कृषि पंजाब

पंजाब में भूजल दोहन दर 152 प्रतिशत, आकलन में खुलासा

2025-26 डायनेमिक भूजल आकलन के अनुसार पंजाब में भूजल दोहन दर 152 प्रतिशत रही। राज्य के 153 ब्लॉकों में से 72 प्रतिशत 'रेड जोन' में हैं, जो देश में सर्वाधिक है। धान और गेहूं की सिंचाई में सालाना करीब 25 अरब घन मीटर पानी खर्च होता है। 2022 से 2025 के बीच मानसून बाद 40 मीटर से नीचे जलस्तर वाले कुओं का अनुपात दो प्रतिशत अंक बढ़ा। अध्ययनों के अनुसार बड़े किसान अधिक पानी निकालते हैं, छोटे किसानों को पानी खरीदना पड़ता है।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Punjab's groundwater extraction rate was 152% as per the 2025-26 Dynamic Groundwater Assessment — Attributed to the 2025-26 Dynamic Groundwater Assessment in the source; figure appears in source.
  • 72% of Punjab's 153 blocks are in the 'red zone', the highest among States — Figure appears in source, drawn from the same assessment; no independent verification possible.
  • Irrigation for rice and wheat consumes nearly 25 billion cubic metres a year — Stated in source as the latest estimate; specific agency not named.
  • Share of observation wells with water below 40 metres post-monsoon rose two percentage points between 2022 and 2025 — Presented as data in the source without naming the dataset.
  • Studies in Economic and Political Weekly and Discover Sustainability found wealthier/larger farms draw more water and record lower groundwater productivity in Sangrur and Barnala — Attributed to named journals; author names not given in source.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

पंजाब में 152% भूजल निकासी दर मूलतः जल-विज्ञान की नहीं, कीमत-संकेत की कहानी है। जब पंपिंग की बिजली सब्सिडी पर हो और धान-गेहूं की खरीद सुनिश्चित हो, तो व्यवस्था में सबसे सस्ता संसाधन वही बन जाता है जो सबसे दुर्लभ है — और सालाना करीब 25 अरब घन मीटर पानी एक ही फसल-चक्र में चला जाता है। आर्थिक चुभन वितरण की है: जलस्तर गिरने के साथ सिंचाई पूंजी-खर्च बन जाती है, और पूंजी ही छोटे किसानों के पास सबसे कम है।

  • सब्सिडी वाली बिजली और आश्वस्त खरीद मिलकर पानी-गहन धान को सबसे कम जोखिम वाला विकल्प बना देती हैं, इसलिए दक्षता में होने वाले छोटे सुधार निकासी के पैमाने के सामने दब जाते हैं।
  • गिरता जलस्तर पानी को लगभग मुफ्त इनपुट से पूंजीगत वस्तु — गहरे ट्यूबवेल — में बदल देता है, जिससे वित्त तक बेहतर पहुंच रखने वाले किसानों को स्वतः लाभ मिलता है।
  • उद्धृत अध्ययन केवल संसाधन के नुकसान की नहीं, संपत्ति के हस्तांतरण की ओर इशारा करते हैं: गहरे कुएं न बनवा पाने वाले छोटे किसान बड़े भूस्वामियों से पानी खरीदते हैं, जिससे अनियंत्रित निर्भरता बनती है।
  • गौरतलब है कि रिपोर्ट के अनुसार बड़े खेत ऊंचा मुनाफा कमाते हैं पर धान में उनकी भूजल उत्पादकता छोटे खेतों से कम रहती है — यानी पानी कम कुशल उपयोग की ओर बह रहा है।
  • फसल विविधीकरण कृषि-तकनीकी से ज्यादा आर्थिक कारणों से रुका है: भंडारण, प्रसंस्करण, स्थिर कीमतों और आपूर्ति शृंखला के बिना फसल बदलने का जोखिम अकेले किसान पर पड़ता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ' योजना में नामांकन बढ़ता है या नहीं, और बिजली सब्सिडी का कोई हिस्सा छोटे किसानों, साझा सिंचाई ढांचे या विविधीकरण की ओर मुड़ता है या नहीं — और सबसे अहम, लाभ जमीन या पंप के मालिक की जगह वास्तविक काश्तकार, जिसमें बटाईदार भी शामिल हैं, तक पहुंचता है या नहीं।

यह रिपोर्ट न बिजली सब्सिडी का आकार बताती है, न प्रस्तावित बदलाव की लागत, न यह कि मौजूदा योजना में नामांकन कम क्यों है — और खेत-स्तरीय निष्कर्ष कुछ विशेष क्षेत्रों के अध्ययनों से हैं, इसलिए वे रुझान दिखाते हैं, पूरे राज्य का माप नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पंजाब में हरित क्रांति के बाद धान-गेहूं आधारित सघन फसल चक्र विकसित हुआ, जिसे सुनिश्चित सरकारी खरीद, सब्सिडी वाली बिजली और भूजल की आसान उपलब्धता ने मजबूत किया। इससे सिंचाई के लिए भूजल का अत्यधिक दोहन हुआ। 2025-26 डायनेमिक भूजल आकलन के अनुसार राज्य की भूजल दोहन दर 152% है और उसके 153 ब्लॉकों में से 72% 'रेड जोन' में हैं, जो देश में सर्वाधिक है। स्रोत के अनुसार जल संकट के साथ-साथ किसानों के बीच संपत्ति की खाई भी बढ़ रही है, क्योंकि गहरे ट्यूबवेल लगाने में सक्षम बड़े किसान अधिक पानी निकाल पाते हैं और छोटे किसानों को पानी खरीदना पड़ता है।

मुख्य तथ्य

  • 2025-26 डायनेमिक भूजल आकलन के अनुसार पंजाब की भूजल दोहन दर 152% है।
  • पंजाब के 153 ब्लॉकों में से 72% 'रेड जोन' में हैं, जो राज्यों में सर्वाधिक है।
  • पिछले दो आकलनों के दौरान हस्तक्षेपों से 'अति-दोहित' ब्लॉकों की संख्या पांच घटी।
  • मुख्य उपभोग धान और गेहूं की सिंचाई है, जो नवीनतम अनुमान में सालाना लगभग 25 अरब घन मीटर पानी है।
  • 2022 से 2025 के बीच मानसून-बाद अवधि में 40 मीटर से नीचे जलस्तर वाले निगरानी कुओं का अनुपात दो प्रतिशत अंक बढ़ा।
  • Economic and Political Weekly के अध्ययन के अनुसार सीमांत जोत वाले किसान पानी का अधिक कुशल उपयोग करते हैं, जबकि संपन्न किसान गहरे जलस्तर तक पहुंच और अधिक मात्रा में निकासी कर पाते हैं।
  • Discover Sustainability में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार संगरूर और बरनाला में बड़े खेतों ने अधिक आय दर्ज की, पर धान के सापेक्ष उनकी भूजल उत्पादकता छोटे खेतों से कम रही।
  • 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ' योजना में किसानों को एक सीमा के नीचे पंपिंग के लिए बची हर किलोवाट-घंटा बिजली पर नकद मिलता है; नामांकन कम है।

समयरेखा

  1. 2022 से 2025मानसून-बाद 40 मीटर से नीचे जलस्तर वाले निगरानी कुओं का अनुपात दो प्रतिशत अंक बढ़ा।
  2. पिछले दो आकलनहस्तक्षेपों के कारण 'अति-दोहित' ब्लॉकों की संख्या में पांच की कमी आई।
  3. 2025-26डायनेमिक भूजल आकलन में पंजाब की दोहन दर 152% और 153 ब्लॉकों में से 72% रेड जोन में दर्ज।
  4. 23 सितंबर 2026यह आकलन और उससे जुड़ी असमानता की चिंता पर लेख प्रकाशित।

किसका दाँव

  • छोटे और सीमांत किसान — गहरे ट्यूबवेल का खर्च उठाने में असमर्थ; जलस्तर गिरने पर पानी खरीदने को मजबूर, जिससे उनकी संपत्ति बड़े भूस्वामियों को हस्तांतरित होती है।
  • बड़े/संपन्न किसान — वित्त तक बेहतर पहुंच के कारण गहरे जलस्तर तक पहुंच और अधिक निकासी; अधिक आय, पर भूजल उत्पादकता कम।
  • पंजाब सरकार — बिजली सब्सिडी बिल, मांग-प्रबंधन उपाय, किसानों की आय व सिंचाई पहुंच की रक्षा और अतिरिक्त दोहन को महंगा बनाने की जिम्मेदारी।
  • काश्तकार/बटाईदार किसान — लाभ भूमि या पंप के मालिकों के बजाय वास्तविक काश्तकार तक पहुंचे, तभी कल्याण जल-पहुंच को सहारा देगा।
  • 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ' योजना — आशाजनक प्रोत्साहन मॉडल, लेकिन कम नामांकन के कारण प्रभाव सीमित।
  • फसल विविधीकरण से जुड़ा ढांचा (भंडारण, प्रसंस्करण, आपूर्ति शृंखला) — अनिश्चित कीमतों व अधोसंरचना की कमी के कारण किसान वैकल्पिक फसलों से हिचकते हैं।

क्यों अहम है

पंजाब देश का प्रमुख अनाज उत्पादक राज्य है, इसलिए 152% दोहन दर और 72% ब्लॉकों का रेड जोन में होना खाद्य सुरक्षा और जल सुरक्षा दोनों के लिए चेतावनी है। स्रोत के अनुसार यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, वितरणात्मक भी है—भूजल की गहराई बढ़ने से सिंचाई की पूंजी लागत बढ़ती है, जो वित्त तक पहुंच वाले किसानों को व्यवस्थागत लाभ देती है। इससे नीति का प्रश्न बदल जाता है: सब्सिडी भूजल-दोहन को नहीं, जल तक पहुंच को सहारा दे।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 2025-26 डायनेमिक भूजल आकलन: पंजाब की भूजल दोहन दर 152%।
  • पंजाब के कुल 153 ब्लॉक; इनमें 72% 'रेड जोन' में—राज्यों में सर्वाधिक।
  • धान-गेहूं सिंचाई में सालाना लगभग 25 अरब घन मीटर भूजल की खपत।
  • 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ': सीमा से कम पंपिंग बिजली (प्रति बची किलोवाट-घंटा) पर किसानों को नकद प्रोत्साहन।
  • 2022-2025: मानसून-बाद 40 मीटर से नीचे जलस्तर वाले कुओं का अनुपात 2 प्रतिशत अंक बढ़ा।
  • संगरूर और बरनाला पर आधारित अध्ययन Discover Sustainability में; असमानता पर अध्ययन Economic and Political Weekly में।

मेन्स दृष्टिकोण

पंजाब का भूजल संकट नीति-जनित है: खाद्य सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति ने सुनिश्चित खरीद, सब्सिडी वाली बिजली और भूजल की सुलभता के सहारे एक केंद्रित धान-गेहूं फसल चक्र बनाया, जिसमें उच्च उपज वाली किस्में, सघन सिंचाई, उर्वरक उपयोग और मशीनीकरण वैकल्पिक खेती से कम जोखिमपूर्ण लगे। परिणाम 152% दोहन दर, 153 में से 72% ब्लॉकों का रेड जोन में होना और सिंचाई में सालाना ~25 अरब घन मीटर की खपत है। दूसरी ओर भंडारण, कीमत, प्रसंस्करण अधोसंरचना और आपूर्ति शृंखला की अनिश्चितताओं के कारण किसानों की विविधीकरण से हिचक अनसुलझी रही। स्रोत के अध्ययन दिखाते हैं कि सीमांत किसान पानी का कुशल उपयोग करते हैं, पर गिरते जलस्तर पर वे ट्यूबवेल का खर्च न उठा पाने से पानी खरीदने को बाध्य होते हैं—जिससे अनियंत्रित निर्भरता और संपत्ति का हस्तांतरण बढ़ता है। आगे का रास्ता: मांग-प्रबंधन के प्रयासों के साथ किसानों की आय व सिंचाई पहुंच की सुरक्षा, अतिरिक्त दोहन की लागत निषेधात्मक बनाना, 'पानी बचाओ, पैसा कमाओ' जैसे प्रोत्साहनों का विस्तार, बिजली सब्सिडी के हिस्से से लघु किसानों को सीधा समर्थन, सिंचाई अधोसंरचना का सामूहिकीकरण और फसल-परिवर्तन में सहायता, तथा लाभ को भूमि/पंप मालिक के बजाय काश्तकार सहित वास्तविक कृषक से जोड़ना।

मुख्य शब्द

डायनेमिक भूजल आकलन (2025-26)
भूजल की उपलब्धता और निकासी का समय-समय पर किया जाने वाला आकलन, जिसमें पंजाब की दोहन दर 152% आई।
भूजल दोहन दर
पुनर्भरण की तुलना में निकाली गई भूजल की मात्रा का प्रतिशत; 100% से अधिक होना अस्थिर दोहन दर्शाता है।
अति-दोहित ब्लॉक / 'रेड जोन'
वे प्रशासनिक ब्लॉक जहां भूजल निकासी पुनर्भरण से अधिक है; पंजाब के 72% ब्लॉक इस श्रेणी में।
धान-गेहूं फसल चक्र
पंजाब का केंद्रित फसल पैटर्न, जो सुनिश्चित खरीद, सब्सिडी बिजली और भूजल पहुंच से प्रोत्साहित हुआ।
'पानी बचाओ, पैसा कमाओ'
योजना जिसमें किसान पंपिंग के लिए निर्धारित सीमा से कम उपयोग की प्रत्येक किलोवाट-घंटा बिजली पर नकद पाने के हकदार हैं।
भूजल उत्पादकता
प्रयुक्त भूजल की प्रति इकाई उपज/प्रतिफल; संगरूर-बरनाला में बड़े खेतों की यह छोटे खेतों से कम पाई गई।

अभ्यास प्रश्न

  1. पंजाब में भूजल के अति-दोहन के कारणों का विश्लेषण कीजिए और बताइए कि नीतिगत प्रोत्साहन (सुनिश्चित खरीद, सब्सिडी बिजली) इस संकट को कैसे बनाए रखते हैं।
  2. 'भूजल ह्रास केवल पर्यावरणीय नहीं, वितरणात्मक समस्या भी है।' पंजाब के अनुभव के आलोक में परीक्षण कीजिए।
  3. फसल विविधीकरण को व्यवहार्य बनाने के लिए किन संस्थागत और अधोसंरचनात्मक कमियों को दूर करना आवश्यक है? स्रोत में उल्लिखित उपायों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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