राजनीति कुंडरा

सहकारिता से महिला सशक्तीकरण मोदी सरकार का लक्ष्य: अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि सहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख उद्देश्यों में एक है। उन्होंने केरल के कोल्लम जिले के कुंडरा में एनसीसीएफ के तहत सहकारी समितियों की पहलों का उद्घाटन करने के बाद यह कहा। शाह ने कहा कि श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 2014-15 के 23 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हुई और करीब 36 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। उन्होंने तीन तलाक पर रोक, 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश और सशस्त्र बलों में 11,000 से अधिक महिला अधिकारियों का उल्लेख किया। तीन करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य 2024 से पहले पूरा हुआ, 2029 तक छह करोड़ का लक्ष्य है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Women's share in the labour force rose from 23% in 2014-15 to 40%. — Attributed to Amit Shah in the source; no end-year given for the 40% figure.
  • Bank accounts were opened for nearly 36 crore women under PM Modi. — Figure appears in source, attributed to Shah; no independent data cited.
  • Over 11,000 women serve as officers in the Indian Armed Forces. — Direct quote from Shah; no official source cited.
  • Target of three crore Lakhpati Didis achieved before 2024, aim of six crore by 2029. — Attributed to Shah; source defines Lakhpati Didi as an SHG member with annual household income above Rs 1 lakh.
  • Paid maternity leave increased to 26 weeks. — Stated by Shah as a Modi government measure; no notification reference in source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

केरल में सहकारी क्षेत्र के मंच से अमित शाह का बोलना केवल प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश है। यह दौरा उस सहकारी नेटवर्क में केंद्रीय योजनाओं के ज़रिये प्रवेश की कोशिश का संकेत देता है, जिस पर दशकों से वाम दलों और कांग्रेस का दबदबा रहा है। साथ ही यह भाजपा की उस राष्ट्रीय रणनीति का विस्तार है, जिसमें महिला लाभार्थियों — स्वयं सहायता समूह सदस्य, लखपति दीदी, बैंक खाताधारक — को एक पहचान योग्य वोट समूह के रूप में गढ़ा जा रहा है।

  • आज़ादी के बाद से सहकारिता मंत्रालय की मांग पूरी न होने का उल्लेख पुरानी सरकारों पर अप्रत्यक्ष आरोप और मोदी सरकार के लिए श्रेय-दावा है — यह स्पष्ट राजनीतिक फ्रेमिंग है।
  • केरल में सहकारी समितियाँ स्थानीय सत्ता के केंद्र हैं, इसलिए केंद्रीय संस्थाओं के रास्ते वहाँ पहुँच भाजपा के संगठनात्मक विस्तार में मददगार हो सकती है।
  • 2029 तक छह करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य घोषित करना आने वाले चुनावी चक्रों तक महिला लाभार्थी वर्ग को केंद्र में रखने का संकेत है।
  • तीन तलाक और महिलाओं के अकेले हज पर जाने का ज़िक्र मुस्लिम महिलाओं को लक्षित संदेश है, जिसका बड़ी मुस्लिम आबादी वाले राज्य में चुनावी महत्व है।
  • वाम दलों और कांग्रेस की ओर से यह प्रत्यारोप संभव है कि केंद्र राज्य के सहकारी क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहा है, हालाँकि इस खबर में ऐसी कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि केरल की सहकारी समितियों में एनसीसीएफ की पहलें कितनी दूर तक फैलती हैं और राज्य सरकार तथा विपक्ष की प्रतिक्रिया क्या रहती है।

शाह द्वारा दिए आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि यहाँ नहीं है, और यह खबर यह भी नहीं बताती कि ऐसी पहलें वोट में बदलेंगी या नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केरल के कोल्लम जिले के कुंडरा में भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) के अंतर्गत सहकारी समितियों की विभिन्न पहलों का उद्घाटन किया, जिनका लक्ष्य सहकारी क्षेत्र में महिला सशक्तीकरण को मजबूत करना है। शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से महिला सशक्तीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद से किसान और सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोग एक अलग सहकारिता मंत्रालय की मांग कर रहे थे, जिसे मोदी सरकार ने पूरा किया। कार्यक्रम में उन्होंने पिछले 10-12 वर्षों में महिलाओं से जुड़े सरकारी कदमों का ब्योरा दिया।

मुख्य तथ्य

  • अमित शाह ने शुक्रवार, 26 सितंबर को कोल्लम (केरल) के कुंडरा में एनसीसीएफ के तहत सहकारी समितियों की पहलों का उद्घाटन किया।
  • शाह के अनुसार श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 2014-15 के 23 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत हो गई है।
  • मोदी के नेतृत्व में करीब 36 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, शाह ने कहा।
  • शाह ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तीन तलाक पर प्रतिबंध लगाया गया।
  • शाह के अनुसार अब मुस्लिम महिलाएं पुरुष सहयात्री के बिना हज कर सकती हैं।
  • भारतीय सशस्त्र बलों में 11,000 से अधिक बेटियां अधिकारी के रूप में सेवा दे रही हैं, शाह ने कहा।
  • मोदी सरकार में सवेतन मातृत्व अवकाश बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया।
  • तीन करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य 2024 से पहले हासिल; 2029 तक यह संख्या छह करोड़ करने का लक्ष्य।

समयरेखा

  1. स्वतंत्रता के बाद सेकिसान और सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोग अलग केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की मांग करते रहे, जो पूरी नहीं हुई।
  2. 2014-15श्रमबल में महिलाओं की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत थी (शाह के अनुसार अब 40 प्रतिशत)।
  3. पिछले 10-12 वर्षशाह के अनुसार मोदी के नेतृत्व में मातृशक्ति और महिला सशक्तीकरण के लिए बड़े प्रयास किए गए।
  4. 2024 से पहलेतीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पूरा हुआ।
  5. 26 सितंबर (शुक्रवार)शाह ने कुंडरा में एनसीसीएफ के तहत सहकारी पहलों का उद्घाटन कर महिला सशक्तीकरण पर बयान दिया।
  6. 2029 तकलखपति दीदियों की संख्या छह करोड़ करने का घोषित लक्ष्य।

किसका दाँव

  • केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय / अमित शाह — सहकारी क्षेत्र के जरिये ग्रामीण विकास, कृषि विकास और महिला सशक्तीकरण के दावों और लक्ष्यों की जवाबदेही।
  • एनसीसीएफ (भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड) — इसके अंतर्गत सहकारी समितियों की नई पहलों का क्रियान्वयन और महिला भागीदारी बढ़ाना।
  • स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की महिला सदस्य — लखपति दीदी लक्ष्य के तहत वार्षिक घरेलू आय एक लाख रुपये से अधिक करने का अवसर।
  • मुस्लिम महिलाएं — तीन तलाक पर रोक और पुरुष सहयात्री के बिना हज की अनुमति से जुड़े अधिकार।
  • कामकाजी महिलाएं — 26 सप्ताह का सवेतन मातृत्व अवकाश और श्रमबल भागीदारी बढ़ाने वाली सुविधाएं।
  • केरल के कोल्लम/कुंडरा के सहकारी सदस्य — स्थानीय सहकारी समितियों की नई पहलों से आर्थिक अवसर।

क्यों अहम है

सहकारिता भारत में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिलाओं की सामूहिक आर्थिक भागीदारी का बड़ा माध्यम है, और अलग सहकारिता मंत्रालय बनने के बाद इसे महिला सशक्तीकरण से जोड़ा जा रहा है। शाह द्वारा बताए गए आंकड़े—श्रमबल में 23 से 40 प्रतिशत भागीदारी, 36 करोड़ बैंक खाते, तीन करोड़ लखपति दीदी—सरकार की महिला-केंद्रित उपलब्धियों का राजनीतिक विमर्श गढ़ते हैं। केरल जैसे राज्य में, जहां सहकारी ढांचा मजबूत है, यह कार्यक्रम राजनीतिक संकेत भी देता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एनसीसीएफ = भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड; कार्यक्रम स्थल कुंडरा, कोल्लम जिला, केरल।
  • अमित शाह के पास केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ सहकारिता मंत्रालय भी है; सहकारिता मंत्रालय मोदी सरकार में बनाया गया।
  • लखपति दीदी: वह स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्य जिसकी वार्षिक घरेलू आय एक लाख रुपये से अधिक हो।
  • शाह के अनुसार श्रमबल में महिला हिस्सेदारी 2014-15 में 23% से बढ़कर 40%।
  • सवेतन मातृत्व अवकाश मोदी सरकार में 26 सप्ताह किया गया।
  • शाह के अनुसार सशस्त्र बलों में 11,000 से अधिक महिला अधिकारी सेवारत हैं।

मेन्स दृष्टिकोण

सहकारिता को महिला सशक्तीकरण का वाहक बनाने का तर्क इस धारणा पर खड़ा है कि सामूहिक संस्थाएं—सहकारी समितियां और स्वयं सहायता समूह—महिलाओं को पूंजी, बाजार और सामाजिक पूंजी तक पहुंच देती हैं। शाह के बयान में तीन स्तर दिखते हैं: संस्थागत (स्वतंत्रता के बाद से लंबित मांग के बाद अलग सहकारिता मंत्रालय का गठन), आर्थिक (36 करोड़ महिला बैंक खाते, श्रमबल में 23% से 40% भागीदारी, 26 सप्ताह मातृत्व अवकाश, तीन करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य 2024 से पहले पूरा और 2029 तक छह करोड़ का लक्ष्य) और अधिकार-आधारित (तीन तलाक पर रोक, पुरुष सहयात्री के बिना हज, सशस्त्र बलों में 11,000 से अधिक महिला अधिकारी)। विश्लेषणात्मक प्रश्न यह है कि क्या खाता-खोलना और सदस्यता जैसे मात्रात्मक संकेतक वास्तविक निर्णय-शक्ति, नेतृत्व पदों और स्थायी आय में बदलते हैं—स्रोत इस पर आंकड़े नहीं देता (स्रोत में उल्लेख नहीं)। आगे का रास्ता, जैसा कार्यक्रम स्वयं संकेत देता है, सहकारी क्षेत्र में महिला-केंद्रित पहलों को मजबूत करना और लखपति दीदी लक्ष्य को दोगुना करने की दिशा में क्रियान्वयन है।

मुख्य शब्द

एनसीसीएफ
भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड, जिसके अंतर्गत सहकारी समितियों की पहलों का उद्घाटन किया गया।
सहकारिता मंत्रालय
अलग केंद्रीय मंत्रालय, जिसकी मांग स्वतंत्रता के बाद से थी और जिसे मोदी सरकार ने बनाया; अमित शाह इसके मंत्री हैं।
लखपति दीदी
स्वयं सहायता समूह की वह सदस्य जिसकी वार्षिक घरेलू आय एक लाख रुपये से अधिक है।
स्वयं सहायता समूह (एसएचजी)
महिलाओं का सामूहिक समूह, जिसके जरिये बचत, ऋण और आजीविका गतिविधियां संचालित होती हैं।
मातृशक्ति
शाह द्वारा प्रयुक्त शब्द, जो महिला शक्ति और उसके सशक्तीकरण के प्रयासों को दर्शाता है।
तीन तलाक पर रोक
शाह के अनुसार मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम।

अभ्यास प्रश्न

  1. सहकारी संस्थाएं ग्रामीण भारत में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम कैसे बन सकती हैं? अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन के संदर्भ में चर्चा करें।
  2. 'लखपति दीदी' जैसे आय-आधारित लक्ष्य महिला सशक्तीकरण मापने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं? तर्कसहित परीक्षण करें।
  3. श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में मातृत्व अवकाश, वित्तीय समावेशन और कानूनी सुधारों की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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