मेडक के गांव में असाइंड जमीन का सर्वे, किसान चिंतित
मेडक जिले के तूप्रान मंडल के इस्लामपुर गांव में भूमि सुधार अधिनियम, 1973 के तहत दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग परिवारों को दी गई जमीन का राजस्व अधिकारी सर्वे कर रहे हैं। हैदराबाद के चारों ओर प्रस्तावित 300 किलोमीटर रीजनल रिंग रोड और एचएमडीए की आवासीय परियोजनाओं के लिए गांव की 300 एकड़ से अधिक जमीन चिह्नित है। किसानों ने बताया कि अधिकारियों ने प्रति एकड़ 500 वर्ग गज मुआवजा देने की बात कही। वारंगल में सरकार ने कुडा की भूमि पूलिंग रद्द कर दी है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Telangana has up to 1.5 crore acres of cultivation land, of which at least 30 lakh acres was assigned to the landless poor. — Presented as government estimation in the source, with 'reportedly' hedging for the assigned-land figure; no document or official named.
- Over 300 acres of assigned land in Islampur village, Thoopran mandal, Medak, is earmarked for HMDA residential ventures. — Figure appears in source; attributed to the reporting rather than a named official.
- The proposed six-lane Regional Ring Road is a 300-km stretch passing over 20 towns and 200 villages; a 158-km first phase from Sangareddy via Narsapur, Thoopran, Gajwel, Jagdevpur and Bhongir has been approved. — Specific project details stated in source as approved by the government; no notification cited.
- Officials told farmers they would be given 500 sq yards of land as compensation per acre of assigned land. — Attributed to several farmers the reporter spoke to; not confirmed by officials in the source.
- KUDA had proposed acquiring about 21,510 acres across 27 villages for the Warangal Outer Ring Road, and the pooling for the 41-km stretch was cancelled with immediate effect. — Figures in source; cancellation described as 'it was learnt', i.e. unattributed at time of writing.
विश्लेषकों की राय राय
राजनीति को अलग रखें तो यह भूमि-मूल्य के हस्तांतरण का मामला है: दलित, आदिवासी और बीसी परिवारों ने 40 वर्षों में पथरीली बंजर ज़मीन को सिंचित खेत में बदला, और अब वही ज़मीन 300 किमी रीजनल रिंग रोड तथा एचएमडीए आवासीय योजनाओं की राह में है, जहाँ शहर के बाहरी इलाके की भूमि खेती से कहीं ज़्यादा प्लॉट के रूप में मूल्यवान है। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ 500 वर्ग गज की पेशकश है — यानी एकड़ के लगभग दसवें हिस्से के बराबर विकसित भूमि — और यह उचित है या नहीं, यह पूरी तरह परियोजना के बाद के प्लॉट मूल्यों पर निर्भर करता है, जिनका कोई आँकड़ा इस रिपोर्ट में नहीं है। सबसे बड़ा आर्थिक जोखिम यह है कि इन परिवारों द्वारा कुओं, बोरवेलों और ज़मीन समतल करने में लगाया गया उत्पादक निवेश शून्य मान लिया जाए, जबकि मूल्यवृद्धि का लाभ विकास प्राधिकरण और आगे के खरीदारों को मिले।
- रिंग रोड और सैटेलाइट सिटी योजनाएँ आसपास की ज़मीन के दाम तेज़ी से बढ़ाती हैं, इसलिए अधिग्रहण का समय और मुआवज़े का फ़ॉर्मूला ही तय करता है कि यह लाभ किसके हाथ जाएगा।
- क्षेत्रफल के रूप में मुआवज़ा (प्रति एकड़ 500 वर्ग गज) मूल्यांकन का पूरा जोखिम किसान पर डाल देता है, क्योंकि उसका मूल्य भविष्य के प्लॉट दामों, स्थान और विकास की गति पर निर्भर है, जो यहाँ स्पष्ट नहीं हैं।
- चार दशकों का डूबा निवेश — पत्थर हटाना, कुएँ और बोरवेल खोदना — वास्तविक पूँजी है, जिसे भूमि-दर आधारित मुआवज़ा आमतौर पर नहीं गिनता, इसलिए घोषित रकम वास्तविक नुकसान से कम दिख सकती है।
- प्रभावित परिवार संपत्ति के लिहाज़ से कमज़ोर और आय के लिए खेती पर निर्भर हैं, इसलिए ज़मीन जाना आजीविका और ऋण-ज़मानत दोनों का नुकसान है, और कहानी में पुनर्रोज़गार का कोई रास्ता नहीं बताया गया।
- वरंगल में कुडा भूसमीकरण रद्द होना दिखाता है कि नीति राजनीतिक रूप से पलट सकती है, जिससे किसानों और परियोजनाओं के संभावित निवेशकों दोनों के लिए अनिश्चितता बढ़ती है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सरकार असाइन्ड भूमि धारकों के लिए एलएआरआर 2013 के मानकों पर नकद-सह-प्लॉट पैकेज तय करती है या नहीं, और मेदक का सर्वे आगे बढ़ता है या वरंगल की तरह रोका जाता है।
यह रिपोर्ट बाज़ार भूमि मूल्य, अंतिम मुआवज़ा पैकेज, राज्यव्यापी कुल रकबा व प्रभावित परिवारों की संख्या, या किसानों के दावों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तेलंगाना के मेडक जिले के तूप्रान मंडल स्थित इस्लामपुर गांव में 1970 के दशक में आंध्र प्रदेश भूमि सुधार (कृषि जोत पर सीमा) अधिनियम, 1973 के तहत दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग के भूमिहीन परिवारों को जमीन 'असाइन' की गई थी। इन परिवारों ने चार दशकों में पथरीली, ढलान वाली बंजर जमीन को खेती योग्य बनाया। अब हैदराबाद के चारों ओर प्रस्तावित 300 किलोमीटर रीजनल रिंग रोड (आरआरआर) और एचएमडीए की आवासीय/रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए राजस्व विभाग इन असाइंड जमीनों का सर्वे कर रहा है। किसानों को डर है कि उनकी आजीविका छिन जाएगी और उन्हें पट्टादार किसानों के बराबर मुआवजा नहीं मिलेगा।
मुख्य तथ्य
- इस्लामपुर के किसान चेरलापल्ली बलैया के परिवार को भूमि सुधार अधिनियम, 1973 के तहत लगभग चार एकड़ जमीन मिली थी, जिसे 40 वर्षों में खेती योग्य बनाया गया।
- सरकारी अनुमान के अनुसार तेलंगाना में करीब 1 करोड़ 50 लाख एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से कम से कम 30 लाख एकड़ भूमिहीन गरीबों को असाइन की गई बताई जाती है।
- प्रस्तावित छह-लेन रीजनल रिंग रोड 300 किलोमीटर लंबी है और हैदराबाद के आसपास 20 से अधिक कस्बों तथा 200 गांवों से गुजरेगी।
- पहले चरण में संगारेड्डी से शुरू होकर नरसापुर, तूप्रान, गजवेल, जगदेवपुर और भोंगीर तक 158 किलोमीटर सड़क को सरकार ने मंजूरी दी है।
- इस्लामपुर गांव से एचएमडीए की आवासीय परियोजनाओं के लिए 300 एकड़ से अधिक असाइंड जमीन पूलिंग हेतु चिह्नित है।
- इस्लामपुर के 200 असाइंड-भूमि किसानों में 60% से अधिक मडिगा जाति के हैं, बाकी पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति के; प्रत्येक परिवार को 1 से 4 एकड़ दी गई थी।
- किसानों के अनुसार अधिकारियों ने प्रति एकड़ असाइंड जमीन के बदले 500 वर्ग गज जमीन मुआवजे के रूप में देने की बात कही।
- वारंगल में कुडा ने 27 गांवों की करीब 21,510 एकड़ जमीन अधिग्रहण का प्रस्ताव दिया था; रिपोर्ट लिखे जाने तक सरकार ने 41 किलोमीटर वारंगल आउटर रिंग रोड के लिए भूमि पूलिंग 'तत्काल प्रभाव से' रद्द कर दी।
समयरेखा
- 1973आंध्र प्रदेश भूमि सुधार (कृषि जोत पर सीमा) अधिनियम लागू, जिसके तहत भूमिहीनों को जमीन असाइन करने का आधार बना।
- 1970 के दशक का उत्तरार्धतत्कालीन आंध्र प्रदेश में भूमि वितरण; किसान इसे 'इंदिरा गांधी के समय' के रूप में याद करते हैं।
- 1977असाइंड जमीन के हस्तांतरण पर रोक लगाने वाला कानून, जो अब तेलंगाना असाइंड लैंड्स (प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर्स) एक्ट, 1977 कहलाता है।
- 2007 और 2017संशोधनों द्वारा गरीब किसानों के बीच 'सद्भावना' में हुई असाइंड जमीन की खरीद-बिक्री को नियमित किया गया।
- 2013उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता सहित भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन अधिनियम (LARR) लागू।
- हाल में (रिपोर्ट से कुछ दिन पहले)राजस्व अधिकारी बलैया की जमीन पर सर्वे के लिए पहुंचे; एचएमडीए सीमा के हजारों एकड़ असाइंड जमीन का सर्वे जारी।
- रिपोर्ट लिखे जाने के समयसरकार ने वारंगल आउटर रिंग रोड के लिए कुडा की भूमि पूलिंग प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रद्द की।
किसका दाँव
- इस्लामपुर के असाइंड-भूमि किसान (मडिगा, बीसी, एसटी) — 40 साल की मेहनत से खेती योग्य बनाई 1–4 एकड़ जमीन और आजीविका छिनने का खतरा; पट्टादार के बराबर मुआवजे की मांग।
- राजस्व विभाग, तेलंगाना — एचएमडीए सीमा में असाइंड जमीन का सर्वे और पूलिंग; किसानों के विरोध का सामना।
- एचएमडीए (हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी) — आवासीय/रियल एस्टेट परियोजनाओं और हैदराबाद के आसपास सैटेलाइट सिटी योजना के लिए भूमि।
- कुडा (काकतीय अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी), वारंगल — 27 गांवों की 21,510 एकड़ के अधिग्रहण प्रस्ताव पर विरोध; 41 किमी आउटर रिंग रोड की भूमि पूलिंग रद्द।
- तेलंगाना सरकार (मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव) — दलित भूमिहीन परिवारों को तीन एकड़ देने का वादा अपूर्ण, वहीं पुरानी असाइंड जमीन विकास परियोजनाओं के दायरे में।
- वरिष्ठ अधिवक्ता पल्ला त्रिनाथ राव — तर्क कि असाइंड-भूमि किसानों के अधिकार पट्टादार किसानों के समान हैं और LARR, 2013 के तहत मुआवजा मिलना चाहिए।
- सिलिवेरु हरिनाथ, CESS — मत कि केवल संपत्ति-सृजन हेतु असाइंड जमीन की पूलिंग भूमि सुधार के उद्देश्य को विफल करेगी।
क्यों अहम है
यह मामला भूमि सुधार की सामाजिक न्याय की विरासत और शहरी विस्तार की जमीन की भूख के बीच सीधा टकराव है — असाइंड जमीन उन दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के परिवारों की एकमात्र संपत्ति है जो पहले 'जीतगल्लू' के रूप में काम करते थे। यदि सरकार असाइंड जमीन को केवल इसलिए वापस ले सकती है कि वह सरकार ने दी थी, तो पुनर्वितरण के जरिये हासिल जातिगत-आर्थिक बराबरी पलट सकती है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि LARR, 2013 के तहत उचित मुआवजा और पुनर्वास इन किसानों को मिलेगा या नहीं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- आंध्र प्रदेश भूमि सुधार (कृषि जोत पर सीमा) अधिनियम, 1973 — इसी के तहत भूमिहीनों को जमीन असाइन की गई।
- तेलंगाना असाइंड लैंड्स (प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर्स) एक्ट, 1977 — असाइंड जमीन के हस्तांतरण/अन्यसंक्रमण पर रोक; 2007 और 2017 में संशोधन।
- 'भूमिहीन गरीब व्यक्ति' की परिभाषा: ढाई एकड़ से कम गीली भूमि या पांच एकड़ से कम शुष्क भूमि का स्वामी।
- प्रस्तावित रीजनल रिंग रोड: 300 किमी, छह-लेन; पहला चरण 158 किमी (संगारेड्डी–नरसापुर–तूप्रान–गजवेल–जगदेवपुर–भोंगीर)।
- इस्लामपुर, तूप्रान मंडल, मेडक जिला — राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के किनारे सर्वे नंबर 14 में आवासीय परियोजना प्रस्तावित।
- LARR अधिनियम, 2013 — भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा, पुनर्वासन व पुनर्व्यवस्थापन का कानूनी ढांचा।
मेन्स दृष्टिकोण
तेलंगाना का असाइंड-भूमि विवाद दिखाता है कि भूमि सुधार से मिले अधिकार कितने अपूर्ण रह गए। 1973 के अधिनियम के तहत दलित, बीसी और एसटी परिवारों को बंजर, पथरीली जमीन मिली, जिसे उन्होंने दशकों की श्रम-साधना और बोरवेल खोदकर उपजाऊ बनाया; लेकिन 1977 का हस्तांतरण-निषेध कानून, जो दबंग जातियों द्वारा कब्जे से बचाने के नाम पर आया, व्यवहार में लाभार्थियों को मात्र 'कृषक' बनाकर पूर्ण स्वामित्व से वंचित रखता है — इसी कमजोरी का लाभ उठाकर प्रशासन तर्क देता है कि 'सरकार ने दी थी, सरकार ले लेगी'। आरआरआर, एचएमडीए की आवासीय योजनाओं और सैटेलाइट सिटी की मांग ने इन जमीनों को रियल एस्टेट पूलिंग के दायरे में ला दिया है, जबकि प्रति एकड़ 500 वर्ग गज का प्रस्तावित मुआवजा किसानों को अपर्याप्त और पट्टादार किसानों से भेदभावपूर्ण लगता है। विशेषज्ञों का मत है कि बहुउद्देशीय एकीकृत विकास के लिए अधिग्रहण स्वीकार्य हो सकता है, पर केवल संपत्ति-सृजन के लिए उपजाऊ असाइंड जमीन लेना भूमि सुधार का उद्देश्य ही विफल कर देगा। आगे का रास्ता: उच्च न्यायालय के स्पष्टीकरण के अनुरूप असाइंड-भूमि किसानों को पट्टादार के समान मानकर LARR, 2013 के तहत मुआवजा-पुनर्वास, लंबित हस्तांतरण आवेदनों का निपटारा, सहमति-आधारित पारदर्शी सर्वे, और दलित भूमिहीन परिवारों को तीन एकड़ देने के वादे पर अमल — जैसा वारंगल में कुडा की पूलिंग रद्द करने के फैसले से संकेत मिलता है कि जन-दबाव पर पुनर्विचार संभव है।
मुख्य शब्द
- असाइंड लैंड
- सरकार द्वारा भूमिहीन गरीबों को आवंटित जमीन, जिसके हस्तांतरण पर कानूनी रोक है और जिस पर पूर्ण स्वामित्व अधिकार सीमित रहते हैं।
- भूमि सुधार अधिनियम, 1973
- आंध्र प्रदेश भूमि सुधार (कृषि जोत पर सीमा) अधिनियम, जिसके तहत अधिशेष जमीन भूमिहीन निचली जातियों में बांटी गई।
- तेलंगाना असाइंड लैंड्स (प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर्स) एक्ट, 1977
- असाइंड जमीन की बिक्री/हस्तांतरण रोकने वाला कानून; 2007 व 2017 के संशोधनों से कुछ 'सद्भावना' खरीदें नियमित हुईं।
- रीजनल रिंग रोड (आरआरआर)
- हैदराबाद के चारों ओर प्रस्तावित 300 किमी छह-लेन सड़क, 20+ कस्बों और 200 गांवों से गुजरेगी; पहला चरण 158 किमी।
- एचएमडीए / कुडा
- हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी और काकतीय अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (वारंगल) — शहरी विकास व भूमि पूलिंग करने वाली संस्थाएं।
- LARR, 2013
- भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा, पारदर्शिता, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन का अधिकार देने वाला केंद्रीय अधिनियम।
अभ्यास प्रश्न
- असाइंड भूमि पर भूमिहीन दलित व आदिवासी किसानों के अधिकार किस हद तक सुरक्षित हैं? तेलंगाना के उदाहरण से हस्तांतरण-निषेध कानूनों की सीमाओं का परीक्षण कीजिए।
- शहरी अवसंरचना (जैसे रीजनल रिंग रोड) और रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि पूलिंग में LARR, 2013 के सिद्धांतों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।
- "भूमि सुधारों की सामाजिक न्याय की उपलब्धियां शहरीकरण के दबाव में पलट सकती हैं।" तेलंगाना के असाइंड-भूमि सर्वे के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
