एनजीटी अपीलों में पर्यावरण पक्ष की सफलता शून्य: रिपोर्ट
साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ (सारेल) ने जनवरी से जून 2026 के बीच राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पांच पीठों द्वारा तय 119 अपीलों का आकलन किया। पर्यावरण या जनहित पक्ष अपनी 16 मेरिट अपीलों में एक भी नहीं जीत सका। उद्योग, परियोजना प्रस्तावकों और संपत्ति मालिकों ने 51 में से 30 जीतीं, यानी 58.8% सफलता दर। 119 में से 52 अपीलें प्रक्रियागत आधार पर निपटाई गईं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि एनजीटी को अपना साहस फिर पाना होगा।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Environmental/public-interest parties won 0 of 16 merits appeals in NGT between January and June 2026. — Attributed to the South Asian Reporter on Environment Law (SAREL) assessment; figure appears in source and is internally consistent.
- Industry, project proponents and property owners won 30 of 51 merits appeals, a 58.8% success rate. — Attributed to SAREL; the stated percentage matches 30 of 51 arithmetically.
- Of 119 appeals, 52 were disposed of on procedural grounds, leaving 67 merits decisions; about 44% dismissed without merits ruling. — Figures appear in source and are internally consistent (119 minus 52 equals 67; 52 of 119 is about 44%).
- Jairam Ramesh said the NGT must 'rediscover' its courage. — Attributed to a post on X by the Congress leader; quoted word appears in source.
- NGT was established in June 2010 through an Act of Parliament. — Presented in source as context within Ramesh's remarks; no independent sourcing given.
विश्लेषकों की राय राय
यह महज़ आंकड़ों की रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक संस्था की विश्वसनीयता पर राजनीतिक बहस खोलने का औज़ार है। पर्यावरण पक्ष की 16 में शून्य जीत और उद्योग व परियोजना प्रस्तावकों की 58.8% सफलता दर — यह अंतर ऐसा आंकड़ा है जिसे विपक्ष 'विकास के नाम पर पर्यावरणीय सुरक्षा कमज़ोर करने' के व्यापक नैरेटिव में जोड़ सकता है। एनजीटी को अपना 'साहस फिर से खोजने' की बात कहकर जयराम रमेश निशाना केवल ट्रिब्यूनल पर नहीं, उसके इर्द-गिर्द के नीतिगत माहौल पर भी साधते दिखते हैं।
- एनजीटी 2010 में संसद के अधिनियम से बनी संस्था है, इसलिए उसके प्रदर्शन का सवाल स्वाभाविक रूप से संसदीय और राजनीतिक सवाल बन जाता है।
- 119 में से 52 अपीलें — लगभग 44% — समय-सीमा, क्षेत्राधिकार, ग्राह्यता या वापसी के आधार पर खारिज होना इस तर्क को बल देता है कि आम नागरिक गुण-दोष की सुनवाई तक पहुंच ही नहीं पाते।
- सरकार पक्ष जवाब दे सकता है कि पश्चिमी बेंच में प्रस्तावकों की ज़्यादातर जीतें खारिज मंज़ूरियों को रद्द कर कमियां सुधारने के बाद नए सिरे से विचार के निर्देश की थीं — यानी प्रक्रियागत सुधार, कोई खुली हरी झंडी नहीं।
- एक निजी विधिक डेटाबेस के विश्लेषण को कांग्रेस नेता द्वारा एक्स पर उठाना बताता है कि विपक्ष पर्यावरणीय शासन को अपने जवाबदेही एजेंडे में शामिल कर रहा है।
- समय भी राजनीतिक रूप से अनुकूल रहा — रिपोर्ट एनजीटी के पर्यावरण और जलवायु के भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के साथ ही आई, यानी भविष्य की चर्चा के बीच वर्तमान रिकॉर्ड पर सवाल।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि ये आंकड़े संसद के सवालों, स्थायी समिति की समीक्षा या एनजीटी में नियुक्तियों-रिक्तियों की मांग तक पहुंचते हैं या नहीं, और सत्ता पक्ष औपचारिक प्रत्युत्तर देता है या नहीं।
छह महीने और 119 मामलों का नमूना एक रुझान दिखा सकता है, लेकिन यह खबर न तो अलग-अलग फ़ैसलों के कानूनी गुण-दोष स्पष्ट करती है, न किसी राजनीतिक हस्तक्षेप या जानबूझकर पक्षपात को साबित करती है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्थापना जून 2010 में संसद के एक अधिनियम के जरिए प्रभावी और शीघ्र पर्यावरणीय न्याय देने के लिए की गई थी। दक्षिण एशिया में अदालती फैसलों को ट्रैक करने वाले डेटाबेस 'साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ' (सारेल) ने जनवरी से जून 2026 के बीच एनजीटी की पांच पीठों द्वारा तय 119 अपीलों का आकलन किया। आकलन के अनुसार इस छह महीने की अवधि में पर्यावरण/जनहित पक्ष की मेरिट पर सफलता दर शून्य रही, जबकि उद्योग व परियोजना प्रस्तावकों की सफलता दर 58.8% रही। यह रिपोर्ट एनजीटी के दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (19-20 सितंबर) के साथ ही सामने आई।
मुख्य तथ्य
- सारेल ने जनवरी से जून 2026 के बीच एनजीटी की पांच पीठों (दिल्ली की प्रधान पीठ सहित) द्वारा तय 119 अपीलों का आकलन किया।
- पर्यावरण/जनहित पक्ष ने मेरिट पर तय 16 अपीलों में से एक भी नहीं जीती — सफलता दर 0%।
- उद्योग, परियोजना प्रस्तावक और संपत्ति मालिकों ने मेरिट की 51 अपीलों में से 30 जीतीं — सफलता दर 58.8%; प्रधान पीठ में 3 मामलों में यथास्थिति बनी रही।
- 119 अपीलों में से 52 प्रक्रियागत आधार (परिसीमन, अधिकारिता, पोषणीयता या वापसी) पर निपटाई गईं; यानी लगभग 44% अपीलें मेरिट पर फैसले के बिना खारिज हुईं।
- शेष 67 मामलों का ही गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर निर्णय हुआ।
- पश्चिमी क्षेत्र पीठ: पर्यावरण पक्ष की सभी 9 मेरिट अपीलें खारिज; उद्योग/प्रस्तावक पक्ष को 24 में से 15 में अनुकूल आदेश।
- मध्य क्षेत्र पीठ: तीनों पर्यावरण अपीलें असफल, उद्योग की 5 में से 1 सफल; प्रधान पीठ: दोनों पर्यावरण अपीलें खारिज, उद्योग की 10 में 5 सफल; दक्षिणी क्षेत्र: एकमात्र पर्यावरण अपील खारिज, उद्योग की 12 में 9 सफल।
- पश्चिमी पीठ में प्रस्तावक पक्ष की ज्यादातर जीत में अस्वीकृत पर्यावरणीय मंजूरियों को रद्द कर कमियां दूर करने के बाद नए मूल्यांकन का निर्देश दिया गया।
समयरेखा
- जून 2010संसद के अधिनियम के जरिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना, प्रभावी और शीघ्र पर्यावरणीय न्याय के लिए।
- जनवरी–जून 2026एनजीटी की पांच पीठों द्वारा 119 अपीलों का निपटारा, जिनका सारेल ने आकलन किया।
- 19-20 सितंबरएनजीटी का दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स'; इसी के साथ आकलन जारी हुआ।
- सम्मेलन के दौरान/बादकांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एनजीटी को अपना साहस फिर से खोजना होगा।
किसका दाँव
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) — शीघ्र पर्यावरणीय न्याय देने के अपने वैधानिक उद्देश्य और विश्वसनीयता पर प्रश्न।
- पर्यावरण/जनहित याचिकाकर्ता — मेरिट पर एक भी अपील में सफलता नहीं; न्यायिक उपाय तक पहुंच सीमित होने की चिंता।
- उद्योग, परियोजना प्रस्तावक, संपत्ति मालिक — 58.8% सफलता दर; अस्वीकृत पर्यावरणीय मंजूरियों पर पुनर्विचार का अवसर।
- सारेल (साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ) — दक्षिण एशिया में अदालती फैसलों की ट्रैकिंग और आंकड़ों के आधार पर रुझान उजागर करना।
- जयराम रमेश, कांग्रेस नेता — एनजीटी की भूमिका पर राजनीतिक व नीतिगत सवाल उठाना।
- एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव — पर्यावरण कानून को उत्तरदायी व भविष्योन्मुखी बनाने, संस्थागत क्षमता निर्माण की पैरवी।
क्यों अहम है
एनजीटी आम नागरिकों और पर्यावरण समूहों के लिए मंजूरियों व प्रदूषण मामलों को चुनौती देने का मुख्य मंच है; यदि उसकी अपीलों में पर्यावरण पक्ष की सफलता शून्य रहती है तो पर्यावरणीय न्याय की पहुंच पर गंभीर सवाल उठते हैं। लगभग 44% अपीलों का मेरिट पर विचार के बिना प्रक्रियागत आधार पर निपटना दर्शाता है कि परिसीमन और पोषणीयता जैसे तकनीकी अवरोध निर्णायक बन रहे हैं। यह रुझान विकास परियोजनाओं की मंजूरी और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को सीधे प्रभावित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- एनजीटी की स्थापना जून 2010 में संसद के अधिनियम द्वारा; उद्देश्य—प्रभावी व शीघ्र पर्यावरणीय न्याय।
- एनजीटी की प्रधान पीठ दिल्ली में; आकलन में कुल पांच पीठें शामिल—प्रधान, पश्चिमी, मध्य, दक्षिणी क्षेत्र।
- सारेल: दक्षिण एशिया में अदालती फैसलों को ट्रैक करने वाला डेटाबेस/रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ।
- जनवरी-जून 2026: 119 अपीलें; 52 प्रक्रियागत आधार पर निपटीं, 67 मेरिट पर तय।
- पर्यावरण/जनहित पक्ष 0/16; उद्योग व प्रस्तावक 30/51 (58.8%)।
- एनजीटी के वर्तमान अध्यक्ष: जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव; सम्मेलन—'द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स' (19-20 सितंबर)।
मेन्स दृष्टिकोण
सारेल के आकलन से उभरा प्रश्न यह है कि पर्यावरणीय न्याय के लिए बनी विशेष अधिकरण व्यवस्था व्यवहार में किसके पक्ष में काम कर रही है। जनवरी-जून 2026 की 119 अपीलों में पर्यावरण/जनहित पक्ष की मेरिट पर सफलता शून्य रही, जबकि उद्योग व परियोजना प्रस्तावकों की 58.8%; साथ ही लगभग 44% अपीलें परिसीमन, अधिकारिता, पोषणीयता या वापसी जैसे प्रक्रियागत आधारों पर मेरिट पर विचार के बिना ही समाप्त हो गईं। इससे दो कारण संकेतित होते हैं—एक, तकनीकी/प्रक्रियागत अवरोध जो जनहित याचिकाकर्ताओं के लिए अधिक भारी पड़ते हैं; दो, प्रस्तावक पक्ष की जीतों का स्वरूप, जिसमें अस्वीकृत पर्यावरणीय मंजूरियों को रद्द कर कमियां सुधारने के बाद नए मूल्यांकन का निर्देश दिया गया। इसका प्रभाव अधिकरण की विश्वसनीयता और नागरिकों के न्याय तक पहुंच पर पड़ता है, जैसा जयराम रमेश की टिप्पणी—एनजीटी को अपना साहस फिर पाना होगा—में झलकता है। आगे का रास्ता, स्रोत के अनुसार, एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा रेखांकित दिशा में है: चुनौतियों की पहचान से आगे बढ़कर उत्तरदायी कानून, संस्थाएं और साझेदारियां बनाना, तथा प्रौद्योगिकी, नवाचार, संधारणीय वित्त और न्यायसंगत संक्रमण को अपनाना। इससे अधिक नीतिगत उपाय स्रोत में उल्लिखित नहीं हैं।
मुख्य शब्द
- एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण)
- जून 2010 में संसद के अधिनियम से बना अधिकरण, जिसका उद्देश्य प्रभावी और शीघ्र पर्यावरणीय न्याय देना है।
- सारेल (SAREL)
- साउथ एशियन रिपोर्टर ऑन एनवायरनमेंट लॉ—दक्षिण एशिया में पर्यावरण संबंधी अदालती फैसलों को ट्रैक करने वाला डेटाबेस।
- मेरिट पर निर्णय
- मामले के गुण-दोष की वास्तविक सुनवाई के बाद दिया गया फैसला, प्रक्रियागत आधार पर निपटारे से भिन्न।
- प्रक्रियागत आधार
- परिसीमन (समय-सीमा), अधिकारिता, पोषणीयता या अपील वापसी जैसे तकनीकी कारण, जिनसे मामला मेरिट तक पहुंचे बिना समाप्त हो जाता है।
- पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी)
- परियोजनाओं को पर्यावरणीय शर्तों पर दी जाने वाली स्वीकृति; अस्वीकृत मंजूरियों को एनजीटी ने रद्द कर नए मूल्यांकन के लिए भेजा।
- प्रधान पीठ
- दिल्ली स्थित एनजीटी की मुख्य पीठ; आकलन में शामिल पांच पीठों में एक।
अभ्यास प्रश्न
- एनजीटी में पर्यावरण/जनहित पक्ष की शून्य सफलता दर और प्रक्रियागत आधार पर 44% अपीलों के निपटारे के क्या कारण और परिणाम हो सकते हैं? परीक्षण करें।
- क्या विशेष पर्यावरण अधिकरण भारत में 'प्रभावी और शीघ्र पर्यावरणीय न्याय' के अपने वैधानिक उद्देश्य को पूरा कर पा रहे हैं? सारेल आकलन के आंकड़ों के आलोक में चर्चा करें।
- पर्यावरणीय मंजूरियों के न्यायिक पुनर्विचार में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन कैसे साधा जाए? अस्वीकृत मंजूरियों को नए मूल्यांकन के लिए भेजने के रुझान के संदर्भ में मूल्यांकन करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
