राष्ट्रीय दिल्ली

दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूज़क्लिक के खिलाफ एफआईआर, ईडी केस रद्द किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने डिजिटल न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा की एफआईआर तथा प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही रद्द कर दी। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि अप्रैल 2018 में वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से 7.69% शेयरों के बदले मिले 15 लाख डॉलर (करीब 9.59 करोड़ रुपये) से किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ, क्योंकि उस समय डिजिटल न्यूज़ में विदेशी निवेश पर कोई सीमा नहीं थी। कोर्ट ने कार्यवाही को स्वतंत्र पत्रकारिता पर दुर्भावनापूर्ण, मनमाना हमला बताया।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Delhi High Court, through Justice Neena Bansal Krishna, quashed the EOW FIR and the ED's ECIR against NewsClick and Prabir Purkayastha on May 29, 2026. — Attributed to the judgment, with quoted paragraphs; the 2026 date appears in the source but is unusual and should be checked before publication.
  • NewsClick received about USD 1.5 million (around Rs 9.59 crore) from Worldwide Media Holdings LLC in April 2018 for 7.69% shares. — Figures appear in the source and in a quoted paragraph of the judgment.
  • The Ministry of Information and Broadcasting clarified on January 5, 2018 that online publication through websites did not fall within print media, so no FDI cap applied. — Attributed to the judgment's recording of the Ministry's response.
  • The Court described the proceedings as mala fide and an arbitrary attack on free and impartial journalism. — Direct quote attributed to Para 121 of the judgment.
  • RBI told investigators the remittance was under the automatic route with no delay in share issue or FEMA reporting. — Attributed to a status report dated 26.07.2021 as recorded in the judgment; the source notes the report was not placed on record.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह केवल एक अदालती नतीजा नहीं है — यह जांच एजेंसियों के इस्तेमाल और प्रेस की आज़ादी की बहस को फिर राजनीतिक मैदान में ले आता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने ईओडब्ल्यू की एफआईआर और ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग मामला खारिज करने के साथ-साथ कार्यवाही को दुर्भावनापूर्ण और स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला कहा, जिससे विपक्ष को अदालत की मुहर वाला तर्क मिल गया। सरकार के पक्ष के लिए यह एजेंसियों की विश्वसनीयता पर असहज सवाल है।

  • छह साल की जांच के बाद कोर्ट का यह निष्कर्ष कि 2018 में डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म में विदेशी निवेश पर कोई सीमा ही नहीं थी, जांच की कानूनी तैयारी पर सवाल खड़ा करता है।
  • 'दुर्भावनापूर्ण' और 'निष्पक्ष पत्रकारिता पर हमला' जैसे शब्द राजनीतिक रूप से सबसे असरदार हैं और विपक्षी दलों तथा पत्रकार संगठनों द्वारा बार-बार दोहराए जाने की संभावना है।
  • सरकार पक्ष की अपेक्षित प्रतिक्रिया यही होगी कि एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
  • कोर्ट द्वारा यह स्वीकार करना कि निवेश से पहले मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा गया था, नीतिगत अस्पष्टता को राजनीतिक जिम्मेदारी बना देता है।
  • व्यावसायिक फैसलों को अपराध नहीं बनाया जा सकता — यह टिप्पणी मीडिया संस्थानों और एनजीओ से जुड़े अन्य विदेशी फंडिंग मामलों में उद्धृत हो सकती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राज्य या ईडी सुप्रीम कोर्ट जाते हैं या नहीं, और विपक्ष संसद तथा चुनावी मंचों पर एजेंसियों की जवाबदेही के मुद्दे को इस फैसले के सहारे कितना आगे बढ़ाता है।

यह खबर यह साबित नहीं करती कि जांच राजनीतिक निर्देश पर हुई थी — कोर्ट ने केवल कानूनी आधार न होने की बात कही — और न ही यह तय है कि फैसले के खिलाफ अपील होगी।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

न्यूज़क्लिक एक डिजिटल न्यूज़ पोर्टल है, जिसे चलाने वाली कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को अप्रैल 2018 में अमेरिका स्थित वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से करीब 15 लाख डॉलर (लगभग 9.59 करोड़ रुपये) का निवेश मिला था। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अगस्त 2020 में आरोप लगाया कि शेयरों का जानबूझकर अधिक मूल्यांकन कर न्यूज़ मीडिया में विदेशी निवेश की पाबंदियों से बचा गया और धन को वेतन, कंसल्टेंसी फीस, किराया आदि के ज़रिए इधर-उधर किया गया। इसी एफआईआर को अनुसूचित अपराध मानकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज की। दिल्ली हाई कोर्ट ने अब एफआईआर और ईसीआईआर दोनों रद्द कर दी हैं।

मुख्य तथ्य

  • जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 29 मई 2026 को फैसला सुनाते हुए ईओडब्ल्यू की एफआईआर और ईडी की पीएमएलए कार्यवाही दोनों रद्द कर दीं।
  • न्यूज़क्लिक को अप्रैल 2018 में वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से करीब 15 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 9.59 करोड़ रुपये) मिले; रकम 11 अप्रैल 2018 को भेजी गई और बदले में 7.69% शेयर दिए गए।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2018 को स्पष्ट किया था कि वेबसाइट/वेब पोर्टल के जरिये ऑनलाइन प्रकाशन प्रिंट मीडिया के दायरे में नहीं आता; कोर्ट ने कहा उस समय डिजिटल न्यूज़ में एफडीआई पर कोई सीमा नहीं थी।
  • एफआईआर अगस्त 2020 में आईपीसी की धारा 406, 420 और 120बी के तहत दर्ज हुई; उसके तुरंत बाद ईडी ने पीएमएलए के तहत ईसीआईआर दर्ज की।
  • बीजीजेसी एसोसिएट्स एलएलपी के वैल्यूएशन सर्टिफिकेट में फेमा के अनुरूप शेयर का उचित मूल्य 9,188 रुपये प्रति शेयर आंका गया; कोर्ट ने कहा—'यह एक आर्थिक निर्णय है जिससे कोई आपराधिक अपराध नहीं बनता।' (पैरा 73)
  • 26 जुलाई 2021 की स्टेटस रिपोर्ट में दर्ज था कि आरबीआई के अनुसार फॉर्म एफसीजीपीआर के मुताबिक विदेशी रकम ऑटोमैटिक रूट से आई और शेयर जारी करने व रिपोर्टिंग में फेमा के तहत कोई देरी नहीं थी।
  • कोर्ट ने कहा कि शिकायत शोभन सिंह ने की थी, जो मात्र सूचक था, पीड़ित नहीं; निवेशक कंपनी ने ठगे जाने की कोई शिकायत नहीं की—इसलिए धारा 420 नहीं बनती। (पैरा 83)
  • कोर्ट ने कार्यवाही को 'फिशिंग एंड रोविंग एक्सरसाइज' तथा 'स्वतंत्र व निष्पक्ष पत्रकारिता पर मनमाना हमला और शक्तियों का दुरुपयोग' बताया। (पैरा 119, 121)

समयरेखा

  1. 5 जनवरी 2018सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वेबसाइट/वेब पोर्टल पर ऑनलाइन समाचार प्रकाशन प्रिंट मीडिया के दायरे में नहीं आता।
  2. 20 मार्च 2018न्यूज़क्लिक और वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी के बीच निवेश समझौता (इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट) हुआ।
  3. 11 अप्रैल 201815 लाख अमेरिकी डॉलर की रकम भेजी गई, जिसके बदले कंपनी के 7.69% शेयर दिए गए।
  4. अगस्त 2020आईपीसी की धारा 406, 420 और 120बी के तहत ईओडब्ल्यू की एफआईआर दर्ज; इसके तुरंत बाद ईडी की ईसीआईआर।
  5. 2021प्रबीर पुरकायस्थ और कर्मचारी कई बार जांच में शामिल हुए; 26 जुलाई 2021 की स्टेटस रिपोर्ट में आरबीआई का जवाब दर्ज।
  6. सितंबर 2021 से जून 2022इस अवधि में याचिकाकर्ताओं को एक बार भी समन नहीं किया गया।
  7. 2022विवादित ईसीआईआर का पंजीकरण; कोर्ट ने नोट किया कि इसके बाद वर्षों में कोई अपराध स्थापित करने वाली सामग्री सामने नहीं आई।
  8. 29 मई 2026जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने एफआईआर और ईसीआईआर दोनों रद्द कीं।

किसका दाँव

  • न्यूज़क्लिक (पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्रा. लि.) और संस्थापक संपादक प्रबीर पुरकायस्थ — लगभग छह साल चली आपराधिक व मनी लॉन्ड्रिंग जांच से राहत; कारोबार और संपादकीय कामकाज की बहाली।
  • आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), दिल्ली पुलिस — अगस्त 2020 की एफआईआर रद्द; अधिक मूल्यांकन और धन के दुरुपयोग के आरोप न्यायिक परीक्षण में टिक नहीं सके।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) — पीएमएलए के तहत अधिकारक्षेत्र की बुनियाद—अनुसूचित अपराध—ही न होने के कारण ईसीआईआर पूरी तरह रद्द।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय — 5 जनवरी 2018 की उसकी स्पष्टीकरण-चिट्ठी बचाव का मुख्य आधार बनी—डिजिटल न्यूज़ पर एफडीआई सीमा का प्रश्न।
  • भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) — उसकी जानकारी कि रकम ऑटोमैटिक रूट से आई और फेमा रिपोर्टिंग में देरी नहीं थी—जांच के आरोपों को कमजोर करने वाली रही।
  • वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी — निवेशक होने के नाते; कंपनी के अस्तित्व पर सवाल उठा, पर कोर्ट ने आरोप को असमर्थित पाया और कंपनी ने ठगी की शिकायत नहीं की।
  • स्वतंत्र मीडिया व पत्रकार समुदाय — जांच एजेंसियों की शक्तियों के दुरुपयोग और प्रेस स्वतंत्रता पर असर—फैसले में सीधा उल्लेख।

क्यों अहम है

यह फैसला केवल सबूतों की कमी नहीं बताता, बल्कि कहता है कि आरोप स्वयं कोई आपराधिक अपराध ही प्रकट नहीं करते—और साथ ही पीएमएलए के तहत ईडी के अधिकारक्षेत्र की बुनियाद पर सवाल उठाता है, क्योंकि अनुसूचित (प्रिडिकेट) अपराध रद्द होने पर मनी लॉन्ड्रिंग कार्यवाही भी नहीं टिक सकती। कोर्ट ने वाणिज्यिक मूल्यांकन के विवाद और आपराधिक गलत काम के बीच स्पष्ट रेखा खींची तथा सामान्य परिचालन खर्च को अपराध का सबूत मानने से इनकार किया। सबसे अहम यह कि एक संवैधानिक अदालत ने जांच शक्तियों के प्रयोग को स्वतंत्र पत्रकारिता और प्रेस स्वतंत्रता के सवाल से सीधे जोड़ा।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 29 मई 2026: दिल्ली हाई कोर्ट (जस्टिस नीना बंसल कृष्णा) ने न्यूज़क्लिक व प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ एफआईआर और ईडी की ईसीआईआर रद्द कीं।
  • एफआईआर की धाराएँ: आईपीसी 406 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (छल) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र); दर्ज—अगस्त 2020।
  • ईसीआईआर = एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट, पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा दर्ज; अनुसूचित अपराध का होना पीएमएलए लागू करने की अधिकारक्षेत्रीय पूर्वशर्त है।
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 5 जनवरी 2018 की स्पष्टोक्ति: वेब पोर्टल पर ऑनलाइन प्रकाशन प्रिंट मीडिया के दायरे में नहीं—उस समय डिजिटल न्यूज़ में एफडीआई पर कोई सीमा नहीं।
  • फेमा के तहत शेयर मूल्यांकन: बीजीजेसी एसोसिएट्स एलएलपी ने डिस्काउंटेड कैश फ्लो (डीसीएफ) विधि से 9,188 रुपये प्रति शेयर उचित मूल्य आंका।
  • फॉर्म एफसीजीपीआर और 'ऑटोमैटिक रूट' के जरिये विदेशी रकम प्राप्ति—आरबीआई ने फेमा उल्लंघन न होने की जानकारी दी थी (26 जुलाई 2021 की स्टेटस रिपोर्ट)।

मेन्स दृष्टिकोण

यह मामला दिखाता है कि आपराधिक कानून और वित्तीय जांच की असाधारण शक्तियों का प्रयोग किसी पहचान-योग्य, विधिसम्मत अपराध से जुड़ा होना चाहिए, न कि मात्र संदेह पर। कारणों की जड़ में एक नियामकीय अस्पष्टता का आपराधिकीकरण है: 2018 में डिजिटल न्यूज़ में विदेशी निवेश पर कोई सीमा नहीं थी—जिसकी पुष्टि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 5 जनवरी 2018 की स्पष्टोक्ति और आरबीआई की ऑटोमैटिक रूट संबंधी जानकारी से हुई—फिर भी शेयरों के 'अधिक मूल्यांकन' और वेतन/किराया/कंसल्टेंसी जैसे सामान्य खर्चों को 'धन की हेराफेरी' बताकर एफआईआर और ईसीआईआर चलाई गई। कोर्ट ने पाया कि छल के लिए आवश्यक 'पीड़ित व्यक्ति' ही नहीं था (शिकायतकर्ता शोभन सिंह मात्र सूचक), शेयरों के बदले निवेश को 'न्यास' या 'दुर्विनियोग' नहीं कहा जा सकता, और षड्यंत्र के आरोप बिना साक्ष्य थे—इसलिए पीएमएलए का आधार ही ढह गया। निहितार्थ दो स्तरों पर हैं: संस्थागत—जांच एजेंसियों की जवाबदेही, स्टेटस रिपोर्ट से अनुकूल सामग्री हटाने की प्रवृत्ति, तथा 'फिशिंग एंड रोविंग' जांच से नागरिकों पर पड़ने वाला दबाव; और संवैधानिक—स्वतंत्र पत्रकारिता तथा प्रेस स्वतंत्रता पर प्रभाव, जिसे अदालत ने स्पष्ट शब्दों में दर्ज किया। आगे का रास्ता स्रोत में विस्तार से नहीं बताया गया, पर फैसले का निहित संदेश यही है कि वाणिज्यिक निर्णयों व नियामकीय विवादों को आपराधिक अपराध में बदलने से बचा जाए और कठोर शक्तियों का प्रयोग विधि व साक्ष्य से बँधा रहे।

मुख्य शब्द

ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा)
पुलिस की वह इकाई जो आर्थिक/वित्तीय अपराधों की जांच करती है; इसी ने अगस्त 2020 में न्यूज़क्लिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
ईसीआईआर
एनफोर्समेंट केस इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट—पीएमएलए के तहत ईडी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करने के लिए दर्ज की जाने वाली रिपोर्ट।
अनुसूचित/प्रिडिकेट अपराध
पीएमएलए की अनुसूची में शामिल वह मूल अपराध जिसके बिना मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही नहीं चल सकती; मूल अपराध रद्द होने पर ईसीआईआर भी गिर जाती है।
ऑटोमैटिक रूट (एफडीआई)
विदेशी निवेश का वह मार्ग जिसमें सरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं; आरबीआई के अनुसार न्यूज़क्लिक की रकम इसी रूट से आई थी।
फॉर्म एफसीजीपीआर
फेमा के तहत विदेशी निवेशक को शेयर जारी करने की सूचना आरबीआई को देने वाला फॉर्म; इसमें कोई देरी न होने की बात दर्ज थी।
डिस्काउंटेड कैश फ्लो (डीसीएफ)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मूल्यांकन पद्धति, भारतीय नियामकीय ढाँचे में भी स्वीकार्य; इसी से न्यूज़क्लिक के शेयरों का मूल्य आँका गया।

अभ्यास प्रश्न

  1. क्या मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी का अधिकारक्षेत्र पूर्णतः 'अनुसूचित अपराध' के अस्तित्व पर निर्भर है? न्यूज़क्लिक मामले के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
  2. वाणिज्यिक मूल्यांकन संबंधी विवाद और आपराधिक छल (धारा 420) व आपराधिक न्यासभंग (धारा 406) के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। दिल्ली हाई कोर्ट के तर्कों की सहायता से उत्तर दें।
  3. डिजिटल समाचार माध्यमों में विदेशी निवेश के नियमन की अस्पष्टता जांच एजेंसियों की शक्तियों और प्रेस स्वतंत्रता को कैसे प्रभावित करती है? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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