यूसीसी पर टीडीपी, शिवसेना का समर्थन; जद(यू) ने बिहार में नकारा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान के एक दिन बाद कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी, सहयोगी दलों ने प्रतिक्रिया दी। टीडीपी, शिवसेना और हम (सेक्युलर) ने समर्थन किया। लोकसभा में टीडीपी नेता लावु कृष्ण देवरायलु ने कहा, "हम इसका समर्थन करेंगे।" जद(यू) नेता श्याम रजक ने दोहराया कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में लागू नहीं होने देगी। एनसीपीआई और लोजपा (रा.वि.) ने विचार-विमर्श के बाद रुख तय करने की बात कही।

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Amit Shah announced UCC would be implemented in all 21 NDA-ruled states before the 2029 Lok Sabha polls. — Attributed to the Union Home Minister in the source; figure of 21 states appears in source.
  • TDP will support the UCC. — Directly quoted to Lavu Krishna Devarayalu, TDP's Lok Sabha leader, speaking to The Indian Express.
  • JD(U) supports the Bill nationally but will not allow it in Bihar. — Quoted to JD(U) leader Shyam Rajak in Patna, citing Nitish Kumar's earlier position.
  • Census 2011 figures for Andhra Pradesh and West Bengal population shares. — Figures appear in source, attributed to the 2011 Census.
  • 'UCC is very much needed in a country like India' remark. — Attributed only to an unnamed TDP leader; no source given by name.

विश्लेषकों की राय राय

AI రాజకీయ విశ్లేషకులు · తెలుగు

యూసీసీని పార్లమెంటు మార్గంలో కాకుండా రాష్ట్రాల మార్గంలో తీసుకెళ్లడం బీజేపీకి రాజకీయంగా చౌకైన వ్యూహం — దీనితో మిత్రపక్షాలు జాతీయ స్థాయిలో "మద్దతు" ప్రకటిస్తూనే, సొంత రాష్ట్రాల్లో ముస్లిం ఓటర్లకు వేరే సమాధానం చెప్పుకోగలుగుతాయి. టీడీపీ 2024కు ముందు తీసుకున్న వైఖరి నుంచి మెత్తబడినట్టు కనిపిస్తున్నా, "ఇప్పుడు చర్చ లేదు, భాగస్వాములతో మాట్లాడాకే" అనే షరతులు ఆ పార్టీకి తప్పించుకునే దారిని ఉంచుకున్నట్టే. జేడీ(యూ) బహిరంగంగా బిహార్‌లో వద్దని చెప్పడం సైద్ధాంతిక వైరుధ్యం కాదు, ఎన్నికల గణితం — ఇది ఎన్‌డీఏ లోపల విభేదం కాకుండా "ఫెడరల్ సౌలభ్యం"గా చిత్రించబడే అవకాశం ఎక్కువ.

  • రాష్ట్రాల మార్గం ఎంచుకోవడం వల్ల ఎన్‌డీఏకు లోక్‌సభలో మెజారిటీ కోసం అవసరమైన మిత్రపక్షాల ఓట్లపై ఒత్తిడి తగ్గుతుంది — 16 ఎంపీలున్న టీడీపీ, 12 ఉన్న జేడీ(యూ)ల వీటో శక్తి పరోక్షంగా నీరుగారుతుంది.
  • టీడీపీ మద్దతు మాటల్లో ఉన్నా, ఆంధ్రప్రదేశ్‌లో సుమారు 10% ముస్లిం జనాభా దృష్ట్యా అమలుకు తొందరపడే సూచనలు కథనంలో లేవు; ఇది "సూత్రప్రాయ మద్దతు, ఆచరణలో ఆలస్యం" నమూనా.
  • జేడీ(యూ) "జాతీయంగా అవును, బిహార్‌లో కాదు" అనే ద్వంద్వ వైఖరి — నితీశ్ కుమార్ చిరకాల సామాజిక సమతుల్య రాజకీయాలకు అనుగుణమైనదే, కానీ ఇది బీజేపీతో బహిరంగ చర్చకు దారితీసే అవకాశం ఉంది.
  • బెంగాల్‌లో బీజేపీ రాష్ట్ర ప్రభుత్వం వేగంగా ముందుకెళ్లాలనుకోవడం, అక్కడి కొత్త మిత్రపక్షం ఎన్‌సీపీఐ (20 ఎంపీలు) వెంటనే మద్దతు ఇవ్వకుండా "చర్చ తర్వాత" అనడం — 27% పైగా ముస్లిం జనాభా ఉన్న రాష్ట్రంలో సున్నితత్వాన్ని సూచిస్తుంది.
  • శివసేన మాత్రం భావజాల ఏకత్వాన్ని చూపి ఎన్‌డీఏలో తన స్థానాన్ని బలపరచుకునే అవకాశంగా దీన్ని ఉపయోగించుకుంటోంది — ఇది మహారాష్ట్ర రాజకీయాల్లో స్పష్టమైన లబ్ధి.

किस पर नज़र रखें — జేడీ(యూ) నేతలు అమిత్ షాతో జరపబోతున్న చర్చల ఫలితం, ఎన్‌సీపీఐ–ఎల్‌జేపీ (ఆర్‌వీ) తుది వైఖరి, మరీ ముఖ్యంగా ఏ ఎన్‌డీఏ రాష్ట్రం మొదట ముసాయిదా బిల్లును బయటపెడుతుందో — అక్కడే ఈ ప్రకటన నిజమైన రాజకీయ పరీక్షకు నిలుస్తుంది.

ఏ రాష్ట్రంలోనూ ముసాయిదా బిల్లు, కాలపరిమితి, చట్టపరమైన స్వరూపం ఏమిటో ఈ కథనం చెప్పలేదు; టీడీపీ వైఖరిలో మార్పు శాశ్వతమా లేక ప్రస్తుత రాజకీయ అవసరమా అనేదీ, మిత్రపక్షాల మద్దతు వాస్తవ అమలుగా మారుతుందా అనేదీ ఇంకా నిర్ధారణ కాలేదు.

गहराई से

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सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। इस घोषणा के एक दिन बाद एनडीए के सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं — कुछ ने खुला समर्थन दिया, कुछ ने सतर्क रुख अपनाया और जद(यू) ने बिहार में इसे लागू न करने की बात दोहराई। खास बात यह है कि यूसीसी की राह संसद के बजाय राज्यों के रास्ते तय की जा रही है, जिससे राज्य-स्तरीय राजनीतिक समीकरण अहम हो गए हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 2019 की 303 से घटकर 240 रह गईं, जिससे बहुमत के लिए सहयोगियों पर निर्भरता बढ़ी है।

मुख्य तथ्य

  • अमित शाह ने कहा कि 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू की जाएगी।
  • लोकसभा में टीडीपी नेता लावु कृष्ण देवरायलु ने कहा, "हम इसका समर्थन करेंगे"; उन्होंने अपनाने से पहले विभिन्न हितधारकों को शामिल करने की बात कही।
  • जद(यू) नेता श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर विधेयक का समर्थन करती है, पर बिहार में लागू नहीं होने देगी।
  • जद(यू) के राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पार्टी यह मुद्दा गृह मंत्री के साथ उठाएगी।
  • 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 2019 की 303 से घटकर 240 हो गईं, जिसके बाद टीडीपी एनडीए में शामिल हुई।
  • 2011 जनगणना: आंध्र प्रदेश की कुल आबादी 8,45,80,777 — हिंदू 7,48,24,149 (88% से अधिक), मुस्लिम 80,82,412 (लगभग 10%)।
  • 2011 जनगणना: पश्चिम बंगाल की आबादी 9,12,76,115 — हिंदू 6,43,85,546 (70% से अधिक), मुस्लिम 2,46,54,825 (27% से कुछ अधिक)।
  • लोकसभा में टीडीपी के 16, शिवसेना के 13, जद(यू) के 12, लोजपा (रा.वि.) के 5 और हम (से.) का 1 सांसद; एनसीपीआई के 20 सांसद।

समयरेखा

  1. 2019 लोकसभा चुनावभाजपा ने 303 सीटें जीतीं।
  2. 2024 लोकसभा चुनाव से पहलेटीडीपी प्रमुख व आंध्र के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि यूसीसी के मामले में टीडीपी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी।
  3. 2024 लोकसभा चुनावभाजपा की सीटें 240 रह गईं; इसके बाद टीडीपी एनडीए में शामिल हुई।
  4. शाह के बयान से तीन महीने पहलेभाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल की, जहाँ पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार यूसीसी की कड़ी विरोधी थी।
  5. शाह के बयान का दिनअमित शाह ने 2029 से पहले 21 एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू करने की घोषणा की।
  6. अगले दिन (सोमवार)टीडीपी, शिवसेना, हम (से.) ने समर्थन जताया; जद(यू) ने बिहार में विरोध दोहराया; एनसीपीआई और लोजपा (रा.वि.) ने विचार-विमर्श की बात कही; बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने शीघ्र प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की।
  7. 2029अगले लोकसभा चुनाव — इससे पहले यूसीसी लागू करने का लक्ष्य।

किसका दाँव

  • भाजपा / केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह — यूसीसी को पार्टी की स्थापना से प्राथमिकता बताया गया; 2029 से पहले 21 एनडीए राज्यों में लागू करने का वादा पूरा करना।
  • टीडीपी (16 लोकसभा, 4 राज्यसभा सांसद) — संसद में एनडीए के बहुमत के लिए अहम; आंध्र में बड़ा मुस्लिम वोट बैंक होने के बावजूद रुख नरम कर समर्थन दिया।
  • जद(यू) (12 लोकसभा, 4 राज्यसभा सांसद) — राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन, लेकिन बिहार में लागू न करने का रुख; नीतीश कुमार पहले व्यापक राष्ट्रीय सहमति की बात कह चुके हैं।
  • शिवसेना (13 लोकसभा, 2 राज्यसभा सांसद) — वैचारिक सहयोगी के तौर पर समर्थन; श्रीकांत शिंदे ने बालासाहेब ठाकरे की पुरानी वैचारिक स्थिति का हवाला दिया।
  • एनसीपीआई (20 लोकसभा सांसद, टीएमसी से अलग हुए) — बंगाल में भाजपा का नया सहयोगी; प्रस्ताव आने पर विचार-विमर्श के बाद रुख तय करेगा।
  • लोजपा (रा.वि.) — 5 लोकसभा सांसद — ब्लूप्रिंट या मसौदा विधेयक सामने आने पर प्रभाव और विधिक ढाँचे का मूल्यांकन करने का रुख।
  • हम (सेक्युलर) — 1 लोकसभा सांसद — राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने शाह के बयान का "पूरे दिल से" स्वागत किया।
  • मुस्लिम समुदाय व अन्य धार्मिक समूह — व्यक्तिगत कानूनों पर सीधा असर; आंध्र में लगभग 10% और पश्चिम बंगाल में 27% से अधिक आबादी।

क्यों अहम है

यूसीसी लंबे समय से भारतीय राजनीति का सबसे विवादास्पद वैचारिक मुद्दा रहा है, और इसे संसद के बजाय राज्यों के रास्ते लागू करने की रणनीति गठबंधन की मजबूरियों और संघीय ढाँचे दोनों को सामने ले आती है। 2024 में भाजपा के 240 सीटों पर सिमटने के बाद टीडीपी और जद(यू) जैसे सहयोगियों का रुख निर्णायक हो गया है, और जद(यू) का \"राष्ट्रीय स्तर पर हाँ, बिहार में नहीं\" वाला रुख इसी तनाव को दर्शाता है। इससे यह सवाल भी उठता है कि क्या राज्य-दर-राज्य लागू संहिता वास्तव में \"समान\" रह सकती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • अमित शाह की घोषणा: 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने का लक्ष्य।
  • लोकसभा में सहयोगी दलों की ताकत: टीडीपी 16, शिवसेना 13, जद(यू) 12, लोजपा (रा.वि.) 5, हम (से.) 1, एनसीपीआई 20।
  • राज्यसभा: टीडीपी और जद(यू) के चार-चार तथा शिवसेना के दो सदस्य।
  • भाजपा की लोकसभा सीटें — 2019 में 303, 2024 में 240।
  • 2011 जनगणना: आंध्र प्रदेश में मुस्लिम लगभग 10%, पश्चिम बंगाल में 27% से अधिक।
  • एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) — तृणमूल कांग्रेस से टूटे सांसदों से बनी, बंगाल में भाजपा की नई सहयोगी।

मेन्स दृष्टिकोण

समान नागरिक संहिता पर अमित शाह की घोषणा ने एक नई कार्यनीति उजागर की है — संसदीय कानून के बजाय एनडीए शासित 21 राज्यों के माध्यम से इसे लागू करना। इसका तात्कालिक कारण गठबंधन गणित है: 2024 में भाजपा 303 से 240 सीटों पर आ गई, जिससे टीडीपी (16 सांसद) और जद(यू) (12 सांसद) जैसे सहयोगी संसद में बहुमत के लिए अनिवार्य हो गए, और दोनों के अपने राज्यों में बड़े मुस्लिम मतदाता आधार हैं (2011 जनगणना के अनुसार आंध्र में लगभग 10%)। परिणामस्वरूप प्रतिक्रियाएँ बंटी हुई हैं — शिवसेना और हम (से.) वैचारिक आधार पर समर्थक, टीडीपी ने पहले की आपत्ति नरम करते हुए समर्थन दिया पर हितधारकों से परामर्श की शर्त जोड़ी, जद(यू) ने राष्ट्रीय समर्थन के साथ बिहार में लागू न करने की स्पष्ट रेखा खींची, और एनसीपीआई तथा लोजपा (रा.वि.) मसौदा देखने के बाद रुख तय करेंगे। इसके निहितार्थ गंभीर हैं: राज्य-दर-राज्य लागू संहिता की एकरूपता, संघीय सहमति, और अल्पसंख्यक विश्वास। आगे का रास्ता वही दिखता है जिसकी ओर सहयोगी संकेत कर रहे हैं — सार्वजनिक मसौदा, हितधारकों से व्यापक परामर्श और नीतीश कुमार द्वारा रेखांकित \"व्यापक राष्ट्रीय सहमति\", ताकि सुधार टकराव के बजाय स्वीकृति के जरिये आगे बढ़े।

मुख्य शब्द

समान नागरिक संहिता (यूसीसी)
सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून का प्रस्ताव; शिवसेना ने इसे समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता के सिद्धांतों से जुड़ा बताया।
एनडीए
भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन; स्रोत के अनुसार 21 राज्यों में इसकी सरकारें हैं।
एनसीपीआई
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया — तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों से बनी पार्टी, लोकसभा में 20 सांसद, बंगाल में भाजपा की सहयोगी।
हम (सेक्युलर)
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) — बिहार का एनडीए सहयोगी, राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, लोकसभा में एक सांसद।
लोजपा (रा.वि.)
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) — बिहार का सहयोगी, लोकसभा में पाँच सांसद; मसौदा आने पर रुख तय करने की नीति।
2011 जनगणना
भारत की अंतिम उपलब्ध जनगणना, जिसके आँकड़े आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की धार्मिक जनसंख्या संरचना बताते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. समान नागरिक संहिता को संसदीय कानून के बजाय राज्यों के माध्यम से लागू करने की रणनीति के संघीय और विधिक निहितार्थों का परीक्षण कीजिए।
  2. गठबंधन राजनीति किस प्रकार बड़े सामाजिक सुधारों की गति और स्वरूप को प्रभावित करती है? 2024 के बाद एनडीए सहयोगियों के यूसीसी पर रुख के आलोक में चर्चा कीजिए।
  3. "राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन, राज्य में विरोध" — जद(यू) के इस रुख का विश्लेषण भारतीय संघवाद और अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व के संदर्भ में कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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