भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में सहमति बनी, गोलमेज चर्चा में कहा गया

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की भारतीय अध्यक्षता में दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनी, यह बात चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की गोलमेज चर्चा में कही गई। प्रमुख नतीजों में 2025 के पहलगाम हमले पर सहमति, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और आतंकी वित्तपोषण पर रोक शामिल रहे। सम्मेलन में डी-डॉलरीकरण, सीमापार भुगतान तंत्र और न्यू डेवलपमेंट बैंक को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। ब्रिक्स ओपन-सोर्स एआई समुदाय के चीन के प्रस्ताव पर सदस्यों ने संदेह जताया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The 18th BRICS Summit was held in New Delhi under India's chairmanship and adopted the Delhi Declaration. — Appears in source as reported fact; no external verification possible, and the source dates the summit to September 2026.
  • Consensus was reached on the 2025 Pahalgam attack, with a call for zero tolerance for terrorism and disruption of terror financing. — Stated in source as a summit outcome; not attributed to a specific document quote.
  • China proposed a BRICS open-source AI community, which members viewed with scepticism. — Stated in source without direct attribution to a named speaker.
  • Prime Minister Narendra Modi asked the 11-member bloc to work on 10 global governance reform proposals to form a BRICS Reform Roadmap. — Attributed in source to the keynote address by MEA Joint Secretary Shambhu L. Hakki; no quote provided.
  • The Chintan Research Foundation held a roundtable in New Delhi on 16 September 2026 on lessons from the summit. — Specific date and organiser named in source; date is in the future relative to normal news cycles and should be checked.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता एक राजनीतिक पूंजी बनती दिख रही है — विविध सदस्यों को एक मंच पर लाकर सहमति बनाने की छवि नई दिल्ली को मजबूती देती है, और पहलगाम हमले तथा आतंकी वित्तपोषण पर ब्रिक्स की भाषा सरकार को घरेलू स्तर पर मजबूत तर्क देती है। दूसरी ओर, डी-डॉलरीकरण और साझा मुद्रा की अनुपस्थिति पर अनसुलझे सवाल तथा चीन के प्रस्ताव पर संदेह समूह के भीतर दिशा तय करने की होड़ को उजागर करते हैं। ब्रिक्स को खुलकर पश्चिम-विरोधी बनाने के बजाय मध्यमार्गी रखने की कोशिश भारत की बहु-संतुलन रणनीति से मेल खाती है। यह विशेषज्ञों की राय है; अमल अभी बाकी है।

  • पहलगाम हमले पर सहमति और आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस वह नतीजा है जिसे सरकार बहुपक्षीय मंच पर कूटनीतिक जीत के रूप में सबसे आसानी से पेश कर सकती है।
  • चीन के ओपन-सोर्स एआई कम्युनिटी प्रस्ताव पर सदस्यों का संदेह बताता है कि समूह का एजेंडा कौन तय करेगा, इस पर भीतरी खींचतान है।
  • ब्रिक्स को स्पष्ट पश्चिम-विरोधी खेमे के बजाय मध्यमार्गी मंच के रूप में रखना भारत की पश्चिमी साझेदारियां बचाने की रणनीतिक जरूरत दर्शाता है।
  • पाकिस्तान के संभावित प्रवेश से पैदा होने वाली जटिलताओं और मलेशिया के संभावित योगदान की चर्चा दिखाती है कि विस्तार अब प्रक्रियात्मक नहीं, राजनीतिक मुद्दा है।
  • अगला शिखर सम्मेलन चीन में होने के साथ असली परीक्षा यह है कि भारत का सुधार रोडमैप एजेंडा अध्यक्षता बदलने के बाद कितना टिकता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सीमा-पार भुगतान व्यवस्था, मजबूत न्यू डेवलपमेंट बैंक और सुधार रोडमैप कागज से आगे अमल में आते हैं या नहीं, और चीन की अध्यक्षता में भारत की प्राथमिकताएं कहां टिकती हैं।

यह एक थिंक-टैंक राउंडटेबल में व्यक्त विशेषज्ञ राय है; दिल्ली घोषणापत्र की सटीक भाषा, सदस्य देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं या अमल की समयसीमा इस रिपोर्ट से स्थापित नहीं होती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विस्तारित समूह ने "दिल्ली घोषणापत्र" पर सहमति बनाई। कठिन भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक माहौल तथा भारत की समन्वय क्षमता पर कम अपेक्षाओं के बावजूद यह सहमति बनी। इन नतीजों की समीक्षा के लिए चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) ने 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में "Post BRICS Summit 2026: Presidency and Lessons for India" शीर्षक से गोलमेज चर्चा आयोजित की, जिसमें राजनयिक, शिक्षाविद, थिंक टैंक और सामरिक समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा में सम्मेलन के प्रमुख नतीजों, सदस्यों के बीच सहमति-असहमति के क्षेत्रों और समूह के विस्तार के प्रभावों का आकलन किया गया।

मुख्य तथ्य

  • 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता में दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति बनी, जो विकासशील देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग का संकेत माना गया।
  • भारत के लिए बड़ी उपलब्धि: 2025 के पहलगाम हमले पर सहमति, आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस और आतंकी वित्तपोषण पर रोक का आह्वान।
  • चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) की गोलमेज चर्चा 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में, शिखर सम्मेलन के तीन दिन बाद हुई।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सदस्यीय समूह को 10 वैश्विक शासन सुधार प्रस्तावों पर मिलकर काम करने और एकीकृत 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' बनाने की चुनौती दी, चीन में अगले सम्मेलन से पहले।
  • सम्मेलन में अफ्रीकी संघ, आसियान, CELAC, GCC और बिम्सटेक की उपस्थिति रही, जिससे विकासशील देशों का व्यापक प्रतिनिधित्व मिला।
  • चीन ने ब्रिक्स ओपन-सोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समुदाय बनाने का प्रस्ताव रखा, जिस पर सदस्यों ने संदेह जताया।
  • MEA में संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय) और ब्रिक्स सूस शेरपा शंभु एल. हक्की ने मुख्य भाषण दिया।
  • गोलमेज की सिफारिशें: सीमापार भुगतान तंत्र, ब्रिक्स अनाज विनिमय (grain exchange) और रिमोट-सेंसिंग उपग्रह समूह का शीघ्र कार्यान्वयन तथा न्यू डेवलपमेंट बैंक को और मजबूत करना।

समयरेखा

  1. 2025पहलगाम हमला, जिस पर 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्यों के बीच सहमति बनी।
  2. 13 सितंबर 2026 के आसपास (गोलमेज से तीन दिन पूर्व)नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया।
  3. 16 सितंबर 2026चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की नई दिल्ली में गोलमेज चर्चा—'Post BRICS Summit 2026: Presidency and Lessons for India'।
  4. आगामी महीनेचीन में अगले शिखर सम्मेलन से पहले 10 सुधार प्रस्तावों पर 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' तैयार करने का लक्ष्य।

किसका दाँव

  • भारत (ब्रिक्स अध्यक्ष) — विविध सदस्यों में सहमति बनाकर वैश्विक कूटनीतिक विश्वसनीयता; आतंकवाद पर भाषा और व्यावहारिक सहयोग के एजेंडे को आगे बढ़ाना।
  • विदेश मंत्रालय (MEA) / ब्रिक्स सूस शेरपा शंभु एल. हक्की — अध्यक्षता का संचालन, दिल्ली घोषणापत्र और संस्थागत निरंतरता (ट्रोइका व्यवस्था) सुनिश्चित करना।
  • चीन — ओपन-सोर्स AI समुदाय का प्रस्ताव; अगले शिखर सम्मेलन की मेजबानी और सुधार रोडमैप पर आगे की भूमिका।
  • ग्लोबल साउथ और साझेदार संगठन (अफ्रीकी संघ, आसियान, CELAC, GCC, बिम्सटेक) — व्यापक प्रतिनिधित्व, व्यापार लचीलापन, मानकों के सामंजस्य और संस्थागत सुधार में हिस्सेदारी।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) — सुदृढ़ीकरण और सीमापार भुगतान तंत्र में भूमिका; डी-डॉलरीकरण बहस का केंद्र।
  • विस्तार के इच्छुक/चर्चित देश (पाकिस्तान, मलेशिया, क्यूबा, बोलीविया) — सदस्यता या आर्थिक भागीदारी—पाकिस्तान के शामिल होने से जटिलताएं, मलेशिया से अतिरिक्त वजन।

क्यों अहम है

भारत की अध्यक्षता ने दिखाया कि बढ़ते और विविध ब्रिक्स में भी आतंकवाद, संस्थागत सुधार और व्यावहारिक सहयोग पर सहमति संभव है, और समूह को स्पष्ट पश्चिम-विरोधी रुख से हटाकर अधिक मध्यमार्गी दिशा दी जा सकती है। साथ ही यह ग्लोबल साउथ के लिए ब्रिक्स को व्यापक मंच—व्यापार लचीलापन, खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, AI—के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। परंतु बहुपक्षीय प्रक्रिया होने के कारण अधिकांश नतीजे दीर्घकालिक हैं और कागज से जमीन पर उतरने में समय लेंगे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में; परिणाम दस्तावेज—दिल्ली घोषणापत्र।
  • ब्रिक्स अब 11 सदस्यीय समूह के रूप में उल्लिखित; अगला शिखर सम्मेलन चीन में।
  • ट्रोइका व्यवस्था—वार्षिक अध्यक्षता के रोटेशन में संस्थागत निरंतरता सुनिश्चित करती है।
  • सम्मेलन में शामिल आमंत्रित संगठन: अफ्रीकी संघ, आसियान, CELAC, GCC, बिम्सटेक।
  • राष्ट्रीय मानकीकरण निकायों (NSBs) के प्रमुखों ने मानकों के सामंजस्य और व्यापार बाधाएं घटाने पर चर्चा की।
  • सिफारिशें: सीमापार भुगतान तंत्र, ब्रिक्स अनाज विनिमय, रिमोट-सेंसिंग उपग्रह समूह, NDB का सुदृढ़ीकरण।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का महत्व केवल विस्तारित और विविध समूह को एक मेज पर लाने में नहीं, बल्कि व्यावहारिक सहयोग के इर्द-गिर्द सहमति गढ़ने में है। कारण स्पष्ट हैं: कठिन भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक परिवेश, सदस्यों के बीच विचलन (जैसे चीन के ओपन-सोर्स AI प्रस्ताव पर संदेह), डी-डॉलरीकरण पर अस्पष्टता और साझा ब्रिक्स मुद्रा का अभाव, तथा विस्तार से जुड़ी प्रतिनिधित्व व एकजुटता की दुविधा (पाकिस्तान की संभावित सदस्यता की जटिलताएं, मलेशिया का संभावित योगदान)। निहितार्थ: 2025 के पहलगाम हमले पर सहमति तथा आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और आतंकी वित्तपोषण पर रोक का आह्वान भारत की आतंकवाद-विरोधी कूटनीति को बहुपक्षीय वैधता देता है; एजेंडे का विस्तार—व्यापार लचीलापन, स्वास्थ्य, खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, महिला सशक्तिकरण—ब्रिक्स को ग्लोबल साउथ के व्यापक मंच के रूप में गढ़ता है, न कि संकीर्ण भू-राजनीतिक गुट। आगे का रास्ता: सहमति बिंदुओं का समयबद्ध कार्यान्वयन—सीमापार भुगतान तंत्र, ब्रिक्स अनाज विनिमय, रिमोट-सेंसिंग उपग्रह समूह, NDB का सुदृढ़ीकरण, मानकों का सामंजस्य, कचरे से संपदा सृजन—तथा ट्रोइका के जरिये निरंतरता और चीन में अगले शिखर सम्मेलन से पहले 10 सुधार प्रस्तावों पर एकीकृत सुधार रोडमैप।

मुख्य शब्द

दिल्ली घोषणापत्र
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाया गया परिणाम दस्तावेज, जो विकासशील देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग का संकेत देता है।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB)
ब्रिक्स से जुड़ा विकास बैंक, जिसे और मजबूत करने तथा सीमापार भुगतान से जोड़ने की सिफारिश गोलमेज में की गई।
डी-डॉलरीकरण
अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में डॉलर पर निर्भरता घटाने का प्रयास; सम्मेलन में इसकी चुनौतियों और साझा ब्रिक्स मुद्रा के अभाव पर चर्चा हुई।
ट्रोइका व्यवस्था
पिछली, वर्तमान और आगामी अध्यक्षताओं के समन्वय की व्यवस्था, जो वार्षिक अध्यक्षता बदलने पर संस्थागत निरंतरता देती है।
सूस शेरपा
ब्रिक्स वार्ता में शेरपा के सहयोगी वरिष्ठ अधिकारी; भारत की ओर से MEA के संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय) शंभु एल. हक्की।
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF)
नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक, जिसने 16 सितंबर 2026 को शिखर सम्मेलन के बाद गोलमेज चर्चा आयोजित की।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के प्रमुख नतीजों का परीक्षण कीजिए और बताइए कि विस्तारित ब्रिक्स में सहमति निर्माण की चुनौतियां क्या हैं।
  2. क्या ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी गुट के बजाय ग्लोबल साउथ के व्यावहारिक सहयोग मंच के रूप में स्थापित करना भारत के हित में है? तर्कसहित उत्तर दीजिए।
  3. डी-डॉलरीकरण और सीमापार भुगतान तंत्र पर ब्रिक्स की बहस का मूल्यांकन कीजिए—साझा मुद्रा के अभाव में विकल्प क्या हो सकते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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