ऑफर वापस लेने पर ऑरेकल समेत 22 कंपनियों पर आईआईटी की कार्रवाई
2026 बैच के छात्रों को दिए 150 से अधिक नौकरी ऑफर पूरे न होने के बाद आईआईटी ने ऑरेकल समेत 22 कंपनियों के साथ अगले दो प्लेसमेंट सत्रों तक सहयोग बंद करने का फैसला किया है। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार, यह निर्णय आईआईटी-गुवाहाटी में एआईपीसी की बैठक में लिया गया। ये ऑफर 23 आईआईटी से जुड़े हैं, ऑरेकल ने करीब 40 ऑफर पूरे नहीं किए। प्रभावित छात्रों में 20-30 प्रतिशत को रेफरल से नौकरी मिली।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- IITs will not cooperate with 22 companies, including Oracle, for the next two placement seasons. — Attributed to an AIPC decision reported by Economic Times; figure appears in source.
- More than 150 offers to 2026 graduates went unhonoured across 23 IITs. — Figure appears in source, credited to the ET report; no primary AIPC document cited.
- Oracle did not honour around 40 offers and has not approached IITs for recruitment this year. — Based on unnamed campus sources; the recruitment point is attributed to IIT-Guwahati Associate Professor John Jose.
- About 20-30% of affected students found jobs through cross-referrals. — Presented as an estimate by John Jose; source states IITs lack a complete count.
- Last year IITs wrote to about 10-11 companies over unhonoured offers. — Figure appears in source without specific attribution.
विश्लेषकों की राय राय
यह सज़ा से ज़्यादा भरोसे को बचाने की एक नीतिगत कोशिश है। "ब्लैकलिस्टिंग" के बजाय "असहयोग" शब्द चुनकर आईआईटी यह संकेत दे रहे हैं कि ऑफर वापस लेने की एक कीमत होगी, साथ ही अपने कानूनी और औद्योगिक जोखिम को सीमित भी रख रहे हैं। पिछले साल अलग-अलग संस्थानों द्वारा 10-11 कंपनियों को चिट्ठी लिखने से लेकर इस साल एआईपीसी के ज़रिए 22 कंपनियों पर संयुक्त कार्रवाई तक का सफ़र बिखरी प्रतिक्रिया से केंद्रीकृत नियम-निर्माण की ओर बदलाव दिखाता है — लेकिन जिन छात्रों के ऑफर पहले ही रद्द हो चुके हैं, उनके लिए इसमें कोई राहत नहीं है।
- असली ताकत सामूहिक सौदेबाज़ी में है: 23 आईआईटी का एक साथ खड़ा होना किसी एक संस्थान की चिट्ठी से कहीं ज़्यादा प्रभावी निवारक है।
- "ब्लैकलिस्टिंग" की जगह "असहयोग" कहना सोचा-समझा शब्द-चयन लगता है, जो मुकदमेबाज़ी के ख़तरे और उद्योग से रिश्तों में स्थायी कड़वाहट, दोनों को टालता है।
- नीति की खामी साफ़ है: दो सीजन की रोक आगे के बैच को बचा सकती है, पर जिनके ऑफर रद्द हुए उनके लिए कोई मुआवज़ा या पक्का विकल्प नहीं देती।
- अमल अभी अधूरा है — अंतिम सूची बन रही है और आईआईटी खुद मानते हैं कि नौकरी खोज रहे प्रभावित छात्रों की पूरी गिनती उनके पास नहीं है, जिससे लक्षित मदद मुश्किल हो जाती है।
- क्रॉस-रेफरल से 20-30% प्रभावित छात्रों को नौकरी मिलने का अनुमान प्लेसमेंट सेल की तेज़ प्रतिक्रिया दिखाता है, मगर यह अनुमान है, कोई ढांचागत समाधान नहीं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 30 सितंबर तक कंपनियों को सूचित करने के बाद अंतिम सूची कैसी बनती है, कोई कंपनी इस पर आपत्ति या जवाब देती है या नहीं, और आने वाले सीजन में ऑफर वापसी घटती है या भर्ती ऑफ-कैंपस रास्तों पर खिसक जाती है।
यह खबर इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट और कैंपस सूत्रों पर आधारित है; इसमें अंतिम सूची, ओरेकल सहित किसी कंपनी का पक्ष, और "असहयोग" के व्यावहारिक अमल व उल्लंघन के नतीजों का ब्योरा नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
आईआईटी के कैंपस प्लेसमेंट में कंपनियों द्वारा नौकरी के ऑफर देकर बाद में वापस लेने की घटनाएँ बढ़ी हैं। 2026 बैच के स्नातकों को दिए गए 150 से अधिक ऑफर पूरे नहीं किए गए, जिसके बाद आईआईटी की केंद्रीय प्लेसमेंट समन्वय संस्था एआईपीसी ने 22 कंपनियों के साथ अगले दो प्लेसमेंट सत्रों तक "असहयोग" (नॉन-कोऑपरेशन) का फैसला किया। इनमें अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी ऑरेकल भी शामिल है, जिसने कथित तौर पर करीब 40 ऑफर पूरे नहीं किए। यह फैसला इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी-गुवाहाटी में हुई बैठक में लिया गया।
मुख्य तथ्य
- 23 आईआईटी में 2026 बैच के स्नातकों को दिए गए 150 से अधिक नौकरी ऑफर पूरे नहीं किए गए।
- 22 कंपनियों को अगले दो प्लेसमेंट सत्रों तक आईआईटी के असहयोग का सामना करना पड़ेगा।
- यह निर्णय इसी महीने आईआईटी-गुवाहाटी में एआईपीसी की बैठक में लिया गया (रिपोर्ट: इकनॉमिक टाइम्स)।
- एआईपीसी 30 सितंबर तक संबंधित कंपनियों को इस फैसले की जानकारी देने की योजना बना रही है।
- ऑरेकल ने कथित तौर पर आईआईटी छात्रों को दिए करीब 40 ऑफर पूरे नहीं किए; कंपनी ने इस साल अब तक आईआईटी में भर्ती के लिए संपर्क नहीं किया।
- कुछ कंपनियों ने 10 से 15 ऑफर प्रति कंपनी वापस लिए; सूची में कई स्टार्टअप भी शामिल बताए गए हैं।
- आईआईटी-गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस के अनुमान के मुताबिक प्रभावित छात्रों में 20 से 30 प्रतिशत को क्रॉस-रेफरल से नौकरी मिली।
- पिछले साल अलग-अलग आईआईटी ने ऑफर पूरा न करने वाली करीब 10-11 कंपनियों को पत्र लिखा था; इस साल यह संख्या 22 हो गई।
समयरेखा
- पिछला वर्षअलग-अलग आईआईटी ने ऑफर पूरा न करने वाली करीब 10-11 कंपनियों को पत्र लिखे।
- सितंबर 2026 (महीने की शुरुआत)आईआईटी-गुवाहाटी में एआईपीसी की बैठक में 22 कंपनियों के साथ दो प्लेसमेंट सत्रों तक असहयोग का फैसला।
- 25 सितंबर 2026फैसले की रिपोर्ट सामने आई; अंतिम सूची तैयार की जा रही है क्योंकि आईआईटी एआईपीसी को ताज़ा स्थिति बता रहे हैं।
- 30 सितंबर तक (प्रस्तावित)एआईपीसी संबंधित कंपनियों को निर्णय की सूचना देगी।
- आगामी प्लेसमेंट सत्रचिह्नित कंपनियाँ अगले दो सत्रों तक आईआईटी कैंपस भर्ती में शामिल नहीं होंगी।
किसका दाँव
- 2026 बैच के आईआईटी छात्र — ऑफर वापस लिए जाने से नौकरी और करियर की शुरुआत अनिश्चित; कुछ को रेफरल से ही रोजगार मिला।
- एआईपीसी (ऑल इंडिया प्लेसमेंट कमिटी) — आईआईटी में प्लेसमेंट व इंटर्नशिप दिशानिर्देशों का समन्वय और ऑफर की विश्वसनीयता की रक्षा।
- 23 आईआईटी और उनके प्लेसमेंट कार्यालय — प्रभावित छात्रों के सीवी मौजूदा भर्तीकर्ताओं में भेजना; संस्थानों की प्लेसमेंट प्रतिष्ठा।
- ऑरेकल — करीब 40 ऑफर पूरे न करने के आरोप; दो सत्रों तक आईआईटी कैंपस भर्ती से बाहर।
- अन्य 21 कंपनियाँ व स्टार्टअप — दो प्लेसमेंट सत्रों तक आईआईटी टैलेंट पूल से भर्ती का अवसर खोना।
- आईआईटी-गुवाहाटी के एसोसिएट प्रोफेसर जॉन जोस — प्रभावित छात्रों की स्थिति और ऑरेकल के संपर्क न करने पर जानकारी देने वाले सूत्र।
क्यों अहम है
कैंपस प्लेसमेंट का पूरा ढाँचा इस भरोसे पर टिका है कि दिया गया ऑफर पूरा होगा; 150 से अधिक ऑफर वापस होने से यह भरोसा कमजोर होता है और छात्र अंतिम वर्ष में वैकल्पिक अवसर खो देते हैं। तकनीकी क्षेत्र में एंट्री-लेवल भर्ती की अनिश्चितता के बीच आईआईटी की यह कार्रवाई संस्थागत जवाबदेही तय करने की कोशिश है। पत्र लिखने वाली कंपनियों की संख्या 10-11 से 22 होना बताता है कि समस्या बढ़ रही है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- एआईपीसी: आईआईटी में प्लेसमेंट व इंटर्नशिप दिशानिर्देशों का समन्वय करने वाली केंद्रीय संस्था।
- 150 से अधिक अपूर्ण ऑफर 23 आईआईटी से जुड़े; 22 कंपनियों पर दो प्लेसमेंट सत्रों की कार्रवाई।
- आईआईटी इसे "ब्लैकलिस्टिंग" नहीं, "नॉन-कोऑपरेशन" (असहयोग) कहेंगे।
- ऑरेकल: अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी; करीब 40 ऑफर पूरे न करने का आरोप, इस साल वैश्विक स्तर पर हजारों नौकरियों में कटौती।
- बैठक स्थल: आईआईटी-गुवाहाटी; कंपनियों को सूचना देने की तय समय-सीमा 30 सितंबर।
- प्रभावित छात्रों में 20-30% को क्रॉस-रेफरल के जरिये नौकरी मिली (अनुमान: प्रो. जॉन जोस)।
मेन्स दृष्टिकोण
कैंपस भर्ती में ऑफर वापसी की बढ़ती प्रवृत्ति तकनीकी क्षेत्र में सतर्क भर्ती और वैश्विक छँटनी (ऑरेकल ने इस वर्ष भारत सहित दुनिया भर में हजारों नौकरियाँ घटाईं) से जुड़ी है, जिसका बोझ अंततः अंतिम वर्ष के छात्रों पर पड़ता है जो एक ऑफर स्वीकार कर लेने के बाद अन्य अवसर छोड़ देते हैं। आईआईटी की प्रतिक्रिया दो स्तरों पर है—उपचारात्मक, जिसमें प्रभावित छात्रों के सीवी मौजूदा भर्तीकर्ताओं में परिचालित किए गए (20-30% को इससे नौकरी मिली), और निवारक, जिसमें 22 कंपनियों के साथ दो सत्रों तक असहयोग तय हुआ। सीमाएँ स्पष्ट हैं: सूची अभी संकलित हो रही है, बिना नौकरी रह गए छात्रों की पूरी गिनती नहीं है क्योंकि कई ऑफ-कैंपस या निजी नेटवर्क से नौकरी पाकर संस्थान को सूचित नहीं करते, और असहयोग की कोई कानूनी बाध्यता स्रोत में वर्णित नहीं है। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार एआईपीसी जैसे साझा मंच के जरिये एकरूप दिशानिर्देश, कंपनियों को समयबद्ध सूचना (30 सितंबर तक) और छात्रों के लिए क्रॉस-रेफरल जैसी सहायता प्रणाली को मजबूत करना है, ताकि प्लेसमेंट प्रणाली से दिए गए ऑफर की विश्वसनीयता बनी रहे।
मुख्य शब्द
- एआईपीसी
- आईआईटी में प्लेसमेंट और इंटर्नशिप दिशानिर्देशों का समन्वय करने वाली केंद्रीय समिति, जिसने असहयोग का निर्णय लिया।
- नॉन-कोऑपरेशन (असहयोग)
- आईआईटी द्वारा अपनाया गया शब्द—कंपनी को अगले दो प्लेसमेंट सत्रों में कैंपस भर्ती के लिए नहीं बुलाया जाएगा; इसे ब्लैकलिस्टिंग नहीं कहा गया।
- ऑफर विदड्रॉल
- कंपनी द्वारा छात्र को दिया गया नौकरी का प्रस्ताव बाद में पूरा न करना या वापस ले लेना।
- क्रॉस-रेफरल
- प्लेसमेंट कार्यालय द्वारा प्रभावित छात्रों के सीवी मौजूदा भर्तीकर्ताओं में भेजकर उपलब्ध पदों पर विचार कराना।
- एंट्री-लेवल हायरिंग
- नए स्नातकों की शुरुआती स्तर की भर्ती, जो तकनीकी क्षेत्र में अनिश्चितता का सामना कर रही है।
- ऑरेकल
- अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी; करीब 40 आईआईटी ऑफर पूरे न करने के कारण कार्रवाई की सूची में शामिल।
अभ्यास प्रश्न
- कैंपस प्लेसमेंट में ऑफर वापसी की बढ़ती घटनाओं के कारण और छात्रों पर उनके प्रभाव का परीक्षण कीजिए। आईआईटी का "असहयोग" मॉडल कितना प्रभावी उपाय है?
- क्या शैक्षणिक संस्थानों द्वारा कंपनियों पर असहयोग जैसी कार्रवाई पर्याप्त है, या भर्ती प्रस्तावों की जवाबदेही के लिए व्यापक नियामक ढाँचे की आवश्यकता है? तर्क सहित उत्तर दें।
- तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक छँटनी और सतर्क भर्ती का भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों की प्लेसमेंट प्रणाली पर क्या असर पड़ता है? चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
