घाना में चीन की भूमिका पर भारतीय नजरिया दर्ज करती रिपोर्ट
वेद वैद्यनाथन और अर्हिन अचियाम्पोंग की रिपोर्ट अटलांटिक काउंसिल ने 16 दिसंबर 2022 को प्रकाशित की, जिसमें अफ्रीका में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारतीय दृष्टिकोण से देखा गया है। इसमें चीन-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार 254 अरब डॉलर और 2020-21 में भारत-अफ्रीका व्यापार 55 अरब डॉलर बताया गया है। शोधकर्ताओं ने घाना में 23 भारतीय कंपनियों में से 12 और घाना निवेश प्रोत्साहन केंद्र की सूची में दर्ज 261 चीनी कंपनियों में से 33 का साक्षात्कार किया।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Africa accounts for almost 25% of global revenues of Chinese construction companies, while US and European firms held over 85% of continental construction contracts in 1990. — Attributed in the report to the China Africa Research Initiative dataset and cited media analyses; figures appear in the source.
- China-Africa two-way trade stood at $254 billion, with investments exceeding $2.07 billion in the first seven months of 2021. — Figure appears in source, attributed to the International Institute for Sustainable Development.
- India's total trade with Africa in 2020-21 was $55 billion and India is the fifth-largest investor with $54 billion cumulative investments. — Figures appear in source; no specific citation given for these two numbers in the text provided.
- Ghana's imports from China rose from $71.3 million to $6.75 billion and exports to China from $4.23 million to $1.52 billion between 1995 and 2020. — Attributed to the Observatory of Economic Complexity 2020 data in the source.
- Researchers interviewed 12 of 23 Indian businesses listed by the Indian High Commission in Accra, and 33 of 261 Chinese firms registered with the Ghana Investment Promotion Centre. — Methodology stated by the report authors; self-reported and internally consistent.
विश्लेषकों की राय राय
यह रिपोर्ट भले कारोबारी सर्वेक्षण की शक्ल में आई हो, इसका असली सार सामरिक है — अफ्रीका में चीन की आर्थिक पकड़ को भारत अब महज व्यापारिक प्रतिस्पर्धा मानकर नहीं चल सकता। रिपोर्ट में दिए आंकड़े — चीन-अफ्रीका व्यापार 254 अरब डॉलर और 2020-21 में भारत-अफ्रीका व्यापार 55 अरब डॉलर — अंतर की मात्रा नहीं, पैमाने का फर्क दिखाते हैं। घाना के निवेश प्रोत्साहन केंद्र की सूची में 261 चीनी कंपनियों के मुकाबले 23 प्रमुख भारतीय कंपनियां होना यही असंतुलन ज़मीनी स्तर पर दर्शाता है।
- अफ्रीका के निर्माण क्षेत्र में चीनी कंपनियों का दबदबा — जहां 1990 में 85 प्रतिशत से अधिक ठेके पश्चिमी कंपनियों के पास थे — यह दिखाता है कि आर्थिक उपस्थिति किस तरह राजनीतिक प्रभाव में बदलती है।
- संयुक्त राष्ट्र में चीन के प्रवेश में अफ्रीकी वोटों की निर्णायक भूमिका का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट बहुपक्षीय मंचों पर अफ्रीकी समर्थन के सामरिक मूल्य को रेखांकित करती है।
- सीमा पर टकराव, भारी व्यापार घाटे और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के बीच भारत-चीन संबंध सबसे निचले स्तर पर बताए गए हैं, और रिपोर्ट का तर्क है कि यह प्रतिस्पर्धा हिंद महासागर से आगे बढ़कर अफ्रीका तक पहुंच चुकी है।
- पूंजी के पैमाने पर चीन की बराबरी न कर पाने की स्थिति में भारत के लिए व्यावहारिक रास्ता जापान और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय सहयोग, क्वाड से जुड़ी पहलें, कौशल हस्तांतरण और प्रवासी भारतीय कड़ियां हैं।
- दूसरा पक्ष भी अहम है: अफ्रीका में बुनियादी ढांचे की वित्तीय कमी सालाना अरबों डॉलर की है, इसलिए घाना जैसे देशों के लिए चीनी निवेश विकल्प नहीं बल्कि ज़रूरत है और अफ्रीकी देश इस होड़ में निष्क्रिय दर्शक नहीं हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि नई दिल्ली अफ्रीका में अकेले प्रतिस्पर्धा करने के बजाय जापान और अमेरिका जैसे साझेदारों के साथ त्रिपक्षीय परियोजनाओं की ओर बढ़ती है या नहीं, और पश्चिम अफ्रीका में अपनी कूटनीतिक तथा व्यापारिक उपस्थिति बढ़ाती है या नहीं।
यह सीमित साक्षात्कार नमूने पर आधारित एक थिंक-टैंक अध्ययन है; इससे भारत या घाना की किसी सरकारी नीति के निर्णय या किसी सैन्य या सुरक्षा घटनाक्रम की पुष्टि नहीं होती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 9 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
अटलांटिक काउंसिल ने 16 दिसंबर 2022 को वेद वैद्यनाथन और अर्हिन अचियाम्पोंग की रिपोर्ट प्रकाशित की, जो अफ्रीका, विशेषकर घाना में चीन की बढ़ती मौजूदगी को भारतीय दृष्टिकोण से परखती है। रिपोर्ट का तर्क है कि पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका भारत के पारंपरिक साझेदार रहे हैं, लेकिन बीजिंग के भू-राजनीतिक व आर्थिक प्रभाव के बाद नई दिल्ली को अपनी भागीदारी फिर से गढ़नी होगी। साथ ही भारत-चीन संबंध सीमा गतिरोध, अविश्वास, भारी व्यापार घाटे और बीआरआई के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के कारण निचले स्तर पर हैं। घाना को केस स्टडी के रूप में चुना गया क्योंकि वहाँ बड़ा भारतीय प्रवासी समुदाय है और यह चीनी प्रवासियों का लोकप्रिय गंतव्य भी बना है।
मुख्य तथ्य
- रिपोर्ट 16 दिसंबर 2022 को प्रकाशित; लेखक वेद वैद्यनाथन और अर्हिन अचियाम्पोंग।
- चीन-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार 254 अरब डॉलर; 2021 के पहले सात महीनों में ही निवेश 2.07 अरब डॉलर से अधिक।
- अफ्रीका की अवसंरचना आवश्यकता सालाना 130-170 अरब डॉलर आँकी गई, वित्तपोषण अंतर 68-108 अरब डॉलर।
- चीनी निर्माण कंपनियों के वैश्विक राजस्व का लगभग 25% अफ्रीका से; बाजार हिस्सेदारी 31%-62%, केन्या नेशनल हाईवेज ऑथोरिटी परियोजनाओं में 85%।
- 1990 में अमेरिकी व यूरोपीय कंपनियों के पास महाद्वीप के 85% से अधिक निर्माण ठेके थे।
- संयुक्त राष्ट्र में पीआरसी के पक्ष का प्रस्ताव 76 मतों से पारित; 35 विरोध, 17 अनुपस्थित—पक्ष के एक-तिहाई से अधिक मत अफ्रीका से।
- शोधकर्ताओं ने घाना की 23 प्रमुख भारतीय कंपनियों में से 12 का साक्षात्कार अगस्त 2022 में अक्रा और टेमा में किया।
- GIPC डेटा की 261 चीनी कंपनियों में 83 से संपर्क हुआ, 33 ने टेलीफोनिक साक्षात्कार दिया।
समयरेखा
- 1949पीआरसी की स्थापना; तब इथियोपिया, मिस्र, लाइबेरिया और रंगभेदी दक्षिण अफ्रीका कुछ स्वतंत्र अफ्रीकी देशों में थे।
- 1962भारत-चीन युद्ध; रणनीतिक हलकों के अनुसार आज संबंध इसके बाद के सबसे निचले स्तर पर।
- 1990अफ्रीका के 85% से अधिक निर्माण ठेके अमेरिकी और यूरोपीय कंपनियों के पास थे।
- 2000-2014शिंगयांग तांग द्वारा घाना में चीनी निवेश का अध्ययन, जिस पर यह शोध आधारित है।
- 24 सितंबर 2021क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन (व्हाइट हाउस फैक्ट शीट)।
- अक्टूबर 2021'India's Path to Power' रिपोर्ट—विकासशील देशों से भारत के संबंध 'क्षीण' हुए।
- अगस्त 2022अक्रा और टेमा में भारतीय कंपनियों के प्रतिनिधियों के साक्षात्कार।
- 2022इचिकोविट्ज़ फैमिली फाउंडेशन का अफ्रीकी युवा सर्वे—15 देश, 4,507 साक्षात्कार।
- 16 दिसंबर 2022अटलांटिक काउंसिल की रिपोर्ट प्रकाशित।
किसका दाँव
- भारत (नई दिल्ली) — अफ्रीका में पारंपरिक साझेदारियाँ बचाए रखना और 'नए आउटरीच' के जरिए आर्थिक व बहुपक्षीय समर्थन हासिल करना।
- चीन (बीजिंग) — अधिकांश अफ्रीकी देशों का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार, निवेशक व ऋणदाता; बहुपक्षीय मंचों पर अफ्रीकी समर्थन।
- घाना — पश्चिम अफ्रीका की तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था; भारतीय प्रवासी और चीनी प्रवासियों, दोनों की मौजूदगी का प्रबंधन।
- अफ्रीकी युवा — 54% मानते हैं चीन का बहुत प्रभाव; सस्ते उत्पाद व रोजगार के लाभ बनाम संसाधन दोहन और स्थानीय नौकरियों की चिंता।
- क्वाड (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान) — अफ्रीका सहित हिंद-प्रशांत में लोकतंत्रों के साथ त्रिकोणीय व व्यावहारिक सहयोग का मंच।
- घाना निवेश प्रोत्साहन केंद्र (GIPC) — 2014-2021 के चीनी निवेश आँकड़ों का स्रोत; निवेश आकर्षण व निगरानी।
- अफ्रीकी सरकारें (जाम्बिया, इथियोपिया) — जाम्बिया निवेश एजेंसियों में चीनी नागरिकों की नियुक्ति; इथियोपिया दवा निर्माण में चीनी निवेश हेतु प्रोत्साहन।
क्यों अहम है
अफ्रीका में चीन की पकड़—व्यापार, ऋण और निर्माण ठेकों में—भारत के पारंपरिक साझेदारी क्षेत्र को नए सिरे से आकार दे रही है, जबकि भारत-अफ्रीका व्यापार चीन-अफ्रीका व्यापार से कई गुना कम है। सीमा गतिरोध के बाद भारत-चीन प्रतिस्पर्धा हिंद महासागर और दक्षिण एशिया से आगे बढ़कर अफ्रीका तक फैल रही है। घाना जैसे जमीनी अध्ययन बताते हैं कि भारतीय कंपनियाँ चीनी कंपनियों के साथ सहअस्तित्व और प्रतिस्पर्धा, दोनों कर रही हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- अटलांटिक काउंसिल रिपोर्ट, 16 दिसंबर 2022: लेखक वेद वैद्यनाथन व अर्हिन अचियाम्पोंग।
- चीन-अफ्रीका व्यापार 254 अरब डॉलर; भारत-अफ्रीका व्यापार 2020-21 में 55 अरब डॉलर।
- क्वाड = अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान; हिंद-प्रशांत में सहयोग, अफ्रीका भी दायरे में।
- FOCAC = फोरम ऑन चाइना-अफ्रीका कोऑपरेशन; जी-20 की ऋण सेवा स्थगन पहल व IMF की CCRT ऋण पुनर्गठन में शामिल।
- चार चीनी ऋणदाता: एक्सिम बैंक ऑफ चाइना, चाइना डेवलपमेंट बैंक, ICBC, CIDCA।
- USAID-टेक्नोसर्व की 'फीड द फ्यूचर इंडिया अफ्रीका इनोवेशन ट्रांसफर प्लेटफॉर्म' ने केन्या-मलावी में भारतीय खड़ीन व टांका तकनीक साझा की।
मेन्स दृष्टिकोण
अफ्रीका में चीन की मौजूदगी अब केवल राज्य-संचालित नहीं, बल्कि 'विखंडित ग्लोबल चाइना' है—कारीगर खनिक, ठेकेदार, उद्यमी, प्रांतीय व राष्ट्रीय अधिकारी—जो 254 अरब डॉलर के व्यापार, अवसंरचना ठेकों में 31-85% तक हिस्सेदारी, औद्योगिक पार्कों और दूरसंचार नेटवर्क के जरिए ठोस रूप लेती है। इसके कारण अफ्रीका का विशाल अवसंरचना वित्तपोषण अंतर (68-108 अरब डॉलर सालाना) और विकल्पों की कमी हैं, जिससे चीन 'पसंदीदा साझेदार' बन रहा है; प्रतिफल में बीजिंग को बहुपक्षीय मंचों पर सामूहिक अफ्रीकी समर्थन मिलता है, जिसकी ऐतिहासिक मिसाल 1971 के यूएन मतदान में 76 पक्षधर मतों में एक-तिहाई से अधिक अफ्रीकी मत हैं। भारत के लिए निहितार्थ दोहरे हैं: पारंपरिक अफ्रीकी साझेदारियों का 'क्षीण' होना, और गलवान के बाद भारत-चीन अविश्वास का अफ्रीका तक विस्तार। आगे का रास्ता रिपोर्ट के सुझावों के अनुरूप है—जापान व अमेरिका जैसे लोकतंत्रों के साथ त्रिकोणीय सहयोग, क्वाड जैसे मंचों का व्यावहारिक उपयोग, खड़ीन-टांका जैसे कम लागत वाले भारतीय तकनीक हस्तांतरण, और चीनी उपस्थिति के जमीनी प्रभाव की सूक्ष्म, केस-स्टडी आधारित समझ (जैसे घाना), ताकि 'नया आउटरीच' धारणाओं के बजाय आँकड़ों पर टिके।
मुख्य शब्द
- ग्लोबल चाइना
- चीन की बहुस्तरीय विदेशी उपस्थिति—खनिक, ठेकेदार, उद्यमी, प्रांतीय व राष्ट्रीय अधिकारी—जो अफ्रीका में एकरूप नहीं, विखंडित रूप में सक्रिय है।
- बीआरआई (बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव)
- चीन की वैश्विक अवसंरचना व संपर्क पहल; इसका चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा भारत-चीन तनाव का एक कारण।
- FOCAC
- फोरम ऑन चाइना-अफ्रीका कोऑपरेशन; इसके ऋण रद्दीकरण कार्यक्रमों का उपयोग चीनी ऋणदाता ऋण पुनर्गठन में करते हैं।
- GIPC
- घाना निवेश प्रोत्साहन केंद्र; इसके आँकड़ों में 2014-2021 की 261 चीनी कंपनियाँ सूचीबद्ध थीं।
- क्वाड
- अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और जापान का समूह, जो अफ्रीकी देशों सहित हिंद-प्रशांत के मुद्दों पर काम करता है।
- अफ्रीकी युवा सर्वे 2022
- इचिकोविट्ज़ फैमिली फाउंडेशन का 15 देशों में 4,507 साक्षात्कारों वाला सर्वे; 54% युवा चीन का बहुत प्रभाव मानते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- अफ्रीका में चीन की बढ़ती आर्थिक व राजनीतिक मौजूदगी भारत के पारंपरिक साझेदारियों के लिए क्या चुनौतियाँ खड़ी करती है? घाना के उदाहरण से समझाइए।
- 'अवसंरचना वित्तपोषण अंतर ही चीन को अफ्रीका का पसंदीदा साझेदार बनाता है।' आँकड़ों के आधार पर परीक्षण कीजिए।
- क्वाड और त्रिकोणीय विकास सहयोग किस हद तक अफ्रीका में भारत की भागीदारी को पुनर्जीवित कर सकते हैं? समीक्षा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
