एनसीपीआई के 20 में से 17 सांसद भाजपा में शामिल होंगे: बसुनिया

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सत्ता जाने के बाद जून में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए 20 लोकसभा सदस्यों में से एक, कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को कहा कि उनमें से 17 अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले भाजपा में शामिल होंगे। खान ने इसे खारिज करते हुए कहा कि किसी ने बसुनिया को उनकी ओर से बोलने का अधिकार नहीं दिया और वे कभी भाजपा में शामिल नहीं होंगे। अन्य सांसदों ने न पुष्टि की, न इनकार।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 17 of 20 NCPI MPs will join the BJP before Durga Puja in October — Attributed solely to Cooch Behar MP Jagadish Chandra Barma Basunia; not confirmed by other MPs quoted in the source.
  • Twenty TMC Lok Sabha members joined the NCPI on June 14, questioning Abhishek Banerjee's leadership — Stated as fact in the source with a specific date; no external document or spokesperson cited.
  • Khan says they will never join the BJP and nobody authorised Basunia to speak for them — Direct quote attributed to Khan in the source, presented as a rebuttal.
  • NCPI is an unrecognised party that contested two Tripura assembly seats and polled a few hundred votes — Figure appears twice in the source without an attributed data source; vote count is imprecise.
  • TMC won 29 of 42 Lok Sabha seats in West Bengal in 2024 and was left with nine Rajya Sabha members after resignations — Numbers appear in the source; no source given for the Rajya Sabha tally.

विश्लेषकों की राय राय

AI రాజకీయ విశ్లేషకులు · తెలుగు

ఇది ఒక దశలవారీ ఫిరాయింపు వ్యూహంలా కనిపిస్తోంది — తృణమూల్ నుంచి నేరుగా బీజేపీలోకి కాకుండా, ఎన్‌సీపీఐ అనే గుర్తింపు లేని పార్టీని మధ్యేమార్గంగా వాడుకుని, ఇప్పుడు దుర్గా పూజ ముందు తుది మజిలీకి చేరే ప్రయత్నం. బసునియా వ్యాఖ్యలు, ఖాన్ ఖండన కలిపి చూస్తే ఈ 20 మంది బృందం ఏకశిలా సదృశం కాదని, ముర్షిదాబాద్ లాంటి ముస్లిం మెజారిటీ నియోజకవర్గాల ఎంపీలకు బీజేపీ ట్యాగ్ ఎన్నికల రిస్క్ అని స్పష్టమవుతోంది. బెంగాల్ బీజేపీ నాయకత్వం తలుపులు మూయకపోవడం, కానీ "అంగీకారం పైస్థాయిలో నిర్ణయం" అనడం — బలం ప్రదర్శన, బేరసారాల శక్తి తమ చేతిలోనే ఉంచుకోవడం.

  • 2024లో 42లో 29 సీట్లు గెలిచిన తృణమూల్‌కు 28లో 20 మంది ఎంపీలు, 80లో 58 మంది ఎమ్మెల్యేలు చేజారడం — ఇది వ్యక్తిగత ఫిరాయింపు కాదు, సంస్థాగత విచ్ఛిన్నం స్థాయి దెబ్బ.
  • ఎన్‌సీపీఐ లాంటి అనామక పార్టీని వాడుకోవడం రాజకీయ సౌకర్యం కోసమే అనిపిస్తుంది; బసునియా స్వయంగా ఆ పార్టీ గురించి ముందు తెలియదని అంగీకరించడం ఆ 'ఏర్పాటు' స్వభావాన్ని బయటపెడుతోంది.
  • ఖాన్, ఖలీలుర్ రహమాన్, యూసుఫ్ పఠాన్ ఎన్‌డీఏ సమావేశాలకు దూరంగా ఉండటం — మైనారిటీ ఓటు బ్యాంకు ఆధారిత ఎంపీలకు బీజేపీలో చేరడం రాజకీయ ఆత్మహత్య కావచ్చనే లెక్క.
  • శతాబ్ది రాయ్, అరూప్ చక్రవర్తి సహా చాలామంది 'తెలియదు, ఇతరులను అనుసరిస్తా' అనడం — నిర్ణయం అట్టడుగు నుంచి రాలేదని, పైస్థాయి బేరసారాలపై ఆధారపడి ఉందని సూచన.
  • అభిషేక్ బెనర్జీ నాయకత్వాన్ని ప్రశ్నించడమే ఈ తిరుగుబాటుకు చెప్పిన కారణం కావడంతో, తృణమూల్‌కు ఇది వారసత్వ సంక్షోభంగానూ మారే ప్రమాదం ఉంది.

किस पर नज़र रखें — దుర్గా పూజ ముందు ఈ 17 మంది నిజంగా చేరుతారా, బీజేపీ 'పైస్థాయి' అందరినీ అంగీకరిస్తుందా, ముర్షిదాబాద్ త్రయం విడిగా ఏ దారి ఎంచుకుంటుందా — ఈ మూడు అంశాలే బెంగాల్‌లో తదుపరి బలాబలాలను నిర్ణయిస్తాయి.

బసునియా చెప్పింది ఒక వ్యక్తి ప్రకటన మాత్రమే; 17 మంది చేరికపై ఎన్‌సీపీఐ లేదా బీజేపీ అధికారిక నిర్ణయం, ఫిరాయింపు నిరోధక చట్టపరమైన పరిణామాలు, ఈ మార్పులకు వెనుక ఉన్న ఒప్పందాల స్వభావం — ఇవేవీ ఈ కథనం నిర్ధారించలేదు.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सत्ता जाने के बाद पार्टी में बड़ी टूट हुई। 14 जून को टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद एक अपरिचित और गैर-मान्यता प्राप्त दल नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गए और उन्होंने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। एनसीपीआई भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का घटक है। अब कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया का दावा है कि इनमें से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले भाजपा में शामिल होंगे, जिसे मुर्शिदाबाद क्षेत्र के सांसद खान ने खारिज किया है।

मुख्य तथ्य

  • कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने सोमवार को कहा कि एनसीपीआई के 20 में से 17 सांसद अक्टूबर में दुर्गा पूजा से पहले भाजपा में शामिल होंगे।
  • टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद 14 जून को एनसीपीआई में शामिल हुए और उन्होंने अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए।
  • एनसीपीआई एक गैर-मान्यता प्राप्त दल है, जिसने त्रिपुरा में दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और कुछ सौ वोट ही पाए।
  • बसुनिया के अनुसार शुरुआती योजना सीधे भाजपा में शामिल होने की थी, पर अबू ताहेर और दो अन्य सांसदों की आपत्ति के कारण एनसीपीआई में जाने की व्यवस्था की गई।
  • मुर्शिदाबाद जिले के तीन सांसद—खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान—एनसीपीआई में शामिल होने के बाद भी एनडीए की बैठकों से दूर रहे हैं।
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने बंगाल की 42 में से 29 सीटें जीती थीं; एक सांसद के निधन के बाद बचे 28 में से 20 एनसीपीआई में चले गए।
  • लगभग उसी समय टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने बगावत कर पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा किया।
  • सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक ने जून में इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के बाद 24 जुलाई को राज्यसभा में पुनर्निर्वाचित हुए; चौथी सदस्य अभिनेत्री कोयल मल्लिक ने भी इस्तीफा दिया।

समयरेखा

  1. 2024 लोकसभा चुनावटीएमसी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 लोकसभा सीटें जीतीं; बाद में एक सांसद का निधन।
  2. 14 जूनटीएमसी के 20 लोकसभा सांसद एनसीपीआई में शामिल; अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल।
  3. लगभग उसी समय (जून)टीएमसी के 80 में से 58 विधायकों की बगावत, पार्टी के चुनाव चिह्न पर दावा।
  4. जूनसुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक का राज्यसभा से इस्तीफा और भाजपा में प्रवेश; कोयल मल्लिक का भी इस्तीफा।
  5. 24 जुलाईतीनों पूर्व टीएमसी राज्यसभा सदस्य राज्यसभा के लिए पुनर्निर्वाचित हुए।
  6. सोमवार (हाल में)बसुनिया का दावा—17 एनसीपीआई सांसद भाजपा में जाएंगे; खान ने खंडन किया।
  7. अक्टूबर, दुर्गा पूजा से पहलेबसुनिया के अनुसार प्रस्तावित भाजपा प्रवेश।

किसका दाँव

  • जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया (कूचबिहार सांसद) — दावा किया कि 17 सांसद भाजपा में जाएंगे; कहा—"मुझे दूसरों का अनुसरण करना है।"
  • खान, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान (मुर्शिदाबाद के तीन सांसद) — एनडीए बैठकों से दूरी; खान ने कहा कोई भी उनकी ओर से बोलने के लिए अधिकृत नहीं, वे कभी भाजपा में नहीं जाएंगे।
  • भाजपा और प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य — प्रवेश की संभावना से इनकार नहीं; कहा कि स्वीकार करने का निर्णय सर्वोच्च स्तर पर होगा।
  • तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी — सत्ता गंवाने के बाद सांसद-विधायक स्तर पर बड़ी टूट; राज्यसभा में नौ सदस्य बचे।
  • एनसीपीआई — गैर-मान्यता प्राप्त दल, एनडीए घटक; सांसदों के पलायन से इसकी भूमिका पर सवाल।
  • शताब्दी रॉय, अरूप चक्रवर्ती, मिताली बाग, कालीपद सोरेन — एनसीपीआई सांसद, जिन्होंने भाजपा में जाने के किसी निर्णय की जानकारी न होने की बात कही।

क्यों अहम है

पश्चिम बंगाल की सत्ता बदलने के बाद टीएमसी के 20 लोकसभा और 58 विधानसभा सदस्यों का पाला बदलना राज्य के दलीय समीकरण में बड़े फेरबदल का संकेत है। एक गैर-मान्यता प्राप्त दल के जरिये सामूहिक दलबदल और फिर भाजपा में विलय की चर्चा दलबदल कानून, चुनाव चिह्न पर दावे और प्रतिनिधित्व की नैतिकता से जुड़े सवाल खड़े करती है। मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों के सांसदों की असहमति यह भी दिखाती है कि यह गुट एकजुट नहीं है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) एक गैर-मान्यता प्राप्त दल है और भाजपा नीत एनडीए का घटक है।
  • एनसीपीआई ने त्रिपुरा में दो विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था और कुछ सौ वोट पाए।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: पश्चिम बंगाल की 42 सीटों में टीएमसी ने 29 जीती थीं।
  • 14 जून—टीएमसी के 20 लोकसभा सांसदों का एनसीपीआई में प्रवेश; 80 में से 58 विधायकों की बगावत।
  • 24 जुलाई—टीएमसी छोड़कर भाजपा में गए तीन नेता राज्यसभा के लिए पुनर्निर्वाचित; टीएमसी के पास नौ राज्यसभा सदस्य बचे।
  • मुर्शिदाबाद (मुस्लिम-बहुल जिला) के तीन सांसद—खान, खलीलुर रहमान, यूसुफ पठान—एनडीए बैठकों से दूर।

मेन्स दृष्टिकोण

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की चुनावी पराजय के बाद हुआ सामूहिक दलबदल भारतीय राजनीति में सत्ता-केंद्रित निष्ठा की प्रवृत्ति का ताजा उदाहरण है। 2024 में 42 में से 29 सीटें जीतने वाली पार्टी के 20 लोकसभा सांसद 14 जून को एक ऐसे गैर-मान्यता प्राप्त दल में गए जिसके बारे में, बसुनिया के अपने कथन के अनुसार, उन्हें कुछ भी पता नहीं था; साथ ही 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करके चुनाव चिह्न पर दावा किया। बसुनिया का यह कथन कि सीधे भाजपा में जाने की योजना कुछ सांसदों की आपत्ति के कारण नहीं बनी और "व्यवस्था" के तहत एनसीपीआई का रास्ता चुना गया, यह प्रश्न उठाता है कि क्या ऐसे मंच दलबदल-विरोधी प्रावधानों के व्यावहारिक असर को कमजोर करने के साधन बन रहे हैं। दूसरी ओर खान का खंडन और मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों की एनडीए बैठकों से दूरी दिखाती है कि दलबदल में भी क्षेत्रीय और सामाजिक आधार की बाध्यताएं काम करती हैं, तथा भाजपा नेतृत्व स्वयं स्वीकृति का निर्णय "सर्वोच्च स्तर" पर रखना चाहता है। आगे का रास्ता मतदाता के जनादेश और प्रतिनिधि की निष्ठा के बीच जवाबदेही मजबूत करने तथा चुनाव चिह्न व दल-मान्यता से जुड़े विवादों के पारदर्शी निपटारे में है।

मुख्य शब्द

एनसीपीआई
नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया—गैर-मान्यता प्राप्त दल, एनडीए का घटक, जिसमें 20 टीएमसी सांसद शामिल हुए।
एनडीए
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन—भाजपा नीत सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसकी बैठकों से तीन एनसीपीआई सांसद दूर रहे।
गैर-मान्यता प्राप्त दल
ऐसा राजनीतिक दल जिसे मान्यता प्राप्त नहीं; एनसीपीआई ने त्रिपुरा में दो सीटें लड़कर कुछ सौ वोट पाए।
चुनाव चिह्न पर दावा
बगावत करने वाले 58 टीएमसी विधायकों द्वारा पार्टी के चुनाव चिह्न पर अधिकार का दावा।
मुर्शिदाबाद
पश्चिम बंगाल का मुस्लिम-बहुल जिला, जिसके तीन सांसदों ने भाजपा में जाने से इनकार किया।

अभ्यास प्रश्न

  1. सत्ता परिवर्तन के बाद सामूहिक दलबदल लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की विश्वसनीयता को कैसे प्रभावित करता है? पश्चिम बंगाल के हालिया घटनाक्रम के संदर्भ में परखें।
  2. गैर-मान्यता प्राप्त दलों के माध्यम से सामूहिक दल-परिवर्तन की व्यवस्था क्या कानूनी और नैतिक प्रश्न खड़े करती है? चर्चा कीजिए।
  3. पश्चिम बंगाल में टीएमसी के संसदीय और विधायी क्षरण के आंकड़ों (29/42 सीटें, 20 सांसद, 58/80 विधायक) के आधार पर राज्य के बदलते दलीय समीकरण का विश्लेषण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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