यूपीआई पर एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से, 97.5% लेनदेन मुक्त

एनपीसीआई ने 15 अक्टूबर 2026 से कुछ यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर की अनुमति दी है। प्रति लेनदेन ₹2,000 से अधिक प्राप्त करने वाले मध्यम और बड़े व्यापारियों को 0.4% देना होगा, ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में एकमुश्त ₹5 तथा पूंजी बाजार भुगतान पर 0.02% लगेगा। व्यक्ति-से-व्यक्ति हस्तांतरण और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान मुफ्त रहेंगे। द हिंदू के विश्लेषण के अनुसार 97.5% लेनदेन मुक्त रहेंगे।

स्रोत

The Hindu — Business · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • MDR on certain UPI payments will apply from October 15, 2026 under an NPCI circular. — Attributed to the NPCI circular as cited in the source.
  • Mid- to large merchants pay 0.4% MDR on UPI transactions above ₹2,000, capped at ₹300 for transactions of ₹75,000 and above. — Figures appear directly in the source text.
  • 97.5% of all UPI transactions will remain free of MDR, including all P2P transfers. — Based on The Hindu's analysis of NPCI volume data, as stated in the source.
  • Yes Bank is the payer bank in over 50% and payee bank in about 55% of UPI transactions, making it the biggest gainer. — Attributed to the source's analysis of NPCI data; no independent verification possible.
  • Maximum possible MDR earnings are about ₹2,400 crore a month or ₹28,000 crore a year. — Source presents this as its own calculation and notes actual collections will be lower.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह यूपीआई के 'मुफ़्त सार्वजनिक ढांचे' से 'लागत वसूलने वाले ढांचे' की ओर पहला ठोस क़दम है — लेकिन जान-बूझकर बहुत सीमित दायरे में रखा गया क़दम। संख्या के हिसाब से 97.5% लेनदेन छूट में हैं, मगर जिन पर एमडीआर लगेगा वे कुल मूल्य का 20% हैं, यानी बोझ छोटी दुकानों पर नहीं बल्कि बड़े कारोबारियों के नक़दी प्रवाह पर पड़ेगा। बैंकों और भुगतान ऐप्स के लिए यह एक नई आय की धारा है — गणना के अनुसार अधिकतम लगभग ₹2,400 करोड़ प्रति माह या सालाना करीब ₹28,000 करोड़, हालांकि छूट, सीमाएँ और फ्लैट दरें वास्तविक वसूली को इससे काफ़ी नीचे रखेंगी।

  • संख्या और मूल्य का अंतर सबसे अहम है: सिर्फ़ 2.5% लेनदेन शुल्क के दायरे में हैं, पर वे कुल मूल्य का 20% बनते हैं — अगस्त 2026 के ₹29.8 लाख करोड़ में से ₹5.99 लाख करोड़।
  • लाभ का बँटवारा स्वभावतः केंद्रित है: वसूली का 40% भुगतानकर्ता के बैंक को, 30% व्यापारी के बैंक को, 20% यूपीआई ऐप को और 10% पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को जाता है, जिससे बड़ी हिस्सेदारी वाले यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस, फ़ोनपे और गूगल पे सबसे मज़बूत स्थिति में हैं।
  • कीमतों पर असर सीधा नहीं, अप्रत्यक्ष सवाल है: उपभोक्ता एमडीआर नहीं देगा, लेकिन 0.4% लागत व्यापारी ख़ुद वहन करेगा या दाम में जोड़ेगा — यही विपक्ष की आपत्ति है, जिस पर सरकार का कहना है कि बैंकों को यह लागत ग्राहकों पर न डालने की सलाह दी गई है और ऐप्स पर प्लेटफ़ॉर्म या छिपे शुल्क लगाने की रोक है।
  • रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट पर फ्लैट ₹5 पतले मार्जिन वाले ज़रूरी क्षेत्रों को लागत की निश्चितता देने की रचना है, जबकि पूँजी बाज़ार भुगतानों पर मात्र 0.02% खुदरा निवेश को हतोत्साहित न करने के लिए है।
  • क्यूआर कोड से महीने में ₹1 लाख तक पाने वाले छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को छूट देने से नीचे के स्तर पर डिजिटल अपनाव धीमा पड़ने का ख़तरा घटता है, और सरकार के अनुसार वसूली का 5% छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने वाले कोष में जाएगा।

किस पर नज़र रखें — 15 अक्टूबर 2026 के बाद देखिए कि व्यापारी ₹2,000 से ऊपर के भुगतान कार्ड या नक़दी की ओर मोड़ते हैं या बिल छोटे हिस्सों में बाँटते हैं, और 'लागत ग्राहक पर न डालें' वाली सलाह व्यवहार में कैसे लागू होती है।

यह ख़बर यह तय नहीं करती कि वास्तव में कितना एमडीआर वसूल होगा, किस बैंक या ऐप को कितनी आय मिलेगी, या लागत उपभोक्ता कीमतों तक पहुँचेगी या नहीं; ₹28,000 करोड़ का सालाना आँकड़ा छूट और सीमाओं से पहले की अधिकतम हद है, और 5% कोष किसकी हिस्सेदारी से आएगा यह स्पष्ट नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब तक व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए शून्य-शुल्क व्यवस्था पर चल रहा था। लंबी अटकलों और बहस के बाद एनपीसीआई ने परिपत्र जारी कर 15 अक्टूबर 2026 से कुछ यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लगाने की अनुमति दी है। एमडीआर वह शुल्क है जो व्यापारी भुगतान प्रोसेसरों और बैंकों को देते हैं; उपभोक्ता इसे सीधे नहीं चुकाते। विपक्ष का तर्क है कि इससे उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी, जबकि सरकार कहती है कि ऐसा नहीं होगा और व्यापारियों पर भी असर न्यूनतम रहेगा।

मुख्य तथ्य

  • एनपीसीआई के परिपत्र के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से कुछ यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर लगेगा।
  • प्रति लेनदेन ₹2,000 से अधिक प्राप्त करने वाले मध्यम व बड़े व्यापारियों पर 0.4% एमडीआर; ₹75,000 और उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300।
  • रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक व पतले-मार्जिन क्षेत्रों में ₹2,000 या अधिक के लेनदेन पर एकमुश्त ₹5 एमडीआर।
  • पूंजी बाजार लेनदेन (म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकर, डीलर, इक्विटी) पर 0.02% एमडीआर, प्रति लेनदेन अधिकतम ₹300।
  • द हिंदू के एनपीसीआई आंकड़ों के विश्लेषण अनुसार: पी2पी 37%, ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान 60.5% — कुल 97.5% लेनदेन शुल्कमुक्त; ₹2,000 से ऊपर के पी2एम केवल 2.5%।
  • पी2पीएम श्रेणी में यूपीआई क्यूआर से मासिक ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारी व स्ट्रीट वेंडर एमडीआर से छूट प्राप्त।
  • अगस्त 2026 में यूपीआई पर कुल ₹29.8 लाख करोड़ का लेनदेन; ₹2,000 से ऊपर के पी2एम लेनदेन ₹5.99 लाख करोड़ (मूल्य का 20%) — अधिकतम एमडीआर आय ~₹2,400 करोड़ मासिक या ₹28,000 करोड़ वार्षिक।
  • एमडीआर बंटवारा: भुगतानकर्ता का बैंक 40%, प्राप्तकर्ता/व्यापारी बैंक 30%, यूपीआई ऐप (टीपीएपी) 20%, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर 10%; कुल एमडीआर संग्रह के 5% के बराबर राशि छोटे व्यापारियों में यूपीआई अपनाने को बढ़ावा देने वाले समर्पित कोष में जाएगी।

समयरेखा

  1. अगस्त 2026यूपीआई पर ₹29.8 लाख करोड़ का लेनदेन, जिसमें ₹2,000 से ऊपर के पी2एम लेनदेन ₹5.99 लाख करोड़।
  2. मंगलवार, 15 सितंबर 2026वित्त मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की — बैंकों को सलाह कि व्यापारी एमडीआर उपभोक्ताओं पर न डालें; यूपीआई ऐप प्रदाताओं पर प्लेटफॉर्म फीस या छिपे शुल्क लगाने की स्पष्ट रोक।
  3. 15 अक्टूबर 2026चुनिंदा यूपीआई भुगतानों पर एमडीआर लागू होने की तिथि।

किसका दाँव

  • एनपीसीआई — परिपत्र जारी कर एमडीआर की अनुमति और छूट श्रेणियाँ तय कीं; यूपीआई नेटवर्क का संचालक।
  • वित्त मंत्रालय / सरकार — दावा कि उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं आएगा और व्यापारियों पर असर न्यूनतम; बैंकों को शुल्क आगे न बढ़ाने की सलाह।
  • मध्यम व बड़े व्यापारी — ₹2,000 से अधिक के प्रति लेनदेन पर 0.4% एमडीआर की लागत वहन करनी होगी।
  • छोटे व्यापारी व स्ट्रीट वेंडर — पी2पीएम के तहत मासिक ₹1 लाख तक प्राप्ति पर एमडीआर से छूट।
  • यस बैंक — 50% से अधिक लेनदेन में भुगतानकर्ता बैंक और लगभग 55% में प्राप्तकर्ता बैंक — सबसे बड़ा लाभार्थी; आईसीआईसीआई बैंक 18.3% (पेयर), एक्सिस बैंक ~19% (पेयी)।
  • फोनपे और गूगल पे (टीपीएपी) — एमडीआर का 20% हिस्सा; फोनपे ~46% और गूगल पे ~32% यूपीआई लेनदेन मात्रा।
  • विपक्ष — तर्क कि इस शुल्क से उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ेंगी।
  • उपभोक्ता — पी2पी हस्तांतरण और ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान मुफ्त; एमडीआर सीधे नहीं देना होगा।

क्यों अहम है

यूपीआई भारत के डिजिटल भुगतान का आधार है और अगस्त 2026 में इस पर ₹29.8 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ; इस पर पहली बार शुल्क आना डिजिटल भुगतान की "मुफ्त" नीति में बदलाव का संकेत है। शुल्क का दायरा सीमित (2.5% से भी कम लेनदेन) है, पर वार्षिक अधिकतम ₹28,000 करोड़ की संभावित आय भुगतान उद्योग की व्यवहार्यता और बैंकों-ऐप्स की कमाई को प्रभावित करेगी। असली परीक्षा यह है कि व्यापारी यह लागत उपभोक्ताओं पर डालते हैं या नहीं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एमडीआर = मर्चेंट डिस्काउंट रेट; यूपीआई पर एनपीसीआई परिपत्र के तहत 15 अक्टूबर 2026 से लागू।
  • 0.4% एमडीआर: ₹2,000 से अधिक प्रति लेनदेन वाले मध्यम/बड़े व्यापारी; ₹75,000+ लेनदेन पर सीमा ₹300।
  • आवश्यक क्षेत्र (रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन, कृषि इनपुट): एकमुश्त ₹5; पूंजी बाजार: 0.02% (अधिकतम ₹300)।
  • पी2पी लेनदेन पूर्णतः मुक्त (कुल मात्रा का 37%); ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी मुक्त (60.5%) — कुल 97.5%।
  • पी2पीएम श्रेणी: मासिक ₹1 लाख तक क्यूआर प्राप्ति वाले छोटे व्यापारी/स्ट्रीट वेंडर एमडीआर मुक्त।
  • एमडीआर बंटवारा: पेयर बैंक 40%, पेयी बैंक 30%, टीपीएपी 20%, पीएसपी 10%; 5% के बराबर राशि छोटे व्यापारी प्रोत्साहन कोष को।

मेन्स दृष्टिकोण

यूपीआई पर एमडीआर की वापसी शून्य-शुल्क डिजिटल भुगतान मॉडल की वित्तीय स्थिरता के प्रश्न से जुड़ी है — बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडरों और यूपीआई ऐप्स को प्राधिकरण, सुरक्षा, निपटान, क्यूआर तैनाती और व्यापारी निपटान की लागत वहन करनी पड़ती है, जिसकी भरपाई अब तक राजस्व स्रोत के अभाव में होती थी। एनपीसीआई का ढाँचा लक्षित है: शुल्क केवल ₹2,000 से अधिक के पी2एम लेनदेन पर, आवश्यक व पतले-मार्जिन क्षेत्रों में एकमुश्त ₹5, पूंजी बाजार में केवल 0.02%, और छोटे व्यापारी/स्ट्रीट वेंडर पूर्ण छूट में — जिससे मात्रा के हिसाब से 97.5% लेनदेन मुक्त रहते हैं। निहितार्थ दोतरफा हैं: एक ओर अगस्त 2026 के आंकड़ों के आधार पर अधिकतम ₹28,000 करोड़ वार्षिक राजस्व उद्योग की व्यवहार्यता और नवाचार को बल दे सकता है; दूसरी ओर लाभ का संकेंद्रण चिंता का विषय है, क्योंकि यस बैंक (50%+ पेयर, ~55% पेयी), फोनपे (~46%) और गूगल पे (~32%) जैसे कुछ ही खिलाड़ी अधिकांश हिस्सा पाएंगे। विपक्ष की आशंका है कि व्यापारी लागत उपभोक्ताओं पर डालेंगे; इसीलिए सरकार ने बैंकों को शुल्क आगे न बढ़ाने की सलाह दी है और ऐप्स पर प्लेटफॉर्म फीस या छिपे शुल्क पर स्पष्ट रोक लगाई है। आगे का रास्ता प्रवर्तन और पारदर्शिता में है — शुल्क-हस्तांतरण की निगरानी, छूटों का सख्त पालन, और एमडीआर संग्रह के 5% के बराबर समर्पित कोष का प्रभावी उपयोग, जिसके योगदान का स्रोत अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

मुख्य शब्द

एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट)
यूपीआई के उपयोग के लिए व्यापारियों द्वारा भुगतान प्रोसेसरों और बैंकों को दिया जाने वाला शुल्क; उपभोक्ता इसे सीधे नहीं देते।
एनपीसीआई
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया — यूपीआई का संचालक, जिसने एमडीआर संबंधी परिपत्र जारी किया।
पी2पी और पी2एम
व्यक्ति-से-व्यक्ति (पूर्णतः मुक्त, मात्रा का 37%) और व्यक्ति-से-व्यापारी लेनदेन (₹2,000 से ऊपर वाले 2.5%) की श्रेणियाँ।
पी2पीएम
पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट श्रेणी — क्यूआर से मासिक ₹1 लाख तक पाने वाले छोटे व्यापारी/स्ट्रीट वेंडर, एमडीआर से मुक्त।
टीपीएपी
थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर — फोनपे, गूगल पे जैसे यूपीआई ऐप, जिन्हें एमडीआर का 20% मिलेगा।
पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर (पीएसपी)
यूपीआई ऐप को केंद्रीय नेटवर्क स्विच से जोड़ने वाले तकनीकी साझेदार बैंक को जोड़ने वाली इकाई; एमडीआर का 10% हिस्सा।

अभ्यास प्रश्न

  1. यूपीआई पर एमडीआर लागू करने के एनपीसीआई के ढाँचे का परीक्षण करें। क्या यह डिजिटल भुगतान की समावेशिता और भुगतान उद्योग की वित्तीय व्यवहार्यता के बीच संतुलन साधता है?
  2. सरकार का दावा है कि एमडीआर से उपभोक्ता कीमतें नहीं बढ़ेंगी, जबकि विपक्ष असहमत है। दोनों तर्कों का मूल्यांकन कीजिए और शुल्क-हस्तांतरण रोकने के उपाय सुझाइए।
  3. एमडीआर के बंटवारे की संरचना (पेयर बैंक 40%, पेयी बैंक 30%, टीपीएपी 20%, पीएसपी 10%) को देखते हुए भारत के भुगतान बाजार में संकेंद्रण के जोखिमों पर चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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