2025 में भारत की जीडीपी में यूट्यूब का 18,000 करोड़ रुपये योगदान: रिपोर्ट
यूट्यूब के रचनात्मक तंत्र ने 2025 में भारत की जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया और 9.6 लाख से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों के समतुल्य रोजगार को सहारा दिया। मंच ने 29 सितंबर को जारी रिपोर्ट में यह कहा। ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स के शोध पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, एक साल पहले यह आंकड़ा 16,000 करोड़ रुपये और 9.3 लाख नौकरियां था। पिछले साल दो लाख से अधिक चैनलों ने पहली बार कमाई की। कमाई करने वाले 73 प्रतिशत क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब मुख्य आय स्रोत है। 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ भारत यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार है।
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- YouTube's creative ecosystem contributed over Rs 18,000 crore to India's GDP in 2025 and supported over 960,000 full-time equivalent jobs. — Attributed in source to YouTube's 2025 Impact Report based on Oxford Economics research; figures appear consistently in the source.
- Previous year figures were over Rs 16,000 crore and more than 930,000 full-time equivalent jobs. — Attributed to the platform's 2024 findings as cited in the source.
- More than 20,000 Indian channels had over one million subscribers as of June 2026. — Attributed to the company; the date is later than the report release date given in the source, an internal inconsistency to check.
- 73 percent of monetising creators said YouTube was their primary income source; over 200,000 channels earned money for the first time in the past year. — Figures appear in the source, attributed to the report.
- In May 2025 CEO Neal Mohan announced Rs 850 crore investment over two years and said Rs 21,000 crore was paid to Indian creators in three years. — Attributed to a named executive in the source; no independent verification possible here.
विश्लेषकों की राय राय
भारत की अर्थव्यवस्था के आकार के सामने 18,000 करोड़ रुपये बड़ी संख्या नहीं है — इसका महत्व कुल आंकड़े में नहीं, बल्कि उसके फैलाव में है, क्योंकि जयपुर, लखनऊ और कोच्चि जैसे गैर-महानगरीय केंद्रों में कुशल रचनात्मक काम पैदा हो रहा है। 16,000 करोड़ से 18,000 करोड़ की बढ़त स्वस्थ है, लेकिन रोजगार का आंकड़ा 9.3 लाख से 9.6 लाख तक ही गया — यानी वृद्धि नए रोजगार के विस्तार से कम और प्रति व्यक्ति आय बढ़ने से ज्यादा आई है। और सबसे अहम, यह प्लेटफॉर्म की अपनी रिपोर्ट है, जो अनुमान-आधारित पद्धति पर टिकी है।
- "पूर्णकालिक रोजगार के समकक्ष" एक अनुमान है जिसमें पार्ट-टाइम, फ्रीलांस और अनियमित आय भी जुड़ती है — यह वेतनभोगी, सुरक्षित नौकरी के बराबर नहीं है।
- कमाई करने वाले 73 प्रतिशत क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब मुख्य आय स्रोत होना अवसर भी है और जोखिम भी, क्योंकि एक ही प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम या भुगतान नियम बदलने से घरेलू आय हिल सकती है।
- 10 लाख रुपये या अधिक कमाने वाले चैनलों में 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी और 2 लाख चैनलों की पहली कमाई बताती है कि क्रिएटर इकोनॉमी आय की सीढ़ी चढ़ रही है।
- भारत में बने कंटेंट का 15 प्रतिशत से अधिक व्यू-टाइम विदेश से आना दिखाता है कि यह गतिविधि केवल घरेलू खपत नहीं, आंशिक रूप से सेवा निर्यात जैसी है।
- फायदा किसे: क्रिएटर्स को आय, गैर-महानगरों में कौशल, और प्लेटफॉर्म को विज्ञापन आधार — इसलिए 850 करोड़ का निवेश और स्किलिंग साझेदारियां कारोबारी रणनीति के तौर पर भी पढ़ी जानी चाहिए।
किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि अगली रिपोर्ट में रोजगार का आंकड़ा जीडीपी योगदान के साथ कदम मिलाकर बढ़ता है या कमाई कुछ बड़े चैनलों में सिमट जाती है — यही क्रिएटर इकोनॉमी की गुणवत्ता की असली परीक्षा है।
यह प्लेटफॉर्म द्वारा जारी रिपोर्ट है; जीडीपी और रोजगार अनुमानों की पद्धति, क्रिएटर्स की औसत कमाई और आय के केंद्रीकरण का ब्योरा इस खबर से स्थापित नहीं होता।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
गूगल के स्वामित्व वाले वीडियो मंच यूट्यूब ने ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स के शोध पर आधारित अपनी '2025 इम्पैक्ट रिपोर्ट' जारी की है, जिसमें भारत के क्रिएटर इकोनॉमी (रचनाकार अर्थव्यवस्था) में उसके योगदान का आकलन किया गया है। 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं के साथ भारत यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार है और मंच के भविष्य की वृद्धि के लिए अहम क्षेत्र है। रिपोर्ट के मुताबिक यूट्यूब का रचनात्मक तंत्र अब सिनेमैटोग्राफर, साउंड इंजीनियर, पटकथा लेखक और प्रोडक्शन पेशेवरों जैसी भूमिकाओं में रोजगार को सहारा दे रहा है, और इसका असर बड़े शहरों से आगे गैर-महानगरीय केंद्रों तक फैल रहा है।
मुख्य तथ्य
- यूट्यूब के रचनात्मक तंत्र ने 2025 में भारत की जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान दिया (रिपोर्ट 29 सितंबर को जारी)।
- मंच ने भारत में 9,60,000 से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों के समतुल्य रोजगार को सहारा दिया।
- 2024 के आंकड़ों में यह योगदान 16,000 करोड़ रुपये से अधिक और 9,30,000 से अधिक पूर्णकालिक समतुल्य नौकरियां था।
- पिछले एक साल में भारत में 2,00,000 से अधिक यूट्यूब चैनलों ने पहली बार कमाई की।
- 10 लाख रुपये या अधिक राजस्व कमाने वाले चैनलों की संख्या में साल-दर-साल 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई।
- कमाई करने वाले 73 प्रतिशत क्रिएटर्स ने कहा कि यूट्यूब उनकी आय का प्रमुख स्रोत है।
- जून 2026 तक भारत में 20,000 से अधिक चैनलों के 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे; भारतीय चैनलों के कंटेंट का 15 प्रतिशत से अधिक वॉच टाइम देश के बाहर से आता है।
- मई 2025 में यूट्यूब सीईओ नील मोहन ने दो वर्षों में 850 करोड़ रुपये निवेश की घोषणा की और बताया कि पिछले तीन साल में भारतीय क्रिएटर्स, कलाकारों व मीडिया कंपनियों को 21,000 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया गया।
समयरेखा
- 2024 (पिछले वर्ष के निष्कर्ष)यूट्यूब के रचनात्मक तंत्र का जीडीपी योगदान 16,000 करोड़ रुपये से अधिक और 9,30,000 से अधिक पूर्णकालिक समतुल्य नौकरियां।
- मई 2025सीईओ नील मोहन ने भारत की क्रिएटर इकोनॉमी के लिए दो वर्षों में 850 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।
- 2025जीडीपी योगदान 18,000 करोड़ रुपये से अधिक और 9,60,000 से अधिक पूर्णकालिक नौकरियों के समतुल्य रोजगार।
- जून 2026 तकभारत में 20,000 से अधिक यूट्यूब चैनलों के 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर।
- 29 सितंबरयूट्यूब ने ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स के शोध पर आधारित 2025 इम्पैक्ट रिपोर्ट जारी की।
किसका दाँव
- भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स — 73 प्रतिशत कमाई करने वाले क्रिएटर्स के लिए यूट्यूब आय का प्रमुख स्रोत; 2 लाख से अधिक चैनलों ने पहली बार कमाई की।
- यूट्यूब/गूगल — 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं वाला भारत सबसे बड़ा बाजार और भविष्य की वृद्धि का अहम क्षेत्र।
- गैर-महानगरीय केंद्र (जयपुर, लखनऊ, कोच्चि) — रचनात्मक क्लस्टर स्थानीय प्रतिभा के तकनीकी कौशल विकास में मदद कर रहे हैं।
- प्रशिक्षु व तकनीकी पेशेवर — पिछले साल कमाई करने वाले क्रिएटर्स ने 3,00,000 से अधिक प्रशिक्षुओं को सहारा दिया; सिनेमैटोग्राफर, साउंड इंजीनियर, पटकथा लेखक जैसी भूमिकाएं।
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और IICT — यूट्यूब के साथ कौशल विकास पहलों में साझेदार।
- ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स — रिपोर्ट के आर्थिक आकलन का शोध आधार, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता जुड़ी है।
क्यों अहम है
डिजिटल क्रिएटर अर्थव्यवस्था अब औपचारिक आर्थिक योगदान और रोजगार सृजन का मापनीय स्रोत बन रही है — जीडीपी योगदान 16,000 करोड़ से 18,000 करोड़ रुपये और रोजगार 9.3 लाख से 9.6 लाख पूर्णकालिक समतुल्य तक पहुंचा है। जयपुर, लखनऊ और कोच्चि जैसे गैर-महानगरीय केंद्रों तक इसका फैलाव रोजगार के भौगोलिक विस्तार और कौशल विकास का संकेत देता है। साथ ही 73 प्रतिशत क्रिएटर्स की आय एक ही मंच पर निर्भर होना और एआई-जनित कंटेंट का बढ़ना नियामकीय व आय-सुरक्षा के प्रश्न खड़े करते हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- यूट्यूब 2025 इम्पैक्ट रिपोर्ट ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स के शोध पर आधारित है; 29 सितंबर को जारी।
- 2025 में भारत की जीडीपी में योगदान: 18,000 करोड़ रुपये से अधिक; रोजगार: 9,60,000 पूर्णकालिक समतुल्य।
- भारत यूट्यूब का सबसे बड़ा बाजार — 50 करोड़ (आधा अरब) से अधिक उपयोगकर्ता।
- मई 2025: सीईओ नील मोहन ने दो वर्षों में 850 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की।
- यूट्यूब ने तीन वर्षों में भारतीय क्रिएटर्स, कलाकारों व मीडिया कंपनियों को 21,000 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया।
- कौशल विकास साझेदारी: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा IICT; वृद्धि के तीन क्षेत्र — एआई क्रिएशन टूल्स, इकोसिस्टम साझेदारी, जिम्मेदार एआई।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की क्रिएटर अर्थव्यवस्था तेजी से एक संगठित आर्थिक क्षेत्र का रूप ले रही है: यूट्यूब की रिपोर्ट के अनुसार उसके रचनात्मक तंत्र ने 2025 में जीडीपी में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक जोड़ा और 9.6 लाख पूर्णकालिक नौकरियों के समतुल्य रोजगार को सहारा दिया, जो पिछले वर्ष के 16,000 करोड़ रुपये व 9.3 लाख से अधिक है। इसके पीछे कारण हैं — 50 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं का विशाल घरेलू बाजार, सस्ता स्मार्टफोन-आधारित उपभोग, मुद्रीकरण के विस्तृत रास्ते (2 लाख से अधिक चैनलों ने पहली बार कमाई की; 10 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले चैनल 20 प्रतिशत से अधिक बढ़े) और जयपुर, लखनऊ, कोच्चि जैसे गैर-महानगरों में रचनात्मक क्लस्टर। निहितार्थ दोहरे हैं: एक ओर सिनेमैटोग्राफी, साउंड इंजीनियरिंग, पटकथा लेखन जैसी कुशल भूमिकाओं में रोजगार और 3 लाख से अधिक प्रशिक्षुओं को अवसर, तथा 15 प्रतिशत से अधिक वॉच टाइम विदेश से आने के कारण सॉफ्ट पावर व निर्यात संभावना; दूसरी ओर एक ही मंच पर आय-निर्भरता (73 प्रतिशत क्रिएटर्स), एल्गोरिदम व नीतिगत बदलावों का जोखिम, और एआई-जनित सामग्री से जुड़ी पहचान व प्रामाणिकता की चुनौतियां। आगे का रास्ता सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और IICT जैसी संस्थाओं के साथ कौशल साझेदारी को गहरा करने, आय के स्रोतों में विविधता (क्रिएटर-नेतृत्व वाली शॉपिंग साझेदारियां), तथा सिंथेटिक कंटेंट पर लेबल, डिस्क्लोजर व एआई लाइकनेस डिटेक्शन जैसे सुरक्षा उपायों को मजबूत करने में है।
मुख्य शब्द
- क्रिएटर इकोनॉमी (रचनाकार अर्थव्यवस्था)
- ऑनलाइन मंचों पर सामग्री बनाकर कमाई करने वाले क्रिएटर्स और उनसे जुड़े तकनीकी-उत्पादन पेशेवरों का आर्थिक तंत्र।
- पूर्णकालिक समतुल्य (FTE) नौकरियां
- अलग-अलग अंशकालिक व परियोजना-आधारित कामों को जोड़कर निकाला गया पूर्णकालिक रोजगार के बराबर आंकड़ा; भारत में 9,60,000 से अधिक।
- ऑक्सफर्ड इकोनॉमिक्स
- वह शोध संस्था जिसके अध्ययन पर यूट्यूब की 2025 इम्पैक्ट रिपोर्ट के आर्थिक अनुमान आधारित हैं।
- IICT
- यूट्यूब की कौशल विकास पहलों में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ नामित साझेदार संस्थान (पूरा विवरण स्रोत में नहीं दिया गया)।
- एआई लाइकनेस डिटेक्शन
- क्रिएटर्स को अपनी डिजिटल उपस्थिति/चेहरे-आवाज के अनधिकृत एआई उपयोग पर नियंत्रण देने वाला यूट्यूब का उपकरण।
- यूट्यूब क्रिएटर कलेक्टिव्स
- उभरते क्रिएटर्स को सहपाठी-आधारित सीखने और मुद्रीकरण के अवसरों से जोड़ने वाला विस्तारित कार्यक्रम।
अभ्यास प्रश्न
- भारत की क्रिएटर अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन और जीडीपी में योगदान का नया स्रोत बन रही है। यूट्यूब की 2025 इम्पैक्ट रिपोर्ट के आंकड़ों के आलोक में इसके अवसरों और जोखिमों का परीक्षण कीजिए।
- डिजिटल मंचों पर क्रिएटर्स की आय-निर्भरता (73 प्रतिशत के लिए प्रमुख आय स्रोत) क्या नीतिगत चुनौतियां पैदा करती है? चर्चा कीजिए।
- गैर-महानगरीय शहरों में रचनात्मक क्लस्टर का उभरना कौशल विकास और क्षेत्रीय संतुलित विकास को कैसे प्रभावित कर सकता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
