एनसीईआरटी ने अंग्रेजी, अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समितियां गठित कीं

एनसीईआरटी ने कक्षा 11 और 12 के लिए अर्थशास्त्र तथा अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए दो समितियां गठित की हैं। 8 सितंबर की अधिसूचना के अनुसार 17 सदस्यीय अंग्रेजी समिति में एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय मीडिया संयोजक साकेत बहुगुणा शामिल हैं; इसकी अध्यक्षता हैदराबाद स्थित ईएफएलयू के कुलपति एन. नागराजू करेंगे। 14 सदस्यीय अर्थशास्त्र समिति के प्रमुख पीएम-ईएसी सदस्य संजीव सान्याल हैं, शमिका रवि भी सदस्य हैं। समयसीमा: कक्षा 11 – 30 नवंबर 2026, कक्षा 12 – 30 सितंबर 2027, अर्थशास्त्र – 28 फरवरी 2027।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • NCERT constituted committees to develop Economics and English textbooks for Classes 11 and 12. — Attributed to an NCERT notification issued on September 8 quoted in the source.
  • Saket Bahuguna, Assistant Professor at the Central Institute of Hindi, Delhi, is among the 17 members of the English committee and is a former ABVP national media convenor. — Named in the source; his ABVP role is stated by the reporter without a cited document.
  • Sanjeev Sanyal heads the 14-member Economics committee and Shamika Ravi is also a member; both are PM-EAC members. — Figure and names appear in the source, attributed to NCERT.
  • English committee to finish Class 11 work by November 30, 2026 and Class 12 by September 30, 2027; Economics committee by February 28, 2027. — Attributed in the source to NCERT director Dinesh Saklani via the notification.
  • An earlier Political Science textbook committee had at least four members with direct or indirect RSS links. — Unattributed assertion in the source; no supporting source given.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

कागज़ पर यह सामान्य पाठ्यक्रम प्रक्रिया है — एनसीईआरटी ने कक्षा 11 और 12 की नई किताबों के लिए विशेषज्ञ समितियाँ बनाई हैं। लेकिन नीति का संकेत गठन में है: अंग्रेज़ी समिति में एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय मीडिया संयोजक और अर्थशास्त्र समिति की अध्यक्षता पीएम-ईएसी सदस्य के हाथ में होना, और इससे पहले राजनीति विज्ञान समिति पर उठे सवाल — इन्हें जोड़कर एक पैटर्न का आरोप लगना स्वाभाविक है। दूसरा पक्ष भी उतना ही वैध है: कुलपतियों, शिक्षाविदों, एक पूर्व स्कूल विभागाध्यक्ष और नीति-अर्थशास्त्रियों वाली समितियाँ असामान्य नहीं हैं, और असली परीक्षा मसौदे की गुणवत्ता होगी।

  • समिति कैसे बनती है, यही असल नीतिगत निर्णय है — पर रिपोर्ट के अनुसार अधिसूचना चयन के मानदंड या पारदर्शिता की व्यवस्था नहीं बताती।
  • 'सांस्कृतिक जड़ें' और 'भारतीय ज्ञान परंपरा' जैसे विषय व्यापक राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दिशा से मेल खाते हैं, पर इन्हें अंग्रेज़ी साहित्य और अर्थशास्त्र में उतारना ही कठिन क्रियान्वयन-चुनौती है।
  • अर्थशास्त्र समिति में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों की केंद्रीय भूमिका नीतिगत अनुभव लाती है, साथ ही यह सवाल भी उठाती है कि पाठ्यक्रम में एक ही आर्थिक दृष्टिकोण हावी न हो जाए।
  • नवंबर 2026 से सितंबर 2027 तक चरणबद्ध समयसीमा और उसके बाद एनसीईआरटी की समीक्षा सोच-विचार की गुंजाइश देती है, बशर्ते शिक्षक प्रशिक्षण और मूल्यांकन ढाँचा साथ-साथ तैयार हो।
  • हाल के पाठ्यपुस्तक संशोधनों पर हुए विवादों को देखते हुए, मसौदों को सार्वजनिक परामर्श के लिए खोलना एनसीईआरटी के लिए विश्वसनीयता का सबसे सस्ता रास्ता हो सकता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि मसौदा अध्याय और समीक्षा चरण सार्वजनिक किए जाते हैं या नहीं, और राज्य बोर्ड तथा शिक्षक संगठन कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

यह खबर यह सिद्ध नहीं करती कि सदस्यों की पूर्व संबद्धताएँ किताबों की सामग्री तय करेंगी, न ही इसमें चयन प्रक्रिया या दोनों समितियों की पूरी सदस्य-सूची का विवरण है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 11 और 12 के लिए अर्थशास्त्र तथा अंग्रेजी की नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने के लिए दो समितियां गठित की हैं। इससे पहले एनसीईआरटी ने वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं के लिए राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक समिति घोषित की थी, जिसके कम से कम चार सदस्यों के आरएसएस से सीधे या अप्रत्यक्ष संबंध बताए गए। नई समितियों में आरएसएस से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के एक पूर्व राष्ट्रीय मीडिया संयोजक तथा प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएम-ईएसी) के सदस्य शामिल हैं। नई किताबों में सांस्कृतिक जड़ता और भारतीय ज्ञान प्रणाली जैसे विषयों के समावेश की शर्त रखी गई है।

मुख्य तथ्य

  • एनसीईआरटी ने 8 सितंबर की अधिसूचना के जरिये अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य पाठ्यपुस्तक समिति गठित की, जिसमें 17 सदस्य हैं।
  • अंग्रेजी समिति की अध्यक्षता हैदराबाद स्थित अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (ईएफएलयू) के कुलपति एन. नागराजू करेंगे।
  • समिति के सदस्य साकेत बहुगुणा केंद्रीय हिंदी संस्थान, दिल्ली में सहायक प्रोफेसर (भाषाविज्ञान) हैं और एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं।
  • अर्थशास्त्र की 14 सदस्यीय समिति के प्रमुख पीएम-ईएसी सदस्य संजीव सान्याल हैं; पीएम-ईएसी सदस्य शमिका रवि भी इसमें शामिल हैं।
  • अंग्रेजी समिति को कक्षा 11 का कार्य 30 नवंबर 2026 तक और कक्षा 12 का 30 सितंबर 2027 तक पूरा करना है।
  • अर्थशास्त्र समिति को अपना कार्य 28 फरवरी 2027 तक पूरा करना है।
  • अधिसूचना के अनुसार पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा में सांस्कृतिक जड़ता, भारतीय ज्ञान प्रणाली, समावेशन, शैक्षिक प्रौद्योगिकी और मूल्यांकन के समावेश को सुनिश्चित किया जाएगा।
  • समिति में गुरुग्राम के द श्री राम स्कूल अरावली की अंग्रेजी विभाग की पूर्व प्रमुख त्रिविक्रमा कुमारी जामवाल भी हैं, जो पूर्व मेवाड़ राजपरिवार की सदस्य हैं।

समयरेखा

  1. फरवरी 2016जेएनयू आंदोलन के दौरान साकेत बहुगुणा एबीवीपी के प्रमुख चेहरों में रहे; अफजल गुरु पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों से टकराव।
  2. 2017त्रिविक्रमा कुमारी जामवाल के भाई ने परिवार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर फिल्म 'पद्मावती' के प्रमाणन व रिलीज रोकने की मांग की।
  3. 8 सितंबरएनसीईआरटी ने अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य पाठ्यपुस्तक समिति की अधिसूचना जारी की।
  4. 15 सितंबर 2026समितियों के गठन की खबर प्रकाशित।
  5. 30 नवंबर 2026अंग्रेजी समिति द्वारा कक्षा 11 का कार्य पूरा करने की समयसीमा।
  6. 28 फरवरी 2027अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समिति के कार्य पूरा करने की समयसीमा।
  7. 30 सितंबर 2027अंग्रेजी समिति द्वारा कक्षा 12 का कार्य पूरा करने की समयसीमा।

किसका दाँव

  • एनसीईआरटी — पाठ्यपुस्तक समितियों का गठन, अधिसूचना जारी करना और मसौदा पांडुलिपि की समीक्षा करना; निदेशक दिनेश सकलानी ने समयसीमा बताई।
  • कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थी व शिक्षक — नई अर्थशास्त्र और अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकों की विषयवस्तु सीधे उनके पाठन और मूल्यांकन को प्रभावित करेगी।
  • समिति अध्यक्ष — एन. नागराजू (ईएफएलयू) और संजीव सान्याल (पीएम-ईएसी) — क्रमशः अंग्रेजी और अर्थशास्त्र पुस्तकों की सामग्री व दिशा तय करने की जिम्मेदारी।
  • एबीवीपी/आरएसएस से जुड़े सदस्य — समितियों में उनकी उपस्थिति पाठ्यक्रम में वैचारिक झुकाव को लेकर बहस का केंद्र है।
  • पीएम-ईएसी — इसके दो सदस्य (संजीव सान्याल, शमिका रवि) अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समिति में हैं, जिससे नीति-दृष्टि पाठ्यपुस्तकों में परिलक्षित हो सकती है।

क्यों अहम है

वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अर्थशास्त्र और अंग्रेजी पाठ्यपुस्तकें लाखों विद्यार्थियों की आर्थिक व साहित्यिक समझ गढ़ती हैं, इसलिए उन्हें लिखने वाली समितियों की संरचना सार्वजनिक महत्व का प्रश्न है। स्रोत के अनुसार राजनीति विज्ञान समिति में भी आरएसएस से जुड़े सदस्य थे, जिससे पाठ्यपुस्तक निर्माण में वैचारिक प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक स्वायत्तता पर बहस तेज होती है। साथ ही 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' और 'सांस्कृतिक जड़ता' जैसे अनिवार्य विषय बताते हैं कि नई किताबें किस दिशा में ढाली जाएंगी।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एनसीईआरटी = राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद; इसके निदेशक (स्रोत में) दिनेश सकलानी।
  • अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक समिति: 17 सदस्य, अध्यक्ष एन. नागराजू, कुलपति, ईएफएलयू हैदराबाद।
  • अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समिति: 14 सदस्य, अध्यक्ष संजीव सान्याल (पीएम-ईएसी सदस्य); शमिका रवि भी सदस्य।
  • समयसीमा: कक्षा 11 अंग्रेजी – 30 नवंबर 2026; कक्षा 12 अंग्रेजी – 30 सितंबर 2027; अर्थशास्त्र – 28 फरवरी 2027।
  • एनसीईआरटी के पाठ्यचर्या क्षेत्र समूहों द्वारा निर्धारित क्रॉस-कटिंग विषय: समता व समावेशन, आयु-अनुकूल शिक्षणशास्त्र, मूल्य शिक्षा, आईसीटी, भारतीय ज्ञान प्रणाली, पर्यावरण शिक्षा।
  • एबीवीपी आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन है; साकेत बहुगुणा इसके दिल्ली राज्य सचिव और बाद में राष्ट्रीय मीडिया संयोजक रहे।

मेन्स दृष्टिकोण

एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 11-12 की अर्थशास्त्र (14 सदस्य, अध्यक्ष संजीव सान्याल) और अंग्रेजी (17 सदस्य, अध्यक्ष एन. नागराजू) पाठ्यपुस्तक समितियों का गठन पाठ्यक्रम निर्माण में विशेषज्ञता, प्रतिनिधित्व और वैचारिक तटस्थता के प्रश्न को सामने लाता है। एक ओर समितियों को समता व समावेशन, आयु-अनुकूल शिक्षणशास्त्र, मूल्य शिक्षा, आईसीटी, भारतीय ज्ञान प्रणाली और पर्यावरण शिक्षा जैसे क्रॉस-कटिंग विषयों को समाहित करने का निर्देश है, जो पाठ्यपुस्तकों को स्थानीय संदर्भ और समकालीन कौशल से जोड़ने का प्रयास दिखाता है; दूसरी ओर एबीवीपी के पूर्व राष्ट्रीय मीडिया संयोजक की सदस्यता और पहले राजनीति विज्ञान समिति में आरएसएस से जुड़े कम से कम चार सदस्यों की उपस्थिति से पाठ्यपुस्तक लेखन के राजनीतिकरण की आशंका जताई जा रही है। नीति-निर्माताओं का समिति में होना (पीएम-ईएसी के दो सदस्य) नीति-अनुभव तो जोड़ता है, पर शैक्षणिक स्वतंत्रता का प्रश्न बना रहता है। आगे का रास्ता स्रोत में वर्णित प्रक्रिया पर निर्भर है — मसौदा पांडुलिपि की एनसीईआरटी द्वारा समीक्षा और निर्धारित समयसीमा (30 नवंबर 2026, 28 फरवरी 2027, 30 सितंबर 2027) के भीतर पारदर्शी, व्यापक परामर्श-आधारित समीक्षा।

मुख्य शब्द

एनसीईआरटी
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, जो स्कूली पाठ्यपुस्तकें विकसित करती है और उनके मसौदे की समीक्षा करती है।
एबीवीपी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद — आरएसएस से संबद्ध छात्र संगठन।
पीएम-ईएसी
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद; इसके सदस्य संजीव सान्याल और शमिका रवि अर्थशास्त्र समिति में हैं।
ईएफएलयू
अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय, हैदराबाद; इसके कुलपति एन. नागराजू अंग्रेजी समिति के अध्यक्ष हैं।
भारतीय ज्ञान प्रणाली
एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित क्रॉस-कटिंग विषय, जिसे नई पाठ्यपुस्तकों में सांस्कृतिक जड़ता के साथ समाहित किया जाना है।
क्रॉस-कटिंग विषय
एनसीईआरटी के पाठ्यचर्या क्षेत्र समूहों द्वारा तय ऐसे विषय जो सभी पुस्तकों में आने हैं, जैसे समता, मूल्य शिक्षा, आईसीटी, पर्यावरण शिक्षा।

अभ्यास प्रश्न

  1. पाठ्यपुस्तक निर्माण समितियों की संरचना शिक्षा की गुणवत्ता और वस्तुनिष्ठता को कैसे प्रभावित करती है? एनसीईआरटी की हाल की समितियों के उदाहरण से चर्चा करें।
  2. 'भारतीय ज्ञान प्रणाली' और 'सांस्कृतिक जड़ता' जैसे क्रॉस-कटिंग विषयों को स्कूली पाठ्यक्रम में समाहित करने के अवसर और चुनौतियाँ क्या हैं?
  3. क्या नीति-निर्माताओं (जैसे पीएम-ईएसी सदस्यों) को स्कूली अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक समितियों का नेतृत्व करना चाहिए? पक्ष-विपक्ष में तर्क दें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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