चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप पर लाल चेतावनी का प्रस्ताव

कफ सिरप की बोतलों पर लाल रंग में चेतावनी छापने के प्रस्ताव पर भारत का दवा नियामक विचार कर रहा है, जिसमें कहा जाएगा कि यह दवा चार साल से कम उम्र के बच्चों को न दी जाए। इकनॉमिक टाइम्स ने शनिवार को यह जानकारी दी। ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) के सामने रखे प्रस्ताव में स्कूल जाने वाले बच्चों का चित्र दिखाने और ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में संशोधन की बात है। अक्टूबर 2025 में डीजीएचएस ने दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड दवाएं न देने की सलाह दी थी।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • India's drug regulator is considering a red warning on cough syrup labels against use in children below four years. — Attributed in source to an Economic Times report published Saturday; framed as a proposal, not a decision.
  • The proposal before the Drugs Consultative Committee seeks an amendment to Rule 96 of the Drugs Rules, 1945, and includes a pictorial depiction of school-age children. — Specific rule and details appear in the source, credited to the ET report.
  • In October 2025, DGHS advised against prescribing cough and cold medicines to children below two years. — Figure and date appear in source, attributed to DGHS advisory.
  • A CDSCO internal technical committee examined a complaint in April 2026 and recommended consulting ICMR, which said it was not working on cough-syrup labelling. — Stated in source via the ET report; dates as given, not independently verifiable here.
  • An August 22 health ministry notification required warnings on FDCs containing chlorpheniramine maleate and phenylephrine hydrochloride for children under four. — Attributed to the health ministry notification; year of the notification is not specified in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह प्रतिबंध के बजाय लेबल के जरिये नियमन है — और यही चुनाव नीति-डिजाइन के बारे में बहुत कुछ बताता है। बच्चों की खांसी की दवाओं पर पूरी रोक लगाने के बजाय नियामक लाल रंग की चेतावनी और बोतल पर चित्र लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे फैसले का बोझ दवा दुकान और अभिभावक पर आ जाता है। यह उत्पाद प्रतिबंध की तुलना में हल्का और सस्ता उपाय है, लेकिन यह भारत की दवा व्यवस्था की सबसे कमजोर कड़ी — बिना पर्चे की बिक्री और स्व-चिकित्सा की आदत — पर टिका है, जिसे सलाहें बार-बार बदल नहीं पाईं।

  • क्रम महत्वपूर्ण है: अक्टूबर 2025 में डीजीएचएस की दो साल से छोटे बच्चों को खांसी-जुकाम की दवा न देने की सलाह, फिर चार साल से छोटे बच्चों के लिए विशेष एफडीसी पर लेबल चेतावनी, और अब व्यापक नियम संशोधन — यानी पहले के नरम कदम पूरी तरह असर नहीं कर पाए।
  • सलाह से आगे बढ़कर ड्रग्स रूल्स, 1945 के रूल 96 में संशोधन का प्रस्ताव अहम है, क्योंकि सलाह केवल अनुरोध होती है जबकि नियम निर्माताओं पर लागू करवाया जा सकता है।
  • स्कूल जाने की उम्र के बच्चों का चित्र दिखाने का सुझाव कम साक्षरता और जल्दबाजी में खरीदारी की हकीकत को स्वीकार करता है, जो अन्य उपभोक्ता चेतावनियों वाली जनस्वास्थ्य रणनीति से लिया गया तरीका है।
  • डिजाइन में एक खाली जगह भी है: प्रस्ताव लेबल पर केंद्रित है, पर्चा लिखने की आदत पर नहीं, जबकि सीडीएससीओ समीक्षा की वजह बनी शिकायत दो साल से छोटे शिशुओं को सिरप लिखे जाने से जुड़ी थी।
  • खबर खुद प्रमाण-आधार की कमजोरी दर्ज करती है — तकनीकी समिति ने आईसीएमआर से राय चाही, लेकिन आईसीएमआर ने कहा कि वह खांसी सिरप की लेबलिंग पर काम नहीं कर रहा, यानी उपाय नई घरेलू शोध के बजाय विशेषज्ञ समिति की राय पर टिका है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि डीसीसी रूल 96 में संशोधन को मंजूरी देती है या नहीं, आयु सीमा अंत में क्या तय होती है — दो साल, चार साल या चरणबद्ध चेतावनी — और डॉक्टरों तथा केमिस्टों के अनुपालन पर कोई समांतर कदम उठता है या नहीं।

यह एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार परामर्श चरण में पड़ा प्रस्ताव है, अधिसूचित नियम नहीं; खबर यह स्थापित नहीं करती कि यह मंजूर होगा, किस रूप में होगा, और इसकी समयसीमा या अनुपालन व्यवस्था क्या होगी।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत का दवा नियामक ढांचा बच्चों में कफ सिरप के उपयोग को लेकर लगातार चिंतित रहा है। इकनॉमिक टाइम्स की शनिवार की रिपोर्ट के अनुसार, अब कफ सिरप की बोतलों के लेबल पर लाल रंग में यह चेतावनी छापने का प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) के सामने रखा गया है कि यह दवा चार साल से कम उम्र के बच्चों को न दी जाए। इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में संशोधन करना होगा। इससे पहले डीजीएचएस ने अक्टूबर 2025 में दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड दवाएं न देने की सलाह दी थी।

मुख्य तथ्य

  • प्रस्तावित चेतावनी का पाठ: "WARNING: Cough syrup should not be used in children below 4 years of age." — यानी कफ सिरप 4 साल से कम उम्र के बच्चों को न दी जाए।
  • चेतावनी बोतल के लेबल पर लाल रंग में छापने का प्रस्ताव है, साथ ही स्कूल जाने वाले बच्चों का चित्र दिखाने का सुझाव, जिससे शिशुओं व छोटे बच्चों में इसका उपयोग हतोत्साहित हो।
  • प्रस्ताव ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) के सामने रखा गया है और इसमें ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में संशोधन मांगा गया है।
  • अक्टूबर 2025 में डीजीएचएस ने सलाह दी थी कि बाल चिकित्सा में कफ-कोल्ड दवाएं विवेकपूर्ण ढंग से दी जाएं, और दो साल से कम उम्र के बच्चों को न दी जाएं।
  • अप्रैल 2026 में सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने दो साल से कम उम्र के शिशुओं को कफ सिरप दिए जाने की शिकायत की जांच की।
  • समिति ने आईसीएमआर से परामर्श और लेबलिंग बदलाव की नियामक व विपणन व्यवहार्यता पर हितधारक परामर्श की सिफारिश की; आईसीएमआर ने कहा कि वह कफ-सिरप लेबलिंग पर कोई काम नहीं कर रहा।
  • 22 अगस्त की अधिसूचना में स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट और फिनाइलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले सभी एफडीसी पर चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध लगाया।
  • एफडीसी निर्माताओं को लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार साहित्य पर चेतावनी दिखानी होगी; यह प्रतिबंध विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों पर आधारित था।

समयरेखा

  1. अक्टूबर 2025डीजीएचएस ने बाल चिकित्सा में कफ-कोल्ड दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी; दो साल से कम उम्र के बच्चों को न देने की विशेष सलाह।
  2. 22 अगस्त (अधिसूचना)स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट व फिनाइलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड युक्त एफडीसी पर चार साल से कम उम्र के लिए चेतावनी अनिवार्य की।
  3. अप्रैल 2026सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने दो साल से कम उम्र के शिशुओं को कफ सिरप दिए जाने की शिकायत की जांच की और आईसीएमआर से परामर्श की सिफारिश की।
  4. शनिवार (रिपोर्ट)इकनॉमिक टाइम्स ने बताया कि चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लाल चेतावनी का प्रस्ताव डीसीसी के सामने है।

किसका दाँव

  • ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी) — प्रस्तावित लेबलिंग बदलाव पर विचार-विमर्श करना; इसके बाद ही नियामक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
  • सीडीएससीओ — इसकी आंतरिक तकनीकी समिति ने शिशुओं को कफ सिरप देने की शिकायत जांची और परामर्श की सिफारिश की।
  • स्वास्थ्य मंत्रालय / डीजीएचएस — एफडीसी पर 22 अगस्त की अधिसूचना जारी की और अक्टूबर 2025 में बाल चिकित्सा सलाह दी।
  • आईसीएमआर — परामर्श के लिए संदर्भित; इसने कहा कि वह कफ-सिरप लेबलिंग पर कोई काम नहीं कर रहा है।
  • दवा निर्माता — लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार साहित्य बदलने होंगे; लेबलिंग बदलाव की विपणन व्यवहार्यता पर हितधारक परामर्श प्रस्तावित।
  • माता-पिता व छोटे बच्चे — शिशुओं व चार साल से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप के अनुचित उपयोग से जुड़ा सुरक्षा जोखिम।

क्यों अहम है

छोटे बच्चों में कफ-कोल्ड दवाओं के उपयोग को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, और लाल चेतावनी व चित्र जैसा उपाय सीधे उपभोक्ता तक जोखिम की जानकारी पहुंचाने का प्रयास है। यदि मंजूरी मिली, तो यह आवश्यकता कुछ विशिष्ट एफडीसी से आगे बढ़कर व्यापक रूप से लागू होगी। इसके लिए ड्रग्स रूल्स, 1945 में अलग संशोधन जरूरी होगा, जो नियामक प्रक्रिया की जटिलता दर्शाता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • प्रस्तावित संशोधन: ड्रग्स रूल्स, 1945 का नियम 96 (लेबलिंग से संबंधित प्रावधान)।
  • डीसीसी = ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी; डीटीएबी = ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड।
  • डीजीएचएस की अक्टूबर 2025 सलाह: दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड दवाएं न दी जाएं।
  • 22 अगस्त की अधिसूचना: क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट + फिनाइलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले एफडीसी चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंधित चेतावनी के साथ।
  • प्रस्तावित चेतावनी लाल रंग में और स्कूल जाने वाले बच्चों के चित्र के साथ बोतल के लेबल पर।
  • आईसीएमआर ने कहा कि वह कफ-सिरप लेबलिंग पर कोई काम नहीं कर रहा है।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत में बाल चिकित्सा में कफ-कोल्ड दवाओं का उपयोग नियामक चिंता का विषय बना हुआ है, और मौजूदा प्रस्ताव इसे लेबलिंग के जरिए संबोधित करने का प्रयास है — बोतल पर लाल रंग में चेतावनी कि चार साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दी जाए, साथ ही स्कूल जाने वाले बच्चों का चित्र ताकि शिशुओं में उपयोग हतोत्साहित हो। कारणों की श्रृंखला स्रोत में स्पष्ट है: अक्टूबर 2025 में डीजीएचएस की सलाह (दो वर्ष से कम आयु में न देने की), उसके बावजूद शिशुओं को कफ सिरप दिए जाने की शिकायत, जिसे अप्रैल 2026 में सीडीएससीओ की आंतरिक तकनीकी समिति ने जांचा, और 22 अगस्त की अधिसूचना जिसने क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट व फिनाइलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड युक्त एफडीसी पर चार वर्ष से कम आयु के लिए चेतावनी अनिवार्य की। प्रभाव दोहरे हैं: उपभोक्ता तक जोखिम-संचार सरल होगा, पर निर्माताओं के लिए लेबल, पैकेज इंसर्ट व प्रचार सामग्री में बदलाव तथा विपणन व्यवहार्यता के प्रश्न खड़े होंगे — इसीलिए हितधारक परामर्श की सिफारिश की गई। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार यही है कि डीसीसी विचार-विमर्श करे और फिर नियामक प्रक्रिया के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 के नियम 96 में अलग संशोधन हो; आईसीएमआर की भागीदारी इस विषय पर नहीं है, ऐसा उसने बताया।

मुख्य शब्द

ड्रग्स कंसल्टेटिव कमिटी (डीसीसी)
वह निकाय जिसके सामने कफ सिरप लेबलिंग बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है और जिसके विचार-विमर्श के बाद नियामक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
ड्रग्स रूल्स, 1945 का नियम 96
वह नियम जिसमें प्रस्तावित लेबलिंग चेतावनी लागू करने के लिए संशोधन मांगा गया है।
सीडीएससीओ
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, जिसकी आंतरिक तकनीकी समिति ने अप्रैल 2026 में शिशुओं को कफ सिरप देने की शिकायत जांची।
डीजीएचएस
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, जिसने अक्टूबर 2025 में दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड दवाएं न देने की सलाह दी।
एफडीसी (फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन)
एक ही खुराक में दो या अधिक दवाओं का संयोजन; क्लोरफेनिरामाइन मैलिएट व फिनाइलेफ्रिन हाइड्रोक्लोराइड वाले एफडीसी चार साल से कम उम्र के लिए प्रतिबंधित किए गए।
ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (डीटीएबी)
तकनीकी सलाहकार निकाय, जिसकी सिफारिशों पर एफडीसी संबंधी प्रतिबंध लगाया गया।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत में दवा लेबलिंग से जुड़े नियामक ढांचे की व्याख्या करते हुए बताइए कि बाल चिकित्सा में कफ सिरप के उपयोग पर चेतावनी अनिवार्य करने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है।
  2. डीजीएचएस की सलाह के बावजूद शिशुओं को कफ सिरप दिए जाने की शिकायतें क्यों बनी रहीं? नियामक अनुपालन सुनिश्चित करने के उपायों पर चर्चा करें।
  3. चित्रात्मक और रंग-आधारित चेतावनियां उपभोक्ता तक जोखिम-संचार में कितनी प्रभावी हो सकती हैं? कफ सिरप लेबलिंग प्रस्ताव के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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