कोटा निकाय चुनाव में भाजपा को बहुमत, ईवीएम गड़बड़ी से सभापति चुनाव टला
कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 100 में से 55 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि कांग्रेस को 40 और निर्दलीयों को तीन वार्ड मिले। मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा के आदेश के अनुसार ईवीएम में गड़बड़ी के बाद कोटा के वार्ड 87, 44 और 11 तथा सुकेत नगर पालिका के वार्ड 4 के एक बूथ के परिणाम रोक दिए गए। 16 सितंबर को पुनर्मतदान और 17 सितंबर को मतगणना होगी। कोटा और सुकेत में सभापति तथा उपसभापति चुनाव टाल दिए गए। बूंदी में भाजपा ने 29 वार्ड जीते।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- BJP won 55 of 100 wards in Kota Municipal Corporation; Congress 40 and Independents 3. — Figures appear in source as results reporting; totals add up to 98 of 100 wards, consistent with three withheld ward results.
- Counting for Wards 87, 44 and 11 in Kota and a booth in Ward 4 of Suket Municipality was put on hold due to EVM malfunctioning. — Attributed in source to official orders issued by Chief Electoral Officer and Secretary Rajesh Verma.
- Re-polling on September 16 and counting on September 17 in affected booths. — Dates appear in source, linked to the official orders; no separate confirmation given.
- BJP 'played some game overnight' to defeat the Congress candidate in Ward 87. — Direct allegation quoted from Congress candidate Laxmi Sharma; opinion, not established fact, and no BJP response included.
- In Bundi, BJP won 29 wards and reached majority after three Independents joined it. — Figures and defections stated in source without named official attribution.
विश्लेषकों की राय राय
కోటాలో 100 వార్డుల్లో 55 గెలిచి బీజేపీ స్పష్టమైన మెజారిటీ సాధించడం, బూందీలో మెజారిటీకి రెండు స్థానాలు తక్కువ పడినా స్వతంత్రుల చేరికతో బోర్డు ఏర్పాటుకు దారి తెరుచుకోవడం — రాజస్థాన్ హడౌతీ ప్రాంతంలో పట్టణ ఓటరు ఇంకా కమలం వైపే మొగ్గు చూపుతున్నట్టు సూచిస్తోంది. కానీ నాలుగు బూత్లలో ఈవీఎం లోపాలతో ఫలితాలు నిలిపివేయడం, చైర్పర్సన్ ఎన్నిక వాయిదా పడటం బీజేపీ విజయ కథనాన్ని కొంత మసకబార్చి, కాంగ్రెస్కు "పారదర్శకత" అనే రాజకీయ ఆయుధాన్ని ఇచ్చింది. అదే సమయంలో బూందీలో టికెట్ల పంపిణీపై కాంగ్రెస్ లోపలి నుంచే వచ్చిన అసంతృప్తి, తిరుగుబాటు అభ్యర్థుల విజయాలు ఆ పార్టీ ఓటమిలో సంస్థాగత కారణాలు ఎక్కువ అని చెబుతున్నాయి.
- కోటాలో 55–40 తేడా ఉన్నందున, నిలిపివేసిన మూడు వార్డుల ఫలితాలు ఏ వైపు వచ్చినా బీజేపీ బోర్డు ఏర్పాటుకు గణితపరమైన ఆటంకం లేదు — అంటే వివాదం సంఖ్యల కంటే విశ్వసనీయతపైనే కేంద్రీకృతమవుతుంది.
- ఈవీఎం లోపం ఆరోపణలను కాంగ్రెస్ స్థానిక స్థాయిలోనే వదిలేయకుండా, రాష్ట్ర స్థాయి 'ఓటు గౌరవం' కథనంగా మలచుకునే అవకాశం ఉంది; మరోవైపు అధికారులు అధికారికంగా రీపోలింగ్ ప్రకటించడం విధానపరమైన ప్రతిస్పందన జరిగిందని బీజేపీ వాదనకు బలం.
- బూందీలో స్వతంత్రులు గెలిచిన వెంటనే బీజేపీలో చేరడం, స్థానిక సంస్థల్లో అధికార పార్టీకి సహజంగా ఉండే ఆకర్షణ శక్తిని చూపుతుంది — దీన్ని కాంగ్రెస్ 'ప్రజాతీర్పు వక్రీకరణ' అని విమర్శించడం ఖాయం.
- టికెట్లు కొన్ని కుటుంబాలకే పరిమితమయ్యాయని కాంగ్రెస్ నేతలే చెప్పడం, తిరస్కరించబడిన మూడు నేతలు స్వతంత్రులుగా గెలవడం — పార్టీ ఓటమి ఈవీఎంల వల్ల కాదు, అభ్యర్థుల ఎంపిక వల్ల అన్న ప్రత్యామ్నాయ వివరణను బలపరుస్తుంది.
- నాలుగోసారి, ఐదోసారి గెలిచిన బీజేపీ కౌన్సిలర్లు ఉన్నా, మాజీ డిప్యూటీ మేయర్ ఓటమి, మాజీ నగర అధ్యక్షుడి పరాజయం వంటివి పార్టీలో వ్యక్తిగత వ్యతిరేకత (యాంటీ-ఇన్కంబెన్సీ) వార్డు స్థాయిలో పనిచేసిందని సూచిస్తున్నాయి.
किस पर नज़र रखें — సెప్టెంబర్ 16 రీపోలింగ్, 17 లెక్కింపు తర్వాత చైర్పర్సన్ ఎన్నిక ఎంత సాఫీగా జరుగుతుందో, కాంగ్రెస్ ఈవీఎం అంశాన్ని న్యాయ/ఎన్నికల సంఘం వేదికల వరకు తీసుకెళ్తుందో లేక రాజకీయ ప్రచారంతో సరిపెడుతుందో గమనించాలి.
ఈవీఎంలలో లోపం సాంకేతిక కారణమా, ఉద్దేశపూర్వక అక్రమమా అనేది ఈ కథనం ఏమాత్రం నిర్ధారించలేదు; కాంగ్రెస్ ఆరోపణలకు స్వతంత్ర ధ్రువీకరణ లేదు, రాష్ట్ర స్థాయి రాజకీయ ప్రభావం గురించి ఇంకా ఎలాంటి ఆధారమూ లేదు.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
राजस्थान के कोटा नगर निगम और बूंदी सहित कुछ निकायों के चुनाव परिणाम घोषित हुए, जिनमें भाजपा ने कोटा में 100 में से 55 वार्ड जीतकर बहुमत पार किया। लेकिन कोटा के तीन वार्डों और सुकेत नगर पालिका के एक बूथ पर ईवीएम में गड़बड़ी के कारण मतगणना और परिणाम रोक दिए गए। इसी वजह से कोटा और सुकेत में सभापति तथा उपसभापति के चुनाव टाल दिए गए। कांग्रेस ने पारदर्शिता की मांग करते हुए मतगणना स्थल पर धरना दिया और मशीन सील कराई।
मुख्य तथ्य
- कोटा नगर निगम के 100 वार्डों में भाजपा को 55, कांग्रेस को 40 और निर्दलीयों को 3 वार्ड मिले।
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा के आदेश से कोटा के वार्ड 87, 44, 11 और सुकेत नगर पालिका के वार्ड 4 के एक निर्धारित बूथ की मतगणना व परिणाम रोके गए।
- प्रभावित बूथों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान और 17 सितंबर को मतगणना निर्धारित की गई।
- भाजपा के विवेक रजवंशी ने वार्ड 54 से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की, कांग्रेस के मनीष को 2,226 वोट से हराया।
- भाजपा के गोपाल राम मंदा ने लगातार पांचवीं जीत हासिल की, कांग्रेस के संजय यादव को 899 वोट से हराया।
- युवा कांग्रेस के अर्पित जैन ने वार्ड 86 में पूर्व उपमहापौर योगेंद्र खींची को 250 वोट से हराया।
- निर्दलीय वंदना फौजदार ने वार्ड 71 में 1,264 वोट पाकर भाजपा की मीनाक्षी सेन को 160 वोट से हराया; कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही।
- बूंदी में भाजपा 29 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी (बहुमत से दो सीट कम), कांग्रेस 20 और 11 निर्दलीय; शाम को तीन निर्दलीय भाजपा में शामिल हो गए।
समयरेखा
- 14 सितंबर 2026कोटा कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम ने वार्ड 87 की मशीन में गड़बड़ी की सूचना पर JDB कॉलेज पहुंचकर कलेक्टर व एडीएम से वार्ता कर मशीन सील करवाई (ट्वीट)।
- मतगणना दिवसवार्ड 87 की कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी शर्मा, शालिनी गौतम और शुभम गोचर ने JDB कॉलेज के बाहर परिणाम की मांग को लेकर धरना दिया।
- उसी दिनअधिकारियों ने रिटर्निंग ऑफिसर के जरिये निर्वाचन आयोग को औपचारिक रिपोर्ट भेजकर निर्देश मांगे।
- उसी दिन शामबूंदी में वार्ड 1 की प्रभात देवी, वार्ड 3 के आत्माराम चोपदार और वार्ड 16 के विशाल शर्मा भाजपा में शामिल हुए, जिससे भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।
- 16 सितंबर 2026प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान निर्धारित।
- 17 सितंबर 2026पुनर्मतदान की मतगणना निर्धारित।
किसका दाँव
- भाजपा — कोटा में 55 वार्ड के साथ बहुमत; बूंदी में निर्दलीयों के शामिल होने से बोर्ड बनाने की स्थिति।
- कांग्रेस — कोटा में 40 वार्ड; ईवीएम गड़बड़ी और पारदर्शिता पर सवाल, टिकट वितरण में भेदभाव के आंतरिक आरोप।
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा — गड़बड़ी वाले वार्डों के परिणाम रोकने और पुनर्मतदान का आदेश जारी करने वाली अधिकारी-भूमिका।
- निर्वाचन आयोग / रिटर्निंग ऑफिसर — औपचारिक रिपोर्ट पर निर्देश देना और प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना।
- जिला कलेक्टर व एडीएम — मतगणना स्थल पर मशीन सील कराने और कानून-व्यवस्था तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी।
- निर्दलीय पार्षद — बूंदी में बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका; कोटा वार्ड 71 जैसी जीतें।
- मतदाता — पुनर्मतदान से परिणाम में देरी; सभापति-उपसभापति चुनाव टलने से नगर निकाय नेतृत्व अधूरा।
क्यों अहम है
नगर निकाय चुनाव शहरी शासन की पहली इकाई तय करते हैं, और सभापति-उपसभापति चुनाव टलने से बोर्ड गठन तथा नीतिगत निर्णय अटक जाते हैं। ईवीएम गड़बड़ी पर विपक्ष के आरोप और पुनर्मतदान का आदेश यह दिखाते हैं कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मशीन-सीलिंग जैसे सुरक्षा उपाय जनविश्वास के लिए कितने अहम हैं। बूंदी में निर्दलीयों के दलबदल से त्रिशंकु निकायों में सौदेबाजी की राजनीति भी उजागर होती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- कोटा नगर निगम: कुल 100 वार्ड; भाजपा 55, कांग्रेस 40, निर्दलीय 3।
- परिणाम रोके गए: कोटा के वार्ड 87, 44, 11 तथा सुकेत नगर पालिका के वार्ड 4 का एक बूथ।
- पुनर्मतदान 16 सितंबर, मतगणना 17 सितंबर (स्रोत के अनुसार 2026)।
- आदेश जारी करने वाले: मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं सचिव राजेश वर्मा।
- बूंदी: भाजपा 29, कांग्रेस 20, निर्दलीय 11; तीन निर्दलीयों के भाजपा में जाने से पूर्ण बहुमत।
- कोटा और सुकेत में सभापति व उपसभापति चुनाव स्थगित।
मेन्स दृष्टिकोण
कोटा और बूंदी के निकाय परिणाम स्थानीय शासन में तीन प्रवृत्तियों को सामने रखते हैं। पहला, चुनावी तकनीक पर भरोसे का प्रश्न: वार्ड 87, 44, 11 तथा सुकेत के एक बूथ पर ईवीएम गड़बड़ी के कारण परिणाम रोकना, मशीन को कलेक्टर व एडीएम की उपस्थिति में सील कराना और रिटर्निंग ऑफिसर के जरिये निर्वाचन आयोग से निर्देश मांगना यह दिखाता है कि संस्थागत प्रक्रिया मौजूद है, पर विपक्ष की आशंकाएँ बनी रहती हैं—16 व 17 सितंबर के पुनर्मतदान-मतगणना ही समाधान का रास्ता है। दूसरा, प्रक्रियागत देरी का शासन पर असर: सभापति व उपसभापति चुनाव टलने से बोर्ड गठन और शहरी सेवाओं से जुड़े निर्णय लंबित रहते हैं। तीसरा, दलीय संगठन की कमजोरी: कांग्रेस के भीतर टिकट वितरण के केंद्रीकरण के आरोप और देवराज गोचर, अंकित बुलीवाल व जीशान अली जैसे टिकट से वंचित नेताओं की निर्दलीय जीत बताती है कि उम्मीदवार चयन ही परिणाम तय कर देता है। आगे का रास्ता—ईवीएम गड़बड़ी की समयबद्ध जाँच व सार्वजनिक रिपोर्टिंग, पुनर्मतदान की पारदर्शी निगरानी, और दलों में लोकतांत्रिक टिकट-प्रक्रिया।
मुख्य शब्द
- नगर निगम (Municipal Corporation)
- बड़े शहरों की निर्वाचित शहरी स्थानीय संस्था; कोटा में 100 वार्ड से पार्षद चुने गए।
- नगर पालिका (Municipality)
- छोटे शहरी क्षेत्रों की स्थानीय निकाय; स्रोत में सुकेत नगर पालिका का वार्ड 4 उल्लिखित।
- सभापति व उपसभापति
- निकाय बोर्ड के प्रमुख व उप-प्रमुख पद, जिनके चुनाव कोटा और सुकेत में ईवीएम गड़बड़ी के कारण टाले गए।
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO)
- चुनाव संचालन का वरिष्ठ अधिकारी; यहाँ राजेश वर्मा के आदेश पर परिणाम रोके और पुनर्मतदान तय हुआ।
- रिटर्निंग ऑफिसर (RO)
- निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव संचालन व परिणाम घोषित करने वाला अधिकारी; इसी के जरिये आयोग को रिपोर्ट भेजी गई।
- पुनर्मतदान (Re-polling)
- गड़बड़ी वाले बूथों पर दोबारा मतदान; यहाँ 16 सितंबर को निर्धारित, मतगणना 17 सितंबर को।
अभ्यास प्रश्न
- शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम गड़बड़ी की घटनाएँ चुनावी विश्वसनीयता को कैसे प्रभावित करती हैं? कोटा-सुकेत के उदाहरण से समझाइए।
- त्रिशंकु निकायों में निर्दलीय पार्षदों की निर्णायक भूमिका स्थानीय लोकतंत्र के लिए अवसर है या चुनौती? बूंदी के परिणाम के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
- राजनीतिक दलों में टिकट वितरण की केंद्रीकृत प्रक्रिया चुनावी परिणामों को कैसे प्रभावित करती है? स्रोत में उल्लिखित उदाहरणों सहित चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
