मोदी के जन्मदिन पर उमर अब्दुल्ला ने दोहराई राज्य के दर्जे की मांग
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 76वें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि अब तक केवल मौखिक आश्वासन मिले, लिखित में कुछ नहीं दिया गया। केंद्र ने परिसीमन, विधानसभा चुनाव और राज्य के दर्जे की बहाली की तीन-चरणीय प्रक्रिया बताई थी, जिसमें पहले दो चरण पूरे हुए। उन्होंने लद्दाख नेतृत्व को केंद्र के मौखिक आश्वासनों पर भरोसा न करने की सलाह दी। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटाकर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया था।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Omar Abdullah, while wishing Modi on his birthday, said the Centre should grant J&K statehood. — Direct quotes attributed to Abdullah via news agency PTI in the source.
- PM Modi turned 76 on Thursday, September 17. — Figure and date appear in the source; no external verification done.
- The Centre outlined a three-step process of delimitation, Assembly elections and restoration of statehood. — Attributed to Abdullah, who said the assurance was given in Parliament and the Supreme Court.
- Article 370 was scrapped on August 5, 2019, and J&K was split into two Union territories. — Stated as background fact in the source, consistent with its own timeline.
- In December 2023 the Supreme Court upheld the revocation but asked the government to restore statehood as soon as possible. — Reported in source without direct citation of the judgment text.
विश्लेषकों की राय राय
उमर अब्दुल्ला ने जन्मदिन की शुभकामनाओं को एक राजनीतिक मंच बना दिया और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग फिर केंद्र के दरवाजे पर रख दी। लहजा जानबूझकर टकराव वाला नहीं है — 'तोहफे' के रूप में दर्जा मांगना मांग को सुर्खियों में रखता है, पर दिल्ली से रिश्ते नहीं बिगाड़ता। जब अधिकार दिल्ली के पास हैं और जवाबदेही श्रीनगर सरकार पर, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए यह राजनीतिक जरूरत भी है।
- निर्वाचित मुख्यमंत्री होकर भी केंद्रशासित प्रदेश के सीमित अधिकारों के साथ काम करना उमर की मूल राजनीतिक दिक्कत है, और राज्य के दर्जे की मांग उसी खालीपन को भरने वाला एजेंडा है।
- 'सिर्फ जुबानी आश्वासन, लिखित कुछ नहीं' वाली दलील केंद्र की विश्वसनीयता को मुद्दा बनाने की सोची-समझी रणनीति है।
- परिसीमन और चुनाव हो जाने पर भी तीसरा चरण अधूरा बताकर वे अपनी मांग को केंद्र की ही घोषित प्रक्रिया से जोड़ते हैं, जो शुद्ध दलगत दावे से मजबूत स्थिति है।
- लद्दाख नेतृत्व को दी गई सलाह संकेत देती है कि वे इसे कश्मीर तक सीमित न रखकर व्यापक क्षेत्रीय मुद्दा बनाना चाहते हैं।
- केंद्र का पक्ष — आमतौर पर सुरक्षा और हालात के आधार पर फैसले की दलील — इस खबर में दर्ज नहीं है, यानी यह एकपक्षीय दबाव का चरण है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे दिल्ली-केंद्रित लगातार आंदोलन तक ले जाती है या नहीं, और अन्य विपक्षी दल व लद्दाख के संगठन इस मांग से जुड़ते हैं या नहीं।
यह खबर यह नहीं बताती कि केंद्र राज्य के दर्जे पर कब या किन शर्तों पर कदम उठाएगा; इसमें केंद्र की प्रतिक्रिया या कोई समयसीमा दर्ज नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
5 अगस्त 2019 को केंद्र ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करते हुए तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख — में बांट दिया। केंद्र ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए तीन-चरणीय प्रक्रिया बताई थी: परिसीमन, विधानसभा चुनाव और फिर राज्य का दर्जा। दिसंबर 2023 में उच्चतम न्यायालय ने विशेष दर्जा हटाने के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार से यथाशीघ्र राज्य का दर्जा बहाल करने को कहा था। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन पर राज्य के दर्जे की मांग दोहराई।
मुख्य तथ्य
- गुरुवार, 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 76वां जन्मदिन मनाया; इसी दिन उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की मांग दोहराई।
- अब्दुल्ला के अनुसार केंद्र ने परिसीमन, विधानसभा चुनाव और राज्य के दर्जे की बहाली की तीन-चरणीय प्रक्रिया बताई थी; पहले दो हो चुके, तीसरा नहीं।
- अब्दुल्ला ने कहा कि यह आश्वासन संसद और उच्चतम न्यायालय में भी दिया गया था, लेकिन लिखित में कुछ नहीं मिला।
- 5 अगस्त 2019 को केंद्र ने अनुच्छेद 370 समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित किया।
- दिसंबर 2023 में उच्चतम न्यायालय ने विशेष दर्जा हटाने और दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले को बरकरार रखा, पर जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने को कहा।
- बयान के समय अब्दुल्ला अमृतसर के कोर्ट रोड पर जम्मू एंड कश्मीर हाउस की जीर्णोद्धार की गई विरासत इमारत के उद्घाटन के लिए मौजूद थे।
- जुलाई में अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे के लिए अभियान का नया चरण घोषित किया और कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का धैर्य समाप्त हो गया है — 'Enough is enough'।
- अब्दुल्ला ने लद्दाख नेतृत्व को सलाह दी कि जमीन और नौकरियों पर संवैधानिक संरक्षण के लिए केंद्र के मौखिक वादों पर भरोसा न करें, लिखित में लें।
समयरेखा
- 5 अगस्त 2019केंद्र ने अनुच्छेद 370 हटाया और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा।
- दिसंबर 2023उच्चतम न्यायालय ने फैसला बरकरार रखा, पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने को कहा।
- जुलाई (इस वर्ष)अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे के लिए अभियान का नया चरण घोषित किया; मांग दिल्ली तक ले जाने की बात कही।
- जुलाई के अंत मेंदिल्ली में प्रदर्शन के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य के दर्जे के बिना अनुच्छेद 370 की बहाली अर्थहीन है।
- गुरुवार, 17 सितंबरमोदी के 76वें जन्मदिन पर अमृतसर में अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे की मांग दोहराई।
किसका दाँव
- उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री — निर्वाचित सरकार के पूर्ण अधिकार और राज्य के दर्जे की बहाली उनकी प्रमुख राजनीतिक मांग है।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस — राज्य के दर्जे के लिए आंदोलन तेज करने की घोषणा; जुलाई में दिल्ली तक मांग ले जाने की बात।
- केंद्र सरकार / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — तीन-चरणीय प्रक्रिया के तीसरे चरण — राज्य का दर्जा — पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी।
- उच्चतम न्यायालय — दिसंबर 2023 में फैसला बरकरार रखते हुए राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने का निर्देश दिया।
- लद्दाख का नेतृत्व और लोग — जमीन व नौकरियों पर संवैधानिक संरक्षण की मांग; अब्दुल्ला ने लिखित आश्वासन लेने की सलाह दी।
- जम्मू-कश्मीर के मतदाता — परिसीमन और विधानसभा चुनाव में भागीदारी के बाद भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं हुआ।
क्यों अहम है
जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार होने के बावजूद केंद्र शासित प्रदेश का ढांचा बना रहने से संघीय ढांचे, निर्वाचित सरकार की शक्तियों और केंद्र-राज्य विश्वास का प्रश्न खड़ा होता है। उच्चतम न्यायालय के "यथाशीघ्र" राज्य का दर्जा बहाल करने के निर्देश के बाद भी यह लंबित है, जिससे मौखिक बनाम लिखित आश्वासन की राजनीति उभरी है। लद्दाख के संवैधानिक संरक्षण की मांग से जुड़कर यह मुद्दा पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 5 अगस्त 2019: अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी; जम्मू-कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख — में विभाजित।
- केंद्र की बताई तीन-चरणीय प्रक्रिया: परिसीमन → विधानसभा चुनाव → राज्य के दर्जे की बहाली।
- दिसंबर 2023: उच्चतम न्यायालय ने विशेष दर्जा हटाने का फैसला बरकरार रखा, पर राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने को कहा।
- उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री; नेशनल कॉन्फ्रेंस राज्य के दर्जे के लिए अभियान चला रही है।
- 17 सितंबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन।
- लद्दाख की मांग: जमीन और नौकरियों से जुड़े संवैधानिक संरक्षण।
मेन्स दृष्टिकोण
जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग भारतीय संघवाद और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के बीच के तनाव को उजागर करती है। केंद्र ने 5 अगस्त 2019 के बाद परिसीमन, विधानसभा चुनाव और राज्य के दर्जे की बहाली की तीन-चरणीय प्रक्रिया बताई थी; मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अनुसार पहले दो चरण पूरे हुए, लोगों ने चुनाव में भाग लिया, लेकिन तीसरा चरण अधूरा है और सारे आश्वासन मौखिक रहे — संसद और उच्चतम न्यायालय में दिए गए आश्वासन भी लिखित रूप में नहीं मिले। दिसंबर 2023 में उच्चतम न्यायालय ने फैसला बरकरार रखते हुए राज्य का दर्जा यथाशीघ्र बहाल करने की बात कही थी, जिससे विलंब पर सवाल तीखे होते हैं। इसका प्रभाव दो स्तरों पर है: एक, केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे में निर्वाचित सरकार की सीमित शक्तियां; दो, लद्दाख जैसे क्षेत्रों में भी केंद्र के वादों की विश्वसनीयता पर संदेह, जिसे अब्दुल्ला ने "लिखित में लें" की सलाह से रेखांकित किया। आगे का रास्ता संवाद, स्पष्ट समयसीमा और लिखित/विधायी प्रतिबद्धता में निहित दिखता है, ताकि न्यायालय के निर्देश और लोगों की चुनावी भागीदारी को सार्थकता मिले।
मुख्य शब्द
- अनुच्छेद 370
- संविधान का वह उपबंध जो तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देता था; 5 अगस्त 2019 को समाप्त किया गया।
- राज्य का दर्जा (Statehood)
- केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देना; जम्मू-कश्मीर की यह मांग अब तक पूरी नहीं हुई।
- परिसीमन
- विधानसभा/संसदीय क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण; केंद्र की तीन-चरणीय प्रक्रिया का पहला चरण।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस
- उमर अब्दुल्ला की पार्टी, जो राज्य के दर्जे की बहाली के लिए आंदोलन चला रही है।
- जम्मू एंड कश्मीर हाउस, अमृतसर
- कोर्ट रोड पर स्थित विरासत इमारत, जिसके जीर्णोद्धार के उद्घाटन के लिए मुख्यमंत्री अमृतसर में थे।
अभ्यास प्रश्न
- जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली में विलंब भारतीय संघवाद और निर्वाचित सरकारों की जवाबदेही पर क्या प्रश्न खड़े करता है? समीक्षा करें।
- दिसंबर 2023 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय के आलोक में केंद्र की तीन-चरणीय प्रक्रिया (परिसीमन, चुनाव, राज्य का दर्जा) का मूल्यांकन कीजिए।
- लद्दाख में जमीन और नौकरियों से जुड़े संवैधानिक संरक्षण की मांग के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
