भूभौतिकीय अनुसंधान की स्वदेशी क्षमता देगा, जिसे सचिव टुम्मला ने "अद्वितीय" बताया। यह मैंगनीज नोड्यूल्स और पॉलीमेटैलिक सल्फाइड जैसे समुद्री खनिजों की खोज तथा सरकार की व्यापक ब्लू इकॉनमी दृष्टि को सहारा देगा। साथ ही यह देश की जहाज निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता का भी प्रदर्शन है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • ओआरवी 'सागर मंथन' (यार्ड 3041) का निर्माण जीआरएसई, कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में; लॉन्च 9 सितंबर 2026।
  • पोत एनसीपीओआर के लिए, डीप ओशन मिशन के तहत; समन्वय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन एनसीपीओआर द्वारा।
  • विशेषताएं: 89.5 मीटर लंबाई, 18.8 मीटर चौड़ाई, 5,900 टन ग्रॉस टनेज, 14 नॉट गति, लागत 840 करोड़ रुपये।
  • 6 किलोमीटर गहराई तक स्वाथ मल्टीबीम व सिस्मिक सर्वेक्षण; सीटीडी प्रोफाइलिंग; उन्नत डॉप्लर मौसम रडार।
  • एनआईओटी डीप ओशन मिशन के तहत एयूवी और आरओवी विकसित कर रहा है।
  • लक्षित समुद्री खनिज: मैंगनीज नोड्यूल्स और पॉलीमेटैलिक सल्फाइड।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता लंबे समय तक सीमित अनुसंधान बेड़े पर निर्भर रही है; 840 करोड़ रुपये के स्वदेशी पोत 'सागर मंथन' का लॉन्च डीप ओशन मिशन के जरिये इस अंतर को भरने का प्रयास है। पोत सब-बॉटम प्रोफाइलर, सिस्मिक उपकरण, उन्नत समुद्रविज्ञानीय यंत्र और डॉप्लर मौसम रडार से लैस होगा, गंभीर समुद्री परिस्थितियों में काम कर सकेगा और भूमध्यरेखीय हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अंटार्कटिका के आसपास दक्षिणी महासागर तक जा सकेगा; यह एनआईओटी के एयूवी/आरओवी की तैनाती का मंच भी बनेगा। इसके निहितार्थ तीन स्तरों पर हैं — वैज्ञानिक (समुद्रविज्ञान, वायुमंडलीय प्रेक्षण, जैविक नमूनाकरण), आर्थिक (मैंगनीज नोड्यूल्स व पॉलीमेटैलिक सल्फाइड जैसे खनिजों की खोज तथा शिपिंग, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन से जुड़ी ब्लू इकॉनमी) और औद्योगिक (कील रखने के पांच महीने में लॉन्च कर जीआरएसई द्वारा स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का प्रदर्शन)। आगे की राह में 2028 की शुरुआत तक समयबद्ध कमीशनिंग, पोत पर वैज्ञानिकों व तकनीशियनों के प्रशिक्षण की सुविधाओं का उपयोग, तथा एनसीपीओआर-एनआईओटी समन्वय से डेटा का प्रभावी उपयोग अहम होगा।

मुख्य शब्द

डीप ओशन मिशन
सरकार का मिशन जिसके तहत 'सागर मंथन' पोत तथा एनआईओटी के एयूवी/आरओवी विकसित किए जा रहे हैं।
एनसीपीओआर
राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं समुद्री अनुसंधान केंद्र; पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन, जिसके लिए पोत बन रहा है और जो इसका समन्वय करेगा।
जीआरएसई
गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता स्थित जहाज निर्माता; प्रबंध निदेशक कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त)।
सीटीडी प्रोफाइलिंग
कंडक्टिविटी, टेम्परेचर और डेप्थ मापन, जिससे समुद्री जल के गुणों का अध्ययन होता है।
एयूवी और आरओवी
स्वचालित पनडुब्बी वाहन तथा दूर से संचालित वाहन, जिन्हें एनआईओटी डीप ओशन मिशन के तहत विकसित कर रहा है।
पॉलीमेटैलिक सल्फाइड व मैंगनीज नोड्यूल्स
हिंद महासागर क्षेत्र में पाए जाने वाले समुद्री खनिज संसाधन, जिनकी खोज पोत से मजबूत होगी।

अभ्यास प्रश्न

  1. डीप ओशन मिशन के उद्देश्यों की चर्चा करते हुए बताइए कि 'सागर मंथन' जैसे स्वदेशी अनुसंधान पोत भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता को कैसे मजबूत करते हैं।
  2. समुद्री खनिज संसाधनों की खोज और ब्लू इकॉनमी के बीच संबंध का परीक्षण कीजिए, स्रोत में उल्लिखित उदाहरणों के आधार पर।
  3. स्वदेशी जहाज निर्माण (जीआरएसई) और वैज्ञानिक संस्थानों (एनसीपीओआर, एनआईओटी) के बीच तालमेल भारत की आत्मनिर्भरता में किस प्रकार योगदान देता है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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