टेक्नोलॉजी

जियो यूबीआर ब्रॉडबैंड तकनीक को विदेशी बाजारों में ले जाएगी

भारत में तैनाती के बाद जियो प्लेटफॉर्म्स अपनी अनलाइसेंस्ड ब्रॉडबैंड रेडियो (यूबीआर) तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ले जाने की तैयारी में है। मनीकंट्रोल ने मामले से जुड़े लोगों के हवाले से यह बताया। यूबीआर बिना लाइसेंस वाले 5 गीगाहर्ट्ज वाई-फाई बैंड का उपयोग कर उन इलाकों में लास्ट-माइल अंतर भरती है जहां फाइबर बिछाना महंगा है। जियो के पास करीब 2.7 करोड़ होम ब्रॉडबैंड ग्राहक और 13 लाख रूट किमी फाइबर है, 65 लाख यूबीआर उपयोग कर रहे हैं। यह 2023 में रेडिसिस के जरिए मिमोसा नेटवर्क्स अधिग्रहण पर आधारित है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Jio Platforms plans to take its unlicensed broadband radio (UBR) technology to international markets after deploying it across India. — Attributed to a Moneycontrol report citing unnamed people familiar with the matter; no company statement in source.
  • Jio has about 27 million home broadband customers and roughly 1.3 million route km of fibre. — Figures appear in source, attributed to Moneycontrol; not independently verifiable here.
  • About 6.5 million customers already use Jio's UBR technology. — Figure appears in source, attributed to the Moneycontrol report.
  • UBR can deliver upload and download speeds of around 1 Gbps, comparable to fibre. — Attributed to unnamed people familiar with Jio's strategy; performance claim not independently tested.
  • Jio's UBR capabilities build on its 2023 acquisition of US-based Mimosa Networks through Radisys. — Stated in source without named attribution; internally consistent with the rest of the report.

विश्लेषकों की राय राय

AI टेक्नोलॉजी विश्लेषक

जियो यहां सिर्फ एक उत्पाद निर्यात नहीं कर रहा, बल्कि टेलीकॉम ऑपरेटर से टेक्नोलॉजी वेंडर बनने की कोशिश कर रहा है। बिना लाइसेंस वाले 5 गीगाहर्ट्ज़ बैंड के इस्तेमाल से महंगा सी-बैंड स्पेक्ट्रम मोबाइल 5जी के लिए बचा रहता है, और जहां फाइबर बिछाना महंगा या मुश्किल है वहां घरों को जोड़ना आसान हो जाता है। 2.7 करोड़ ब्रॉडबैंड ग्राहकों में 65 लाख पहले से यूबीआर पर हैं — विदेशी ऑपरेटरों के सामने यही सबसे मजबूत सबूत है कि यह बड़े पैमाने पर चलता है।

  • 2023 में रेडिसिस के जरिए मिमोसा नेटवर्क्स का अधिग्रहण अब रंग दिखा रहा है — तकनीक खरीदो, अपने विशाल नेटवर्क पर परखो, फिर बाहर बेचो।
  • लाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम से बचना आर्थिक गणित है: सी-बैंड हैंडसेट 5जी को मिले तो फिक्स्ड वायरलेस की लागत घटती है।
  • यह फाइबर-विरोधी रणनीति नहीं, बल्कि हाइब्रिड एक्सेस नेटवर्क है — जहां फाइबर है वहां फाइबर, जहां अर्थशास्त्र नहीं बैठता वहां वायरलेस — और यही उद्योग की व्यापक दिशा है।
  • उपभोक्ता के लिए असली बदलाव रफ्तार से ज्यादा इंतजार कम होना है; रिपोर्ट के मुताबिक जहां फाइबर कटने का खतरा रहता है वहां अपटाइम भी बेहतर हो सकता है।
  • असली अड़चन तकनीक नहीं, नियम हैं — विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे देश चाहिए जहां ऊंची ट्रांसमिट पावर पर 5 गीगाहर्ट्ज़ का व्यावसायिक उपयोग मान्य हो, और लाइन-ऑफ-साइट अच्छी हो।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि यूरोप, पूर्वी एशिया या अफ्रीका में पहला ठोस समझौता किस बाजार में होता है और वह मैनेज्ड सर्विस, रेवेन्यू शेयरिंग या जॉइंट वेंचर में से किस रूप में आता है।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक यह अभी योजना भर है — कोई तय साझेदार, अनुबंध, कीमत या राजस्व अनुमान इस खबर में स्थापित नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड भारत में अपनी अनलाइसेंस्ड ब्रॉडबैंड रेडियो (यूबीआर) तकनीक की तैनाती के बाद इसे विदेशी बाजारों में ले जाने की योजना बना रही है, ऐसा मनीकंट्रोल ने मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया। यूबीआर बिना लाइसेंस वाली वाई-फाई फ्रीक्वेंसी (5 गीगाहर्ट्ज बैंड) का उपयोग कर वायरलेस ब्रॉडबैंड देती है और वहां लास्ट-माइल अंतर भरती है जहां फाइबर बिछाना महंगा या कठिन है। आईपीओ की तैयारी कर रही कंपनी के लिए यह कदम दूरसंचार ऑपरेटर से तकनीक कंपनी बनने की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें अपने नेटवर्क के लिए बनाई गई क्षमताएं अब अंतरराष्ट्रीय राजस्व का स्रोत बन सकती हैं।

मुख्य तथ्य

  • जियो के पास लगभग 2.7 करोड़ (27 मिलियन) होम ब्रॉडबैंड ग्राहक और करीब 13 लाख (1.3 मिलियन) रूट किलोमीटर फाइबर है।
  • लगभग 65 लाख (6.5 मिलियन) ग्राहक पहले से जियो की यूबीआर तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और अपनाने की दर बढ़ रही है।
  • यूबीआर बिना लाइसेंस वाले 5 गीगाहर्ट्ज वाई-फाई बैंड का उपयोग करती है, जिससे सी-बैंड जैसे महंगे लाइसेंस्ड 5जी स्पेक्ट्रम का उपयोग टालना संभव होता है।
  • जियो की रणनीति से परिचित लोगों के अनुसार यूबीआर लगभग 1 जीबीपीएस अपलोड व डाउनलोड स्पीड दे सकती है, सेवा गुणवत्ता फाइबर के समान।
  • जियो की यूबीआर क्षमताएं 2023 में रेडिसिस के जरिए अमेरिकी कंपनी मिमोसा नेटवर्क्स के अधिग्रहण पर आधारित हैं।
  • जियो यूरोप, पूर्वी एशिया और अफ्रीका सहित बाजारों में मौजूदा ऑपरेटरों के साथ साझेदारी का मूल्यांकन कर रही है; मॉडल में मैनेज्ड सर्विसेज, रेवेन्यू शेयरिंग और संयुक्त उपक्रम शामिल हैं।
  • ड्राफ्ट आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार कंपनी चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपना प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी स्टैक साझेदारी और मैनेज्ड-सर्विस व्यवस्थाओं के जरिए तैनात करने की योजना बना रही है।
  • अंतरराष्ट्रीय पेशकश यूबीआर से आगे 5जी कोर, ओएसएस/बीएसएस सॉफ्टवेयर, नेटवर्क ऑटोमेशन और डिजिटल सेवाओं तक फैली है।

समयरेखा

  1. पिछला एक दशकजियो ने दूरसंचार से आगे जाकर तकनीक कंपनी बनने के लिए क्षमताएं विकसित कीं।
  2. 2023जियो ने रेडिसिस के जरिए अमेरिका की मिमोसा नेटवर्क्स का अधिग्रहण किया, जिससे अनलाइसेंस्ड-बैंड कनेक्टिविटी क्षमता मजबूत हुई।
  3. भारत में तैनाती के बाद (वर्तमान)जियो यूबीआर को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तकनीक वेंडर के रूप में ले जाने की योजना बना रही है।
  4. 7 अक्टूबर 2026 (रिपोर्ट प्रकाशन)मनीकंट्रोल के हवाले से जियो की यूबीआर वैश्विक योजना की खबर प्रकाशित।

किसका दाँव

  • जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड — आईपीओ की तैयारी के बीच अपनी प्रोप्राइटरी तकनीक से नए अंतरराष्ट्रीय राजस्व स्रोत और तकनीक कंपनी की पहचान।
  • विदेशी दूरसंचार ऑपरेटर (यूरोप, पूर्वी एशिया, अफ्रीका) — कम फिक्स्ड ब्रॉडबैंड पहुंच वाले बाजारों में एफडब्ल्यूए के जरिए ग्राहक आधार बढ़ाने का विकल्प।
  • भारतीय ब्रॉडबैंड उपभोक्ता — जहां फाइबर उपलब्ध नहीं या कटने का खतरा है, वहां ~1 जीबीपीएस वायरलेस कनेक्शन और बेहतर अपटाइम।
  • रेडिसिस / मिमोसा नेटवर्क्स — पॉइंट-टू-पॉइंट व पॉइंट-टू-मल्टीपॉइंट उत्पाद पोर्टफोलियो जियो की वैश्विक पेशकश का आधार।
  • विश्लेषक व नियामक — 5 गीगाहर्ट्ज बैंड के व्यावसायिक उपयोग और उच्च ट्रांसमिट पावर पर देश-विशेष नियम तैनाती की शर्त।

क्यों अहम है

लास्ट-माइल कनेक्टिविटी भारत के डिजिटलीकरण की बड़ी बाधा बनी हुई है, और बिना लाइसेंस वाले स्पेक्ट्रम पर आधारित स्वदेशी समाधान वैश्विक वेंडरों पर निर्भरता घटा सकता है। यदि जियो यूबीआर को विदेशों में बेच पाती है तो भारत दूरसंचार उपकरण व तकनीक का निर्यातक बनने की दिशा में बढ़ेगा। साथ ही सी-बैंड जैसे महंगे लाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम को हैंडसेट पर 5जी ईएमबीबी सेवाओं के लिए मुक्त रखा जा सकता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • यूबीआर (अनलाइसेंस्ड ब्रॉडबैंड रेडियो): बिना लाइसेंस वाले 5 गीगाहर्ट्ज वाई-फाई बैंड पर वायरलेस ब्रॉडबैंड तकनीक।
  • जियो: ~2.7 करोड़ होम ब्रॉडबैंड ग्राहक, ~13 लाख रूट किमी फाइबर, ~65 लाख यूबीआर उपयोगकर्ता।
  • मिमोसा नेटवर्क्स (अमेरिका) का अधिग्रहण 2023 में रेडिसिस के जरिए हुआ।
  • एफडब्ल्यूए = फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस; सी-बैंड लाइसेंस्ड 5जी स्पेक्ट्रम है, 5 गीगाहर्ट्ज अनलाइसेंस्ड।
  • यूबीआर स्पीड: लगभग 1 जीबीपीएस अपलोड और डाउनलोड, फाइबर के समान गुणवत्ता।
  • संभावित लक्षित क्षेत्र: अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, पूर्वी एशिया के ग्रामीण/कम-पहुंच बाजार।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत में ब्रॉडबैंड विस्तार की सबसे बड़ी अड़चन लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और स्पेक्ट्रम व ढांचागत बाधाएं रही हैं; फाइबर बिछाना महंगा, कठिन और भौतिक कटौती के प्रति संवेदनशील है। जियो की यूबीआर इस समस्या का उत्तर बिना लाइसेंस वाले 5 गीगाहर्ट्ज बैंड से देती है, जिससे महंगे सी-बैंड स्पेक्ट्रम को हैंडसेट पर 5जी ईएमबीबी के लिए मुक्त रखा जा सकता है, और ~1 जीबीपीएस गति के साथ फाइबर-तुल्य अनुभव मिलता है। 2023 में मिमोसा नेटवर्क्स के अधिग्रहण ने इस स्वदेशी क्षमता को उत्पाद व इंजीनियरिंग आधार दिया, और अब कंपनी यूबीआर के साथ 5जी कोर, ओएसएस/बीएसएस, नेटवर्क ऑटोमेशन व डिजिटल सेवाओं को यूरोप, पूर्वी एशिया और अफ्रीका में मैनेज्ड सर्विसेज, रेवेन्यू शेयरिंग या संयुक्त उपक्रम के मॉडल से बेचना चाहती है। विश्लेषकों के अनुसार सफलता की शर्तें हैं—अच्छी लाइन ऑफ साइट और 5 गीगाहर्ट्ज के व्यावसायिक उपयोग व उच्च ट्रांसमिट पावर पर अनुकूल देशीय नियम। आगे का रास्ता फाइबर, वायरलेस और अन्य तकनीकों को बाजार की अर्थव्यवस्था के अनुसार मिलाकर एक लचीला एक्सेस नेटवर्क बनाने में है, जिससे लागत व जटिलता घटे और विदेशी वेंडरों पर निर्भरता कम हो।

मुख्य शब्द

यूबीआर (UBR)
अनलाइसेंस्ड ब्रॉडबैंड रेडियो—बिना लाइसेंस वाली वाई-फाई फ्रीक्वेंसी से वायरलेस ब्रॉडबैंड देने वाली तकनीक, जो सेल टावरों को अधिक इंटरनेट ट्रैफिक संभालने में मदद करती है।
एफडब्ल्यूए (FWA)
फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस—तार/फाइबर के बजाय वायरलेस सिग्नल से घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने की पद्धति।
लास्ट-माइल गैप
नेटवर्क से घर तक की अंतिम कड़ी, जहां फाइबर बिछाना महंगा या कठिन होता है।
सी-बैंड
महंगा लाइसेंस्ड 5जी स्पेक्ट्रम, जिसे यूबीआर अपनाने से एफडब्ल्यूए के बजाय हैंडसेट पर 5जी ईएमबीबी के लिए बचाया जा सकता है।
मिमोसा नेटवर्क्स
अमेरिकी कंपनी, अनलाइसेंस्ड स्पेक्ट्रम पर पॉइंट-टू-पॉइंट/मल्टीपॉइंट ब्रॉडबैंड उत्पाद बनाती थी; 2023 में रेडिसिस के जरिए जियो ने अधिग्रहित की।
ओएसएस/बीएसएस
नेटवर्क संचालन व व्यावसायिक सहायता सॉफ्टवेयर, जिसे जियो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करना चाहती है।

अभ्यास प्रश्न

  1. बिना लाइसेंस वाले स्पेक्ट्रम पर आधारित तकनीकें (जैसे यूबीआर) भारत में लास्ट-माइल ब्रॉडबैंड की बाधाओं को कैसे दूर कर सकती हैं? परीक्षण कीजिए।
  2. दूरसंचार ऑपरेटर से तकनीक निर्यातक बनने की जियो की रणनीति भारत की डिजिटल आत्मनिर्भरता के लिए क्या मायने रखती है? चर्चा कीजिए।
  3. फाइबर, एफडब्ल्यूए और अनलाइसेंस्ड-बैंड वायरलेस के मिश्रित 'लचीले एक्सेस नेटवर्क' के आर्थिक व नियामकीय निहितार्थों का मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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