सभी दवा दुकानों पर सीसीटीवी की सिफारिश, केमिस्टों का विरोध

केंद्र सरकार को सलाह देने वाले ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने 27 अगस्त की बैठक में देशभर की सभी दवा दुकानों के विक्रय परिसर में सीसीटीवी लगाने और आपूर्ति श्रृंखला में सभी एनडीपीएस दवाओं की ट्रैकिंग की सिफारिश की। प्रस्ताव अब डीसीजीआई डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है। 15 लाख से अधिक सदस्यों वाले एआईओसीडी ने 17 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा कि छह से आठ कैमरे, डीवीआर, स्टोरेज और इंटरनेट पर 50,000 से 1 लाख रुपये खर्च होंगे तथा ग्रामीण इलाकों में बिजली और कनेक्टिविटी की समस्या है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • DTAB, which met on August 27, recommended CCTV installation at sales premises and track-and-trace of all NDPS drugs. — Attributed to meeting minutes seen by News18; source names the panel and date.
  • The proposal is now with Drug Controller General of India Dr Rajeev Singh Raghuvanshi for final execution. — Stated in source without further attribution; named official.
  • AIOCD wrote to the Health Ministry on September 17, citing recurring costs of about Rs 50,000-1 lakh for cameras, DVR/NVR, storage, wiring and internet. — Quoted directly from the letter, addressed to Health Secretary Punya Salila Srivastava; figure appears in source.
  • AIOCD represents more than 15 lakh members. — Figure appears in source, attributed to the association's description; not independently verifiable.
  • Retailer Gurumurthy Ganapathy and former TNCDA president Ramachandran Mannargudi oppose the move, citing rural power and internet limitations. — Directly quoted individuals; opinions clearly attributed.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह ऐसा मामला है जहां नीति का लक्ष्य ठीक है, लेकिन उसका औज़ार सवालों के घेरे में है। नशीली और मन:प्रभावी दवाओं के गलत रास्ते पर जाने को रोकना असली जनस्वास्थ्य हित है, मगर डीटीएबी की सिफारिश पूरी सप्लाई चेन की समस्या का बोझ उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी — छोटे रिटेल केमिस्ट — पर डाल देती है। एक जैसा राष्ट्रव्यापी नियम उन बड़ी फार्मेसी चेन के लिए लगभग मुफ़्त है जिनके पास पहले से कैमरे हैं, जबकि गांव की दुकान के लिए यह अस्तित्व का सवाल बन जाता है।

  • प्रस्ताव अभी डीसीजीआई के पास है, यानी नियम बनने से पहले छूट, चरणबद्ध अमल या सब्सिडी जोड़ने की नीतिगत गुंजाइश बची है।
  • 50,000 से 1 लाख रुपये का अनुमान एआईओसीडी का है, और व्यापारियों का तर्क है कि स्टोरेज व रखरखाव जोड़ने पर यह एक बार का खर्च नहीं, बार-बार का खर्च है।
  • जहां बिजली और इंटरनेट भरोसेमंद नहीं, वहां लगातार रिकॉर्डिंग की मांग 'कागज़ पर नियम, ज़मीन पर लाचारी' जैसी अमल की खाई पैदा कर सकती है।
  • दुकानदारों का यह तर्क नीतिगत रूप से वज़नदार है कि कैमरा पर्चे की जांच नहीं कर सकता, और निर्माण स्तर से ट्रैक एंड ट्रेस अधिक सटीक तथा कम बोझिल उपाय होगा।
  • फुटेज कौन देखेगा, कितने दिन रखना होगा और मरीज़ की निजता कैसे बचेगी — ये गवर्नेंस ब्यौरे खबर में तय नहीं हैं, पर अमल की सफलता इन्हीं पर टिकी है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि डीसीजीआई के अंतिम आदेश में छोटी व ग्रामीण दुकानों को छूट या आर्थिक मदद मिलती है, या नियम सिर्फ एनडीपीएस दवाएं रखने वाली दुकानों तक सीमित रहता है।

डीटीएबी की सिफारिश अंतिम नियम नहीं है, और यह खबर न समयसीमा, न स्टोरेज अवधि, न छूट और न ही किसी सब्सिडी की पुष्टि करती है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्र सरकार को दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों के नियमन पर सलाह देने वाली सर्वोच्च संस्था ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी) ने देशभर की सभी दवा दुकानों के विक्रय परिसर में अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी की सिफारिश की है। इसका मकसद नशीली दवाओं की अवैध तस्करी और डायवर्ट की गई दवाओं — विशेषकर नारकोटिक दर्द निवारक और लत लगाने वाले कफ सिरप — पर रोक लगाना है। साथ में आपूर्ति श्रृंखला में सभी एनडीपीएस दवाओं की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग का प्रस्ताव है। देश के सबसे बड़े केमिस्ट संगठन एआईओसीडी ने लागत और ग्रामीण ढांचागत दिक्कतों का हवाला देते हुए इसका विरोध किया है।

मुख्य तथ्य

  • डीटीएबी की 27 अगस्त की बैठक में "विक्रय परिसर में सीसीटीवी लगाने तथा आपूर्ति श्रृंखला में सभी एनडीपीएस दवाओं की ट्रैकिंग व ट्रेसिंग" का प्रस्ताव मंजूर किया गया।
  • प्रस्ताव अब अंतिम अमल के लिए भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास है।
  • एआईओसीडी ने 17 सितंबर की तारीख वाला पत्र स्वास्थ्य मंत्रालय (स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव) को लिखा।
  • एआईओसीडी भारत का सबसे बड़ा केमिस्ट व दवा वितरक संगठन है, जिसके 15 लाख से अधिक सदस्य हैं।
  • एआईओसीडी के अनुसार छह से आठ कैमरे, डीवीआर/एनवीआर, स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और नियमित रखरखाव पर लगभग 50,000 से 1 लाख रुपये का बार-बार होने वाला खर्च आएगा।
  • एआईओसीडी का कहना है कि बार-बार बिजली कटौती और खराब इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण ग्रामीण इलाकों में लगातार सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तकनीकी रूप से अव्यावहारिक है।
  • राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) भी नाबालिगों में नशे की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी की पैरवी करता रहा है।
  • ग्रामीण इलाकों में पाँच रिटेल मेडिकल दुकानें चलाने वाले गुरुमूर्ति गणपति ने 90 दिन के स्टोरेज ड्राइव और लगातार रखरखाव के बोझ का जिक्र करते हुए छोटी ग्रामीण फार्मेसियों को छूट या पूर्ण सब्सिडी की मांग की।

समयरेखा

  1. वर्षों सेनियामक अधिकारी डायवर्ट की गई दवाओं — नारकोटिक दर्द निवारक और लत लगाने वाले कफ सिरप — के अवैध बाजार में पहुँचने पर चिंता जताते रहे; एनसीपीसीआर ने सख्त निगरानी की पैरवी की।
  2. 27 अगस्तडीटीएबी की बैठक में विक्रय परिसर में सीसीटीवी और एनडीपीएस दवाओं की ट्रैक-ट्रेस का प्रस्ताव मंजूर।
  3. 17 सितंबरएआईओसीडी ने स्वास्थ्य मंत्रालय को तत्काल पत्र लिखकर लागत और तकनीकी कठिनाइयों पर आपत्ति जताई।
  4. प्रस्ताव की वर्तमान स्थितिअंतिम कार्यान्वयन के लिए मामला डीसीजीआई डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी के पास लंबित।

किसका दाँव

  • डीटीएबी — दवा नियमन पर केंद्र को सलाह देने वाली सर्वोच्च संस्था; सीसीटीवी और एनडीपीएस ट्रैकिंग की सिफारिश इसी की है।
  • डीसीजीआई डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी — प्रस्ताव के अंतिम कार्यान्वयन का निर्णय उनके स्तर पर लंबित है।
  • एआईओसीडी (15 लाख+ सदस्य) — सदस्य केमिस्टों पर 50,000–1 लाख रुपये के आवर्ती खर्च का बोझ; संगठन ने मंत्रालय से राहत मांगी।
  • छोटे व ग्रामीण केमिस्ट — कम मार्जिन, बिजली-इंटरनेट की दिक्कत; कारोबार के अस्तित्व पर खतरा, छूट या सब्सिडी की मांग।
  • बड़ी फार्मेसी चेन — इनमें से कई के पास पहले से सीसीटीवी सिस्टम है, इसलिए लागत वहन करने में सक्षम — एआईओसीडी इसे असमान बोझ बताता है।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय / स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव — केमिस्टों की आपत्तियों और तस्करी रोकने के लक्ष्य के बीच संतुलन बैठाना।
  • मरीज व उपभोक्ता — एंटीबायोटिक या कफ सिरप की खरीद कैमरे की निगरानी में आ सकती है; दूसरी ओर नशे के दुरुपयोग पर अंकुश।
  • टीएनसीडीए के पूर्व अध्यक्ष रामचंद्रन मन्नारगुडी — प्रस्ताव वापस लेने की मांग; निर्माण स्रोत पर ट्रैक एंड ट्रेस लागू करने का सुझाव।

क्यों अहम है

यह मामला नशीली दवाओं की अवैध बिक्री रोकने की नियामक जरूरत और लाखों छोटे दवा विक्रेताओं की आर्थिक-ढांचागत क्षमता के बीच टकराव को सामने रखता है। एक समान नियम लागू करने से बड़ी चेनों और गाँव की छोटी दुकानों पर असमान बोझ पड़ सकता है, जबकि ग्रामीण भारत में बिजली और इंटरनेट की कमी अनुपालन को अव्यावहारिक बना सकती है। इससे यह बुनियादी नीतिगत सवाल उठता है कि निगरानी रिटेल काउंटर पर हो या निर्माण स्रोत से शुरू होने वाली ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था पर।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • डीटीएबी: दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों व चिकित्सा उपकरणों के नियमन पर केंद्र सरकार को सलाह देने वाला शीर्ष तकनीकी बोर्ड।
  • डीटीएबी की बैठक की तारीख: 27 अगस्त; सिफारिश — विक्रय परिसर में सीसीटीवी + एनडीपीएस दवाओं की ट्रैक एंड ट्रेस।
  • डीसीजीआई: भारत के औषधि महानियंत्रक — वर्तमान में डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी; प्रस्ताव के अंतिम अमल का जिम्मा।
  • एआईओसीडी: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स, 15 लाख से अधिक सदस्य; पत्र की तारीख 17 सितंबर।
  • एनडीपीएस: नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेस — नियंत्रित दवाओं की श्रेणी।
  • एनसीपीसीआर ने नाबालिगों में नशे की रोकथाम हेतु सख्त निगरानी की पैरवी की है।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत में नारकोटिक दर्द निवारकों और लत लगाने वाले कफ सिरप के डायवर्जन से बने अवैध बाजार पर अंकुश लगाने के लिए डीटीएबी ने 27 अगस्त की बैठक में हर दवा दुकान के विक्रय परिसर में सीसीटीवी तथा आपूर्ति श्रृंखला में एनडीपीएस दवाओं की ट्रैकिंग-ट्रेसिंग की सिफारिश की है, जिसका उद्देश्य एक ऑडिट योग्य डिजिटल ट्रेल बनाना है। नीतिगत तर्क मजबूत है — एनसीपीसीआर भी नाबालिगों में नशे की रोकथाम हेतु कड़ी निगरानी चाहता है — पर अनुपालन लागत का वितरण असमान है: एआईओसीडी के अनुसार छह-आठ कैमरे, डीवीआर/एनवीआर, स्टोरेज, वायरिंग, इंटरनेट और रखरखाव पर 50,000 से 1 लाख रुपये का आवर्ती खर्च आएगा, जो कम मार्जिन वाले छोटे व ग्रामीण केमिस्टों की क्षमता से बाहर है, जबकि बड़ी चेनों के पास पहले से सिस्टम मौजूद है। साथ ही बार-बार बिजली कटौती और कमजोर कनेक्टिविटी से 24x7 रिकॉर्डिंग व 90 दिन का स्टोरेज तकनीकी रूप से कठिन है। आगे का रास्ता सुझावों में ही निहित दिखता है — छोटी ग्रामीण फार्मेसियों को छूट या पूर्ण सब्सिडी, तथा टीएनसीडीए के पूर्व अध्यक्ष के अनुसार रिटेल पर बोझ डालने के बजाय निर्माण स्रोत से सीधी ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू करना, क्योंकि कैमरे न पर्चे की जाँच कर सकते हैं न वितरित दवाओं की, जो ब्योरा पहले से कानूनी रजिस्टर और बिलिंग में दर्ज होता है।

मुख्य शब्द

डीटीएबी (ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड)
दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों के नियमन पर केंद्र सरकार को सलाह देने वाला शीर्ष पैनल।
डीसीजीआई (औषधि महानियंत्रक, भारत)
देश का शीर्ष दवा नियामक पद; वर्तमान में डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी, जिनके पास सीसीटीवी प्रस्ताव लंबित है।
एनडीपीएस
नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांसेस — नियंत्रित नशीली व मन:प्रभावी दवाएँ, जिनकी ट्रैकिंग प्रस्तावित है।
एआईओसीडी
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स — 15 लाख से अधिक सदस्यों वाला देश का सबसे बड़ा केमिस्ट व वितरक संगठन।
ट्रैक एंड ट्रेस
दवा को आपूर्ति श्रृंखला में चरण-दर-चरण ट्रैक करने की प्रणाली; केमिस्टों का सुझाव है इसे निर्माण स्रोत पर लागू किया जाए।
एनसीपीसीआर
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, जिसने नाबालिगों में नशे की रोकथाम के लिए सख्त निगरानी की पैरवी की है।

अभ्यास प्रश्न

  1. दवा दुकानों पर अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी नशीली दवाओं के डायवर्जन पर अंकुश लगाने का कारगर उपाय है या अनुपालन का असमान बोझ? तर्कसहित परीक्षण करें।
  2. क्या रिटेल काउंटर पर निगरानी के बजाय निर्माण स्रोत से ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली अधिक प्रभावी होगी? दोनों विकल्पों की तुलना करें।
  3. दवा नियमन में डीटीएबी और डीसीजीआई की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए बताएँ कि एनडीपीएस दवाओं की निगरानी में इनका महत्व क्यों है।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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