राष्ट्रीय तिरुवनंतपुरम

सूचना मंत्रालय ने कहा, 31 फिल्में आगे की जांच में

तिरुवनंतपुरम में शुक्रवार से शुरू हो रहे पांच दिवसीय 18वें अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) में दिखाई जाने वाली 31 फिल्में, विषयवस्तु के कारण गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों की आगे की जांच में हैं, यह जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने सोमवार को दी। उन्होंने कहा कि मंजूरी से इनकार नहीं किया गया। केरल के संस्कृति मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने कहा था कि इनकार के कारण नहीं बताए गए। मंत्रालय ने छह फिल्मों का विस्तृत सारांश मांगा।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 31 films for the Thiruvananthapuram festival await 'further verification' from the home, defence and external affairs ministries due to subject matter, and have not been denied clearance. — Attributed to an unnamed Union I&B ministry official speaking on Monday; ministry's X post cited as echoing it.
  • Kerala culture minister PC Vishnunadh said the I&B ministry gave no reasons for denying screening permission to 31 films at the 18th IDSFFK. — Attributed by name to the state minister; contradicts the I&B account, both positions carried in source.
  • A more detailed synopsis was sought for six of the 31 films. — Figure appears in source, attributed to the I&B ministry's post on X.
  • The Kerala State Chalachitra Academy sought certification exemption for 347 films, most of which have been cleared. — Attributed to unnamed 'people aware of the matter'; number appears in source but sourcing is anonymous.
  • In 2025 the Union government initially withheld exemptions for 19 films at the 17th IFFK before granting them in stages. — Stated in source as background without specific attribution.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह मामला सेंसरशिप विवाद से ज़्यादा केंद्र और केरल के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान का नया मोर्चा बनता दिख रहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इसे प्रक्रियागत कदम बता रहा है — सत्यापन, इनकार नहीं — जबकि केरल सरकार इसे बिना कारण बताई गई देरी और रचनात्मक स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में पेश कर रही है। 2025 में 17वें आईएफएफके में 19 फ़िल्मों के साथ भी ऐसा ही चक्र चला और मंज़ूरियाँ चरणों में मिलीं, जिससे राज्य के 'पैटर्न दोहराया जा रहा है' वाले तर्क को बल मिलता है।

  • केरल में सांस्कृतिक स्वतंत्रता एक मज़बूत राजनीतिक भावना है, इसलिए राज्य सरकार को इस टकराव को उठाने में नुकसान कम और लाभ ज़्यादा है।
  • केंद्र की भाषा भी सतर्क है — 'मंज़ूरी नकारी नहीं गई' कहकर वह सेंसरशिप के आरोप से बचने की कोशिश करता दिखता है।
  • दस्तावेज़ों में कमियों और 15 दिन/एक माह पहले आवेदन के दिशानिर्देश का हवाला मंत्रालय की ओर से ज़िम्मेदारी आयोजकों पर डालने वाला जवाबी तर्क है।
  • लंबित फ़िल्मों के विषय — कोविड काल में सफ़ाई कर्मचारी, गाज़ा का जीवन — इस बहस को प्रशासनिक से हटाकर राजनीतिक दायरे में ले जाते हैं।
  • 347 फ़िल्मों के लिए छूट मांगी गई और अधिकांश को मंज़ूरी मिल गई — यह तथ्य केंद्र को 'सामूहिक रोक नहीं' कहने का आधार देता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि शुक्रवार को उत्सव शुरू होने से पहले मंज़ूरी आती है, या केरल पिछले साल की तरह लंबित मंज़ूरियों के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान कर टकराव बढ़ाता है।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि किसी फ़िल्म की अनुमति वाकई रद्द हुई या देरी के पीछे राजनीतिक मंशा है — केवल यह कि सोमवार तक तीन मंत्रालयों का जवाब नहीं आया था।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तिरुवनंतपुरम में शुक्रवार से 18वां अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) शुरू हो रहा है, जिसका आयोजन केरल राज्य चलचित्र अकादमी करती है। ऐसे गैर-व्यावसायिक महोत्सवों में दिखाई जाने वाली फिल्मों को सेंसर प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होती, पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) प्रमाणन न होने पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रदर्शन की अनुमति (छूट) लेनी पड़ती है। केरल के संस्कृति मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने आरोप लगाया कि मंत्रालय ने 31 फिल्मों को अनुमति देने से इनकार किया और कारण नहीं बताए। मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि अनुमति से इनकार नहीं हुआ है, बल्कि विषयवस्तु के कारण ये फिल्में गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों की "आगे की जांच" में हैं।

मुख्य तथ्य

  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी ने सोमवार को कहा कि 31 फिल्में गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों की "आगे की जांच" में हैं; मंजूरी से इनकार नहीं किया गया।
  • मंत्रालय ने 31 में से छह फिल्मों का अधिक विस्तृत सारांश (सिनॉप्सिस) मांगा, यह जानकारी एक्स पर दी गई पोस्ट में दी गई।
  • सोमवार सुबह तक तीनों मंत्रालयों से 31 फिल्मों पर कोई जवाब नहीं मिला था, अधिकारी के अनुसार।
  • 31 फिल्मों में कोविड-19 महामारी के दौरान दिल्ली के अस्पतालों के सफाई कर्मचारियों के जीवन और घिरे फिलिस्तीनी गाजा पट्टी के जीवन पर वृत्तचित्र शामिल हैं।
  • केरल राज्य चलचित्र अकादमी ने कुल 347 फिल्मों के लिए प्रमाणन से छूट मांगी थी, जिनमें से अधिकांश को मंजूरी मिल चुकी है।
  • 2025 में 17वें आईएफएफके की 19 फिल्मों की छूट केंद्र ने पहले रोकी थी, बाद में चरणों में छूट दी गई।
  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9 केंद्र सरकार को शर्तों के अधीन फिल्मों को प्रमाणन से छूट देने का अधिकार देती है।
  • मंत्रालय के दिशानिर्देश कहते हैं कि आयोजक आवेदन प्राथमिकता से एक महीने पहले और कम से कम 15 दिन पहले, पूरे दस्तावेजों के साथ दें।

समयरेखा

  1. 202517वें आईएफएफके की 19 फिल्मों के लिए केंद्र ने पहले छूट रोकी; राज्य ने प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की, बाद में केंद्र ने चरणों में छूट दी।
  2. रविवार (कहानी से पूर्व दिन)केरल के संस्कृति मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने कहा कि मंत्रालय ने 31 फिल्मों को अनुमति न देने के कारण नहीं बताए।
  3. सोमवारसूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारी और मंत्रालय की एक्स पोस्ट में स्पष्टीकरण; छह फिल्मों का विस्तृत सारांश मांगा गया।
  4. शुक्रवारतिरुवनंतपुरम में पांच दिवसीय 18वां आईडीएसएफएफके शुरू होगा।

किसका दाँव

  • केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय — गैर-व्यावसायिक महोत्सवों में बिना सीबीएफसी प्रमाणन वाली फिल्मों को छूट देने का अधिकार; प्रक्रिया और समयसीमा का बचाव।
  • गृह, रक्षा एवं विदेश मंत्रालय — विषयवस्तु के आधार पर भेजी गई फिल्मों की क्षेत्रीय समीक्षा; सोमवार सुबह तक जवाब नहीं आया था।
  • केरल राज्य चलचित्र अकादमी — आईडीएसएफएफके की आयोजक; 347 फिल्मों के लिए छूट मांगी, शेष फिल्मों की मंजूरी लंबित।
  • केरल सरकार / संस्कृति मंत्री पीसी विष्णुनाथ — आरोप कि अनुमति न देने के कारण नहीं बताए गए; केवल अनुमति प्राप्त फिल्मों की सूची मिली।
  • फिल्मकार और दर्शक — सफाई कर्मचारियों व गाजा जैसे विषयों पर बनी फिल्मों का महोत्सव में प्रदर्शन अनिश्चित।

क्यों अहम है

फिल्म महोत्सवों में प्रमाणन से छूट की प्रक्रिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संघीय संबंधों और प्रशासनिक समयसीमा के टकराव को उजागर करती है। कोविड काल के सफाई कर्मचारियों और गाजा जैसे संवेदनशील विषयों पर फिल्मों को बहु-मंत्रालयीय जांच में भेजा जाना यह सवाल उठाता है कि विषयवस्तु के आधार पर समीक्षा कितनी पारदर्शी है। 2025 में आईएफएफके में भी ऐसा ही विवाद हुआ था, जिससे यह एक दोहराव वाला केंद्र-राज्य मुद्दा बनता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9: केंद्र सरकार शर्तों के अधीन फिल्मों को प्रमाणन से छूट दे सकती है।
  • आईडीएसएफएफके = इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल; आयोजक केरल राज्य चलचित्र अकादमी; 18वां संस्करण तिरुवनंतपुरम में, पांच दिवसीय।
  • सीबीएफसी प्रमाणित फिल्मों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से छूट की आवश्यकता नहीं होती।
  • मंत्रालय के दिशानिर्देश: आवेदन प्राथमिकता से एक महीने पहले, कम से कम 15 दिन पहले, पूरे दस्तावेजों के साथ।
  • इस बार 347 फिल्मों के लिए छूट मांगी गई; 31 फिल्में आगे की जांच में, 6 के विस्तृत सारांश मांगे गए।
  • 2025 में 17वें आईएफएफके में 19 फिल्मों की छूट पहले रोकी गई, बाद में चरणों में दी गई।

मेन्स दृष्टिकोण

सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9 के तहत केंद्र सरकार गैर-व्यावसायिक फिल्म महोत्सवों में दिखाई जाने वाली गैर-प्रमाणित फिल्मों को प्रमाणन से छूट देती है, लेकिन यह विवेकाधिकार व्यवहार में विलंब और अपारदर्शिता का स्रोत बन सकता है। आईडीएसएफएफके मामले में 347 में से 31 फिल्में विषयवस्तु के आधार पर गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों की समीक्षा में भेजी गईं, छह के विस्तृत सारांश मांगे गए, और महोत्सव शुरू होने से कुछ दिन पहले तक जवाब नहीं आया; केरल सरकार का कहना है कि कारण नहीं बताए गए, जबकि मंत्रालय दस्तावेज़ों में कमियों और प्रक्रियागत समय का हवाला देता है। इसके निहितार्थ दोहरे हैं: एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश संबंधों से जुड़ी विषयवस्तु की समीक्षा का सरकारी तर्क, दूसरी ओर वृत्तचित्र निर्माताओं की अभिव्यक्ति स्वतंत्रता और राज्य द्वारा संचालित सांस्कृतिक आयोजनों की स्वायत्तता। 2025 के आईएफएफके अनुभव की पुनरावृत्ति यह संकेत देती है कि आगे का रास्ता स्पष्ट समयबद्ध निर्णय, इनकार या लंबित रखने के लिखित कारण, आयोजकों द्वारा दिशानिर्देशों के अनुसार समय पर व पूर्ण दस्तावेज़ जमा करना और केंद्र-राज्य समन्वय की एकल खिड़की व्यवस्था में है।

मुख्य शब्द

आईडीएसएफएफके
इंटरनेशनल डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल; तिरुवनंतपुरम में आयोजित वृत्तचित्र व लघु फिल्म महोत्सव, इस बार 18वां संस्करण।
सीबीएफसी
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड; सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणपत्र देता है।
सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9
केंद्र सरकार को शर्तों के अधीन फिल्मों को प्रमाणन से छूट देने का अधिकार देने वाला प्रावधान।
प्रदर्शन अनुमति / छूट
महोत्सवों में गैर-प्रमाणित फिल्मों के प्रदर्शन के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से ली जाने वाली अनुमति।
केरल राज्य चलचित्र अकादमी
आईडीएसएफएफके और आईएफएफके जैसे फिल्म महोत्सवों की आयोजक राज्य संस्था।
आईएफएफके
केरल का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव; 2025 में इसके 17वें संस्करण में 19 फिल्मों की छूट को लेकर विवाद हुआ था।

अभ्यास प्रश्न

  1. सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9 के तहत फिल्म महोत्सवों को दी जाने वाली छूट की प्रक्रिया की व्याख्या करें और इसमें पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।
  2. क्या फिल्मों की विषयवस्तु के आधार पर गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों द्वारा समीक्षा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनुचित प्रतिबंध है? चर्चा करें।
  3. सांस्कृतिक आयोजनों में केंद्र-राज्य समन्वय की चुनौतियों को आईडीएसएफएफके और आईएफएफके के उदाहरणों से समझाएं।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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