12 साल में बीएपीएस प्रतिनिधियों से मोदी 18 बार मिले: द वायर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 12 वर्षों में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के प्रतिनिधियों से कम से कम 18 बार मिले या उसके कार्यक्रमों में शामिल हुए, द वायर ने बीएपीएस और प्रधानमंत्री कार्यालय के अभिलेखों के हवाले से बताया। ये मुलाकातें भारत के साथ-साथ फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में भी हुईं। 'बिहाइंड बीएपीएस' रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में बीएपीएस संस्थाओं की संपत्ति 2014 के 1 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024 में 5.2 करोड़ डॉलर हो गई। बीएपीएस ने टिप्पणी नहीं की।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Modi met BAPS representatives or attended BAPS events at least 18 times in the last 12 years. — Attributed to The Wire's review of BAPS and Prime Minister's Office archives; figure appears in source.
- A BAPS delegation asked on September 5 that female workers at the Eiffel Tower be replaced by men. — Stated in source as fact without a named source document; BAPS response not received.
- Assets of BAPS non-profits in the US rose from $10 million in 2014 to $52 million in 2024. — Attributed to the report 'Behind BAPS' compiled by US civil society organisations.
- In 2021 the FBI raided a New Jersey BAPS temple site and removed about 90 workers amid forced-labour allegations; the investigation was closed in September last year. — Attributed to a class action lawsuit and reported actions; allegations remain unproven in source.
- Between July and August 2023, Modi met BAPS monks three times in three countries. — Source lists specific dates and venues (France, India, Johannesburg); internally consistent.
विश्लेषकों की राय राय
यह केवल आध्यात्मिक जुड़ाव की कहानी नहीं, बल्कि राजनीतिक गणित की कहानी दिखती है — द वायर की रिपोर्ट एक ऐसे स्थायी रिश्ते की ओर इशारा करती है जिसका चुनावी और कूटनीतिक उपयोग स्पष्ट है। गुजरात में भाजपा के वोट आधार की रीढ़ माने जाने वाले पाटीदार समुदाय से बीएपीएस का गहरा जुड़ाव और 2017 विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले हुआ अक्षरधाम कार्यक्रम बताते हैं कि आस्था का नेटवर्क राजनीतिक संसाधन कैसे बनता है। विवादों पर चुप्पी भी उतनी ही अर्थपूर्ण है — यह कम कीमत वाला राजनीतिक विकल्प लगता है, क्योंकि जवाब मांगने वाला संगठित दबाव फिलहाल कमजोर है।
- 18 बैठकों की संख्या से ज्यादा मायने उनकी निरंतरता रखती है — विदेश यात्राओं में भी मुलाकातें यह बताती हैं कि यह रिश्ता प्रवासी और सॉफ्ट-पावर कूटनीति का हिस्सा बन चुका है।
- बीएपीएस का मुख्यतः पाटीदार सामाजिक आधार इस तर्क को बल देता है कि पाटीदार आंदोलन के दौर में यह संस्था भाजपा के लिए सामाजिक संतुलन साधने में मददगार रही।
- विदेशों में मंदिर नेटवर्क और कार्यरत वैश्विक नेताओं की यात्राएं 'भारत' और 'हिंदू' के बीच अंतर को धुंधला करने वाली सभ्यतागत छवि मजबूत करती हैं, जैसा रिपोर्ट में एक विश्लेषक कहते हैं — हालांकि वही विश्लेषक यह भी स्पष्ट करते हैं कि बीएपीएस को संघ परिवार का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
- दलित प्रवेश के इतिहास और मंचों से महिलाओं को हटाने के आरोपों पर सरकार की चुप्पी विपक्ष को सामाजिक न्याय का मुद्दा देती है, लेकिन रिपोर्ट में ऐसा कोई संकेत नहीं कि विपक्ष एक लोकप्रिय धार्मिक संस्था से टकराने को तैयार है।
- युवाओं की नाराजगी के दौर के बाद सरकार के युवा कार्यक्रम की मेजबानी बीएपीएस द्वारा करना दिखाता है कि धार्मिक संगठन जनसमर्थन जुटाने के ढांचे के रूप में उभर रहे हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि अगले चुनावी दौर में, खासकर गुजरात में, बीएपीएस के मंच सरकारी संदेश के लिए कितने इस्तेमाल होते हैं और विपक्ष दलित व महिला संबंधी आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बनाता है या नहीं।
रिपोर्ट एक ही अवधि में बैठकों और संपत्ति वृद्धि को दर्ज करती है, लेकिन इनके बीच कारण-प्रभाव संबंध या कोई अनुचित लाभ साबित नहीं करती, और बीएपीएस की प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था 1907 में गुजरात के एक गांव में स्थापित एक हिंदू संप्रदाय है, जो खुद को 'स्वयंसेवक-संचालित आध्यात्मिक फेलोशिप' बताता है और दुनियाभर में दस लाख से अधिक अनुयायियों का दावा करता है। हाल में पेरिस के एफिल टावर पर उसके प्रतिनिधिमंडल द्वारा महिला कर्मचारियों को हटाने की मांग से वैश्विक विवाद खड़ा हुआ। द वायर ने बीएपीएस और प्रधानमंत्री कार्यालय के अभिलेखों की छानबीन करके पाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 12 वर्षों में ही कम से कम 18 बार संस्था के प्रतिनिधियों से मिले या उसके कार्यक्रमों में शामिल हुए। रिपोर्ट इस निकटता को संप्रदाय के भेदभाव के आरोपों और उसकी बढ़ती संपत्ति के साथ जोड़कर देखती है।
मुख्य तथ्य
- द वायर के अनुसार मोदी पिछले 12 वर्षों में कम से कम 18 बार बीएपीएस प्रतिनिधियों से मिले या उसके कार्यक्रमों में शामिल हुए; भारत के अलावा फ्रांस और दक्षिण अफ्रीका में भी।
- 5 सितंबर को बीएपीएस प्रतिनिधिमंडल ने पेरिस के एफिल टावर पर महिला कर्मचारियों की जगह पुरुषों को रखने की मांग कर विवाद खड़ा किया; 24 घंटे के भीतर पेरिस मंदिर उद्घाटन पर मोदी बड़ी स्क्रीन पर दिखे।
- 'बिहाइंड बीएपीएस' रिपोर्ट (अमेरिकी नागरिक समाज संगठनों द्वारा संकलित): अमेरिका में बीएपीएस गैर-लाभकारी संस्थाओं की कुल संपत्ति 2014 के 1 करोड़ डॉलर से 2024 में 5.2 करोड़ डॉलर—पांच गुना।
- 2010–2014 के बीच बीएपीएस की संपत्ति 90 लाख से 1 करोड़ डॉलर के बीच स्थिर रही; 2014 के 1 करोड़ डॉलर से 2020 में 1.84 करोड़ डॉलर—84% वृद्धि।
- जुलाई–अगस्त 2023 में मोदी दो महीनों में तीन देशों में तीन बार बीएपीएस संतों से मिले—फ्रांस, भारत (अबू धाबी मंदिर पर अपडेट) और जोहानिसबर्ग (ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान)।
- संप्रदाय ने बॉम्बे हरिजन मंदिर प्रवेश अधिनियम, 1947 के विरुद्ध मुकदमा किया; सुप्रीम कोर्ट ने 1966 में अपील खारिज करते हुए कहा कि 'सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक जीवन पद्धति की मुख्य नींव है'।
- 2021 में न्यू जर्सी मंदिर निर्माण स्थल पर एफबीआई की छापेमारी में लगभग 90 श्रमिक हटाए गए; मुकदमे में आरोप था कि करीब 200 दलित-आदिवासी श्रमिकों से दिन में साढ़े बारह घंटे, सप्ताह के सातों दिन, 1.20 डॉलर प्रति घंटे पर काम कराया गया।
- मोदी के सत्ता में आने के बाद कम से कम 10 पदस्थ विश्व नेता भारत में बीएपीएस मंदिर गए, जिनमें जेडी वांस, जस्टिन ट्रूडो, जायर बोल्सोनारो, मून जे-इन और बोरिस जॉनसन शामिल हैं।
समयरेखा
- 1907गुजरात के एक गांव में बीएपीएस स्वामीनारायण संप्रदाय की स्थापना।
- अप्रैल 1947सरदार पटेल की टिप्पणी—बोचासण के महाराज ने माना कि दलितों को मंदिर में प्रवेश देने का साहस उनमें नहीं है (द प्रिंट में उर्विश कोठारी के लेख के अनुसार)।
- 1948बॉम्बे हरिजन मंदिर प्रवेश अधिनियम, 1947 के विरुद्ध संप्रदाय का मुकदमा शुरू।
- 1966सुप्रीम कोर्ट ने संप्रदाय की अपील खारिज की; संप्रदाय का दावा था कि वह हिंदू धर्म से 'भिन्न और अलग' है।
- 1991मोदी के अनुसार भाजपा की एकता यात्रा (कन्याकुमारी से कश्मीर) के दौरान प्रमुख स्वामी महाराज ने उन्हें आधा दर्जन बार फोन किया।
- 2015ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की अंतिम पुस्तक के मलयालम संस्करण के कार्यक्रम में स्वामी ब्रह्मविहारी दास के आग्रह पर महिला अनुवादक को मंच पर न आने को कहा गया।
- 2017मोदी ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कम टर्नबुल को दिल्ली के अक्षरधाम ले गए; गुजरात विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले गांधीनगर अक्षरधाम की रजत जयंती में शामिल हुए।
- 2021न्यू जर्सी मंदिर निर्माण स्थल पर एफबीआई की छापेमारी, लगभग 90 श्रमिक हटाए गए।
- जुलाई–अगस्त 2023दो महीनों में तीन देशों में मोदी की बीएपीएस संतों से तीन मुलाकातें; न्यू जर्सी मंदिर उद्घाटन पर मोदी का संदेश।
- 2024कोलकाता में आईसीएआई सम्मेलन में स्वामी ज्ञानवत्सल के सत्र से पहले महिलाओं को अगली पंक्तियों और बैकस्टेज से हटने को कहा गया।
किसका दाँव
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — चार दशकों से अधिक पुराना संप्रदाय से रिश्ता; भेदभाव के आरोपों पर चुप्पी और 18 मुलाकातों के रिकॉर्ड पर सवाल।
- बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था — वैश्विक छवि, संपत्ति में पांच गुना वृद्धि और सत्ता तक पहुंच; द वायर की टिप्पणी मांगने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं।
- दलित और आदिवासी समुदाय — मंदिर प्रवेश से ऐतिहासिक बहिष्कार; न्यू जर्सी में बंधुआ श्रम के आरोपों के कथित पीड़ित।
- महिलाएं — एफिल टावर, 2015 के कलाम पुस्तक कार्यक्रम और 2024 के आईसीएआई कोलकाता सम्मेलन में मंच व अगली पंक्तियों से हटाया जाना।
- भाजपा और पाटीदार समुदाय — आकार पटेल के अनुसार स्वामीनारायण मुख्यतः पटेल संप्रदाय है और भाजपा का गुजरात वोट आधार इससे जुड़ा है।
- संघ परिवार (आरएसएस/विहिप) — चेतन भट्ट व 'सीइंग द संघ' डेटासेट के अनुसार बीएपीएस की 'सभ्यतागत हिंदुत्व' छवि हिंदू राष्ट्रवाद के लिए उपयोगी।
- अमेरिकी एजेंसियां (एफबीआई, न्याय विभाग) — 2021 की छापेमारी और जबरन श्रम की जांच, जो पिछले सितंबर में बंद कर दी गई।
क्यों अहम है
यह रिपोर्ट धर्म, राजनीति और विदेश नीति के मेल पर सवाल उठाती है—जब सरकारी यात्राओं और राजनयिक कार्यक्रमों में किसी एक संप्रदाय को जगह मिलती है, तो 'भारत' और 'हिंदू' का भेद धुंधला होने का जोखिम है, जैसा प्रो. चेतन भट्ट कहते हैं। साथ ही दलितों के मंदिर प्रवेश, महिलाओं के मंच से हटाए जाने और विदेश में जबरन श्रम के आरोपों के बीच सत्ता की निकटता जवाबदेही के प्रश्न खड़ी करती है। संपत्ति में पांच गुना वृद्धि का आंकड़ा राजनीतिक पहुंच और भौतिक लाभ के संभावित संबंध की ओर इशारा करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था: 1907 में गुजरात के एक गांव में स्थापित; दस लाख से अधिक अनुयायियों का दावा; पांच जीवनपर्यंत व्रत।
- बॉम्बे हरिजन मंदिर प्रवेश अधिनियम, 1947—हिंदू व जैन मंदिरों में दलितों को समान पूजा का अधिकार; इसके विरुद्ध संप्रदाय की अपील 1966 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।
- 'बिहाइंड बीएपीएस' रिपोर्ट: अमेरिका में बीएपीएस की संपत्ति 2014 में 1 करोड़ डॉलर, 2020 में 1.84 करोड़ डॉलर, 2024 में 5.2 करोड़ डॉलर।
- प्रमुख स्वामी महाराज—बीएपीएस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे; 2017 से एक वर्ष पूर्व निधन।
- 'सीइंग द संघ' डेटासेट—CERI-साइंसेस पो, पेरिस में स्थित, द कारवां द्वारा प्रकाशित; संघ और उसके सहयोगियों का वैश्विक मानचित्रण।
- सरकार का युवा कार्यक्रम 'नशा-मुक्त युवा फॉर विकसित भारत'—दिल्ली और गांधीनगर के बीएपीएस मंदिरों में आयोजित।
मेन्स दृष्टिकोण
द वायर की रिपोर्ट राज्य और धार्मिक संस्थाओं के बीच बढ़ती निकटता का एक ठोस उदाहरण पेश करती है: 12 वर्षों में प्रधानमंत्री की बीएपीएस प्रतिनिधियों से कम से कम 18 मुलाकातें, आधिकारिक विदेशी दौरों (फ्रांस, जोहानिसबर्ग) में संप्रदाय के मंदिर-प्रस्तुतीकरण, और कम से कम 10 पदस्थ विश्व नेताओं की भारत में बीएपीएस मंदिर यात्राएं। इसके कारण बहुआयामी बताए गए हैं—गुजरात की पाटीदार राजनीति (आकार पटेल के अनुसार यह मुख्यतः पटेल संप्रदाय है और 2017 के चुनाव से पहले रजत जयंती आयोजन), प्रवासी भारतीयों के बीच 'नियंत्रित लेकिन प्रभावशाली' हिंदू छवि का निर्माण (चेतन भट्ट), और सरकार के लिए युवा आउटरीच जैसे कार्यक्रमों की मेजबानी। निहितार्थ गंभीर हैं: 1966 के सुप्रीम कोर्ट फैसले में दर्ज दलित बहिष्कार का इतिहास, 2015 व 2024 में महिलाओं को मंच से हटाने की घटनाएं, तथा न्यू जर्सी में जबरन श्रम के आरोप (साढ़े बारह घंटे प्रतिदिन, 1.20 डॉलर प्रति घंटा) इन आरोपों पर सार्वजनिक चुप्पी को समस्याग्रस्त बनाते हैं; साथ ही अमेरिका में संपत्ति की पांच गुना वृद्धि पहुंच और लाभ के संबंध पर प्रश्न उठाती है। आगे का रास्ता संवैधानिक कसौटी में निहित है—सुप्रीम कोर्ट के शब्दों में 'सामाजिक न्याय लोकतांत्रिक जीवन पद्धति की मुख्य नींव है'—अर्थात राजकीय आयोजनों में धार्मिक संस्थाओं की भागीदारी के लिए पारदर्शिता, भेदभाव के आरोपों पर स्वतंत्र जांच और संस्थागत तटस्थता आवश्यक है।
मुख्य शब्द
- बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था
- 1907 में गुजरात में स्थापित हिंदू संप्रदाय, स्वयं को स्वयंसेवक-संचालित आध्यात्मिक फेलोशिप बताता है; दस लाख से अधिक अनुयायियों का दावा।
- बॉम्बे हरिजन मंदिर प्रवेश अधिनियम, 1947
- हिंदू और जैन मंदिरों में अस्पृश्यता व बहिष्कार समाप्त करके दलितों को समान पूजा का अवसर देने वाला कानून।
- 'बिहाइंड बीएपीएस' रिपोर्ट
- अमेरिकी नागरिक समाज संगठनों द्वारा संकलित रिपोर्ट, जिसमें बीएपीएस गैर-लाभकारी संस्थाओं की संपत्ति के आंकड़े दिए गए हैं।
- 'सीइंग द संघ' डेटासेट
- संघ और उसके वैश्विक सहयोगियों का मानचित्रण; CERI-साइंसेस पो, पेरिस में स्थित और द कारवां द्वारा प्रकाशित।
- नशा-मुक्त युवा फॉर विकसित भारत
- सरकार का युवा आउटरीच कार्यक्रम, जिसके आयोजन दिल्ली और गांधीनगर के बीएपीएस मंदिरों में हुए।
- क्लास एक्शन मुकदमा (न्यू जर्सी)
- आरोप कि करीब 200 दलित-आदिवासी श्रमिक भारत से लाए गए, पासपोर्ट जब्त कर न्यूनतम वेतन से बहुत कम मजदूरी पर काम कराया गया।
अभ्यास प्रश्न
- धार्मिक संस्थाओं की राजकीय व राजनयिक आयोजनों में भागीदारी भारत की धर्मनिरपेक्षता की संवैधानिक कसौटी पर किस प्रकार प्रश्न खड़े करती है? बीएपीएस के उदाहरण से परीक्षण करें।
- 1966 के सुप्रीम कोर्ट फैसले और बॉम्बे हरिजन मंदिर प्रवेश अधिनियम, 1947 के आलोक में मंदिर प्रवेश और सामाजिक न्याय के संबंध पर चर्चा कीजिए।
- प्रवासी भारतीय धार्मिक संस्थाएं भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति में कैसे भूमिका निभाती हैं, और इसके साथ जुड़े जवाबदेही के जोखिम क्या हैं?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।