वैश्विक नियमों के बीच ब्रिक्स कर वार्ता महत्वपूर्ण: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब दुनिया भर में कर नियमों पर फिर से बातचीत हो रही है, ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कराधान पर आम सहमति बनाने की ब्रिक्स देशों की कोशिश महत्वपूर्ण है। बुधवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स कर प्रमुखों की बैठक में उन्होंने कहा कि समूह को ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाना चाहिए। ब्रिक्स में 11 सदस्य और 10 भागीदार देश हैं। भारत की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय कराधान व ट्रांसफर प्राइसिंग तथा राजस्व आंकड़ों पर दो कार्यसमूह बनाए गए।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Sitharaman said Brics efforts to find common ground on international taxation are significant as tax rules are renegotiated globally. — Directly attributed to the finance minister, with supporting quotes in the source.
  • Brics has 11 members and 10 partners, listed by name. — Full lists appear in the source; no external verification performed.
  • The UN General Assembly adopted a resolution in 2023 to begin tax convention negotiations; talks began in 2025 and the text is expected by 2027. — Dates stated in the source without attribution to a named official or document.
  • Under India's chairship, Brics set up working groups on International Taxation and Transfer Pricing and on Revenue Statistics. — Stated in source and consistent with Sitharaman's remark that the meeting would review scoping documents for two new working groups.
  • India shared practices such as faceless assessment, pre-filled returns, real-time invoice authentication and AI-enabled taxpayer assistance with Brics partners. — Attributed to the finance minister in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

यह ऊपर से एक मंचीय भाषण लगता है, लेकिन इसके पीछे की अर्थशास्त्रीय बात ठोस है — सीमापार मुनाफे पर कर लगाने का हक किसे मिलेगा। ब्रिक्स देशों को "स्रोत क्षेत्राधिकार" यानी जहाँ आय पैदा होती है, के रूप में पेश करके यह समूह यह तर्क मजबूत कर रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे पर कर उन बाजारों में लगे जहाँ बिक्री और उत्पादन होता है। 11 सदस्य और 10 साझेदार देशों की एक साझा आवाज़ यूएन कर संधि वार्ता में मोलभाव की ताकत बढ़ा सकती है, लेकिन खबर अभी मंशा के स्तर पर है — राजस्व के आंकड़े नहीं हैं।

  • "स्रोत क्षेत्राधिकार" शब्द ही असली आर्थिक निचोड़ है — मकसद कर अधिकारों को मूल कंपनी वाले विकसित देशों से हटाकर उन विकासशील बाजारों की ओर ले जाना है जहाँ कारोबार होता है।
  • ट्रांसफर प्राइसिंग पर बना कार्यसमूह सबसे सीधा कारोबारी असर रखता है, क्योंकि यही बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रभावी कर भार, विवाद लागत और अनुपालन बोझ तय करता है।
  • साझा मानक और साझा औजार कंपनियों की अनुपालन लागत घटा सकते हैं; इसके उलट बिखराव दोहरे कराधान और निवेश की अनिश्चितता बढ़ा सकता है।
  • फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस सत्यापन और एआई-आधारित करदाता सहायता जैसे भारतीय अनुभव साझा करना, दरें बढ़ाए बिना वसूली बढ़ाने का रास्ता है।
  • राजस्व आंकड़ों वाला समूह तकनीकी लगता है, पर तुलनीय आंकड़ों के बिना "उचित हिस्सा" के तर्क को संख्याओं का सहारा नहीं मिलता।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि दोनों कार्यसमूहों के स्कोपिंग दस्तावेज़ 2027 तक तय होने वाली यूएन कर संधि वार्ता में एक साझा ब्रिक्स रुख बनते हैं या पहले अलग-अलग राष्ट्रीय हित सामने आते हैं।

यह खबर यह नहीं बताती कि किस देश का राजस्व कितना बढ़ेगा, कंपनियों पर बोझ कितना पड़ेगा, या ब्रिक्स किसी ठोस नियम पर सहमत हुआ है — यह प्रक्रिया की शुरुआत है, नतीजा नहीं।

गहराई से

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सार

पृष्ठभूमि

ब्रिक्स समूह की कर प्रमुखों की बैठक बुधवार को नई दिल्ली में हुई, जिसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान पर आम सहमति बनाने की ब्रिक्स की कोशिश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दुनिया भर में कर नियमों पर फिर से बातचीत हो रही है। यह बहस संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग ढांचा अभिसमय (UNFCITC) से जुड़ी है, जिसकी वार्ता 2025 में शुरू हुई और जिसका मसौदा 2027 तक अंतिम रूप लेने की उम्मीद है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स ने कर सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए दो नए कार्यसमूह बनाए हैं। ब्रिक्स ने खुद को ग्लोबल साउथ के हितों की पैरवी करने वाले समूह के रूप में प्रस्तुत किया है।

मुख्य तथ्य

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स कर प्रमुखों की बैठक को संबोधित किया।
  • ब्रिक्स में 11 सदस्य हैं - ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और यूएई।
  • ब्रिक्स के 10 भागीदार देश हैं - बेलारूस, बोलिविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
  • भारत की अध्यक्षता में दो कार्यसमूह बनाए गए - एक अंतरराष्ट्रीय कराधान व ट्रांसफर प्राइसिंग पर, दूसरा राजस्व आंकड़ों (रेवेन्यू स्टैटिस्टिक्स) पर।
  • 2023 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नए कर अभिसमय पर वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया; वार्ता 2025 में शुरू हुई और मसौदा 2027 तक अंतिम होने की उम्मीद है।
  • सीतारमण ने इस वर्ष के ब्रिक्स कर ट्रैक के तीन फोकस क्षेत्र बताए - टेक्नोलॉजी, प्रशासन और लोग।
  • भारत ने फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस प्रमाणीकरण और एआई-सक्षम करदाता सहायता के अनुभव ब्रिक्स टैक्स कोलैबोरेशन टूल के जरिये साझा किए।
  • ब्रिक्स ने ब्रिक्स टैक्स सपोर्ट नेटवर्क, ब्रिक्स टैक्स क्रॉस-लर्निंग लैब, कर पेशेवरों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम और 'विमेन इन टैक्स' नेटवर्क को आगे बढ़ाया।

समयरेखा

  1. 2023संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नए अंतरराष्ट्रीय कर अभिसमय पर वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव अपनाया।
  2. 2025UNFCITC पर औपचारिक वार्ता शुरू हुई।
  3. हाल ही में (भारत की अध्यक्षता में)नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने न्यायसंगत, समावेशी, स्थिर और कुशल अंतरराष्ट्रीय कर प्रणाली के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
  4. बुधवारनई दिल्ली में ब्रिक्स कर प्रमुखों की बैठक; दो नए कार्यसमूहों के स्कोपिंग दस्तावेजों पर विचार।
  5. 2027 तक (अपेक्षित)UNFCITC का मसौदा पाठ अंतिम रूप लेने की उम्मीद।

किसका दाँव

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण / भारत सरकार — ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में कर सहयोग को संस्थागत रूप देना और अगली अध्यक्षता के लिए आधार तैयार करना।
  • ब्रिक्स के 11 सदस्य देश — स्रोत क्षेत्राधिकार और बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के रूप में बहुपक्षीय कर वार्ता में साझा रुख बनाना।
  • ब्रिक्स के 10 भागीदार देश — समूह के कर सहयोग ढांचे और क्षमता निर्माण पहलों से जुड़ाव।
  • ग्लोबल साउथ / विकासशील देश — अंतरराष्ट्रीय कर नियमों में निष्पक्षता और अपने हितों की पैरवी; UNFCITC जैसे मंचों पर प्रतिनिधित्व।
  • संयुक्त राष्ट्र (UNFCITC वार्ता) — अधिक न्यायसंगत, समावेशी और पारदर्शी वैश्विक कराधान प्रणाली के लिए संधि को अंतिम रूप देना।
  • कर प्रशासन व युवा कर पेशेवर — क्षमता निर्माण कार्यक्रम, क्रॉस-लर्निंग लैब और डिजिटल उपकरणों से कौशल व अनुभव साझा करने का अवसर।

क्यों अहम है

अंतरराष्ट्रीय कर नियम तय करते हैं कि बहुराष्ट्रीय मुनाफे पर कर कहाँ लगेगा, इसलिए विकासशील देशों के लिए यह राजस्व का सीधा प्रश्न है। सीतारमण के अनुसार ब्रिक्स देश स्रोत क्षेत्राधिकार और बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ हैं, जिनका दृष्टिकोण इन वार्ताओं की निष्पक्षता और टिकाऊपन के लिए आवश्यक है। UNFCITC का पाठ 2027 तक तय होने की संभावना के बीच ब्रिक्स का साझा रुख ग्लोबल साउथ की सौदेबाजी क्षमता बढ़ा सकता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • ब्रिक्स: 11 सदस्य देश और 10 भागीदार देश; भारत वर्तमान अध्यक्ष (स्रोत के अनुसार)।
  • UNFCITC - अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र ढांचा अभिसमय; 2023 में UNGA प्रस्ताव, 2025 में वार्ता शुरू, 2027 तक पाठ अपेक्षित।
  • भारत की अध्यक्षता में बने दो ब्रिक्स कार्यसमूह: अंतरराष्ट्रीय कराधान व ट्रांसफर प्राइसिंग; राजस्व आंकड़े।
  • ब्रिक्स कर ट्रैक के तीन फोकस क्षेत्र: टेक्नोलॉजी, प्रशासन और लोग।
  • भारत के साझा किए गए कर सुधार: फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस प्रमाणीकरण, एआई-सक्षम करदाता सहायता।
  • ब्रिक्स की पहलें: टैक्स सपोर्ट नेटवर्क, टैक्स क्रॉस-लर्निंग लैब, टैक्स कोलैबोरेशन टूल, 'विमेन इन टैक्स' नेटवर्क।

मेन्स दृष्टिकोण

वैश्विक कर व्यवस्था के पुनर्निर्धारण का दौर चल रहा है - 2023 के संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रस्ताव के बाद UNFCITC पर वार्ता 2025 में शुरू हुई और मसौदा 2027 तक अंतिम रूप ले सकता है। इस संदर्भ में ब्रिक्स का महत्व यह है कि उसके सदस्य 'स्रोत क्षेत्राधिकार' और बड़ी विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ हैं जिन्होंने निम्न आधार से घरेलू कर क्षमता बनाई है; सीतारमण के शब्दों में उनका दृष्टिकोण वार्ता की निष्पक्षता और टिकाऊपन के लिए आवश्यक है। चुनौती समूह की विविधता और बहुपक्षीय मंचों पर साझा रुख बनाए रखने में है, जिसका उत्तर ब्रिक्स संस्थागत ढाँचे से खोज रहा है - अंतरराष्ट्रीय कराधान व ट्रांसफर प्राइसिंग तथा राजस्व आंकड़ों पर दो कार्यसमूह, टैक्स सपोर्ट नेटवर्क, क्रॉस-लर्निंग लैब और कोलैबोरेशन टूल। आगे का रास्ता तीन स्तंभों पर टिका बताया गया: प्रौद्योगिकी (डेटा व डिजिटल अवसंरचना से विवेकाधिकार पर निर्भरता घटाना), प्रशासन (साझा मानक और शासन संरचनाएँ) और लोग (युवा कर पेशेवरों की क्षमता निर्माण, महिला कर नेटवर्क)। भारत ने फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस प्रमाणीकरण और एआई-सक्षम करदाता सहायता जैसे अनुभव साझा किए, और अध्यक्षता का उद्देश्य अगले अध्यक्ष को मजबूत आधार सौंपना बताया गया।

मुख्य शब्द

UNFCITC
अंतरराष्ट्रीय कर सहयोग पर संयुक्त राष्ट्र ढांचा अभिसमय - अधिक न्यायसंगत, समावेशी व पारदर्शी वैश्विक कर प्रणाली के लिए प्रस्तावित संधि।
ट्रांसफर प्राइसिंग
बहुराष्ट्रीय समूहों की आपसी लेनदेन कीमतों से जुड़ा कर मुद्दा; ब्रिक्स के एक नए कार्यसमूह का विषय।
स्रोत क्षेत्राधिकार (सोर्स जुरिसडिक्शन)
वह देश जहाँ आय उत्पन्न होती है; सीतारमण के अनुसार ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएँ इसी श्रेणी में हैं।
ग्लोबल साउथ
विकासशील देशों का समूह, जिनके हितों को ब्रिक्स बहुपक्षीय मंचों पर आगे बढ़ाने की मंशा जता चुका है।
फेसलेस असेसमेंट
करदाता और अधिकारी के आमने-सामने संपर्क के बिना कर निर्धारण; भारत ने यह अनुभव ब्रिक्स साझेदारों से साझा किया।
ब्रिक्स टैक्स कोलैबोरेशन टूल
ब्रिक्स देशों के बीच कर प्रशासन के अनुभव व सर्वोत्तम प्रथाएँ साझा करने का मंच।

अभ्यास प्रश्न

  1. UNFCITC वार्ता के संदर्भ में ब्रिक्स देशों का साझा रुख ग्लोबल साउथ की सौदेबाजी क्षमता को कैसे प्रभावित कर सकता है? चर्चा करें।
  2. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में कर सहयोग को संस्थागत रूप देने के प्रयासों (दो कार्यसमूह, सपोर्ट नेटवर्क, कोलैबोरेशन टूल) का मूल्यांकन कीजिए।
  3. प्रौद्योगिकी आधारित कर प्रशासन सुधार - फेसलेस असेसमेंट, प्री-फिल्ड रिटर्न, रियल-टाइम इनवॉइस प्रमाणीकरण - विकासशील देशों की कर क्षमता कैसे बढ़ा सकते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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